<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ मिशन शक्ति]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mishn-shkti</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mishn-shkti" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 26 Jul 2023 14:53:26 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[सरकरी प्रयासों के साथ सशक्तिकरण के पथ पर ग्रामीण महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/government-schemes-for-rural-women-helping-them-progress</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MGInqmVBTYyUXPuspT2z.jpg"><p>भारत सरकार (Indian Government) महिलाओं की सुरक्षा (women's safety) और सशक्तिकरण (women empowerment) को बढ़ावा देने लिए कई पहलों की शुरुआत कर रही है. इन पहलों के ज़रिये महिलाओं, खासकर ग्रामीण महिलाओं (rural women) के शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है. 73 वें संशोधन अधिनियम के तहत पंचायती राज संस्थानों (PRI) में 1/3 भागों की सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं. पीआरआई में 14.50 लाख से ज़्यादा महिला प्रतिनिधि हैं, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का लगभग 46% हैं.</p>
<h2>सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं / कार्यक्रम लागू किए</h2>
<p>भारत सरकार ने महिलाओं के कल्याण और उनके सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं / कार्यक्रम लागू किए हैं (government schemes for rural women). राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत लगभग 9.00 करोड़ महिलाएं 83.5 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़ी हुई हैं, जिससे ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आज़ादी (financial freedom) हासिल करने में सक्षम बन रही हैं.</p>
<p>महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत तय किया गया कि नौकरियों में कम से कम एक तिहाई हिस्सेदारी महिलाओं की रहेगी. &nbsp;</p>
<h3>महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही सरकार&nbsp;</h3>
<p>इसके अलावा, अन्य योजनाएं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP), समग्र शिक्षा, बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना, स्वच्छ विद्यालय मिशन और स्वच्छ भारत मिशन महिलाओं को अवसरों तक पहुंचने में मदद करते हैं. स्किल इंडिया मिशन (skill India Mission) महिलाओं के रोजगार को बढ़ाने और आर्थिक आज़ादी हासिल करने के लिए प्रशिक्षण देता है.</p>
<p>मिशन पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी सेवाएं गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करा रहीं माताओं तक पहुंच रहा है. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के ज़रिये महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है.&nbsp;</p>
<p>&lsquo;स्वच्छ भारत मिशन&rsquo; (Swachha Bharat Mission) के तहत 11.00 करोड़ से ज़्यादा शौचालयों का निर्माण, &lsquo;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shgs-bringing-change-into-women-lives">उज्जवला योजना</a>&rsquo; (Ujjwala Yojana) के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली लगभग 9.58 करोड़ महिलाओं को क्लीन कुकिंग गैस कनेक्शन, और &lsquo;जल जीवन मिशन&rsquo; के तहत 19.46 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 12.59 करोड़ को नल जल संपर्क कनेक्शन देने से महिलाओं के जीवन में सुधार हुआ है. &lsquo;प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान&rsquo; (digital literacy) ने 6 करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने का लक्ष्य रखा, जिसमें से PMGDISHA के अंतर्गत लाभार्थियों का 53% महिलाएं हैं.</p>
<p>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-govt-launches-mission-shakti-scooter-yojana-for-shg">&lsquo;मिशन शक्ति</a>&rsquo; (Mission Shakti) के ज़रिये<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/banks-fail-shg-loan-under-mission-shakti"> महिलाओं </a>&nbsp;की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए देशभर में समर्थन कर रहा है. सामर्थ्य योजना के तहत एक नया विभाग जोड़ा गया है, जिसमें महिलाओं के लिए शक्तिकरण हब शामिल है. ये हब केंद्रीय, राज्य / संघ के लेवल पर महिलाओं के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए मार्गदर्शन, लिंकिंग और हैंड होल्डिंग कर रहा है. पूरे देश में ब्लॉक / ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, करियर और व्यवसायिक परामर्श / प्रशिक्षण, फाइनेंशियल इन्क्लूशन, उद्यमिता, नेटवर्किंग, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता का समर्थन किया जा रहा है.</p>
<p>इन <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/with-the-right-funding-goa-shg-women-can-make-mid-day-meal-nutritious">योजनाओं</a> के ज़रिये महिलाएं न केवल सशक्त हो रहीं हैं बल्कि, देश के आर्थिक, सामाजिक, और राजनीतिक विकास में भी भागीदार बन रही हैं.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 26 Jul 2023 14:53:26 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/government-schemes-for-rural-women-helping-them-progress]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MGInqmVBTYyUXPuspT2z.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MGInqmVBTYyUXPuspT2z.jpg"/></item><item><title><![CDATA[पौष्ठिक खाने की सौगात दीदियों के आहार किचन के साथ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/more-than-11-crore-rupees-sanctioned-to-ahaar-society-and-shg-women-will-take-its-responsibility</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0brckG7UjdWkkqB1MrFT.jpg"><p dir="ltr"><span>'रोटी, कपड़ा, मकान,' किसी भी व्यक्ति की बेसिक ज़रूरतों में से एक है. सरकार भी इन ज़रूरतों को देश के हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए भरसक प्रयास करती है. इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए <strong>ओड़िशा की सरकार</strong> ने एक पहल की शुरुआत की है. <strong>भुवनेश्वर में सभी यूएलबी में मिशन शक्ति के नेतृत्व वाली आहार पहल को आगे बढ़ाते हुए, आवास और शहरी विकास विभाग ने 34 जिला और शहर आहार सोसायटी को 11.17 करोड़ रुपये जारी</strong> किए हैं.</span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>आहार के नोडल अधिकारी सारदा प्रसाद पांडा</strong> के अनुसार, अब जारी किए गए फंड से राज्य में 167 आहार केंद्रों के माध्यम से नूट्रिशियस भोजन की सुविधा मिलेगी और किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. <strong>'आहार' ओडिशा सरकार की एक बड़ी पहल</strong> है और इसी कारण यह पहल आम लोगों में बहुत प्रचलित हो गयी है. 5 नगर निगमों में 21 आहार केंद्रों के साथ एक मामूली प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब एक शक्तिशाली आंदोलन में बदल गया है. राज्य के सभी 115 शहरी स्थानीय निकायों में फैले, ओडिशा में अब उल्लेखनीय 167 आहार केंद्र हैं.</span></p>
<p dir="ltr"><span>प्रत्येक दिन, यह महत्वपूर्ण प्रयास लगभग 1 लाख योग्य व्यक्तियों के जीवन को छूता है, यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी भूखा न सोए. आज तक, जरूरतमंद लोगों को 150 मिलियन से अधिक भोजन परोसा जा चुका है. सरकार ने आहार कार्यक्रम में <strong>मिशन शक्ति स्वयं सहायता समूह</strong> (SHG) की भागीदारी शुरू की है. सभी 167 आहार केंद्रों और 27 आहार किचन के रखरखाव की जिम्मेदारी Self Help Group को सौंपी गई है. सरकार की यह पहल SHG महिलाओं और आम व्यक्तियों के लिए बहुत बड़ी साबित होगी. देश की हर सरकार को इस तरह के कदम उठाने के बारे में सोचना चाहिए ताकि महिलाओं के साथ सबका विकास मुमकिन हो जाए.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 01 Jul 2023 17:00:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/more-than-11-crore-rupees-sanctioned-to-ahaar-society-and-shg-women-will-take-its-responsibility]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0brckG7UjdWkkqB1MrFT.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0brckG7UjdWkkqB1MrFT.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG के नाम के साथ काम में दम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/what-is-in-the-name</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg"><p dir="ltr">"नाम में क्या रखा है", ये कहा है एक बहुत ही जाने-माने नाटककार, शेक्सपियर ने, उन लोगो या समूहों के लिए, जिनको नामों से नहीं बल्कि उनके कामो से जाना जाता है. बड़े कामों की जब भी बात आती है तो स्वसहायता समूह के बारे में बोले बिना ख़त्म नहीं हो सकती. ये समूह कौनसे  राज्य या देश में है, इस बात को सोचे बिना हम सब सिर्फ ये देखते है की इन समूहों की महिलाओं ने कितने शानदार काम किये है.</p>
<p dir="ltr">भले ही नाम की अहमियत हो न हो, लेकिन बात जब हमारी भाषा की आती है, तो अपने घर की बात और स्वाद दोनों याद आ जाते है. इसिलए अपनी भाषा में बात करनी की बात ही कुछ और है.  </p>
<p dir="ltr">भारत के हर राज्य में न जाने कितने स्वसहायता समूह है जो लाखों लोगो की ज़िन्दगियों को सुधार रहे है. अब बात करे महाराष्ट्र की तो वहाँ स्वयसहायता समूह या 'गट' का बहुत समय से काम कर रहे है.  सबसे पहला गट महाराष्ट्र में अमरावती की महिलाओं ने 1947 में बनाया था और 1988 में पुणे डिस्ट्रिक्ट के चैतन्य ग्रामीण महिला बाल युवक संस्था ने महाराष्ट्र में SHGs बढ़ावा देना शुरू कर दिया था. </p>
<p dir="ltr">ऐसे ही तमिलनाडु में 1989 में 'महलीर थीत्तम' नाम से एक कार्यक्रम धरमपुरी जिले में 1979 में शुरू किया गया. 1995 में 'इंद्रा महिला योजना' आई जिसने महिला सशक्तिकरण पर पुरे भारत में बहुत काम किया. 1999 में राष्ट्रीय महिला कोष को लाया गया जिसने 2 लाख से भी ज़्यादा महिलाओं को आर्थिक मदद की. ये सारे कदम तमिलनाडु में महिलाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिए गए. </p>
<p dir="ltr">अगर बात आंध्र प्रदेश की जाए तो वहां पर भी नाम कुछ अलग ही है लेकिन काम में कोई अंतर नहीं है. तेलगु में SHGs को स्वयंसहायता संघालु कहा जाता  है. 1999, अप्रैल 1 को भारत सरकार ने 'डेवलपमेंट ऑफ़ वीमेन एंड चिल्ड्रन इन रूरल एरियाज'(डवक्रे) शुरू किया जो सबसे ज़्यादा आंध्र में ही सफल हुआ. इस मिशन का सिर्फ एक सोच थी की गांव की महिलाओ को इतना पगार मिले जीसे वो अपनी और अपने परिवार की ज़िन्दगी का गुज़ारा कर सकें.</p>
<p dir="ltr">ओडिशा में SHGs को गोष्टी कहा जाता है. आप लोगो को तो पता ही होगा की गोष्टी बातचीत करने को भी कहते है, लेकिन जैसा अपने ऊपर पढ़ ही लिया है, "नाम में क्या रखा है." यहाँ की सरकार ने 2001 के अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर "मिशन शक्ति" की शुरुवात की थी . जिसका मकसद भी महिला सशक्तिकरण था और इस मकसद को कामियाब बनाने के लिए 70 लाख महिलाए इस मिशन में जुड़ गयी. गुजरात, जहाँ इन समूहों को 'जुट' कहा जाता है, एक और राज्य है जहा महिलाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 'सखी महिला मंडल' को बनाया और हाल ही में 'प्रधानमंत्री महिला कल्याण योजना' की भी स्तापना की गयी.असम में 'दल' कहे जाने वाले स्वयं सहायता समूहों को भी वहां की सरकार ने बहुत मदद की हमारें अगर हमारे देश के बाहर की बात करे तो, जर्मनी में इन्ही समूहों को 'selpst hil fe grupen' कहते है. श्रीलंका में इन्हे 'महिला मंडल' कहा जाता है.</p>
<p dir="ltr">देखा जाए तो हर राज्य और देश में स्वसहायता समूहों के नाम एकदम अलग है लेकिन इनके कामों में कोई अंतर नहीं है. इसीलिए शेक्सपियर ने बहुत सालो पहले ही बोल दिया था, "What is in the name?"</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 20 Mar 2023 15:57:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/what-is-in-the-name]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg"/></item></channel></rss>