<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ ममता देवी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mmtaa-devii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mmtaa-devii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 19 May 2023 12:33:17 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[जम्मू की मिठाई वाली दीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/sweet-success-story-of-mamta-devi-from-jammu</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg"><p>साईकिल वाली दीदी, पत्रकार दीदी, अचार दीदी की कुछ अलग कर दिखाने की कहानियां तो हमनें सुनी. सूपर वुमन की लिस्ट में एक नाम और जुड़ा है - मिठाई वाली दीदी. कम आय, वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली ममता देवी ने जम्मू और कश्मीर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (उम्मीद) से वित्तीय सहायता लेने के बाद उपनाम "मिठाई वाली दीदी" के नाम से फेमस हो गई. देवी बिश्नाह गांव की रहने वाली हैं. वह घर पर ही रहती थी. उनके पति मिठाई की दुकान पर काम करके रोज़ी-रोटी कमाते थे. उनके जीवन में तब बदलाव आया जब 2015 में वह 10 महिलाओं के साथ बिश्नाह स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG) में शामिल हुई.</p>
<p>थोड़ी हिचकिचाहट के बाद ममता देवी SHG में शामिल हुई और धीरे-धीरे, समूह की मदद से आर्थिक रूप से मज़बूत होने लगी. वे गृहिणी से एक सफल व्यवसायी बनी. जम्मू और कश्मीर में संसाधनों की कमी से पीड़ित ग्रामीण महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने अहम भूमिका निभाई. जरूरतमंद एसएचजी सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण मिलने से वे रोज़गार शुरू कर पाये और जल्द ही लोन भी चुका दिया. बचत कर ममता ने दो पक्के कमरे बनाए. इससे पहले, उनका परिवा कच्चे घर में रहता था और बारिश के दौरान  छत से पानी टपकने पर काफी मुश्किल होती थी.</p>
<p>ममता ने अपने पति को खुदकी मिठाई की दुकान खोलने में मदद की. साथ ही, उन्होंने समूह की महिलाओं के साथ कपड़े के थैले, ट्रैकसूट, राष्ट्रीय ध्वज बनाने, और क्लाउड किचन का काम भी शुरू किया. बिश्नाह में कुछ SHG सदस्यों ने रेडीमेड कपड़ों की दुकानें भी खोली. अपने  व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उन्हें आसानी से ऋण मिला. उन्हें पूरे जम्मू-कश्मीर, यहां तक ​​कि बाहर भी अपने काम को प्रदर्शित करने का मौका मिला. बावे (जम्मू) में एक दुकान शुरू कर ममता ने दस दिनों में 35 हज़ार रुपये कमाए. सरकार डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन, गांधी नगर, और पुलिस मुख्यालय में मिठाई की स्टॉल लगाई. </p>
<p>49 साल की उम्र में आकर उन्होंने आर्थिक रूप से मज़बूत बनने का सपना पूरा किया और वो सभी आर्थिक कठिनाइयों से बाहर आई. नौ साल लगातार मेहनत के बाद उन्हें बिश्नाह के बाहर भी लोग 'मिठाई वाली दीदी' के नाम से जानने लगे. उन्होंने महिलाओं को SHG से जुड़ने के लिए प्रेरित किया.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 19 May 2023 12:33:17 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/sweet-success-story-of-mamta-devi-from-jammu]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गांव का चलता फिरता बैंक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mamta-devi-provides-banking-solution-the-women-in-villages-near-jhansi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GavREYuRj1mIVBjjHt0c.jpg"><p dir="ltr">देश हर में महिलाएं धीरे ही सही लेकिन सशक्त बनती जा रही है। खुदका और अपने परिवार का ध्यान तो हमेशा से ही करती आ रही है, पर अब कुछ ऐसी भी महिलाएं सामने आ चुकी है जो अपनी जैसी ना जाने कितनी महिलाओं को भी सशक्त और शिक्षित कर रही है। ऐसी ही एक महिला, ममता देवी है, जो कि बैंकिंग कॉरस्पॉडेंट सखी के तौर पर झांसी के ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रही है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यह अपने लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं और साथ ही अपने गांव या कस्बे के लोगों की मदद करतीं हैं. ममता 'मां शेरावाली स्वयं सहायता समूह' की अध्यक्ष हैं. उन्होंने इस मशीन की मदद से अभी तक अपने गांव में 28 लाख से अधिक ट्रांजैक्शन किए हैं. गांव में किसी को पैसे निकलना, बिजली का बिल जमा करना, पैसा ट्रांसफर करना, या अन्य कोई वित्तीय काम हो तो ममता देवी उनके घर जाकर उनकी मदद करतीं ह। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ममता देवी को उनके काम की सराहना करते हुए प्रशस्ति पत्र भी दिया. <strong> </strong></p>
<p dir="ltr">ममता देवी ने बताया- " 3 साल पहले उन्होंने यह काम करना शुरू किया। समूह में और महिलाएं जुड़ती गई और आज वह आस-पास के गांव में भी सेवाएं देती हैं. इसके साथ ही लोगों को डिजिटल और वित्तीय जागरूकता के बारे में भी बताती हैं. अगर किसी व्यक्ति के पास अपनी साइनया ATM कार्ड ना हो तो उस व्यक्ति की आंख की पुतली को भी स्कैन कर ट्रांजैक्शन करने की सुविधा भी उपलब्ध है."</p>
<p dir="ltr">ममता देवी ने कहा, "उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से सम्मानित होना उनके और उनके समूह की महिलाओं के लिए गौरव का क्षण था." इस काम की वजह से उन्हें आमदनी तो होती ही है साथ में सम्मान भी मिलता है. अब वह आत्मनिर्भर हो चुकी हैं. वह इस काम को आगे भी करती रहेंगी. देश भर के स्वयं सहायता समूह की और भी महिलाएं बैंक सखी बनकर आत्मनिर्भर बन सकती है। इस प्रकार वो अपने परिवार अरु खुद को सुरक्षित ज़िंदगियाँ दे पाएंगी। आत्मनिर्भर भारत की और यह एक बहुत बड़ा कदम होगा।  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 14 Apr 2023 11:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mamta-devi-provides-banking-solution-the-women-in-villages-near-jhansi]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GavREYuRj1mIVBjjHt0c.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GavREYuRj1mIVBjjHt0c.jpg"/></item></channel></rss>