<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ मोटे अनाज]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/motte-anaaj</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/motte-anaaj" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 31 May 2023 17:52:04 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[देश की हर थाली में मिलेट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/fmcg-companies-stepping-towards-making-millets-popular-in-india-with-the-help-of-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4S0KPpWwqHsUMjM7BV4Q.jpg"><p dir="ltr"><strong>मोटे अनाज </strong>(Millets) को लेकर पुरे देश में पहल शुरू है, क्यूंकि देश के प्रधानमंत्री के कारण UN ने इस साल को <strong>Millets Year 2023</strong> घोषित किया है. इसी कारण सरकार की सक्रियता के चलते मोटा अनाज यानी '<strong>श्रीअन्न</strong>' सहायक भूमिका से आगे बढ़कर केंद्रीय भूमिका में नजर आ रहा है. <strong>FMCG</strong> (Fast Moving Consumer Goods) और खाद्य प्रसंस्करण कम्पनियां भी मोटे अनाज (Millets) की लोकप्रियता बढ़ाने के अभियान को सफल बनाने की शुरुआत कर सकतीं है और इसे मुख्य धारा का अनाज बना सकती हैं. </p>
<p dir="ltr">आजकल मोटे अनाज से बने चिप्स, कुकीज, नूडल्स व अन्य तैयार खाद्य सामग्री लोकप्रिय हो रही है. अब पहल यह है की इस अनाज को लोगों के आम जीवन का हिस्सा बनाया जाए. आहार में मोटा अनाज शामिल करने से उसकी गुणवत्ता सुधारी जा सकती है. कम्पनियों को मोटे अनाज को विभिन्न खाद्य उत्पादों से जुड़ी व्यंजन विधियों के साथ नए प्रयोग करने की आवश्यकता है. यह कंपनियां <strong>स्वयं सहायता समूह</strong> (SHGs) से मदद ले सकतीं है क्यूंकि यह पहले से ही मोटे अनाज के उत्पादन, बिक्री एवं भण्डारण में लगे हैं. <strong>FMCG कम्पनियां</strong> पहले से मौजूद मार्केटिंग, सेल्स व वितरण चैनलों के साथ बाजार के इन उभरती <strong>महिला self help group</strong> के साथ भागीदारी निभाने का सोच रहें है. </p>
<p dir="ltr"><strong>भारत सरकार</strong> का उद्देश्य है कि वह भारत को millet center बनाए. इस कार्य में भारत सरकार का साथ दे सकतीं है SHG की महिलाएं जो मोटे आनाज के उत्पाद हमेशा से बनती आई है. आंध्र प्रदेश में ऐसी ही 'पायलट परियोजना' शुरू की गई थी. इससे 200 महिलाओं ने छोटी मिलेट मिक्सी से कुछ शुल्क लेकर पास-पड़ोसियों के लिए मोटा अनाज पीसना शुरू किया और इसे लघु उद्योग बना दिया. देश में भले ही <strong>श्रीअन्न</strong> को अपनाने में कुछ और समय लग सकता है लेकिन एक बार यह चलन शुरू हुआ और लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो गए तो यह काम बहुत आसान हो जाएगा. FMCG कम्पनियां इतनी सक्षम हैं कि वे सरकार के प्रयासों के साथ मिल कर मोटे अनाज को किसान के खेतों से थाली तक पहुंचा सकती हैं. ऐसा होने पर हम लोगों को तो स्वस्थ रख ही सकते हैं साथ ही पर्यावरण संरक्षण और मजबूत अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है. महिलाएं देश में मिलेटस के प्रचलन को तो बढ़ा ही रहीं थी, लेकिन अब <strong>FMCG कम्पनीज</strong> और सरकार का इनके साथ मिलकर काम करना बहुत जल्द बदलाव लाएगा. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 31 May 2023 17:52:04 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/fmcg-companies-stepping-towards-making-millets-popular-in-india-with-the-help-of-shgs]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4S0KPpWwqHsUMjM7BV4Q.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4S0KPpWwqHsUMjM7BV4Q.jpg"/></item><item><title><![CDATA[पति, पत्नी और SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/husbands-work-with-shg-women-to-come-out-of-poverty</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Pg3QDFgf1eHiwtt2gocv.jpg"><p>बड़वानी जिले के आदिवासी ब्लॉक ठीकरी के जय भवानी स्वयं सहायता समूह की हर्षा धर्माल और दीपाली केंगडे ने अपनी मेहनत और रात-दिन एक कर ऐसी पहचान बनाई कि उनके हाथों से तैयार मसाला,पापड़ और सेवइयां का स्वाद निमाड़ और मालवा तक पहुंच गया. हर्षा कहती है -" हमारे जय भवानी समूह की दीदियां छोटे-छोटे समूह के काम कर रहीं थी. तभी पापड़ बनाने की मशीन ली और काम शुरू किया.देखते ही देखते हमारी पहचान बनने लगी.अब एक मशीन और लगाएंगे." धीरे -धीरे दिन फिरने लगे. श्री गणेश स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष वैशाली चौधरी बताती हैं - " हमारे साथ हर्षा और दीपाली ने काम शुरू किया. हमारे साथ अब कई दीदियां इसी तरह जुड़ीं और आत्मनिर्भर हो गई." हर्षा की पापड़ यूनिट में मिलेट्स को भी महत्व दिया गया. यहां रागी मोटे अनाज के भी पापड़ बन रहे,जिसे पसंद किया जा रहा है. हर्षा के पति गिरिधर कहते हैं-" जब फैक्ट्री बंद हुई. लगा जीवन ख़त्म हो गया. लेकिन मुझे ख़ुशी है कि अपनी पत्नी हर्षा की  यूनिट में काम कर रहा हूं ."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/oRCMe33qUmn6s5eVxJLs.jpg" alt="SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>यूनिट में सिवइयां सुखाते हुए दीपाली (Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>यह उपलब्धि यूहीं नहीं मिली.दीपाली और हर्षा पर उस वक़्त चिंताओं का पहाड़ टूट पड़ा जब उन्हें पता चला कि वो फैक्ट्री बंद हो गई है जहां उनके पति काम किया करते थे . घर चलने का साधन नहीं बचा. उनके पैरों की ज़मीन खिसक गई. बच्चों की पढ़ाई और घर चलाने की चिंता... लेकिन कुछ पल में ही उन्होंने खुद को संभाला. और फिर सोचा, नई ज़िंदगी शुरू करेंगे, नए कारोबार से. आखिर उनका स्वयं सहायता समूह ही पहचान बना. जब पति भी समूह में काम करने को तैयार हुए तब सब के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई. </p>
<p>इसी कैंपस में आप जब जाएंगे, बाहर गैलरी में सेवइयें बड़े सुंदर तरीके से सूखते और बनाते हुए दीपाली दिख जाएंगी. इनकी संघर्ष की  कहानी ख़त्म और सफलता रफ़्तार पकड़ चुकी है. दीपाली कहती हैं - "जब मेरे पति प्रमोद बेरोजगार हो गए,सबने हंसी उड़ाई. मैंने हिम्मत नहीं हारी. उदास पति को सहारा दिया और यूनिट से जोड़ लिया. हमारा काम और अच्छे से सेट हो गया. यह सब आजीविका मिशन का ही असर था कि हम आत्मनिर्भर बन सके. "समूह में बनाई जा रही सिवईयें लोगों द्वारा बहुत पसंद की जा रही है. दीपाली के पति प्रमोद कहते हैं - "शुरू में लोग कहते थे, पत्नी की नौकरी कर रहे हैं. हमने परवाह नहीं की. अब हम अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रहे हैं. " </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/G1fVHGBVlgAhjmQGyTbU.jpg" alt="papad"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>रैक में पापड़ सुखा कर पैक किए जाते हैं (Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>जिले में इस यूनिट को देखने पूर्व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ,राज्यपाल मंगू भाई पटेल भी आ चुके हैं. इस कैंपस में लगभग साढ़े तीन सौ से ज्यादा महिलाएं रोजगार पा चुकी हैं.आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक योगेश तिवारी कहते हैं - "ठीकरी में संचालित सभी यूनिट मिसाल हैं. यहां सिलाई, मसाला उद्योग, पापड़ सहित कई यूनिट काम कर रहीं हैं. इस ग्राम संगठन को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मिलने का भी मौका मिला है." लगभग छह हजार महिलाएं इस ब्लॉक में अपने-अपने क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन कर सम्मान की ज़िंदगी जी रहीं हैं. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 01 Apr 2023 17:12:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/husbands-work-with-shg-women-to-come-out-of-poverty]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Pg3QDFgf1eHiwtt2gocv.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Pg3QDFgf1eHiwtt2gocv.jpg"/></item></channel></rss>