<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mukhymntrii-shivraaj-sinh-cauhaan</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mukhymntrii-shivraaj-sinh-cauhaan" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 24 Aug 2023 17:08:10 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[मध्य प्रदेश कर रहा खाद्य प्रसंस्करण का समर्थन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/food-basket-of-india-madhya-pradesh-gaining-growth-in-food-processing-sectors</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8LmLxPDXV8GFhw2XkiyK.jpg"><p style="text-align: justify;"><strong>मध्य प्रदेश </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/madhya-pradesh-sanwer-lok-adhikar-kendra-empowering-women-shgs">Madhya Pradesh</a>) को <strong>सातवीं बार एग्रीकल्चरल एक्सीलेंस अवॉर्ड </strong>(Agricultural Excellence Award) पाने का गौरव प्राप्त हुआ है. राज्य की <strong>47% GDP में कृषि का योगदान</strong> है जिससे पता चलता है कि <strong>राज्य का प्राइमरी फोकस फार्मिंग</strong> है.&nbsp;</p>
<h2>मध्य प्रदेश को 'फ़ूड बास्केट ऑफ़ इंडिया' का मिला टाइटल&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">Madhya Pradesh को<strong> ' फ़ूड बास्केट ऑफ़ इंडिया '</strong> (MP Food Basket Of India) के नाम से जाना जाता है. मध्य प्रदेश संतरों, मसालों, लहसुन, अदरक, चना और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, इसीलिए इसे <strong>एग्रीकल्चर पावरहाउस </strong>(MP Agricultural Powerhouse) के रूप में भी पहचान मिली है. राज्य सोयाबीन<strong> </strong>(Soyabean),<strong> </strong>मक्का, गेहूं, प्याज और फूलों की जैविक खेती<strong> </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/web-story/here-are-some-women-led-business-playing-an-important-role-in-women-empowerment">Organic Farming</a>) के लिए भी जाना जाता है.<strong> </strong>मेडिसिनल प्लांट्स, दूध और बागवानी राज्य की कृषि शान को बढ़ावा देते हैं.</p>
<p><img alt="mp grains" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/508x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ACegdKbjK6G85nJk4DIj.jpg" class="center" style="width: 508px;"></p>
<p>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; <span style="font-size: 8pt;">&nbsp; &nbsp; &nbsp;<em>&nbsp;Image Credits : Smart Food</em></span></p>
<h3>किसानों के विकास के लिए CM शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की कई पहलें</h3>
<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश में <strong>मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-singh-chauhan-met-shg-women-at-his-house">CM Shivraj Singh Chauhan</a>)<strong> </strong>किसानों के विकास के लिए नए-नए इन्नोवेशंस<strong>&nbsp;</strong>जैसे <strong>मेगा फ़ूड पार्क्स </strong>(Mega Food Parks)<strong>, एग्रीकल्चरल क्लस्टर्स </strong>(Agricultural Clusters)<strong>, इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन्स</strong> (Integrated Cold Chains) <strong>और वैल्यू एडिशन्स इंफ़्रास्ट्रक्चर</strong> (Value Additions Infrastructure) लाये हैं. इससे <strong>खाद्य प्रसंस्करण </strong>(Food Processing) और संरक्षण क्षमताओं में ग्रोथ हुई है. मध्य प्रदेश लगातार <strong>कृषि, खाद्य, और डेयरी प्रोसेसिंग सेक्टर्स </strong>को बढ़ावा दे रहा है.</p>
<p><img alt="mp food basket of india" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/496x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/NdFG8upucJEKwxPeC4DK.jpg" class="center" style="width: 496px;"></p>
<p>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; <span style="font-size: 8pt;">&nbsp; <em>&nbsp;Image Credits : Smart Food</em></span></p>
<p style="text-align: justify;">मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य के लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण पर ख़ास ध्यान दे रहे है. <strong>पीएम फ़ॉर्मेलाइजेशन ऑफ़&nbsp;</strong><strong>माइक्रो फ़ूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज</strong> (PM Formalisation Of Micro Food Processing Enterprises)<strong>, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन</strong> (Farmer Producer Organisation, FPO)<strong> और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स</strong> (Self Help Groups, SHG)<strong> </strong>को समर्थन देने वाली पहलें की. इनसे <strong>स्मॉल स्केल फ़ूड प्रोसेसर्स </strong>(Small Scale Food Processors) के सामने आने वाली समस्याएं दूर हुई हैं. <strong>स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज </strong>(State Cooperative Societies)<strong>, माइक्रो इंटरप्राइजेज</strong> (Micro Enterprises) को<strong> ज़रूरी सेवाओं तक</strong>, पहुंच आसान बनाते है. इससे <strong>&nbsp;एग्री फ़ूड सेक्टर </strong>(Agri Food Sector) में उनकी महत्वपूर्णता में बढ़ोत्तरी होती है.</p>
<h2>खाद्य प्रसंस्करण को मिल रहा बढ़ावा&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">इनोवेटिव पॉलिसीस से कई कंपनियां जैसे <strong>कैडबरी </strong>(Cadbury)<strong>, आईटीसी</strong> (ITC)<strong> और यूनिलीवर </strong>(Unilever) निवेश कर रहीं है. अन्य क्षेत्रों के मुकाबले राज्य में 1.5 गुना ज्यादा इन्वेस्टमेंट मिला, जिससे खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा मिला है.</p>
<h2>भारत के डेयरी उत्पादन में MP पंहुचा तीसरे नंबर पर</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में <strong>डेयरी उत्पादक राज्यों में Madhya Pradesh 8.6%</strong> का योगदान कर <strong>तीसरे नंबर</strong> पर है. राज्य के <strong>सहकारी डेयरी फेडरेशन</strong> (Cooperative Dairy Federation)<strong>, एमपी डेयरी फेडरेशन </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/madhya-pradesh-shg-women-ramsakhi-makes-living-from-dairy-appreciates-mp-government-and-chief-minister">MP Dairy Federation</a>) अकेले&nbsp;<strong>9.13 लाख किलोग्राम प्रोड्यूस </strong>करता है. <strong>अमूल </strong>(Amul)<strong>, MPDF, अनिक इंडस्ट्रीज </strong>(Anik Industries<strong>),और पवनश्री फ़ूड इंटरनेशनल </strong>(Pawan Shree Food International)<strong> </strong>जैसी कम्पनीज़ की वजह से डेयरी प्रोसेसिंग लगातार बढ़ रही है.</p>
<p><img alt=" sanchi" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/497x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/E4unjnPJXJpk9lBmsZGK.jpg" class="center" style="width: 497px;"></p>
<p>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;<span style="font-size: 8pt;"> &nbsp;<em> Image Credits : Sanchidairy.com</em> &nbsp;</span>&nbsp;</p>
<h3>मध्य प्रदेश आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">राज्य में डेयरी उद्योग और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी कमिटमेंट का प्रमाण है. <strong>ट्रेडिशनल कृषि तरीकों </strong>(Traditional Agricultural Practices) का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है. यह सब हुआ है राज्य सरकार और लोगों के निरंतर प्रयासों की वजह से. मध्य प्रदेश लगातार <strong>आर्थिक सशक्तिकरण </strong>(Economic Empowerment) की राह पर अग्रसर है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 24 Aug 2023 17:08:10 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/food-basket-of-india-madhya-pradesh-gaining-growth-in-food-processing-sectors]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8LmLxPDXV8GFhw2XkiyK.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8LmLxPDXV8GFhw2XkiyK.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जादुई हाथों वाली बबली ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/babli-gambhir-from-jaora-indore-overcomes-her-disabilities</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VD4EmxKCv7ECG5vg5Ro4.jpg"><p dir="ltr">"इसको ज़हर दे दो, क्यूंकि ये तुम्हारे परिवार पर भोज बन जाएगी", यह शब्द थे उसके परिवार के. एक छोटे से रूढ़िवादी परिवार इस स्पेशल  लड़की का जन्म हुआ था. दोनों कोहनियों में जोड़ नहीं थे, बाएं हाथ में 2 और दाहिने हाथ में 3 उंगलियां ही थी, और हाथ नॉर्मल के मुकाबले आकर में 1/4th. कोई और होता तो शायद हर मान लेता और अपनी ज़िन्दगी पर हर दिन रोता, लेकिन <strong>बबली गंभीर </strong>ऐसी नहीं थी. भगवान ने भी अलग बना कर भेजा कि आज वो पूरी दुनिया से अलग बन चुकी है. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने एक <strong>ब्यूटीशियन </strong>के रूप में काम करना शुरू किया और कुछ ही समय में काम में उनका परफेक्शन हो गया.</p>
<p dir="ltr">उस वक़्त से वह विकलांग लोगों के लिए काम कर रही है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है. 2013 में, गंभीर को <strong>तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी</strong> द्वारा <strong>नई दिल्ली</strong> में 'विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार' के दौरान <strong>उत्कृष्ट रचनात्मक वयस्क व्यक्ति पुरस्कार</strong> (महिला) से सम्मानित किया गया. 2014 में, उन्हें <strong>अभिनेत्री माधुरी दीक्षित</strong>, <strong>ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज </strong>और <strong>राज्यसभा सांसद मैरी कॉम</strong> और <strong>नॉवेलिस्ट शोभा डे</strong> द्वारा 'वुमन प्राइड अवार्ड' से सम्मानित किया गया. 2023 में, उन्हें 'डॉ सरोजिनी नायडू अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया. <strong>मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान</strong> ने रतलाम में उनका अभिनंदन भी किया. 14 राष्ट्रीय और एक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार की विजेता बन चुकी है, बबली गंभीर.</p>
<p dir="ltr">वह बताती है की उसके पिता ही उसका सहारा थे. वे बबली के हाथों को किसी जादू से कम नहीं मानते थे. पूरी दुनिया से बचाकर कर रखा अपनी बेटी को, और आज वो जिस मुकाम पर है, वह अविश्वसनीय है. अपने सैलून के साथ, बबली कई लोगों को रोजगार प्रदान करती है. बहुत से टॉक शोज में भी आ चुकी है और आज देश की 'युथ आइकन' बन गई है. उसने ब्यूटीशियन के क्षेत्र की मास्टर बनने के लिए एक सरकारी नौकरी को तक अस्वीकार कर दिया था. वह बताती है कि उसके पापा ने कहा था- "<em>बबली, कभी हार मत मानो</em>" और आज पूरा देश है जो देख रहा है की वह किस मुकाम पर पहुंच चुकी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 11 Jun 2023 11:00:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/babli-gambhir-from-jaora-indore-overcomes-her-disabilities]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VD4EmxKCv7ECG5vg5Ro4.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VD4EmxKCv7ECG5vg5Ro4.jpg"/></item><item><title><![CDATA[खजूर पत्तियों से बन रहे झुमके, कंगन और गुड़िया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-making-handicrafts-from-khajoor-leaves-to-revive-the-traditio-art</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MR2lzgVMO1LG7tAK8sdP.jpg"><p>"अब बड़े -बड़े बंगलों और घरों में टाइल्स लगने लगी. झाड़ू भी बदल गए. अब कहां कच्चे मकान और कहां लिपे हुए आंगन... अब खजूर के पेड़ की पत्तियों (खोड़) से बनने वाले झाड़ू लगभग ख़त्म से हो गए. खजूर की पत्तियों से झाड़ू के अलावा मैंने फिर कुछ ऐसी चीज़ें बनाई जिसने इस कला को बचा लिया. मेरे बेटे-बहू और बच्चे तक खजूर की पत्तियों से अलग-अलग सजावट का सामान बना रहे हैं. " इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव में आई शारदा बाई ने अपनी बात कही. </p>
<p>मप्र सहित कई इलाकों में खजूर की पत्तियों से झाड़ू बनाए जाते रहे. बदलते वक़्त के साथ अब कच्चे घरों और आलीशान बंगलों में टाइल्स का उपयोग फर्श के लिए किए जा रहे हैं. खोड़ से बने झाड़ू का प्रचलन नहीं रहा. आसाम में बने झाड़ुओं ने इनके जगह ले ली. उज्जैन जिले के कमेड़ गांव की 73 साल की शारदा बाई का परिवार इस परंपरागत कला को बचाने में लगा है. इन पत्तियों से वह मोर, गणेश, गुलदस्ते, झुमके, हेयरबेंड, गुड़िया जैसे कई आइटम यह परिवार बना रहा है. पत्तियों से बने आइटम की खूबसूरती इतनी है कि देश के कई हस्तशिल्प मेले में इस कला को जगह मिलने लगी. कई पुरस्कार से नवाज़ा गया. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/1URgmdFVvTGrWy1T9epX.jpg" alt=" handicrafts from khajoor leaves"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;">मालवा उत्सव में स्टॉल (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></p>
<p>झाड़ू का उपयोग अब केवल गांवों तक सिमित रह गया. शारदा बाई कहती है -" <em>मुझे लगभग 60 साल हो गए. झाड़ू की बिक्री कम हो गई. मुझे लगा अब यह कला ख़त्म हो जाएगी.मैंने परिवार के साथ नए आइटम तैयार किए. वह शासन ने पसंद किए किए. मुझे ख़ुशी है कि हस्तशिल्प मेले में हर जगह मुझे बुलाया जाता है. मेरे पति भी मेरा साथ देते हैं. अब बहुओं के साथ मेरे पोते-पोती भी इस कला को बचा रहे.</em>" शारदा बाई हरियाणा के सूरज कुंड, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, पुरी, चैन्नई, बड़ौदा, खजुराहो सहित कई जगह बुलाया जा चुका है. </p>
<p>इस कला से जुड़ी परिवार की ही संगीता और रजनी कहती हैं - "<em>शादी हो कर आए जब से ही हमने भी इस कला को सीखा. हमें ख़ुशी है कि सरकार और शासन ने हस्तशिल्प मेले में हमें प्रदर्शन करने और स्टॉल की जगह दी.</em>" शारदा बाई के बेटे सुनील वर्मा कहते हैं - "<em>हम लोग जंगल से खजूर की पत्तियां तोड़ कर लाते हैं. उन्हें सूखा कर अलग-अलग तरह का सामान बनाते हैं. मेरा बेटा प्रदीप सहित दूसरे बच्चे भी इस कला को सीख गए."        </em></p>
<p><em><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lsT8BQwvLln8BLUVrdDb.jpg" alt=" handicrafts from khajoor leaves"></em></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>शारदा बाई खजूर कि पत्तियों से गुड़िया बनाते हुए (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</em></span></p>
<p>मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई मंत्री,अधिकारियों ने सम्मान दिया. इंदौर के मालवा उत्सव में शामिल होने आई नैरोबी देश की संध्या दुबे कहती है -"<em> मैं 16 सालों से नैरोबी में रह रही हूं. लेकिन भारतीय लोक संस्कृति और कला की जगह कोई नहीं ले सकता. खजूर की पत्तियों से झाड़ू के अलावा इतनी सुंदर चीज़ें भारत के कलाकार ही बना सकते हैं. इसके यहां की मेहनती महिलाओं ने जिस तरह चूड़ियां और दूसरे सजावटी सामान बनाए, वह मैंने ख़रीदे. सभी विदेश ले जाऊंगी."</em></p>
<p>प्रदेश में कई जगह हस्तशिल्प मेले के आयोजन सरकार करवा रही है. इंदौर के लालबाग में आयोजित मालवा उत्सव में कई तरह के स्टॉल लगे. मेले में आई धीरल ने भी हस्तशिल्प से जुड़ा सामान ख़रीदा. धीरल कहती हैं - " <em>मुझे खजूर से बने सामान बहुत पसंद आए. मैंने कुछ ख़रीदे भी. ऐसे मेले में हस्तशिल्प और हमारी भारतीय संस्कृति को पहचाने का मौका मिलता है. "</em>  शारदा बाई के टेबल पर सजे हुए खजूर के आईटम देखने वालों की भीड़ ने साबित कर दिया कि हस्तशिल्प को पसंद करने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 19 May 2023 12:32:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-making-handicrafts-from-khajoor-leaves-to-revive-the-traditio-art]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MR2lzgVMO1LG7tAK8sdP.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MR2lzgVMO1LG7tAK8sdP.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ट्रक मालकिनों का गांव ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/a-village-where-women-joint-shg-and-purchased-trucks</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GbpYZrcLmEGnyc1Al9Qq.jpg"><p><em>"जब खेतों में मजदूरी करने जाती थी,अक्सर पास से गुजरने वाली बाइक,कारों को देखती थी. और यह सोच कर मन को कोसती थी कि ये हमारी किस्मत में तो कभी लिखे ही नहीं हैं. वक़्त बदला. अब न केवल मेरे पास बड़ा वाहन है बल्कि मजदूरी नहीं दुकान की मालकिन भी हूं. कभी-कभी मुझे खुद यह फिल्मी कहानी लगती है." </em>मुस्कुराते हुए रुबीना बी सभी को यह बात बताती है.आजीविका मिशन ने महिलाओं को एकजुट कर यहां समूह बनाए वे सफलता की कहानी खुद गढ़ रहें हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद रुबीना से मिल चुके हैं. यहां तक कि केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण मंत्रालय के मंत्री भी रुबीना से वर्चुअल बैठक में बात कर चुके हैं.       </p>
<p>देवास जिले के गांव गुर्जर बापच्या में रुबीना मिसाल बन गई. रुबीना से शुरू हुई कहानी एक के बाद एक कई महिलाओं ने लिखी. हमेशा गरीबी ,मजदूरी नशे के आदी अधिकांश लोगों से पहचाने जाने वाला गांव अब ट्रक मालकिनों का गांव कहलाता है. यहां की महिलाओं ने समाज से जुड़ी कई कट्टरताएं ख़त्म की और खुशहाल जीवन जी रहीं हैं. मुस्लिम बहूल इस गांव की महिलाओं ने अपनी मेहनत के बल पर नई पहचान बनाई. आत्मनिर्भर ये महिलाएं अब स्वाभिमान की ज़िंदगी जी रहीं हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tArSYTiT82r2uCNJRCwe.jpg" alt="women who own trucks"></p>
<p> <span style="font-size: 8pt;"><em>देवास के  गुर्जर बापच्या की रुबीना बी से सीएम शिवराज सिंह ने मुलाकात कर हौसला बढ़ाया  (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)   </em></span></p>
<p>रुबीना आगे बताती है -<em>" शादी के बाद समय बहुत बुरा निकला. परिवार में विवाद और झगड़ों से तंग आ गई थी. मजदूरी इतनी नहीं मिल रही थी कि घर का खर्चा चल सके. हमने अधिकारियों के सुझाव पर "जागरूक आजीविका समूह" बनाया. 14 और गरीब महिलाएं भी साथ में जुड़ीं. समूह में हर दो माह में बचत शुरू की. खाता खुलवाया. मैंने पहला लोन पांच हजार रुपए का लिया.बैरागढ़ जाकर पांच हजार रुपए के कपड़े लाई. आठ हजार में सभी माल बिका. मुझे पहली बचत ने नई उम्मीद जगा दी. फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा."</em> रुबीना ने पहले गांव-गांव जाकर कपड़े बेचे. फायदा हुआ तो पहले पुरानी वेन खरीदी. अब एक टवेरा और देवास में कपड़े की दुकान चलाती है.    </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Z9WjyIe6oFueBdURH1Ho.jpg" alt=" देवास के  गुर्जर बापच्याकी रुबीना बी से सीएम शिवराज सिंह ने मुलाकात कर हौसला बढ़ाया "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>जागरूक स्वयं सहायता समूह की रुबीना सिलाई करते हुए  (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)   </em></span></p>
<p>आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक शीला शुक्ला कहती हैं -<em>" यह गांव हमारे लिए चुनौतीपूर्ण था. मुस्लिम बहूल गांव और पर्दा प्रथा सबसे बड़ी रूकावट थी. लेकिन हमारी लगातार काउंसलिंग का असर नज़र आने लगा. 2017 में कई समूह गठित किए. महिलाओं को जोड़ा ,लेकिन कोरोना काल में दिक्कतें आई. अब दो सौ से ज्यादा महिलाएं अलग-अलग कारोबार से जुड़ी हुईं हैं. यहां 30 ट्रक और दूर छोटे वाहन उनके पास हैं जो कभी मजदूरी करतीं थी."  </em>जिले के इस गांव में 16 समूहों के साथ 200 से ज्यादा महिलाएं काम कर रहीं हैं.यहां तक कि स्कूलों में यूनिफॉर्म का काम भी इन समूहों को दिया गया. </p>
<p>इसी गांव की रहने वाली शौकत बी भी सोशल हीरो बन चुकी है. शौकत अपने बारे में बताती है - "जब बच्चे छोटे थे मेरे पति ने सुसाइड कर लिया. मेरी ज़िंदगी में कुछ नहीं बचा. मजदूरी से गुजर-बसर नहीं हो पा रही थी. मैंने " गुलाब स्वयं सहायता समूह " बनाया. 12 दूसरी महिलाओं को भी जोड़ा.समूह से दो लाख रुपए का लोन लेकर दो भैंस खरीदी. दूध बेचने के धंधे में मुझे फायदा हुआ. मेरी हिम्मत बढ़ गई. फिर छह लाख रुपए का लोन लेकर एक सेकेण्ड हेंड ट्रक लिया. लोन टाइम पर चुकाया. अब मेरे पास 4 ट्रक हैं. "</p>
<p>इसी गांव में और भी महिलाओं ने अपने आप को आत्मनिर्भर बनाया. गांव की नसीम बी ने अपने परिवार को विश्वास में लेकर पर्दा प्रथा को ख़त्म किया. " उज्जवल समूह " की सहायता से 6 लाख का लोन लिया. नसीम कहती है -"<em> भैंस खरीदी.कटलरी, मसाला और आटा चक्की की दुकान खोली. वर्ल्ड विज़न योजना में जामफल के पौधे लगाए ,जहां एक लाख रुपए की जाली लगवाई." </em></p>
<p>डीपीएम शीला शुक्ला आगे बताती हैं - <em>"रुबीना सहित दूसरे समूह की महिलाओं के काम को प्रशासन के साथ सरकार ने सराहा. यहां लगातार समूह गठन के काम में मिशन जुटा हुआ है."</em> गांव में ढाई सौ परिवारों में 70 से ज्यादा मुस्लिम  परिवार समूह में शामिल हैं.  </p>
<p>कलेक्टर ऋषभ गुप्ता खुद इन समूहों की जानकारी लेकर उन्हें प्रोत्साहित कर रहें हैं. ऋषभ गुप्ता कहते हैं - <em>"आजीविका मिशन को निर्देश दिए हैं कि समूह की महिलाओं को सरकारी योजनाओं की लगातार जानकारी उपलब्ध कराई जाए. जिससे इसका पूरा लाभ महिला समूहों को मिले. और वे आत्मनिर्भर बन सके."</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Wed, 03 May 2023 15:43:53 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/a-village-where-women-joint-shg-and-purchased-trucks]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GbpYZrcLmEGnyc1Al9Qq.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GbpYZrcLmEGnyc1Al9Qq.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मजदूर दिवस : SHG जैसे संगठन से बदलेगी तस्वीर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-have-the-power-to-make-women-financially-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1pLMU4H0iodc3G8VxXuv.jpg"><p>हमारे देश में चाहे हरे-भरे लहलहाते खेत हों या बड़े बड़े भवन या मल्टीज़ हों या कोई और बड़े इंफ्रास्ट्रक्स्चर.... गांव की सड़कों से महानगरों पर गर्म सड़कों पर डामर बिछा रहे हों, या और जो भी आप आधुनिकता के पैमाने पर सोच सकें. सभी की नींव में यदि कोई है तो वह एक ही शक्ल हमारे मन और मस्तिष्क पर अंकित होती है.... वह है फटे से चीथड़ों और सिर पर गमछा बांधे लोग...चाहे कोई भी मौसम हो बरसात ,भीषण लू से तपती गर्मी या कड़ाके ठंड सब मौसम में ये दिख जाएंगे. इनकी हाड़तोड़ मेहनत और पसीना बहाते लोगों की बदौलत इंडिया एक नई तस्वीर के रूप में उभर रहा है. इन श्रमिकों लेकर चाहे हमारी सरकारों ने पूरा एक दिन समर्पित कर दिया लेकिन कई इलाकों में लोग अब भी इस खास दिन श्रमिक या "मजदूर दिवस " से बेखबर हैं. हर साल की तरह 1 मई को मजूदर दिवस मनाया जाता है. पर मजदूरों का अब तक असंघठित श्रेणी में रखा गया. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के मजदूर जी-जान से जुटे हैं.</p>
<p>सरकारों ने समय -समय पर चाहे कई योजनाएं बनाई बावजूद उसका लाभ पूरी तरह नहीं मिल सका. आज भी कई मजदूर गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं. इन मजदूरों में महिला श्रमिकों की हालत और अधिक दयनीय है. आज भी असंगठित श्रेणी में मजदूरी कर रहे लोगों में बराबरी की मेहनत के बाद भी पैसों के बंटवारे में बहुत अंतर है. किसी खेत में फसल कटाई हो या मकान बनाने पर मिलने वाली मजदूरी किसी पुरुष को तीन सौ रुपए मिलेगी तो किसी महिला को आज भी डेढ़ सौ रुपए दिए जा रहे. इस भुगतान और कमाई को महिला मजदूरों ने अपनी नियति मान लिया. इसका फायदा ठेकेदार और दूसरे मालिक जम कर उठा रहे हैं.यही वजह कई परिवार रात-दिन पसीना बहाने के बावजूद कर्ज में डूबे हैं. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lcJFyQnR7iLEPRa8IOVZ.jpg" alt="Dewas SHG women left labour"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>देवास जिले के SHG से जुड़ी महिला जो मजदूरी छोड़ अब खुद मालकिन बन गई  (इमेज क्रेडिट-रविवार विचार)</em></span> </p>
<p>मजदूरों के भविष्य सुरक्षित करने के लिए सरकारों ने कई योजनाएं बनाई. उनका फायदा पहुंचाने का प्रयास भी किया.अलग श्रम विभाग खोले. बावजूद अलग-अलग श्रेणी और असंगठित मजदूरों की संख्या अधिक होने से मजदूरों तक  इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका. आइए हम कुछ योजनाओं की बात करते हैं. केंद्र सरकार ने नरेगा जो बाद में मनरेगा योजना के नाम से हो गई ,को लागू किया. इस योजना में फैलाव अधिक होने से जॉब कार्ड में विसंगतियां सामने आ गई. मजदूरों की सूची में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और उनके परिवार के नाम शामिल हो गए. जॉब कार्ड बन गए. यह सिर्फ एक उदाहरण है. उधर इससे से भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण  इस जॉब कार्ड और जॉब ग्यारंटी योजना में मृतकों के नाम तक नाम ही शामिल  ही नहीं किए बल्कि उनके खातों से पैसा तक निकाल लिया गया. विसंगति यहीं खत्म नहीं हुई. मजदूरों के हक़ की जगह कई पंचायतों में मशीनों से नियम के विरुद्ध काम करवा कर ख़ास लोगों को लाभ पहुंचाया. यहां तक कि महिला मजदूरों को सौ-पचास रुपए का लालच देकर जॉब कार्ड भी ठेकेदारों ने हजारों  की संख्या में अपने कब्जे में कर लिए. </p>
<p>इन सब विसंगतियों के बाद भी सरकार के प्रयासों में कहीं-कहीं उम्मीद नज़र आती है. हाल के वर्षों में महिलाओं के हित में स्वयं सहायता समूह गठित किए. बाकायदा इनमें महिलाओं को जोड़ा. सरकार ने पूरे प्रदेशों में जिला पंचायत अंतर्गत आजीविका मिशन का स्ट्रक्चर तैयार किया. पिछले डेढ़ दशकों में महिला स्वयं सहायता समूह ने काफी हद तक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया. उन्हें स्वाभिमान से जीना सिखाया. वे परिवार में सहयोगी के तौर पहचाने जाने लगीं हैं. यदि हम महिला स्वयं सहायता समूह के स्ट्रक्चर और कामकाज पर निगाह डालें तो समझ सकते हैं कि इस योजना के पीछे महिला मजदूरों को संगठित कर लाभ देना है. </p>
<p>केवल मप्र में ही लगभग चार लाख महिला समूहों में 60 लाख से ज्यादा श्रमिक महिलाओं को एकजुट कर नए रोजगार से जोड़ दिया गया.वोकल फॉर लोकल आधार पर स्थानीय थीम पर इन महिलाओं को जोड़ा. चाहे डिंडोरी कि महिलाएं गौंडी आर्ट से जुड़ीं हों या महुआ और मोटे अनाज के उत्पादन से जुड़ीं हो या देवास में मजूदर महिलाओं को जमीन मुहैया कर मालिक बनाया हो या नीमच में टेक्स सखियों ने नल-जल योजना से प्रबंधन सीखा हो या बुरहानपुर में मशरूम की खेती तो कभी नल जल योजना में देश में नंबर एक बनाया हो या उज्जैन का मछली पालन तो रतलाम में अचार-पापड़ निर्माण उद्योग हो या उमरिया में टाइगर नेशनल पार्क की लेडी गाइड...ये सब कुछ बानगी है जहां महिलाओं ने देश में खुद की पहचान बनाई. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही क्यों न हों इन आत्मनिर्भर महिलाओं से मिले और हौसला बढ़ाया.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Nbp9mjvwM0P9Rq1ZPjtw.jpeg" alt="labour day"></p>
<p> <span style="font-size: 8pt;"><em>निमाड़ के इलाके में तेज़ दोपहरी में गड्ढे खोदती महिला ,पास में बेखबर बैठा मासूम बच्चा (इमेज क्रेडिट-रविवार विचार )</em></span> </p>
<p>इससे साबित होता है कि यदि महिलाओं की तर्ज पर श्रमिकों को और अधिक संगठित किया जाए और SHG की तरह योजनाओं की मॉनिटरिंग की जाए तो मजदूर दिवस की सार्थता बढ़ जाएगी. आदिवासी इलाकों में आज भी हजारों की संख्या में मजदूर गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन कर जाते हैं. इनको अपने ही गांव में काम दिलाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह जैसी योजना को लागू करना चाहिए. रविवार विचार ऐसी सफल होती योजनाओं को समाज के सामने लाता रहेगा, जिसमें मजदूरों को आर्थिक आत्मनिर्भर और स्वाभिमान की कहानी छुपी हो. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 01 May 2023 17:01:01 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-have-the-power-to-make-women-financially-independent]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1pLMU4H0iodc3G8VxXuv.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1pLMU4H0iodc3G8VxXuv.jpg"/></item><item><title><![CDATA[भैया के घर बहनों का स्वागत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-singh-chauhan-met-shg-women-at-his-house</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg"><p> <br>स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के काम को आज देशभर में सराहा जा रहा है. प्रदेश में 39 हज़ार 258 ग्राम संगठन और 1 हज़ार 350 संकुल संगठन हैं. 4 लाख 33 हज़ार समूहों से जुड़कर 51 लाख 63 हज़ार महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं और प्रदेश के विकास में कर रही है योगदान. सरकार भी इन महिलाओं का साथ दे रही है, उनकी ज़रूरतों को समझ उन्हें पूरा करने का प्रयास कर रह हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से  सीएम हाउस में मिले. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/IHPKc6lFfDGKBuQBFEK2.jpg" alt="CM Shivraj Singh Chauhan met SHG women at his house"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Ravivar vichar</span></p>
<p>समूह की महिलाएं सरकारी नीतियों में भी समर्थन करती हैं और प्रशासन की योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करवाती हैं. कोविड-19 में मास्क बनाने से लेकर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगे बनाने तक इन महिलाओं ने सरकार का साथ दिया है. घरेलु उत्पाद बनाने का काम भी ये महिलाएं कर रही हैं जिसके लिए कम ब्याज पर छोटा लोन और सहायता राशि भी दी जा रही है. मुख्यमंत्री शिवराज ने महिलाओं से बात कर उनकी चुनौतियों को समझा और उन्हें लगातार आगे बढ़ने की लिए प्रेरित किया. </p>
<p>महात्मा ज्योतिबा फुले के जन्मदिन पर उनके और सावित्रीबाई फुले के विचारों को साझा कर ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को SHG से जुड़ने की लिए प्रेरित किया ताकि वो सशक्त बन अपने गांवों और शहरों को सशक्त कर सकें. संकुलों की अध्यक्षों ने अपने अनुभव और उपलब्धियां साझा किये. मुख्यमंत्री ने दीदियों से लखपति दीदियों की संख्या पूछी, लाड़ली बहना योजना की प्रगति के बारे में महिलाओं से जाना, उनके फॉर्म्स जमा हुए या नहीं हुए, इस योजना का उनमे कितना उत्साह है उस पर भी बात की. ये महिलाएं अपने समुदायों में महिलाओ को फॉर्म भरने में मदद करेंगी. योजना की सही जानकारी इन महिलाओं के ज़रिये समुदायों तक पहुंचेगी. आर्थिक सशक्तिकरण को पारिवारिक,सामाजिक, और राजनैतिक विकास का आधार बताया. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/utHw9dOOKHzB6Y2TyUuR.jpg" alt="CM Shivraj Singh Chauhan met SHG women at his house"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Ravivar vichar</span></p>
<p>मुख्यमंत्री द्वारा केटलॉग का विमोचन भी किया गया जिसमे SHG द्वारा निर्मित उत्पादों की सूची है. मुख्यमंत्री ने संगठित रहने पर ज़ोर दिया और बताया कि आगे चलकर लाड़ली बहना सेना भी बनाई जाएगी. ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को समूहों से जोड़ने पर और समाज की कुरीतिओं को ख़त्म करने के लिए आवाज़ उठाने की लिए प्रोत्साहित किया. सबके साथ से विकास का सपना साकार हो सकता है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 12 Apr 2023 16:16:28 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-singh-chauhan-met-shg-women-at-his-house]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg"/></item><item><title><![CDATA[CM हाउस में SHG के संकुल संघठनो की बहनों का स्वागत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/cm-shivraj-singh-chouhan-welcomed-shg-women-at-his-house</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg"><p><iframe style="width: 1121px; height: 629px;" src="https://www.youtube.com/embed/Ky4ye0K1WD8" width="1121" height="629" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के काम को आज देशभर में सराहा जा रहा है. प्रदेश में 39 हज़ार 258 ग्राम संगठन और 1 हज़ार 350 संकुल संगठन हैं. 4 लाख 33 हज़ार समूहों से जुड़कर 51 लाख 63 हज़ार महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं और प्रदेश के विकास में कर रही है योगदान. सरकार भी इन महिलाओं का साथ दे रही है, उनकी ज़रूरतों को समझ उन्हें पूरा करने का प्रयास कर रह हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से  सीएम हाउस में मिले. </p>
<p>समूह की महिलाएं सरकारी नीतियों में भी समर्थन करती हैं और प्रशासन की योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करवाती हैं. कोविड-19 में मास्क बनाने से लेकर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगे बनाने तक इन महिलाओं ने सरकार का साथ दिया है. घरेलु उत्पाद बनाने का काम भी ये महिलाएं कर रही हैं जिसके लिए कम ब्याज पर छोटा लोन और सहायता राशि भी दी जा रही है. मुख्यमंत्री शिवराज ने महिलाओं से बात कर उनकी चुनौतियों को समझा और उन्हें लगातार आगे बढ़ने की लिए प्रेरित किया. </p>
<p>महात्मा ज्योतिबा फुले के जन्मदिन पर उनके और सावित्रीबाई फुले के विचारों को साझा कर ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को SHG से जुड़ने की लिए प्रेरिक किया ताकि वो सशक्त बन अपने गांवों और शहरों को सशक्त कर सकें. संकुलों की अध्यक्षों ने अपने अनुभव और उपलब्धियां साझा किये. मुख्यमंत्री ने दीदियों से लखपति दीदियों की संख्या पूछी, लाड़ली बहना योजना की प्रगति के बारे में महिलाओं से जाना, उनके फॉर्म्स जमा हुए या नहीं हुए, इस योजना का उनमे कितना उत्साह है उस पर भी बात की. ये महिलाएं अपने समुदायों में महिलाओ को फॉर्म भरने में मदद करेंगी. योजना की सही जानकारी इन महिलाओं के ज़रिये समुदायों तक पहुंचेगी. आर्थिक सशक्तिकरण को पारिवारिक,सामाजिक, और राजनैतिक विकास का आधार बताया. </p>
<p>मुख्यमंत्री द्वारा केटलॉग का विमोचन भी किया गया जिसमे SHG द्वारा निर्मित उत्पादों की सूची है. मुख्यमंत्री ने संगठित रहने पर ज़ोर दिया और बताया कि आगे चलकर लाड़ली बहना सेना भी बनाई जाएगी. ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को समूहों से जोड़ने पर और समाज की कुरीतिओं को ख़त्म करने के लिए आवाज़ उठाने की लिए प्रोत्साहित किया. सबके साथ से विकास का सपना साकार हो सकता है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 11 Apr 2023 18:54:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/cm-shivraj-singh-chouhan-welcomed-shg-women-at-his-house]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QQhrzp9vo0juuczShYYl.jpg"/></item><item><title><![CDATA[अर्थसंगिनी के संग फायनेंशिअल लिट्रेसी के रंग ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/aadhi-aabadi/shanu-mehta-working-towards-financial-literacy-of-rural-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG"><p dir="ltr">डावोस की वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिआ के बड़े लीडर्स से मिलना हो या लिटरेचर फेस्ट के मंच पर बोलना, वो हर जगह मौजूद है. महिलाओं की लीडरशिप और आर्थिक आज़ादी पर आर्टिकल लिखना हो या टीवी स्टूडियो में डिबेट करना, वो वहां भी मौजूद है. लेकिन सबसे पहले वो मौजूद है जहां सबसे ज़्यादा ज़रुरत है यानि ज़मीन पर. वो है शानू मेहता, जो बातों से एक कदम आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाई. </p>
<p dir="ltr">सोचना और अपनी सोच को अमल में लाना दो अलग अलग बातें है. अर्थसंगिनी के ज़रिये शानू ने  के कौशल विकास ( स्किल डेवेलपमेंट ) और वित्तीय साक्षरता ( फायनेंशिअल लिट्रेसी ) को ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचाया. अर्थसंगिनी यानि आर्थिक सहेली , एक ऐसी संस्था जो सालों से गाँव की महिलाओं के लिए उनके बीच रहकर काम कर रही है.  शानू बताती हैं - "जब भी गांवों में महिलाओं से बात होती तो उनकी काबिलियत महसूस होती लेकिन वह छुपी हुई रहती." महिलाओं में पैसे कमाने का और अपने पैरों पर खड़े होने का जज़्बा तो था लेकिन कहीं दबा कुचला था. शानू ने इसको पहचाना और इन महिलाओं का साथ देने का सोचा. उन्होंने महसूस किया कि ये महिलाएं अपने साथ परिवार को भी बेहतर ज़िन्दगी दे सकती हैं. धीरे-धीरे महिलाओं की रूचि समझकर उन्हें अगरबत्ती, कपड़े, सैनेटरी पेड, खिलौने बनाने की ट्रेनिंग दी जो उनका स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम बना.  इसको एक कदम आगे ले जाते हुए रुपये-पैसों की बचत के बारे में भी बताया जो कि फायनेंशिअल लिट्रेसी केम्प के ज़रिये हुआ. आज, सालों की कोशिशों के बाद पांच हज़ार से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण मिल चुका है और वो अपने पैरों पर खड़ी है. कुछ महिलाओं के बनाये हुए उत्पाद विदेश में भी बिक रहे हैं.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/IGLzYKum0mQvaxdeApFX.PNG" alt="shanu mehta"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">शानू ने ना केवल अर्थसंगिनी के ज़रिये काम किये बल्कि अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में भी अपने जुनून को सम्मिलित किया. आज उनकी खुद की आइटी कंपनी में करीब 200 कर्मचारियों में से 90 % महिलाएं हैं. इसी के साथ शानू ने सांस्कृतिक आयामों में भी दखलंदाज़ी रखी और इंदौर में नाइट कल्चर का आइडिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिया. अर्थसंगिनी ने ग्रामीण क्षेत्र से बाहर भी कई काम किये जैसे महिला कांस्टेबलों को फाइनेंशियल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/I4Cl5U69MuQTGLWoa83U.jpg" alt="shanu mehta"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">शानू, आईआईएम इंदौर के इंस्टीट्यूशनल सोशल रेस्पॉनसिबिलिटी के साथ मिलकर गांवों की महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी दे रही हैं. अर्थसंगिनी की महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले सैनेटरी पैड पिछ़डे गांवों और कस्बों की ज़रूरतमंद महिलाओं और छात्राओं को दिए जा रहे हैं. अर्थसंगिनी संस्थान ने कुछ जगहों पर सैनेटरी पैड बनाने की मशीन, सिलाई मशीन, बॉल पैन बनाने का सामान और अन्य मशीनरी उपलब्ध कराई.</p>
<p dir="ltr">शानू मेहता की इस पहल ने साबित किया कि महिलाओं में मेहनत और योग्यता की कमी नहीं, बस थोड़ा सा साथ देकर उनकी आर्थिक आज़ादी की चुनौती को दूर किया जा सकता है. अब हमें बातों से ऊपर उठकर, ज़मीनी स्तर पर काम कर बदलाव लाने की ज़रुरत है ताकि महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की क्रांति को बढ़ावा मिल सके.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 13 Mar 2023 14:04:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/aadhi-aabadi/shanu-mehta-working-towards-financial-literacy-of-rural-women]]></guid><category><![CDATA[आधी आबादी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG"/></item><item><title><![CDATA[अचार वाली दीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"><p dir="ltr">रतलाम जिले का गांव धामनोद में लगे डोम में पैर रखने की जगह तक नहीं. मंच पर मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह खड़े हैं. उनके भाषण के पहले संचालक ने नाम पुकारा सविता देवी चौहान को अधिकारी सम्मान से मंच पर लाए. भीड़ में खड़ी सविता अपनी तीन अन्य साथियों के साथ मंच पहुंची. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कहते हैं - आप ही हो न अचार वाली दीदी. सविता ने कहा - जी सर.  इतना कहते ही उसने अपने हाथों में पकड़ी अचार की पैक बॉटल सीएम को दे दी. आप को और अवसर और मार्केट के तरीके सिखाए जाएंगे. अधिकारियों को कह दिया है. धीरे -धीरे  वह मंच से उतर गयी. वह अभी तक कल्पना नहीं कर पा रही थी ,उसने अपनी साथियों को गले लगा कर वहीं हग कर लिया. तीन साल पहले तक खेतों में दूसरे के यहां मजदूरी करने और अपनी मेहनत के पैसे मांगने के लिए गिड़गिड़ाने वाली सविता मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने खड़ी थी. पूरे स्वाभिमान के साथ. उसकी प्रशंसा के पुल बांधे जा रहे थे. अब वह गांव में अचार वाली दीदी के नाम से पहचानी जाती है. </p>
<p dir="ltr">कलोरी खुर्द गांव की सविता चौहान  की कहानी बड़ी दिलचस्प है. सविता और उसके पति हीरालाल चौहान खेत मजदूरी के लिए जाते. सविता कहती है -"मेरा छोटा बेटा गोदी में था. मजदूरी कर पेट भरना ही किस्मत में था. मैं  चिलचिलाती धूप में बच्चे को पेड़ के नीचे झोली बांध कर सुलाती थी. बड़ा बेटा घर पर छोड़ कर आती. " ये कोई एक दिन की बात नहीं थी. इतनी मेहनत और पसीना हर रोज बहाने के बाद भी घर चलना मुश्किल हो रहा था. पति -पत्नी समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इस ज़िंदगी कि मुश्किलों से कैसे निजात पाई जाए.</p>
<p dir="ltr">और एक दिन कलोरी खुर्द में जिला पंचायत की टीम पहुंची. ऐसे ही मजदूरों और कुछ वहां मौजूद महिलाओं को पंचायत सदस्य सरकारी स्कीमों को समझा रहे थे. अपने पैरों पर कैसे खड़ा हुआ जाए ,कैसे स्वाभिमान की ज़िंदगी जी सकें,यह सब शामिल था. शाम हो रही थी महिलाएं मजदूरी से लौट रही थी. उनमें सविता भी शामिल थी. पंचायत में चहल-पहल देख वह भी रुकी. खुद का रोजगार और कमाई की बात सुनते ही वहीं बैठ गई. हालांकि सरकारी स्कीम का सुनकर महिलाओं के गले बात पूरी तरह नहीं उतरी. सविता ने वहां बैठे अधिकारियों से कहा -"साब ,परेशान तो बहुत हैं. पर हमारे पास पैसा है न कोई धंधा शुरू करने का आइडिया." अधिकारियों के समझाने पर सविता राजी  हो गई. समूह बनाया. नाम रखा जय माता दी महिला स्वसहायता  समूह. अध्यक्ष बनी पवन कुमारी.</p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती है- "सप्ताह में मिलने वाली मजदूरी के चंद रुपए भी गिनने और हिसाब करना नहीं आता था. समूह में 13 सदस्यों के साथ सब सीखा." अब थी रोजगार शुरू करने की बार. आजीविका मिशन के सुझाव और SHG ने  जीवन बदल दिया. अचार बनाने और पैकिंग के लिए मिशन के अधिकारी चार सदस्यों में शामू बाई ,अनुषा ,धापू बाई सहित सविता को मंदसौर ले गए जहां अचार बनाने के साथ कई सावधानियां सिखाई. जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने बताया कि इन महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण के लिए मंदसौर ले गए ,जहां विशेषज्ञों ने इन्हें तैयार किया. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3ee3TGUXt6D1ppwuuJra.jpeg" alt="Ratlam aachar wali didi ">    </p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती हैं -"वह अपनी साथियों के साथ थोक में केरियां खरीद कर लाईं.अचार का मसाला और  पैकेजिंग के लिए  शीशियां और सिल्वर क्वाईन भी सस्ते दामों पर इंदौर से मंगाए,जिससे मुनाफा ज्यादा मिल सके."आजीविका नाम से ये अचार स्टोर और हाट बाजार में बेच रहें हैं.सविता आगे कहती है -" पहले खेत मालिकों से कर्ज लेना पड़ता था. अब बेहतर जिंदगी जी रही है. समूह का लोन भी वह समय पर उतार चुके हैं.पति भी मजदूरी छोड़ अचार के प्रचार और सप्लाई में सहयोग करने लगे.अब उन्हें दस से 15 हजार रुपए की कमाई हो जाती है.अचार दो सौ किलो रुपए बिक रहा है.सीज़न खत्म होने पर इंदौर कोल्ड स्टोर से केरी मंगा ली. </p>
<p dir="ltr">रतलाम कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि  "जिले में आजीविका मिशन कि योजना दूसरों जिले की तुलना में देरी से शुरू हुई. बावजूद महिलाओं की मेहनत ने समूह बना कर देश में अलग पहचान बना ली. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां के समूहों के उत्पादों की सराहना की है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 02 Mar 2023 17:20:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"/></item></channel></rss>