<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ मुरैना]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/murainaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/murainaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 30 May 2023 17:08:56 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[मुरैना में शहद की मिठास ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/morena-shgs-gaining-financial-freedom-through-honey-production</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"><p><iframe style="width: 828px; height: 464px;" src="https://www.youtube.com/embed/baVsY0atlp8" width="828" height="464" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>मुरैना में आजीविका मिशन (Ajeevika Mission), जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रूचि ले रहे. इस जिले में लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन(Honey Production) से जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं भी अब इस कारोबार से जुड़ कर अलग-अलग राज्यों में शहद बेच रहीं है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 30 May 2023 17:08:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/morena-shgs-gaining-financial-freedom-through-honey-production]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मुरैना में घुल रही शहद की मिठास ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"><p>मुरैना जिला यानि ख़ास स्वाद वाली गजक की पहचान. लेकिन समय के साथ मुरैना में शहद की मिठास भी घुल रही है. शहद उत्पादन को लेकर मुरैना एक नई पहचान बना रहा है. जिले आजीविका मिशन से जुड़े कई स्वयं सहायता समूह (Self Help Group- SHG) की महिलाएं भी शहद उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गईं. इसके अलावा शहद उत्पादन से कई किसान और शहद उत्पादक जुड़े, जिसमें उनके परिवार की महिलाएं प्रमुख रूप से भूमिका निभा रही. </p>
<p>मुरैना में आजीविका मिशन, जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रूचि ले रहे. इस जिले में लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन (Honey Production) से जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं भी अब इस कारोबार से जुड़ कर अलग-अलग राज्यों में शहद बेच रहीं है. </p>
<p>धूरकुडा गांव में मां संतोषी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रेखा धाकड़ कहती है - "मैंने 2018 में समूह का गठन किया. मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली. अभी मेरे पास 300 बॉक्स की कॉलोनी है.पिछले साल हमने 7 लाख रुपए का कारोबार किया था. पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट जल्दी शुरू होना चहिए, जिससे ज्यादा आदिवासी महिलाओं को काम मिल सके." गांव मिरघान के बजरंग स्वयं सहायता समूह की सदस्य माया देवी कुशवाह कहती है -" पिछले साल मेरे पास 700 बॉक्स थे. इस बार 550 बॉक्स हैं. अच्छे उत्पादन के लिए आगरा जिले के जंगल में कॉलोनी लगाई है. मैं चाहती हूं कि शहद के भाव अच्छे मिले. पिछली बार 150 रुपए किलो तक शहद के भाव थे,जबकि इस बार घट कर 70 रुपए किलो के आसपास आ गए."       <img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7D09G2yscxqoaFRnWWRY.jpeg" alt="bee day ">  </p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में SHG की महिलाओं ने इसे खास कारोबार बना लिया.अभी यहां रिकॉर्ड 35 हजार क्विंटल शहद का उत्पादन मधुमक्खी पालकों ने कर लिया.एक लाख कॉलोनी (बॉक्स का समूह जिसमें मधु मक्खी रहती हैं ) में यह उत्पादन लिया जा रहा है. आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश तोमर कहते हैं -" महिलाओं ने शहद उत्पादन में खास रूचि दिखाई. लगभग 500 महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ीं हैं,जबकि सैकड़ों महिलाएं परिवार के साथ भी इस व्यवसाय से जुड़ गईं. महिलाओं ने कई टन शहद का उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया.जिले में पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है. "        </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3YcEv7BV3K2CFap5eZSO.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले सरसों, बरशिन (मवेशियों का चारा), धनिया, अजवाइन आदि का उत्पादन अधिक होने से फ्लॉवरिंग वातावरण मिल जाता है. कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर कीट वैज्ञानिक और हनी बी विशेषज्ञ डॉ. योगेश यादव कहते हैं - " मुरैना में शहद उत्पादन को लेकर मधु मक्खियों को अनुकूल माहौल मिलता है. मुझे ख़ुशी है कि छह हजार से ज्यादा लोग खास कर महिलाएं भी शहद उत्पादन से जुड़ी हुईं है. यहां लगातार उत्पादन बढ़ रहा है. इसकी शुद्धता बढ़ाने के लिए जिले में तीन प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है. यह प्लांट जौरा में दो और पहाड़गढ़ में एक हैं. सरसों फ्लॉवरिंग अधिक होने से यह ख़ास पसंद बनी हुई है. मुरैना में ही एक लाख 70 हजार हैक्टेयर में सरसों की फसल लगाई जाती है.एक बॉक्स में रानी और 300 नर  मधु मक्खी केअलावा लगभग 60 हजार श्रमिक मधु मक्खियां रहती हैं जो फूलों का रस इकठ्ठा करती हैं. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UqKXBFFXbZTW9iqndw6Z.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी मधुमक्खी की कॉलोनी, पास में लगे सरसों के खेत (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>मधुमक्खी पालन को लेकर कई सावधानी रखना होती है. इसकी खास ट्रेनिंग के बाद ही बॉक्स दिए जाते हैं. वैज्ञानिक अशोक यादव आगे बताते हैं- "हमें भ्रम होता है कि शहद जम जाने का मतलब अशुद्ध है. शहद का प्रकृतिक नेचर है जमना. इसमें नेचुरल ग्लूकोज़ की मात्रा ज्यादा होती है. प्रोसेसिंग यूनिट से शहद का मॉइश्चर और अशुद्धि भी हट जाती है. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lzSR46tt4ZN5nGSl7xDl.jpeg" alt="bee day "></p>
<p> <em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी प्रोसेसिंग यूनिट को समझाते हुए अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में जिला प्रशासन भी महिलाओं को इस कारोबार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इच्छित गढ़पाले कहते हैं - " जिले में मधु मक्खी पालन और कारोबार में महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. मुरैना जिला शहद उत्पादन को लेकर नई पहचान बना चुका है. अच्छे भाव मिले यह भी कोशिश की जा रही है. "  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7txQigbcbnGKrRSyvPkP.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</em></span></p>
<p>इस बार शहद उत्पादन अधिक होने और भाव काम मिलने की वजह से उत्पादकों ने स्टॉक अपने पास ही रख लिया है.समूह की महिलाओं के अलावा किसानों की मांग है कि शहद के अच्छे भाव दिलवाने के लिए सरकार प्रयास करे. ग्वालियर -चंबल संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह कहते हैं -" मुरैना के किसानों खास कर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने शहद उत्पादन में नया मुकाम  हासिल किया है. विशेषज्ञों से और ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी. आने वाल दिनों कई देशों में एक्सपोर्ट देखने को मिलेगा." </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 23 May 2023 11:17:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मुरैना कालीन से घर की शान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-in-morena-started-carpet-manufacturing-business</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8AXG5BoQxFL2jI55pjs5.jpg"><p>पूरे देश में गज़क की मिठास और अनूठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध मुरैना में यहां की महिलाएं अब मजदूर नहीं बल्कि मालकिन के दर्जे से कालीन बनाने की  यूनिट संभालेगी. घर और बंगलों की शान-ओ-शौकत बढ़ाने के उपयोग में लाए जाने वाले गलीचे या कालीन के लिए अब आपको पंजाब या दक्षिण भारत का मुंह नहीं देखना पड़ेगा. अभी तक मजदूरी कर रही महिलाओं ने यह जिम्मा संभाला. अब यही महिलाएं मजदूरी छोड़ कालीन बनाएंगी. एक सप्ताह के अंदर ही 300 से से ज्यादा महिलाओं ने इसकी तैयारी कर ली. बीस से ज्यादा स्वयं सहायता समूह यह का पंजीयन भी करा लिया गया है. आने वाले दिनों में मुरैना के गलीचे या कालीन घरों की सजावट का हिस्सा होंगें.जिला पंचायत अंतर्गत आजीविका मिशन के अधिकारी इस यूनिट को शुरू करने में जुटे हुए हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jpl5xtqH7N8B6AKQxdS3.jpg" alt="murena kaleen"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>कालीन बनाती महिला कारीगर (Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>अलापुर गांव के हाजी अली स्वयं सहायता समूह की रेशमा कहती हैं -"<em> मैं तो बरसों से मजदूरी कर रहीं हूं. केवल डेढ़ सौ रुपए रोज मिलते हैं. समूह के साथ मिलकर हमने कालीन बनाने की ट्रेनिंग ली. मैं अपनी सखियों के साथ बहुत मेहनत कर सुंदर कालीन  बनाएंगे. मुझे ख़ुशी है कि आने वाले दिनों में हम मजूदर नहीं मालकिन कहलाएंगे.</em>" ऐसे ही लगभग तीन सौ महिलाओं के चेहरे पर अब खुशियां देखी जा सकती. दूसरे या अली स्वयं सहायता समूह की सोनी दीदी बताती है -" मैंने कभी सोचा नहीं था कि जीवन में कभी मजदूरी छूट भी सकती है. इतना पैसा नहीं मिलता कि घर को अच्छे से पाल सकें. कई घंटे काम करने के बाद भी मजदूरी बहुत कम मिलती.हम ठेकेदारी प्रथा के चुंगल से मुक्त हो जाएंगे.  घुर्रा गांव के ख्वाजा गरीब नबाब स्वयं सहायता समूह की अकीला कहती है -"अब हमारे बनाए कालीन सब जगह जाएंगे.मेहनत का फल मिलेगा. " </p>
<p>आजीविका मिशन ने इन समूह के सदस्यों की मदद की. जौरा ब्लॉक प्रबंधक द्वारिका प्रसाद धाकड़ कहते हैं -" <em>समूह की सदस्य दीदियों की काउंसलिंग की गई. उनको कालीन बनाने की पहली ट्रेनिंग दे दी गई. अभी और दूसरे समूह को भी इस मिशन में जोड़ा जा रहा है जिससे वे भी आत्मनिर्भर बन सके. शासकीय औपचारिकता पूरी कर ली गई है. जल्दी ही यूनिट शुरू होगी जहां महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भर बन जाएंगी.</em>" जिले में अभी तक ये महिलाएं अन्य ठेकेदारों के यहां मजदूरी करती हैं और अपना जीवन बसर कर रहीं हैं. आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश तोमर कहते हैं -" यह जिले में नया प्रयास है. इन महिलाओं को एकजुट कर "नया सवेरा कालीन उत्पादक संगठन " बनवाया गया. इसका रजिस्ट्रेशन करवा कर बाकायदा नई पहचान देने के प्रयास किए गए हैं. हम और समूह की महिलाओं को भी ठेकेदारी प्रथा और मजूदरी से निकाल कर आर्थिक मजबूत बनाएंगे."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/VHcifVdGHvwfbMQewMO1.jpg" alt="murena kaleen"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>इस तरह कालीन बनाए जाएंगे (Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>मुरैना जिले के कई इलाकों में कालीन और फर्श बनाने का कम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. लेकिन इसमें ठेकेदारी प्रथा होने से महिलाओं के आर्थिक तंगहाली और शोषण की शिकायतें मिलती रहीं हैं. इससे मुक्त कराने का बड़ा मिशन जिला प्रशासन ने हाथ में लिया. जिला पंचायत के सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले कहते हैं -"<em>मुरैना में महिलाओं की मेहनत सराहनीय है. यहां आजीविका मिशन से जुड़े समूहों की महिला सदस्यों द्वारा कई तरह के काम किए जा रहें हैं. कालीन बनाने में भी कई महिलाओं में हूनर है.लेकिन ये महिलाएं मजदूरी तक सीमित रह गईं. अब इन्हीं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है. निर्माण के उपयोग में आने वाले कच्चे माल की व्यवस्था भी जाएगी. साथ ही एडवांस ट्रेनिंग दिलवा कर महिलाओं को और अधिक तकनीक बताई जाएगी. यह जिले की बहुत बड़ी उपलब्धि है."</em></p>
<blockquote>
<p>महिलाओं का हौंसला बढ़ाने के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह ने खुद कई गांव का दौरा किया. समूह सदस्य महिलाओं से मिले. उनके कम को समझा. कमिश्नर सिंह कहते हैं -<em>" यह जिले में बहुत बड़ा बदलाव है. यहां की महिलाएं बहुत मेहनती हैं. उनको शासन की योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जाएगा. यहां के बने कालीनों की मार्केटिंग की भी गुर सिखाए जाएंगे."</em></p>
</blockquote>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 28 Apr 2023 14:45:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-in-morena-started-carpet-manufacturing-business]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8AXG5BoQxFL2jI55pjs5.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8AXG5BoQxFL2jI55pjs5.jpg"/></item><item><title><![CDATA[साइबर सिक्योरिटी के बारे में जानेंगी SHG महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-in-morena-learns-about-cyber-security</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7DvD9C4Tfd8KQwHwRryp.jpg"><p dir="ltr">'इंटरनेट'- सबसे बड़ी ज़रूरत बन चूका है यह शब्द, जिसके बिना व्यक्ति का गुज़ारा एक भी दिन नहीं हो पा रहा है. फायदे अनगिनत है, और ज़रूरत भी बहुत है. लेकिन जिस चीज़ के फायदे इतने हो उसके नुक्सान भी बहुत होते है, यह बात इंटरनेट की कहानी पर एकदम सही लागू होती है. टीम बेरनास ली ,जो की इंटरनेट के फाउंडर है उन्होंने जब इस अनोखी चीज़ को बनाया होगा तब उन्होंने इसके नुकसानों के बारे में कुछ नहीं सोचा होगा. इंटरनेट बना था हमारे फायदे के लिए लेकिन आज इससे जुड़ी फ्रॉड की इतनी कहानियां सामने है कि, व्यक्ति डर चूका है. ऐसे में साइबर सिक्योरिटी के बारे में लोगो को सिखाना और जागृत करना, एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी बन चुकी है. मुरैना के अंबाह विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रशिक्षण सत्र रखा गया. प्रशिक्षण सत्र का आयोजन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) डॉ. इच्छा गढ़पाले के मार्गदर्शन में किया गया. </p>
<p dir="ltr">स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कार्यक्रम में खंडवा के लोक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के विशेषज्ञ लोकेंद्र सिंह भदौरिया और निखिल विजयवर्गीय भी मौजूद थे. लोकेन्द्र सिंह भदौरिया ने SHG महिलाओं को समझाया- "अपना वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी के साथ साझा ना करें, खासकर अगर किसी अज्ञात नंबर से फोन आता है. एसएमएस या मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से प्राप्त किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका इस्तेमाल बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए किया जा सकता है." निखिल विजयवर्गीय ने कहा, "किसी को भी वयस्क वेबसाइटों या ऐसी किसी भी वेबसाइट को सर्फ नहीं करना चाहिए जो संदिग्ध या गड़बड़ हो. अपनी ईमेल आईडी और पासवर्ड किसी के साथ साझा ना करें. कार्यक्रम में फिशिंग स्कैम, एटीएम कार्ड से संबंधित जानकारी, वेबसाइट से संबंधित जानकारी और अन्य प्रकार के साइबर अपराधों की जानकारी भी दी गई.</p>
<p dir="ltr">मुरैना में यह प्रयास एक बहुत अच्छी पहल है क्यूंकि आए दिन ऐसे केसेस सामने आ जाते है जहां ऐसा कोई न कोई फ्रॉड होता है. महिलायों के साथ यह इसीलिए बहुत होता है क्युकि वे इस प्रकार के बैंक-सम्बंधित काम नहीं करतीं. लेकिन यह जानकारी होना बहुत आवश्यक है. देश के हर व्यक्ति को साइबर सिक्योरिटी के बारे में पता होना चाहिए. भारत सरकार को यह पहल हर गांव-कस्बे में शुरू करनी चाहिए ताकि आज की महिला सही और गलत में फैसला करने में आसानी महसूस करे. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 18 Apr 2023 14:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-in-morena-learns-about-cyber-security]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7DvD9C4Tfd8KQwHwRryp.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7DvD9C4Tfd8KQwHwRryp.jpg"/></item></channel></rss>