<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ नीति आयोग]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/niiti-aayog</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/niiti-aayog" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 12 Jun 2023 16:42:06 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[आंध्र SHGs के बढ़ते कदम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/andhra-pradesh-chief-minister-ys-jagan-mohan-reddy-takes-steps-towards-the-development-of-women-in-their-state</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UhvPaEhgSjlqXfDo3q3d.jpg"><p dir="ltr"><strong>आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाय एस जगन मोहन रेड्डी</strong> ने नीति आयोग (NITI Aayog) <strong>गवर्निंग काउंसिल के सत्र</strong> को संबोधित करते हुए महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया. <strong>आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार</strong> महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group) को ब्याज मुक्त बैंक ऋण की व्यवस्था कर रही है. उन्होंने कहा- "<em>केंद्र और सभी राज्य सरकारों को एक प्रगतिशील सोच के साथ यह पहचाना जाना ज़रूरी है कि किन समूहों को आत्मनिर्भर बनाकर आगे ले जाया जाए. सभी राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए और प्रगति हासिल करने के लिए एकजुट होना चाहिए क्योंकि देश और राज्यों का कल्याण आपस में जुड़ा हुआ है.</em>"</p>
<p dir="ltr">आंध्रप्रदेश सरकार ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ <strong>SHG को ट्रेनिंग</strong> देकर महिला सशक्तिकरण की तरफ कदम बढ़ाएं है. साथ ही आसरा और जीरो इंटरेस्ट लोन के ज़रिये कई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज उद्यमी बन चुकी है. 'दिशा एप' भी अनेक SHGs के लिए आसानी लाया है. राज्य सरकार ने अकुशल विकास (Skill Development) विश्वविद्यालय की भी शुरुआत की है जिससे महिलाओं को मदद मिलेगी.  </p>
<p dir="ltr">फैमिली डॉक्टर अभियान के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को महिलाओं के ही ज़रिए चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही है. इसमें Self Help Groups की भूमिका बहुत अहम है. 10,000 से ज़्यादा गाँव में चल रहा यह कार्यक्रम पब्लिक हेल्थ के मामले में आंध्र को ऊँचे स्तर पर ले जायेगा. इस तरह की पहल देश के हर राज्य में शुरू होनी चाहिए. महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ प्रदेश का विकास भी इन पहलों के द्वारा निश्चित है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 12 Jun 2023 16:42:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/andhra-pradesh-chief-minister-ys-jagan-mohan-reddy-takes-steps-towards-the-development-of-women-in-their-state]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UhvPaEhgSjlqXfDo3q3d.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UhvPaEhgSjlqXfDo3q3d.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सबसे बढ़िया, छत्तीसगढ़िया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/new-dimensions-of-women-empowerment-in-chhattisgarh-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uRv1lkDE1PNKMSWuzDw4.jpg"><p dir="ltr">महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) देश के आगे बढ़ने का पक्का रास्ता है. यह तय है कि जिस दिन हर महिला पूरी तरह से अपने पैरो पर खड़ी हो गयी उस दिन विकास निश्चित है. महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक, और पारिवारिक मज़बूती उनका भविष्य उज्जवल करेगी. बस इसी सोच के साथ Chhattisgarh government ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके स्वावलंबन की नीति अपनाई है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) की पहल पर महिलाओं की रचनात्मक क्षमता को बढ़ाने के साथ उनकी सृजन क्षमता को स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़ा गया है. महिलाओं की व्यक्तिगत, सामाजिक, और आर्थिक स्थिति से जुड़ा यह विषय उनके लिए विकास के नयी परिभाषा बनेगा. </p>
<p dir="ltr">नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी वर्ष 2020-21 की India Index Report के अनुसार Gender Equality में छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर था. कुपोषण और एनीमिया से लड़ाई में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली. छत्तीसगढ़ में शुरू हुए 'मुख्यमंत्री सुपाषण अभियान' (Chief Minister's Goodwill Campaign) से अब तक 50 लाख महिलाएं एनीमिया मुक्त हो चुकी हैं. एनीमिया मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बच्चों, किशोरों, गर्भवती तथा शिशुवती महिलाओं को IFA (Iron Folic Acid) सप्लीमेंट्स उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है. छत्तीसगढ़ में महिलाओं की प्रगति के लिए अपनाई गई नीतियों के वजह से ही वनोपज के कारोबार से 50 हजार से ज़्यादा महिलाएं जुड़कर राज्य की आर्थिक उन्नति में अपना योगदान दे रहीं हैं. वहीं जिला खनिज न्यास निधि बोर्ड में ग्रामीण महिलाएं, ग्राम सभा सदस्यों के रूप में खुद के लिए नीतियां भी तैयार कर रही हैं. प्रदेश में करीब 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्क शुरू किए गए, जहां महिलाओं को रोजगार और आय मिल रही है. महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रिया से जोड़ने लगभग चार हजार बहनें बीसी सखी के रूप में चलते-फिरते बैंक के रूप में बैंकिंग सुविधाएं दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचा रही हैं. 'छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान' से करीब 27 लाख गरीब परिवारों की महिलाएं 02 लाख 54 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं. 'गोधन न्याय योजना' के तहत गांव-गांव में बनाए गए गौठानों में लगभग 45 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है. बस्तर के आदिवासी जिले दंतेवाड़ा की डेनेक्स गारमेंट फैक्टरी में काम कर रही महिलाओं ने देश-विदेश में डेनेक्स ब्रांड को लोकप्रिय बनाया है. </p>
<p dir="ltr">महिला Self Help Groups को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से समूह द्वारा लिए गए पुराने 12 करोड़ रूपये के ऋण माफ कर दिये हैं. साथ ही ऋण वापस लौटने की सीमा को भी दो से चार गुना कर दिया. महिला कोष द्वारा दिए जाने वाले ऋण सीमा में भी दोगुनी वृद्धि की गई है. वर्ष 2023-24 में महिला कोष के लिए 25 करोड़ रूपए का वार्षिक बजट उपलब्ध कराया गया है. नई 'कौशल्या समृद्धि योजना' शुरू करने की योजना है, इसमें महिलाओं को व्यवसाय के लिए आसान शर्तों पर 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जाएगा. इसके लिए 25 करोड़ रूपए का बजट अतिरिक्त रूप से स्वीकृत किया है. छत्तीसगढ़ पुरे देश में एक मिसाल के रूप में आगे आया है. महिला सशक्तिकरण पर बिना रुके इतना काम करना सच में सराहनीय है. छत्तीसगढ़ सरकार से पुरे देश को सीखना चाहिए और महिला सशक्तिकरण के लिए  बिना रुके काम करना चाहिए.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 09 May 2023 11:55:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/new-dimensions-of-women-empowerment-in-chhattisgarh-india]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uRv1lkDE1PNKMSWuzDw4.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uRv1lkDE1PNKMSWuzDw4.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मिलेट यूज़ में तेलंगाना सबसे आगे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/telangana-ahead-in-millet-use</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg"><p>देशभर में 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' (International Year of Millet) के तहत मिलेट से बने पकवानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. बाजरा को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों की वजह से बाजरा थाली में वापिस लौट रहा है. तेलंगाना ने बाजरा की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि की है. पूरक पोषण के अलावा लक्षित आबादी समूहों के दैनिक आहार में बाजरा की खपत बढ़ी है. </p>
<p>नीति आयोग की रिपोर्ट ने बताय कि तेलंगाना में बाजरा के उत्पादन, प्रसंस्करण और खपत को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और संगठनों ने कई पहलों की शुरुआत की, जिसकी वजह से बाजरा की खपत बड़ी और आईसीडीएस के तहत बच्चों को परोसे जाने वाले पौष्टिक भोजन  में बाजरा की मात्रा बढ़ी है. इससे लक्ष्य समूह में स्टंटिंग, वेस्टिंग, और एनीमिया को कम करने में योगदान मिला है. यह पहल 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों, उनकी माताओं और समुदाय के सदस्यों को कवर करती है. इसमें जिला प्रशासन, विकाराबाद (2017-19), आदिलाबाद (2019-20) और तकनीकी भागीदार WASSAN (वाटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एंड एक्टिविटीज नेटवर्क) शामिल है. </p>
<p>आईसीडीएस (ICDS) में बाजरा की शुरुआत ने बड़े पैमाने पर खरीद को बढ़ाया है और इस तरह बाजरा के लिए बाजार में भारी मांग पैदा की है. उत्पादन, व्यापार, प्रसंस्करण आदि पर व्यापक रूप से असर पढ़ा और रोज़गार के अवसर बढ़ने लगे. इसने महिला एसएचजी,छोटे उद्यमियों, किसानों और ग्रामीण लघु उद्योगों की संख्या में वृद्धि हुई. कोमाराम भीम जिले के SHG समूह ने अपने ब्रांड के तहत बाजरा का प्रसंस्करण और पैकेजिंग का काम शुरू किया. आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व वाले संयुक्त देयता समूहों (Joint Liability Groups) द्वारा मैनेज ITDA (एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना) क्षेत्रों में आठ खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई, जिसके ज़रिये करीब 80 आदिवासी महिलाएं पोषण उद्यमी बन गई. </p>
<p>सरकार की मिलेट को बढ़ावा देने वाली पहल ने देशभर में ऐसी कई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने में मदद की है. इन महिलाओं ने अपने रोज़गार के ज़रिये सरकार की मिलेट को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. राज्य सरकारों को इन महिलाओं को अपनी पहल में ज़्यादा से ज़्यादा शामिल करना चाहिए, ताकि SHG दीदियों को रोज़गार मिले और इन महिलाओं के ज़रिये इस पहल का फायदा हर तबके तक पहुंच सके.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 04 May 2023 11:42:59 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/telangana-ahead-in-millet-use]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg"/></item></channel></rss>