<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ फाइनेंशियल लिटरेसी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/phaainenshiyl-littresii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/phaainenshiyl-littresii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sun, 02 Apr 2023 23:30:37 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[महिलाओं द्वारा, महिलाओं के लिए, महिलाओं को लोन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/aviom-housing-finance</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ly06lC01EnmmSbKBX86x.jpg"><p dir="ltr">अगर आपने भी घर बनाने के लिए लोन लिया है, तो आपको पता होगा, बैंक के चार चक्कर, दस डॉक्युमेंट्स, और मॉर्गेज के बाद भी लोन मिलेगा या नहीं कन्फर्म नहीं होता. ये कहानी कामकाजी पुरुषों की है, ज़रा सोचिये घर में रह रहीं महिलाएं अगर होम लोन लेने जाएं, तो उन्हें लोन कौन देगा ?  इसका जवाब AVIOM हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है जिसे काजल इल्मी ने शुरू किया. ये कम्पनी ग्रामीण और अर्ध-शहरी, कामकाजी और घर से खुदका काम करने वाली महिलाओं को होम लोन देता है. होम एक्सटेंशन, स्वच्छता सुविधाओं और रेनोवेशन के लिए ₹5 हज़ार से ₹5 लाख तक का ऋण देता है. 2017 से ये कंपनी "महिलाओं द्वारा, महिलाओं के लिए, और महिलाओं को उधार देती है".</p>
<p dir="ltr">AVIOM की 120 से अधिक शाखाएं 14 राज्यों में फ़ैली हुई हैं जिसमे 55 हज़ार से अधिक महिलाओं की एक टीम बनाई, जिन्हें 'शक्ति' का नाम दिया. ये महिलाएं दूसरी महिलाओं को AVIOM से जोड़ कर उन्हें लोन लेने में मदद करती हैं . अब तक, कंपनी 50 हज़ार से अधिक महिलाओं को लोन दे चुकी है. AVIOM में रीपेमेंट आसान किस्तों में होता है जिस वजह से डिफॉल्ट नहीं है और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो सिर्फ 0.5 % है. लगभग 50 हज़ार ग्राहकों में से केवल 30 मामलों में रीपेमेंट देर से मिला पर मिला ज़रूर. अभी तक कोई राइट-ऑफ़ भी नहीं हुआ.</p>
<p dir="ltr">AVIOM हर महीने 4 हज़ार से 5 हज़ार महिला शक्ति वॉलंटियर्स को जोड़ता है. आसान होम लोन देने के साथ-साथ, शक्ति आंदोलन घर पर रहने वाली महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिट्रेसी) की ट्रेनिंग देकर अपना सोर्सिंग एजेंट बना लेते हैं. ये आगे चलकर 'शक्ति शाखाओं' की प्रबंधक बनती हैं जिनकी आय प्रति माह ₹40 हज़ार-50 हज़ार तक बढ़ सकती है. पहले, लोन महिलाओं के लिए होने पर भी पुरुषों के नाम पर लिए जाते थे. AVIOM ने महिलाओं को उन संपत्तियों की सह-मालिक बनने के लिए प्रेरित किया. नियम बनाया कि महिला के नाम पर लोन लेने से वे बड़ा लोन ले सकेंगी. इससे उन महिलाओं को पॉवर मिलता है जो घरेलु हिंसा या घर से बाहर निकाले जाने की धमकियों का सामना करती हैं.  </p>
<p dir="ltr">जिन महिलाओं को लोन दिया जाता है उन्ही महिलाओं को सोर्सिंग एजेंट बनाकर रोज़गार भी मिलता है. इससे उनमे लीडरशिप, पैसों के मैनेजमेंट की समझ, और आत्मविश्वास बढ़ता है. ऐसी पहल और भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को करना चाहिए जिससे हर तबके की महिलाओं का खुद का घर बनाने का सपना पूरा हो सके. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sun, 02 Apr 2023 23:30:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/aviom-housing-finance]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ly06lC01EnmmSbKBX86x.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ly06lC01EnmmSbKBX86x.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की आर्थिक क्रांति का सहयोगी बना HDFC का SLI ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/hdfc-sustainable-livelihood-initiative-gives-financial-literacy-training-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG"><p dir="ltr">आज पूरे भारत में महिलाओं की फाइनेंशियल लिट्रेसी की सुगबुगाहट है. महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की पहली सीढ़ी ही फाइनेंशियल लिट्रेसी है. सरकार, बैंकों और संस्थाओं ने इसके लिए कदम उठाये और SHG का सहारा बनी. बैंकिंग इंस्टीट्यूशन इसको आगे बढ़ा सकते है. HDFC बैंक का नाम आपने सुना होगा. ये बैंक अपने सस्टेनेबल लाइवलीहुड इनिशिएटिव (SLI) डिपार्टमेंट के तहत कई महिलाओं को आर्थिक आज़ादी के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर रहा है.    </p>
<p dir="ltr">ये सस्टेनेबल लाइवलीहुड इनिशिएटिव (SLI) बिना बैंक वाले इलाकों में रह रही महिलाओं तक पहुंचता है. व्यावसायिक प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल ट्रेनिंग), बीमा और क्रेडिट सुविधाएं देकर ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को आर्थिक क्रांति से जोड़ा. ये महिलाएं आसान क्रेडिट पाकर साहूकारों से बचीं और अपना रोज़गार शुरू किया. पैसो की समझ, व्यवसाय का मैनेजमेंट, और बचत के गुण ट्रेनिंग में सीख अपना पैसा खुद कमाया और संभाला. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/AKb9wLoowlULyzP3cmMW.jpg" alt="HDFC CSR"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: HDFC</em></span></p>
<p dir="ltr">नूनमती, असम की अनिमा सिल अपने गांव में कढ़ाई का एक छोटा सा व्यवसाय चला रही थीं. HDFC बैंक ने उन्हें अपने बिज़नेस को बढ़ाने और पैसों का हिसाब किताब करने की ट्रेनिंग दी और स्वसहायता समूह बनाकर कई महिलाओं को उनसे जोड़ा. अब अनिमा सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं है . वे अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा कर पा रही है. ऐसे ही राउरकेला, ओडिशा की सरोजिनी प्रधान ने अपने पति के गुज़र जाने के बाद परिवार को सहारा देने के लिए रोज़गार तलाशा. उन्हें आर्टिफिशल आभूषण बनाने आते थे. SLI की मदद से उन्होंने लोन लेकर आभूषण बनाने का सामान खरीदा और छोटी दुकानों पर बेचना शुरू किया. अब वो अपने पैरों पर खड़ी है और दूसरी महिलाओं के लिए उम्मीद भरा उदाहरण है. </p>
<p dir="ltr">कर्नाटक के शिवपुत्र पूरी तरह से 6 एकड़ ज़मीन की खेती पर निर्भर थे. कम बारिश की वजह से बोरवेल पूरी तरह सूख गया और उम्मीद टूट गई. असफल होकर उन्होंने हैदराबाद जाकर मज़दूरी करने की ठान ली. अपनी किस्मत आज़माते हुए उन्होंने SLI की एक योजना से जुड़ने का सोचा. उनकी भूमि के एक क्रॉस सेक्शन को बांध बनाने के लिए चुना गया और एक वर्मीकम्पोस्टिंग पिट बनाने के लिए सहायता भी मिली. उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट की मदद से अपनी उपज में 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ की बढ़ोतरी की. इससे उन्होंने 4 लाख रुपय कमाए. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ipmsL5NEOdpiz0y1xtgJ.jpg" alt="HDFC CSR"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: HDFC</em></span></p>
<p dir="ltr">SLI ने ज़मीनी स्तर पर काम कर कोने-कोने में फाइनेंशियल लिट्रेसी पहुंचाने के लिए कई अवार्ड जीते जैसे- पोर्टर पुरस्कार 2017, गोल्डन पीकॉक अवार्ड 2018, ET BFSI अवार्ड्स 2018 और राष्ट्रीय सीएसआर पुरस्कार 2019, एशियामनी बेस्ट बैंक अवार्ड्स 2022. 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक 1 करोड़ 48 लाख लोगों को SLI से जोड़ा गया. ऐसी बेहतर की तरफ ले जाती बदलाव की कहानियां हर राज्य में मिल जाएंगी. HDFC SLI की ये पहल लोगों की सिर्फ़ मदद नहीं करती पर उन्हें आत्मनिर्भर बना कर अपनी मदद खुद कर पाने के क़ाबिल बनती है. इसी तरह अगर समाज के प्रतिष्ठित संस्थान महिलाओं की सहायता करेंगे तो आर्थिक क्रांति को देशभर के हर कोने और हर तबके की महिला तक पहुंचाया जा सकता है.   </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 21 Mar 2023 17:23:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/hdfc-sustainable-livelihood-initiative-gives-financial-literacy-training-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG"/></item><item><title><![CDATA[श्रीलंका की SHG मुहीम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/sri-lanka-empowering-women-through-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b3h3E0d6ktCW0hRUJ7UQ.jpg"><p dir="ltr">सिर्फ एक देश आगे नहीं बढ़ता या घटता.  एक बार में पूरा इलाका एक जैसे हालातों से गुज़रता है. चाहे मिडल ईस्ट हो..... साउथ अमेरिका हो.....  ईस्टर्न यूरोप हो....या साउथ ईस्ट एशिया. पूरा इलाका एक जैसी स्थिति में होता है. भारतीय उपमहाद्वीप का भी कुछ ऐसा हाल है. भारत ज़रूर आगे बढ़ गया लेकिन हमारे पड़ोसी देश भी क्या उसी रफ़्तार से आगे बढ़ रहें है ? जब भी समाज में महिलाओं के दर्जे पर प्रश्न उठता है , तो हम टटोलने लगते है हमारे पड़ोसी देशों में क्या हाल है? तो आज बात निकली महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की तो ध्यान श्रीलंका की ओर गया. श्रीलंका दक्षिण में हमारा पड़ोसी देश है. यह द्वीप राष्ट्र अपने विविध लैंडस्केप, हरे-भरे जंगलों, ख़ूबसूरत समुद्र तटों, प्राचीन शहरों और बौद्ध मंदिरों के लिए जाना जाता है. यह एक 3,000 वर्षों से अधिक पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है. </p>
<p dir="ltr">श्रीलंका में महिलाओं ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियाँ हैं जिनका वे सामना करती हैं. श्रीलंका में उच्च महिला साक्षरता दर है और महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और रोज़गार के अवसरों तक पहुंच है. श्रीलंका 1960 में राज्य की महिला प्रमुख का चुनाव करने वाला दुनिया का पहला देश भी था. हालाँकि, अभी भी लिंग आधारित हिंसा, भेदभाव और महिलाओं के लिए असमान वेतन से संबंधित मुद्दे हैं. राजनीति और नेतृत्व के पदों पर भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है. फिर भी, श्रीलंका में इन मुद्दों को हल करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं. </p>
<p dir="ltr">अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, 2021 में श्रीलंका में महिलाओं के लिए श्रम बल की भागीदारी दर 36.4% रही. यह ध्यान देने योग्य है कि श्रीलंका में महिलाओं के लिए श्रम बल की भागीदारी दर हाल के वर्षों में बढ़ रही है, जो लैंगिक समानता और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाती है. अपने पैरों पर खड़े होने के सपने को पूरा करने में स्वसहायता समूह काफ़ी मदद कर रहे है.  SHG जिसे महिला मंडल भी कहा जाता है, उसके ज़रिये महिलाएं छोटे पैमाने पर, समूह बचत और ऋण खाता खोलने की शुरुआत करती हैं. SHG न केवल अपने सदस्यों को एक-दूसरे की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि उन्हें वित्तीय प्रबंधन, टीम मैनेजमेंट और बात-चीत के अपने कौशल को सीखने और लागू करने में भी मदद करते हैं. श्रीलंका में SHG ने महिलाओं को संगठित करने और फाइनेंशियल लिट्रेसी की ज़रुरत को समझने में काफ़ी अच्छा काम किया है.  चलिए, ऐसे ही कुछ SHG के बारे में जानते है और सीखते है.  </p>
<p dir="ltr">सर्वोदय श्रमदान आंदोलन 15,000 से अधिक गांवों के नेटवर्क के साथ श्रीलंका में सबसे बड़े स्वसहायता समूहों में से एक है. समूह की स्थापना 1958 में हुई थी और इसने ग्रामीण समुदायों में सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में मदद की. इसके सबसे सफ़ल कार्यक्रमों में से एक "ग्राम शक्ति" कार्यक्रम है, जिसने महिलाओं और वंचित समूहों को प्रशिक्षण, संसाधन और सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाया है.</p>
<p dir="ltr">इसी तरह महिला विकास संघ का गठन 1981 में किया गया और श्रीलंका में महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह आय सृजन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करता है. इसके सबसे सफल कार्यक्रमों में से एक "ग्राम सुवासरिया" कार्यक्रम है, जो ग्रामीण समुदायों को मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है.</p>
<p dir="ltr">नवजीवन पुनर्वास केंद्र का गठन 1998 में मादक पदार्थों की लत से उबरने वाले व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए किया गया था. केंद्र लोगों को समाज में फिर से जोड़ने में मदद करने के लिए परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य सहायता सेवाएं प्रदान करता है. इसने हजारों लोगों को व्यसन से उबरने और उत्पादक जीवन जीने में मदद की है.</p>
<p dir="ltr">सरला डेवलपमेंट फाउंडेशन की स्थापना 1997 में गरीबी और सामाजिक मुद्दों से प्रभावित बच्चों और परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी. समूह कमजोर समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य सहायता सेवाएं प्रदान करता है. इसके "नेना गुना" कार्यक्रम ने विकलांग बच्चों को शिक्षा और अन्य सहायता सेवाएं प्रदान करके उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद की है.</p>
<p dir="ltr">श्रीलका के स्वसहायता समूहों ने मानों एक ऐसी मुहीम छेड़ दी जो दिन-ब-दिन उनकी आर्थिक स्थिति को सुधार रहा है और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ा रहा है.  ये SHG आगे चलकर महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़ाएगा और उनके बेहतर भविष्य का सपना पूरा कर सकेगा.  </p>
<p><strong id="docs-internal-guid-6d42436a-7fff-3df7-d34e-ba5068ac4836"><br><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 01 Mar 2023 15:19:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/sri-lanka-empowering-women-through-shgs]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b3h3E0d6ktCW0hRUJ7UQ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b3h3E0d6ktCW0hRUJ7UQ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मैनेजमेंट और मार्केटिंग से होगी SHG की मुश्किलें आसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"><p dir="ltr">मार्केटिंग के आस पास ही घूमती है किसी भी व्यवसाय की सफ़लता. महिलाओं को आर्थिक आज़ादी की तरफ़ ले जा रहे हैं तेज़ी से बढ़ते स्वसहायता समूह. इनकी तरक्की टिकी है प्रोडक्ट को आस पास के लोगों से मिली सहमति पर. समूहों को उचित सहायता मिलने पर ये हमारे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों में और ज़्यादा योगदान दे सकेंगे. भारत ने पिछले कुछ दशकों में संचार क्रांति का अनुभव किया. भारत थर्ड वर्ल्ड के देश से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना. इस दौरान देश में बड़े पैमाने पर लोग गांव और छोटे कस्बों से शहरों की ओर आये.</p>
<p dir="ltr">बढ़ती बेरोज़गारी से निपटने के लिए पिछले कुछ दशकों में सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) को लागू किया. जिसके तहत स्वसहायता समूह योजना रोज़गार की तलाश करती महिलाओं के लिए कारगर साबित हुई. आज इन महिलाओं की आर्थिक विकास और बदलाव की कहानियां हर जगह मिल जाएगी.  </p>
<p dir="ltr">पूरे भारत में सपने साकार करते 81 लाख  स्वसहायता समूह कई प्रकार की खाने की चीज़ों, कपड़ों, कला वस्तुओं आदि बना रहे हैं.  इन उत्पादों को बेच ये महिलाएं तभी मुनाफा कमा सकेंगी जब उनके बनाये सामान को मार्केट में जगह मिलेगी. बढ़ते ग्लोबल कॉम्पीटिशन के इस दौर में तकनीकी समझ की कमी और कई सारी व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक वजहों ने SHG को दौड़ में पीछे किया है.   </p>
<p dir="ltr">मार्केट में पकड़ न बना पाने की बड़ी वजह SHG के बनाये सामान की सही पैकेजिंग का न होना है . इससे निपटने के लिए समूहों को अपने प्रोडक्ट का सही नाम व लोगो चुन ने की ट्रेनिंग और सब्सिडाइज़्ड रेट पर मशीन दी जानी चाहिए. साथ ही उन्हें कम दाम में उत्तम कच्चा माल तक पहुंच बढ़ाना चाहिए. फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी, बचत की समझ न होने और सही समय पर लोन न मिलने की वजह से रुकावटें आती है .  RBI  (भारतीय रिजर्व बैंक) और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पर काम करने वाली संस्थाओं को साथ मिलकर फाइनेंशियल लिटरेसी को बढ़ाने का काम करना होगा. महिलाओं को कम इंटरेस्ट रेट पर मिलने वाले माइक्रो फाइनेंस के बारे में बताना होगा. </p>
<p dir="ltr">महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देने वाली योजनाओं में सदस्यों की ट्रैनिंग का प्रावधान भी होना चाहिए ताकि वे टीम मैनेजमेंट, मार्केटिंग, और बचत को समझ सकें. जो स्वसहायता समूह बड़े पैमाने पर उत्पाद तैयार कर रहे है उन्हें तकनीकी जानकारी और मशीन चलाने की शिक्षा देनी होगी और साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों तक पहुंचाना होगा . गुणवत्ता नियंत्रण कर प्रचार प्रसार के आधुनिक तरीके समझाना होंगे. मार्केटिंग या विजिबिलिटी बढ़ाने की बात करें तो सोशल मीडिया को जानना ज़रूरी हो जाता है. </p>
<p dir="ltr">कोरोना महामारी के बाद प्रधानमंत्री द्वारा चलाये गए 'वोकल फॉर लोकल ' अभियान ने देशवासियों का ध्यान छोटे वेंडर्स की तरफ़ खींचा.  इस पहल ने SHG द्वारा बनाये गए उत्पादों की बिक्री को बढ़ाया है. SHGs के बने उत्पादों के लिए लोगों में सहानुभूति और समर्थन की भावना जगी. SHG उत्पादों की खरीद और बिक्री के लिए Amazon, Flipkart, Tata Cliq जैसे ऑनलाइन और मॉल के बड़े विक्रेताओं ने सोचना शुरू किया. इन बड़े विक्रेताओं की मदद से समूह उनके प्रांत की हदें पार कर अपना प्रोडक्ट बेच पाएंगे. मध्य प्रदेश सरकार के आजीविका मार्ट ने भी महिलाओं के प्रोडक्ट को अच्छी पहुंच देने में सहायता की.  इसे और भी प्रदेशों में लागू किया जाना चाहिए. स्वसहायता समूहों को मौसमी बदलावों और मार्केट में उतार-चढ़ाव से भी खतरा होता है. बड़े कॉर्पोरेट अपने सीएसआर एजेंडे के तहत इन SHG को समर्थन देने के लिए आगे आएं .</p>
<p dir="ltr">सरकारी व ग़ैर सरकारी प्रयासों से स्वसहायता समूह लगातार उन्नति कर देश की आर्थिक तरक्की को और आगे बढ़ा सकेंगे. सभी को साथ मिलकर एक दिशा में सोच कायम करनी होगी.  <strong id="docs-internal-guid-9f3fea2f-7fff-4a09-6b28-a944c7198424"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 15:01:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"/></item><item><title><![CDATA[फ़िलीपीन्स के द्वीपों को SHG दे रहे रोज़गार के किनारे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/philipines-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/426gh8RJaz3EYTg5u4XN.jpg"><p>SHG आज न केवल भारत में, पर दुनियाभर के कई देशों की महिलाओं में बदलाव की आस जगा रहें हैं.  इन्ही में से फ़िलीपीन्स एक ऐसा देश है जहां SHG ने सफ़ल बन स्वसहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक आज़ादी का पाठ पढ़ाया.  फ़िलीपीन्स दक्षिण-पूर्व एशिया का एक बड़ा द्वीप समूह है जहां पर ग़रीबी, असमानता, बेरोज़गारी बड़े मुद्दे हैं. भौगोलिक तौर पर एक द्वीप समूह होने के बाद भी इस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था दुनिया की 29वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.</p><p>लगभग 109 मिलियन की आबादी वाले फ़िलीपीन्स ने SHG को ग़रीबी से उभरने और महिलाओं की कमाई का विश्वसनीय ज़रिया माना. सालों की कोशिशों के बाद स्वसहायता समूहों ने महिलाओं तक आसान लोन पहुंचाया. SHG से होने वाली कमाई से फिलिपीनो महिलाओं ने बचत की और उस से मिले लोन को अपने परिवार की शिक्षा - स्वास्थ्य में लगाया. इस लोन की चाबी ने महिलाओं के लिए ख़ुद का काम शुरू करने के कई दरवाज़े खोले.   </p><p>15-25 महिलाओं ने समूह बनाकर फाइनेंशियल लिटरेसी, बचत के सही उपयोग, काम के मैनेजमेंट जैसे विषयों को समझा, नए दोस्त बनाये और सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया. 23 SHG और 2 रजिस्टर्ड फेडरेशंस दो बारंगे (एक छोटा क्षेत्रीय और प्रशासनिक जिला) में काफ़ी सक्रीय रूप से काम कर रहें हैं.  </p><p>14,480 के आबादी वाले बारंगे, साइटियो लिनाओ की नौ महिलाएं एक SHG के ज़रिये साथ आई.  Oxfam Pilipinas और SIKAT Inc. ने SHG की  शुरुआत द्वीप समुदाय की महिलाओं के साथ की. सभी सदस्यों ने हर हफ़्ते 50 फ़िलीपीनि पेसो की बचत की. इस बचत का इस्तेमाल उन्होनें सूअर पालने का काम शुरू करने में किया. सदस्य शर्ली  बतातीं हैं कि, "मेरे पति सोचते थे कि यह समूह केवल दोस्त बनाने और कुछ ट्रेनिंग के लिए है, जब उन्हें पता चला की मैं इस SHG से जुड़करपेसोभी कमा रहीं हूं तो वह हैरान हो गए." </p><p>वोसेस ने बताया उनके पति मछुआरे हैं, पहले उनकी कमाई से घर चल जाया करता था.  पर अब गैसोलीन के बढ़ते दाम और मछलियों की कमी ने गुज़ारा करना मुश्किल कर दिया. सूअर पालने के इस काम ने उनके पति के बोझ को बांटने में मदद करी."</p><p>Oxfam Pilipinas और SIKAT Inc. ने न केवल महिलाओं को अपने छोटे काम को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया बल्कि उन्हें फाइनेंशियल लिटरेसी की ट्रेनिंग देकर अचानक आई मुसीबत के लिए बचत करना भी बताया.  कम ब्याज पर लोन देकर महिलाओं को अवैध साहूकारों से भी बचाया.</p><p>सारंगानी प्रांत में सरकारी डेंटिस्ट लिएलानी मालिनाओ की 200 पेसो की आमदनी जब कम पढ़ने लगी तो वो SHG से जुड़ गईं. 17 और महिलाओं के साथ मालिनाओ ने पैसा बचाने, बजट बनाने और जीवन कौशल की अहमियत को समझा. वह अब सात स्वसहायता समूहों का संचालन कर रहीं हैं. दक्षिणी फ़िलीपीन्स में कई  ग्रामीण महिलाएं नोट्रे डेम सिस्टर्स के हेस्ड फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए इस स्वसहायता समूह से आत्मविश्वास, आर्थिक आज़ादी और साथ हासिल करती हैं.</p><p>SHG के अनुभवी सदस्यों ने आस-पास के पहाड़ी समुदायों में जाकर पाँच- छह महिलाओं के कई समूह बनवाये.  जिस से शहर से दूर रह रहीं महिलाएं भी अपने परिवार के लिए कुछ कर सकें. SHG से जोड़ने में अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा. पुलिस और वहां के लोगों ने सोचा ये पैसे इकट्ठा कर असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे. लगातार वहां जाने और उन्हें फाइनेंशियल लिटरेसी के बारे में समझाने के बाद महिलाओं ने विश्वास किया और समूह से जुड़ीं.  इन महिलाओं ने पैसे बचाकर शहर से चावल और डिब्बाबंद सामान लाकर अपने पड़ोसियों को बेचा. सभी का दूर आने जाने का खर्चा बचा. आस-पास के लोगों ने उन्हें और भी घरेलु सामान बेचने का कहां. </p><p>जोफ़ी वाल्डेज़ बतातीं हैं कि पहले उनमे इतनी झिझक थी कि वो अपनी बेची हुई मछलियों के पैसे भी नहीं मांग पाती थी. लेकिन SHG ने उनमे आत्मविश्वास जगाया कर लोगों का सामना करना, उन्हें समझना, और पैसे बचाना सिखाया. मेल्बा टांडी ने साझा किया कि SHG ने आर्थिक आज़ादी के साथ ग़लत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत भी दी. SHG से जुड़कर वो घरेलु हिंसा के माहौल से निकलकर अपने पैरों पर खड़ी हो पाई हैं.   </p><p>SHG की ये पहल दुनियाभर में चुनौतियों को पार करती दूरदराज़ की जगहों में पहुंची. SHG ने महिलाओं को अपनी बात कहने, सपने पूरे करने, और अपने पैरों पर खड़े होने का साहस दिया. दुनिया भर में कई महिलाएं आज भी SHG का रास्ता तक रहीं हैं. उम्मीद है सरकारें और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की दिशा में काम कर रहीं संस्थाएं ग़ौर करेंगी और उन जगहों में भी SHG की शुरुआत हो सकेगी जहां महिलएं बदलाव और बेहतर ज़िन्दगी की आस लगाए बैठीं हैं.   </p><p>फ़िलीपीन्स में 92% आबादी ईसाई धर्म का पालन करती है. चर्च ने समाज व संस्कृति पर गहरा असर डाला. चर्च ने SHG को महिलाओं के बदलाव का एक साधन बनाया. जैसे फ़िलीपीन्स में धर्म ने महिलाओं की स्थिति में बदलाव की पहल की है वैसे ही दुनियाभर के धर्म ओर पंथ  सार्थक पहल कर सकते हैं. ये एक उदाहरण है उस दौर के लिए जहां चारों ओर धर्म के नाम पर बहस छिड़ी हुई है, वहीं फ़िलीपीन्स से सीखकर सभी धर्मों को अपने-अपने देशों में कमज़ोर लोगों ख़ासकर महिलाओं के बदलाव के लिए काम करना चाहिए.  </p><p><br data-cke-filler="true"></p><p>रिफ्रेंस:  </p><p><a href="https://www.globalsistersreport.org/news/ministry/self-help-groups-bolster-rural-women-southern-philippines-51536">https://www.globalsistersreport.org/news/ministry/self-help-groups-bolster-rural-women-southern-philippines-51536</a> </p><p><a href="https://philippines.oxfam.org/latest/image-story/formation-self-help-group-linao-enables-members-pursue-business-venture">https://philippines.oxfam.org/latest/image-story/formation-self-help-group-linao-enables-members-pursue-business-venture</a> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Feb 2023 17:29:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/philipines-shg]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/426gh8RJaz3EYTg5u4XN.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/426gh8RJaz3EYTg5u4XN.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG महिलाओं को शेयर मार्केट ट्रेडिंग सिखाएगी BMC ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-to-teach-share-market-trading-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg"><p>2023 में भी जब शेयर बाज़ार या पैसों से जुड़े मसलों की तरफ़ देखते है तो सिर्फ़ पुरुष नज़र आते है. सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज, इंडिया) के एक सर्वे ने भी बताया कि पुरुष निवेशकों का भारत में शेयर बाज़ार पर दबदबा है. जबकि ऐसे बाज़ार को निवेश का ज़रिया मानने वाली महिलाओं का प्रतिशत आज भी 25 फ़ीसदी से भी कम है. और इन 25 फ़ीसदी में भी ग्रामीण महिलाएं 1% भी नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक आज़ादी का न होना और उसके साथ फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी है. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने इस कमी को दूर करने का फैसला लिया. BMC महिलाओं को फाइनेंशियल लिटरेसी के ज़रिये अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाएगी. उन्हें शेयर बाज़ार में अपना पैसा निवेश करने के साथ आर्थिक मसलों पर कोर्स महिलाओं की आज़ादी की तरफ़ बड़ा कदम होगा </p><p>शेयर बाज़ार में आपके प्रवेश की शुरुआत शेयर मार्केट की 'क- ख-ग' से होगी और बताया जायेगा कि इसमें निवेश कैसे कर सकते हैं,  शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव के समय क्या करें,  शुरुआत में कितना पैसा निवेश करें, निवेश का उचित समय क्या है, शेयर को कब बेचना सही है और इसमें निवेश कर कैसे अपनी पूँजी को बढ़ाया जा सकता है.  </p><p>कंप्यूटर चलाना सिखाया जायेगा और साथ ही टेक्निकल बातें भी बताएंगे. BMC ने आगे की राह खोलते हुए विदेश जाकर पढ़ने की चाह रखने वाली लड़कियों को लोन और दूसरी आर्थिक सहायता देने का फैसला किया. अभी उन्हें पैसे और जानकारी के अभाव में अपने सपनों को क़ैद करना पड़ रहा है.    </p><p>फाइनेंशियल लिटरेसी की ओर बढ़ता क़दम महिलाओं को आर्थिक आज़ादी की तरफ़ ले जायेगा. रविवार का यह मानना है कि BMC द्वारा की गई पहल यदि बड़े पैमाने पर RBI और बैंकों द्वारा भी ली जाएं तो SHG की महिलाओं को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सकेगा. स्वसहायता समूह माइक्रो फाइनेंस पर निर्भर है. फाइनेंशियल लिटरेसी की ट्रेनिंग, शेयर ट्रेडिंग की समझ उन्हें ऊंचाई पर ले जा सकेगी. सरकार और कई संस्थान महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पर काम कर रहें हैं पर सभी को एकजुट आकर एक दिशा में काम करने की ज़रुरत है. स्वसहायता समूहों की आर्थिक आज़ादी के इस सफ़र को अभी कई और मोड़ तय करने बाकी हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Feb 2023 13:44:58 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-to-teach-share-market-trading-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg"/></item></channel></rss>