<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ पंचायत]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/pncaayt</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/pncaayt" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 06 Jan 2026 23:48:13 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[भारत सरकार महिला अनुकूल ग्राम पंचायत की शुरुआत पुणे के यशदा से करेगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/indian-government-to-organize-national-workshop-on-best-practices-of-model-women-friendly-gram-panchayats-at-yashada-10977287</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/06/women-friendly-gram-panchayat-2026-01-06-23-46-54.png"><h2 id="Titleh2">पंचायती राज मंत्रालय पुणे के यशदा में महिलाओं के अनुकूल आदर्श ग्राम पंचायतों का आयोजन करेगा</h2>
<p data-start="273" data-end="342">क्या सरकारी पहलें सच में गाँव की महिलाओं की ज़िंदगी बदल पा रही हैं.&nbsp;भारत सरकार ने हाल ही में महिला-मैत्री ग्राम पंचायतों पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा की है.&nbsp;इस कार्यशाला का उद्देश्य उन ग्राम पंचायतों के अनुभव साझा करना है, जहाँ महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर काम किया गया है.</p>
<p data-start="587" data-end="767">पहल सकारात्मक लगती है, लेकिन <a href="https://ravivarvichar.in/tags/rvivaar-vicaar">रविवार विचार</a> मानता है कि किसी भी सरकारी घोषणा को समझने के लिए एक बुनियादी सवाल ज़रूरी है, <strong data-start="710" data-end="767">क्या यह बदलाव काग़ज़ पर है या ज़मीन पर भी दिख रहा है.</strong><strong data-start="4" data-end="60" data-is-last-node="" data-is-only-node=""></strong></p>
<h2 data-start="587" data-end="767"><strong data-start="710" data-end="767">महिला-मैत्री ग्राम पंचायत क्या होती है?</strong></h2>
<p data-start="49" data-end="385"><a href="https://ravivarvichar.in/tags/bhaart-srkaar-ttraaibl-ministtrii">भारत सरकार</a> के अनुसार, महिला-मैत्री ग्राम पंचायत वह पंचायत होती है जहाँ महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा माना जाता है. ऐसी पंचायतों में ग्राम सभाओं और समितियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि गाँव से जुड़े अहम फैसले उनकी सहमति और सुझावों के साथ लिए जा सकें.</p>
<p data-start="387" data-end="705">महिला-मैत्री पंचायतों में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है. इसमें सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, बेहतर रोशनी, स्वच्छ शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था शामिल होती है. इसका उद्देश्य यह है कि महिलाएँ बिना डर के घर से बाहर निकल सकें और सामाजिक जीवन में खुलकर हिस्सा ले सकें.</p>
<p data-start="707" data-end="987">इसके साथ ही ऐसी पंचायतों में महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़ी ज़रूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. स्कूल छोड़ने की दर कम करना, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करना और स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए आर्थिक अवसर पैदा करना महिला-मैत्री पंचायतों के अहम लक्ष्य होते हैं.</p>
<p data-start="989" data-end="1303" data-is-last-node="" data-is-only-node="">लेकिन यह भी सच है कि ग्रामीण भारत में महिलाओं की समस्याएँ केवल योजनाओं से हल नहीं होतीं. सामाजिक दबाव, पितृसत्तात्मक सोच और चुप्पी की संस्कृति आज भी कई गाँवों में महिलाओं की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है. इसलिए महिला-मैत्री ग्राम पंचायत का असली अर्थ तभी पूरा होगा, जब नीतियों के साथ-साथ सामाजिक सोच में भी बदलाव आए.</p>
<h2 data-start="1237" data-end="1293"><strong data-start="1240" data-end="1293">744 ग्राम पंचायतें चुनी गईं, क्या यह पर्याप्त है?</strong></h2>
<p data-start="1295" data-end="1443">सरकार ने देश भर से 744 ग्राम पंचायतों को महिला-मैत्री मॉडल के रूप में चुना है.&nbsp;यह एक शुरुआत है, लेकिन भारत में ढाई लाख से अधिक ग्राम पंचायतें हैं.&nbsp;यहाँ एक अहम सवाल उठता है,&nbsp;क्या यह पहल केवल चुनिंदा पंचायतों तक सीमित रह जाएगी, या इसका असर धीरे-धीरे पूरे देश के गाँवों तक पहुँचेगा.</p>
<h2 data-start="120" data-end="169"><strong data-start="124" data-end="167">राष्ट्रीय कार्यशाला: उद्देश्य और सीमाएँ</strong></h2>
<p data-start="171" data-end="474">पुणे में आयोजित होने वाली इस <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/workshop-organized-in-new-delhi-to-connect-with-enterprises-and-create-lakhpati-didi-participated-mission-and-officers-of-ministry-4788540">राष्ट्रीय कार्यशाला</a>&nbsp;में देश भर से अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और नीति-निर्माता शामिल होंगे.<br data-start="293" data-end="296">इसका मुख्य उद्देश्य है कि <strong data-start="322" data-end="394">महिला-मैत्री ग्राम पंचायतों के अनुभव और सर्वोत्तम मॉडल साझा किए जाएँ</strong>, ताकि अन्य पंचायतें भी उनसे सीख सकें और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके.</p>
<p data-start="476" data-end="504">कार्यशाला में शामिल होंगे:</p>
<ul data-start="506" data-end="636">
<li data-start="506" data-end="542">
<p data-start="508" data-end="542">राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी</p>
</li>
<li data-start="543" data-end="585">
<p data-start="545" data-end="585">ब्लॉक और जिला स्तर के पंचायत प्रतिनिधि</p>
</li>
<li data-start="586" data-end="636">
<p data-start="588" data-end="636">नीति-निर्माता और प्रशिक्षण संस्थान के विशेषज्ञ</p>
</li>
</ul>
<p data-start="643" data-end="672"><strong data-start="643" data-end="670">उद्देश्य और गतिविधियाँ:</strong></p>
<ol data-start="674" data-end="1191">
<li data-start="674" data-end="872">
<p data-start="677" data-end="872"><strong data-start="677" data-end="711">सफल मॉडलों का अनुभव साझा करना:</strong><br data-start="711" data-end="714">अलग-अलग राज्यों की उन पंचायतों की कहानियाँ और तरीके सामने आएँगे, जिन्होंने महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण में वास्तविक बदलाव दिखाया है.</p>
</li>
<li data-start="874" data-end="1051">
<p data-start="877" data-end="1051"><strong data-start="877" data-end="906">शिक्षण और प्रशिक्षण सत्र:</strong><br data-start="906" data-end="909">अधिकारियों और प्रतिनिधियों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाएगा कि कैसे <strong data-start="981" data-end="1048">स्थानीय स्तर पर महिला-मैत्री पंचायतों को मज़बूत किया जा सकता है</strong>.</p>
</li>
<li data-start="1053" data-end="1191">
<p data-start="1056" data-end="1191"><strong data-start="1056" data-end="1083">अनुभवों का आदान-प्रदान:</strong><br data-start="1083" data-end="1086">विभिन्न राज्यों और पंचायतों की सफल रणनीतियों, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और उनके समाधान पर चर्चा होगी.</p>
</li>
</ol>
<p data-start="1198" data-end="1219"><strong data-start="1198" data-end="1217">सीमाएँ और सवाल:</strong></p>
<p data-start="1221" data-end="1306">हालांकि यह कार्यशाला एक सकारात्मक कदम है, कुछ सवाल और चुनौतियाँ अभी भी बने हुए हैं:</p>
<ul data-start="1308" data-end="1896">
<li data-start="1308" data-end="1435">
<p data-start="1310" data-end="1435"><strong data-start="1310" data-end="1342">गाँव की आम महिलाओं की आवाज़:</strong><br data-start="1342" data-end="1345">क्या पंचायतों की आम महिलाओं को इस मंच पर बोलने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा?</p>
</li>
<li data-start="1437" data-end="1575">
<p data-start="1439" data-end="1575"><strong data-start="1439" data-end="1468">सामाजिक मुद्दों पर चर्चा:</strong><br data-start="1468" data-end="1471">क्या घरेलू हिंसा, भूमि अधिकार, जाति या आर्थिक भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुले तौर पर बात होगी?</p>
</li>
<li data-start="1577" data-end="1720">
<p data-start="1579" data-end="1720"><strong data-start="1579" data-end="1611">नीति और व्यवहार के बीच अंतर:</strong><br data-start="1611" data-end="1614">क्या यह केवल &ldquo;काग़ज़ पर योजना&rdquo; दिखाने का मंच होगा, या इसका असर <strong data-start="1679" data-end="1700">वास्तविक ज़मीन पर</strong> महसूस किया जाएगा?</p>
</li>
<li data-start="1722" data-end="1896">
<p data-start="1724" data-end="1896"><strong data-start="1724" data-end="1739">सतत प्रभाव:</strong><br data-start="1739" data-end="1742">क्या इस कार्यशाला के बाद सीख को गाँवों में लागू करने का कोई ठोस <strong data-start="1808" data-end="1830">फॉलो-अप और निगरानी</strong> किया जाएगा, ताकि महिला-मैत्री पंचायतें केवल नाममात्र की न रहें?</p>
</li>
</ul>
<p data-start="1920" data-end="2212">राष्ट्रीय कार्यशाला एक जरूरी कदम है, लेकिन इसका असली महत्व तभी तय होगा जब यह <strong data-start="1997" data-end="2058">नीति और <a href="https://ravivarvichar.in/tags/garima-yojnaa">योजना</a> से बढ़कर महिलाओं की ज़मीन पर सशक्त भागीदारी</strong> में बदल सके.<br data-start="2071" data-end="2074">असली सफलता का पैमाना यह होगा कि गाँव की महिलाएँ <strong data-start="2122" data-end="2209">अपनी समस्याओं और सुझावों के साथ सक्रिय रूप से पंचायत के निर्णयों में भाग ले रही हैं</strong>.</p>
<h2 data-start="1984" data-end="2016"><strong data-start="1987" data-end="2016">आँकड़ों से आगे की सच्चाई</strong></h2>
<p data-start="2018" data-end="2167">सरकार पंचायत उन्नति सूचकांक जैसे पैमानों से प्रगति मापने की बात करती है.&nbsp;आँकड़े ज़रूरी हैं, लेकिन वे महिलाओं के अनुभवों को पूरी तरह नहीं दिखा पाते.&nbsp;काग़ज़ पर बनाई गई योजनाएँ और ज़मीन पर महसूस किया गया बदलाव-&nbsp;इन दोनों के बीच का अंतर ही असली सच्चाई बताता है.</p>
<h2 data-start="2286" data-end="2326"><strong data-start="2289" data-end="2326">महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ</strong></h2>
<p data-start="175" data-end="465">महिला-मैत्री ग्राम पंचायतों का उद्देश्य केवल योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुँचाना नहीं है. असली सशक्तिकरण तब शुरू होता है जब महिलाएँ अपने अधिकारों और निर्णयों में बराबरी महसूस करें. इसका मतलब यह है कि महिलाएँ केवल उपभोक्ता या लाभार्थी नहीं, बल्कि <strong data-start="420" data-end="458">सक्रिय निर्णयकर्ता और नेतृत्वकर्ता</strong> हों.</p>
<p data-start="467" data-end="870">महिलाओं की आवाज़ को सुना जाना इसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है. पंचायत की बैठकों, <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/online-learning-and-work-from-home-opportunities-helping-women">सामाजिक कार्यक्रमों</a> और विकास योजनाओं में महिलाओं के सुझावों और अनुभवों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. केवल नाम मात्र की भागीदारी, जैसे &ldquo;साइन कराने के लिए बुलाना&rdquo; या औपचारिक बैठकों में मौजूद रहना, सशक्तिकरण का अर्थ नहीं रखता. महिलाएँ तभी सशक्त महसूस कर सकती हैं जब उनके विचारों का असर वास्तविक निर्णयों में दिखाई दे.</p>
<p data-start="872" data-end="1283">दूसरा पहलू है निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अधिकार देना. इसका अर्थ है कि महिलाएँ पंचायत के बजट, योजना निर्माण, स्थानीय विकास और सामाजिक कार्यक्रमों में <strong data-start="1028" data-end="1055">बराबरी के साथ शामिल हों</strong>. उनके निर्णयों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और न ही केवल दिखावे के लिए शामिल किया जाना चाहिए. बराबरी का अर्थ यह भी है कि उनकी राय को प्रमुखता मिले और गाँव के विकास की दिशा तय करने में उनका योगदान वास्तविक रूप से मापा जाए.</p>
<p data-start="1285" data-end="1666">तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है पंचायतों में मौजूद पुरुष प्रभुत्व और पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं को चुनौती देना. कई गाँवों में निर्णय लेने की शक्ति पुरुषों के हाथों में केंद्रित रहती है, और महिलाओं के सुझाव या विरोध को गंभीरता से नहीं लिया जाता. महिला-मैत्री पंचायत तभी सफल होगी जब यह ढांचा बदले और महिलाएँ <strong data-start="1583" data-end="1609">सशक्त भूमिका निभा सकें</strong>, बिना डर या दबाव के अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें.</p>
<p data-start="1668" data-end="2008">जब तक ये तीन पहलू&mdash;<strong data-start="1686" data-end="1758">आवाज़ सुने जाना, निर्णय में बराबरी, और पुरुष प्रभुत्व को चुनौती देना</strong>&mdash;संपूर्ण रूप से लागू नहीं होंगे, तब तक महिला-मैत्री ग्राम पंचायत अधूरी मानी जाएगी. वास्तविक सशक्तिकरण सिर्फ योजनाओं की उपलब्धता या आंकड़ों में सुधार से नहीं आता; यह महिलाओं की <strong data-start="1934" data-end="1976">सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता</strong> के माध्यम से ही संभव होता है.</p>
<h2 data-start="2615" data-end="2672"><strong data-start="2618" data-end="2672">पहल सही है, लेकिन परीक्षा ज़मीन पर होगी!</strong></h2>
<p data-start="2674" data-end="2884">महिला-मैत्री ग्राम पंचायतों पर राष्ट्रीय कार्यशाला एक सही दिशा में उठाया गया क़दम हो सकता है.&nbsp;लेकिन Ravivar Vichar के लिए असली सवाल यही है&mdash;&nbsp;क्या गाँव की महिलाएँ इस बदलाव को अपनी ज़िंदगी में महसूस कर पाएँगी.&nbsp;क्योंकि महिला सशक्तिकरण नीतियों से नहीं, <strong data-start="2929" data-end="2973">सोच और सत्ता संरचना में बदलाव से आता है.</strong></p>
<h2 data-start="2980" data-end="3013"><strong data-start="2982" data-end="3013">अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-</strong></h2>
<h3 data-start="3015" data-end="3063"><strong data-start="3018" data-end="3061">महिला-मैत्री ग्राम पंचायत क्या होती है?</strong></h3>
<p data-start="3064" data-end="3192">महिला-मैत्री ग्राम पंचायत वह पंचायत होती है जहाँ महिलाओं की सुरक्षा, भागीदारी, शिक्षा और आर्थिक अवसरों को प्राथमिकता दी जाती है.</p>
<h3 data-start="3194" data-end="3244"><strong data-start="3197" data-end="3242">यह पहल किस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है?</strong></h3>
<p data-start="3245" data-end="3308">यह पहल भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है.</p>
<h3 data-start="3310" data-end="3384"><strong data-start="3313" data-end="3382">कितनी ग्राम पंचायतों को महिला-मैत्री मॉडल के रूप में चुना गया है?</strong></h3>
<p data-start="3385" data-end="3438">कुल 744 ग्राम पंचायतों को इस मॉडल के लिए चुना गया है.</p>
<h3 data-start="3440" data-end="3494"><strong data-start="3443" data-end="3492">राष्ट्रीय कार्यशाला कहाँ आयोजित की जा रही है?</strong></h3>
<p data-start="3495" data-end="3537">यह कार्यशाला पुणे में आयोजित की जा रही है.</p>
<h3 data-start="3539" data-end="3593"><strong data-start="3542" data-end="3591">क्या यह पहल सभी ग्राम पंचायतों में लागू होगी?</strong></h3>
<p data-start="3594" data-end="3696">फिलहाल यह पहल चुनिंदा पंचायतों तक सीमित है. इसके विस्तार को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है.</p>
<h3 data-start="3698" data-end="3757"><strong data-start="3701" data-end="3755">महिला-मैत्री पंचायतों से महिलाओं को क्या लाभ होगा?</strong></h3>
<p data-start="3758" data-end="3858">सही ढंग से लागू होने पर इससे महिलाओं की सुरक्षा, भागीदारी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है.</p>
<h3 data-start="3860" data-end="3904"><strong data-start="3863" data-end="3902">इस पहल की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?</strong></h3>
<p data-start="3905" data-end="3981">सबसे बड़ी चुनौती है इसे काग़ज़ से निकालकर ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 06 Jan 2026 23:48:13 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/indian-government-to-organize-national-workshop-on-best-practices-of-model-women-friendly-gram-panchayats-at-yashada-10977287]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/06/women-friendly-gram-panchayat-2026-01-06-23-46-54.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/06/women-friendly-gram-panchayat-2026-01-06-23-46-54.png"/></item><item><title><![CDATA[घूंघट संस्कार नहीं सजा ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/83-year-old-surgeon-stood-up-against-ghoonghat-pratha-in-rajasthan</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4N6AHul50ppHoCG6BihF.jpg"><p>वह दिन मेरे लिए यादगार था जब पहली बार पंचायत परिसर में सरपंच के रूप में मैंने घूंघट हटाया. यह घटना उस दिन की है जब राजस्थान की बुआजी हमारे गांव आई. मैं कुछ महिला साथियों के साथ उनसे मिलने पहुंची. बुआजी ने घूंघट हटाने को बार-बार बोला. हम बुआजी को पुरुषों की भीड़ से एक तरफ ले गए.उन्हें बहुत समझाया. हमारे साथ बैठे पुरुषों ने कहा भी कि ये हमारी परंपरा है. पर बुआजी नहीं मानी.पहले दिन हमें बहुत लाज आ रही थी.पर हमें हिम्मत आई और पुरुषों के सामने बैठ कर बात की.यह घटना है नीमराणा के घीलोठ गांव की. इस घटना ने गांव का माहौल बदल दिया. इस गांव की पूर्व सरपंच सीमा देवी चौहान यह बात कहते हुए गर्व महसूस कर रही थी. इस घटना के बाद से ही यहां लगभग सभी महिलाएं घूंघट हटा कर स्वाभिमान से जिंदगी जी रहीं हैं. पूरे प्रदेश में बुआजी के रूप में चर्चित यह समाजसेवी डॉ. मालती गुप्ता हैं. पेशे से प्लास्टिक सर्जन डॉ. मालती गुप्ता पिछले कई वर्षों से घूंघट प्रथा मुक्त समाज को लेकर मिशन चला रहीं हैं.<br>                   <br>जयपुर के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह हॉस्पिटल की हेड और प्लास्टिक सर्जन रहीं डॉ मालती जॉब से चाहे रिटायर हो गई लेकिन समाज सेवा का यह जूनून बरक़रार है. डॉ मालती गर्व से कहती हैं-" महिलाओं की सोच और परंपरागत रूढ़ियों से बाहर निकलने लगीं हैं. मैं हर आयोजनों और दूसरी यात्राओं में घूंघट प्रथा मुक्त समाज की कल्पना को साकार करने के लिए महिलाओं को प्रेरित करती हूं.लेकिन मुझे लगता है कि पुरुष समाज को अभी भी काउंसलिंग करने कि जरूरत है."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/4ihthJ07iGeMrkmQsiXM.jpg" alt="stood up against ghoonghat"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>घूंघट प्रथा मुक्त समाज अभियान के बाद आयोजनों में कई महिलाओं ने घूंघट नहीं किया  (फोटो क्रेडिट्स - उमा)</em></span></p>
<p>उत्तर भारत में मुग़ल कालीन और फिर अंग्रेज़ों के राजपाट होने से महिलाओं को बुरी नज़र से बचने के लिए घूंघट प्रथा की शुरुआत हुई. जबकि हमारे पुराणों,ग्रंथों में कहीं भी पर्दा या घूंघट प्रथा का ज़िक्र नहीं है. यही कारण किसी भी युग में पर्दा प्रथा नहीं रही. हमारे देवी की मूर्तियों को कहीं भी घूंघट में चित्रित नहीं किया गया.ये हमारी संस्कृति नहीं है. महिलाओं को कुछ-कुछ बात को समझने लगीं और घूंघट कहीं थोड़ा कम हुआ तो कहीं सिर पर पल्ला बनकर रह गया.यह सुखद संकेत है.               </p>
<p>अपने पेशे डॉक्टरी में जहां वे कई सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं, महिलाओं की सोच और घूंघट प्रथा मुक्त समाज के लिए काम कर रही डॉ. मालती को कई सामाजिक संगठन भी सम्मानित कर चुके हैं.पहली बार उन्होंने इस अभियान की शुरुआत साल 2016 से नीमराणा के घीलोठ गांव से की थी,जो लगातार जारी है. इसके बाद से अब तक बड़ी संख्या में महिलाओं ने घूंघट करना बंद कर दिया. डॉ. मालती आगे बताती हैं -" घूंघट प्रथा को लेकर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा रूढ़ियां बनी हुई हैं. इस प्रथा को लेकर पुरुषों की दलील रहती है कि यह संस्कार हैं और इसके हटाने से मर्यादा टूट जाएगी. इसी मानसिकता को लेकर ही पुरुषों को काउंसलिंग कि जरूरत है. जो मैं लगातार कर रहीं हूं."</p>
<blockquote>
<p><em>जयपुर यूनिवर्सिटी की छात्रा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही पूजा चौहान कहती है-" बुआजी ने कई गांव को सिर्फ घूंघट प्रथा से मुक्त नहीं किया बल्कि औरतों को खुला आसमान देखने का अवसर दिया. अब राजस्थान के कई गांव में पर्दा प्रथा को लेकर सोच बदल रखी है. "</em></p>
</blockquote>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/cEzOXLDES6ZrX1M5Mu1L.jpg" alt="stood up against ghoonghat"></p>
<p> <span style="font-size: 8pt;"><em>घूंघट प्रथा छोड़ चुकी महिलाएं (फोटो क्रेडिट्स - उमा)</em></span></p>
<p>घूंघट प्रथा मुक्त समाज के अलावा वे कई दूसरे कामों में भी जुटी हैं.अपने पिता और स्वतंत्रता संग्राम सैनानी कशीराम गुप्ता कि स्मृति में कई आयोजन करवातीं हैं. मुख्य मंत्री अशोक गहलोत के हाथों सम्मानित डॉ मालती को अलवर में भी भामाशाह पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.अपने पिता और स्वतंत्रता संग्राम सैनानी कशीराम गुप्ता कि स्मृति में कई आयोजन करवातीं हैं. उन्हें लाइव टाइम अचीवमेन्ट अवार्ड सहित कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं.</p>
<p><strong>रिपोर्टर - उमा </strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 20 Apr 2023 15:52:12 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/83-year-old-surgeon-stood-up-against-ghoonghat-pratha-in-rajasthan]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4N6AHul50ppHoCG6BihF.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4N6AHul50ppHoCG6BihF.jpg"/></item></channel></rss>