<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ politics]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/politics</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/politics" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 14 Jun 2024 15:50:39 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[36 साल बाद Arunachal को मिली Dasanglu Pul के रूप में एक महिला मंत्री ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/arunachal-pradesh-gets-dasanglu-pul-as-its-second-woman-minister-in-the-cabinet-of-arunachal-pradesh-vidhan-sabha-after-a-long-wait-of-36-years-4761336</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pHndQxc7Kj5q9TWvSOxv.png"><p style="text-align: justify;">जब ज़िन्दगी कठिनाइयों से भरी हो और हर कदम पर संघर्ष हो, तब भी एक महिला अपने अदम्य साहस और धैर्य से हर मुश्किल को पार कर सकती है. चाहे वह व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना कर रही हों या समाजिक प्रतिबंधों से लड़ रही हों, उसकी निरंतरता और सहनशीलता उसे आगे बढ़ने में मदद करती हैं. महिलाएं अपनी स्थिति को समझकर उसे सुधारने में सक्षम होती हैं और समाज में बदलाव लाने के लिए सक्रिय रहती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल (Dasanglu Pul) की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरणादायक यात्रा है. उनकी जिंदगी में कई कठिन मोड़ आए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उनके संघर्ष और संकल्प की यह कहानी न केवल उनके साहस को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि एक महिला अपनी शक्ति और सामर्थ्य से दुनिया को बदल सकती है. दसांगलू पुल ने अपने जीवन के हर मोड़ पर यह साबित किया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा हमें रोक नहीं सकती.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ncc-soft-launches-lai-hara-project-that-empower-women-of-northeast-india-4478108">पूर्वोत्तर भारत की महिलाओं के लिए 'लाई हारा'</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">Meter Reading का करती थी काम</h2>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल की कहानी संघर्ष, धैर्य और साहस की अद्भुत मिसाल है. उनकी यात्रा एक मीटर रीडर से लेकर अरुणाचल प्रदेश की मंत्री बनने तक की है. उनकी इस कहानी में ना सिर्फ संघर्ष है, बल्कि एक महिला के रूप में उनकी सफलता भी है, जो हर किसी को प्रेरित करती है.</p>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल (Dasanglu Pul) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh, India) के सर्टी गांव से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता तांगलैसो तुलांग एक प्रसिद्ध पुजारी थे, जिनका निधन दसांगलू के बचपन में ही हो गया था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वालॉन्ग और हैयूलियांग के सरकारी स्कूलों से पूरी की.</p>
<p style="text-align: justify;">परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण, दसांगलू ने टाइपिंग का कोर्स किया और फिर बिजली विभाग में एक मीटर रीडर के रूप में काम करना शुरू किया. इस नौकरी से उन्होंने अपने परिवार का सहारा बनना शुरू किया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/axis-bank-and-selco-foundation-to-support-rural-livelihoods-in-north-east-1701830">एक्सिस बैंक और सेल्को फाउंडेशन NE में ग्रामीण आजीविका का करेंगे समर्थन</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">पति की मौत के बाद उत्तरी Politics में</h2>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल (Dasanglu Pul) की शादी Arunachal Pradesh के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल (Kalikho Pul) से हुई थी. Kalikho Pul ने राजनीतिक उलटफेरों के चलते 2016 में आत्महत्या कर ली थी. पति की मृत्यु के बाद, दसांगलू ने राजनीति में कदम रखा. उन्होंने अपने पति की सीट, हैयूलियांग निर्वाचन क्षेत्र (Hayuliang Vidhan Sabha Constituency) से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2017 से वह अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में हैयूलियांग और अंजॉ जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में, उन्हें <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-entrepreneurship-cell-has-started-in-arunachal-pradesh-to-strengthen-and-empower-women-entrepreneurs-2318784">मुख्यमंत्री पेमा खांडू</a> (Chief Minister Pema Khandu) के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जिससे वह अरुणाचल प्रदेश विधान सभा में कदम रखने वाली दूसरी महिला मंत्री बनीं.</p>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल ने अपनी जीत पर कहा,</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><em>"मेरा मंत्रिमंडल में शामिल होना एक संदेश है कि हमारी सरकार महिलाओं के आरक्षण के प्रति समर्पित है."</em></p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">दसांगलू पुल (Dasanglu Pul) ने अरुणाचल प्रदेश महिला और बाल विकास विभाग में सलाहकार (A<span>dviser to the Arunachal Pradesh Women and Child Development Department</span>) के रूप में भी सेवा दी है. इस भूमिका में, उन्होंने महिलाओं और बच्चों की भलाई के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे समुदाय में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद मिली.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें -&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shah-jahan-begum-is-the-woman-behind-the-changed-picture-of-bhopal-during-her-reign-4761008">Shah Jahan Begum: अपने राजकाल में बदली Bhopal की तस्वीर</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Fri, 14 Jun 2024 15:50:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/arunachal-pradesh-gets-dasanglu-pul-as-its-second-woman-minister-in-the-cabinet-of-arunachal-pradesh-vidhan-sabha-after-a-long-wait-of-36-years-4761336]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pHndQxc7Kj5q9TWvSOxv.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pHndQxc7Kj5q9TWvSOxv.png"/></item><item><title><![CDATA[Politics की female politicians को लेकर ओछी भाषा... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/politicians-have-been-using-bad-language-against-women-politicians-from-a-long-time-irrespective-of-their-political-inclination-4591306</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oCyLspbZEreIaxtHZrYe.png"><p style="text-align: justify;">चुनावी बिगुल बजते ही जैसे राजनेताओं की ज़बान और भी ज़्यादा खराब हो जाती है. एक तरह से जैसे होड़ सी लग जाती है कि कौन सबसे ज़्यादा घटिया बातें कर सकता है. और हमेशा की तरह इसका भी सबसे ज़्यादा नुकसान महिलाओं को उठाना पड़ता है- इस प्रसंग में राजनेत्रियों को यानी कि female politicians को.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Politics में हर वक़्त होता है अभद्र भाषा का प्रयोग</h2>
<p style="text-align: justify;">इस बार की शुरुआत उस प्रसंग से हुई जब कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को मंडी से बीजेपी टिकट मिलने पर एक भद्दी टिप्पणी की गई. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि वो पोस्ट उनके द्वारा नहीं &nbsp;बल्कि उनकी टीम के किसी सदस्य द्वारा लिखा गया है. उन्होंने माफी मांगी. लेकिन यह अंग्रेजी की कहावत 'टू लिटिल टू लेट' वाला मामला हो गया.</p>
<p style="text-align: justify;">वैसे खुद कंगना की भी बात करें तो महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक बातें करना, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना, जो भी महिला उनकी बात से सहमत ना हो उसे गाली देना, और उनकी राजनीतिक विचारधारा के विपरीत वाली विचारधारा की महिलाओं के चरित्र पर टीका टिप्पणी करना, कंगना इन सभी बातों में माहिर है. चाहे सोशल मीडिया हो या इंटरव्यू, कंगना अक्सर महिलाओं के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती दिखती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/women-pay-the-price-of-any-riot-or-issue-created-during-elections-4580203">चुनाव की मारा मारी, महिलाओं पर भारी</a></p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन मेरा यह मानना है कि ऐसी महिला के खिलाफ़ भी किसी दूसरे को अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. कंगना ने जो आज तक किया वह उनकी करनी है. लेकिन उन्हें भी इस बात पर गाली नहीं पडनी चाहिए कि वह एक महिला हैं. सिलसिला यहां रुका नहीं. एक के बाद एक इस तरह के बयान आते रहे. हाल ही में महाराष्ट्र के संजय राऊत ने बीजेपी की नवनीत राणा को नचनिया कहा.</p>
<p style="text-align: justify;">नवनीत राणा को इस बार अमरावती से भाजपा का टिकट मिला है और अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह एक अभिनेत्री रह चुकी हैं. यह हिंदुस्तान की राजनीति में कोई नई बात नहीं है. वर्तमान समय की अगर बात कर लें तो छोटे-बड़े नेताओं की तो बात ही क्या कहें, प्रधानमंत्री की तरफ से भी कई बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">अपना नेता आखें खोल कर चुने</h2>
<p style="text-align: justify;">चाहे वह 2014 की रेस में सोनिया गांधी के खिलाफ़ हो या फिर 2021 के बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ़. वैसे सोनिया गांधी की अगर बात करें तो वर्तमान में शायद ही किसी महिला के खिलाफ़ <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/women-got-their-voting-rights-after-lots-of-struggle-and-movements-they-must-use-it-with-full-responsibility-4003682">Indian Politics</a> में इतनी बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया हो जितनी बार सोनिया गांधी के लिए किया गया है. चाहे उनकी इटली की जड़ों को लेकर बात हो, चाहे उनकी शादी को लेकर बात हो, इस मामले में भाजपा के कई सारे नेताओं ने, कई बार बेहद अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">और जैसा कि हमने कहा कि महिलाओं के लिए इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी राजनेता के लिए कोई नई बात नहीं है. एक आधी बार कहने को चुनाव आयोग ज़रूर कुछ कार्रवाई कर देता है लेकिन उस कार्रवाई का कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि महिला नेताओं को पड़ने वाली गालियों में कहीं से कहीं तक कोई कमी नहीं आती. अब ऐसे में एक वोटर क्या कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">एक वोटर इस बात को एक पैमाने की तरह रख कर देख सकता है कि जो नेता महिला नेताओं यानी की राजनेत्रियों तक के बारे में शालीनता से बात नहीं कर सकते, उनका सम्मान नहीं कर सकते, वह आम जनता की बच्चियों की, महिलाओं की इज़्ज़त क्या ही करेंगे. तो इस बार चुनावी बूथ में अगले 5 साल के लिए अपने नेता को चुनते वक्त इस बात का ज़रूर ध्यान रखिएगा कि क्या वो शख्स महिलाओं की इज़्ज़त सिर्फ़ और सिर्फ़ भाषणों में ही करता है या उसकी भाषा में और व्यवहार में भी यह दिखाई देता है कि वह सचमुच महिलाओं का सम्मान करता है और उनका हितैषी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मैत्री </dc:creator><pubDate>Mon, 20 May 2024 13:38:35 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/politicians-have-been-using-bad-language-against-women-politicians-from-a-long-time-irrespective-of-their-political-inclination-4591306]]></guid><category><![CDATA[एक्सपर्ट विचार]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oCyLspbZEreIaxtHZrYe.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oCyLspbZEreIaxtHZrYe.png"/></item><item><title><![CDATA[ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आपहुं शीतल होए ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-are-so-important-in-the-2024-lok-sabha-elections-that-ignoring-them-can-cause-huge-loss-to-any-political-party-despite-all-this-like-in-past-years-women-politicians-are-still-facing-derogatory-comments-and-gender-discrimination-4485943</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png"><p style="text-align: justify;">भारत में चुनाव (Elections 2024) सिर्फ चुनावी प्रक्रिया ना होकर लोकतंत्र का उत्सव है. लोकसभा चुनाव 2024 में राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय पार्टियों तक, हर कोई जीत हासिल करने के लिए कमर कस रहा है. 2024 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में महिला वोटर (Female Voters) इतने महत्वपूर्ण है की उनकी अनदेखी किसी भी राजनीतिक दल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इस सबके बावजूद महिला राजनेताओं (Indian Female Politicians) को बीते सालों की तरह, आज भी अपमानजनक टिप्पणियों और लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. चूंकि राजनीति (Politics) अब भी पुरुष-प्रधान है, इसलिए महिला नेताओं को अक्सर उनके पुरुष सहयोगियों से ऐसे हमलों का सामना करना पड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-using-attractive-ways-to-bring-change-and-motivate-other-people-for-voting-and-selecting-the-government-4477996">दूल्हा बन घोड़े पर बैठी और बारात के साथ वोट अपील</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">चुनावों से पहले तेज़ होते हमले</h2>
<p style="text-align: justify;">एक पुरुष नेता द्वारा महिला नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का सबसे ताजा मामला कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का है जिन्होंने भाजपा सांसद और उम्मीदवार हेमा मालिनी के बारे में कहा - '' लोग अपने विधायकों/सांसदों को क्यों चुनते है? ताकि वे (विधायक/सांसद) जनता की आवाज उठा सकें. यह हेमा मालिनी की तरह नहीं है, जिन्हें चाटने के लिए चुना गया था ''. उन्होंने यह भी कहा था कि - ' हेमा मालिनी का सम्मान इसलिए किया जाता है क्योंकि उन्होंने धर्मेंद्र जी से शादी की है और वह हमारी बहू है. इस तरह की टिप्पणी और भाषा के लिए चुनाव आयोग ने भी रणदीप सुरजेवाला को शोकॉज नोटिस जारी किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">2022 में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर कांग्रेस नेता अजय राय ने यह कहकर हमला किया था कि - "वह (ईरानी) केवल लटके-झटके दिखाने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में आती है." पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी कई बार लैंगिक भेदभाव वाली टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है. हाल ही में भाजपा के दिलीप घोष ने उनके माता-पिता के बारे में सवाल उठाए थे. बिहार में, लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने "घूंघट के पीछे रहने" के लिए कहा था.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751">2024 चुनाव - पिछले दो दशकों में women voters की हिस्सेदारी सबसे अधिक!</a></p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा नेता विनय कटियार ने कथित तौर पर पूछा था कि क्या कांग्रेस नेता सोनिया गांधी राहुल गांधी को सबूत दे पाएंगी कि उनके पिता राजीव गांधी थे. कटियार ने प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि "राजनीति में पहले से ही कई खूबसूरत स्टार प्रचारक मौजूद है."</p>
<p style="text-align: justify;">यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी 2016 में भाजपा के दयाशंकर सिंह द्वारा वेश्या से भी बदतर कहे जाने जैसी घिनौनी टिप्पणी का निशाना बनीं, जिन्होंने आरोप लगाया कि दलित नेता ने पैसे के बदले टिकट बेचे. ऐसे ही कांग्रेस के कर्नाटक विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा ने भाजपा की गायत्री सिद्धेश्वरा के बारे में कहा था कि - "वह केवल खाना बनाने के लायक है." अभिनेता से नेता बनीं उर्मिला मातोंडकर लैंगिक टिप्पणी का निशाना बन गईं जब भाजपा के गोपाल शेट्टी ने कहा कि "उन्हें उनके लुक के कारण टिकट दिया गया है".</p>
<p style="text-align: justify;">अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक रैली में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने उनकी पार्टी की पुरानी साथी और बाद में भाजपा में शामिल महिला नेत्री जयाप्रदा के लिए कहा, &ldquo;मैं उन्हें (जया प्रदा) को रामपुर लाया. तुम गवाह हो कि मैंने किसी को उसके शरीर को छूने नहीं दिया. आपको उसका असली चेहरा पहचानने में 17 साल लग गए लेकिन मुझे 17 दिन में पता चल गया कि वह खाकी अंडरवियर पहनती है. "</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-from-self-help-group-in-raisen-and-spreading-awareness-towards-voting-and-elections-4477681">मतदान का महत्व बताने घर से निकली महिलाएं</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">भाषा से प्रभावित होता देश और समाज</h2>
<p style="text-align: justify;">किसी महिला के शरीर पर टिप्पणी करके उसे नीचा दिखाना एक आम राजनीतिक और सामाजिक मानसिकता है. महिला नेताओं के प्रति का उपयोग की जाने वाली भाषा से केवल उनके व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे समाज में महिलाओं के प्रति सामाजिक और सांस्कृतिक सम्मान की कमी भी आती है. भारतीय राजनीतिक दलों में महिला नेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का उपयोग किसी भी विचारशीलता या राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए लाभदायक नहीं है. देश के लोकतंत्र में, राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक दृष्टिकोण से सम्मानित होना चाहिए, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं. लेकिन अपमानजनक टिप्पणियों के माध्यम से महिला नेताओं को निशाना बनाना न केवल उनके व्यक्तित्व की अपमान है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी घातक रूप में प्रभावित करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और जागरूकता की कमी के कारण पुरुष श्रेष्ठता (male superiority in politcs) की विकृत धारणा पैदा होती है. हमारे पास उदार राजनीतिक संरचना है लेकिन उदार समाज का विकास एक सतत प्रक्रिया है, जिसके पूर्ण होने में समय लगेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-of-shg-will-challenge-with-ballot-instead-of-bullets-in-naxal-area-in-balaghat-4479361">बुलेट को बैलेट से टक्कर देतीं महिलाएं</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">शिवरंजिनी देवांगन</dc:creator><pubDate>Wed, 17 Apr 2024 14:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-are-so-important-in-the-2024-lok-sabha-elections-that-ignoring-them-can-cause-huge-loss-to-any-political-party-despite-all-this-like-in-past-years-women-politicians-are-still-facing-derogatory-comments-and-gender-discrimination-4485943]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png"/></item><item><title><![CDATA[जर्नलिज़्म में फेमिनिज़्म की आवाज़ बन रही शिरीन भान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shereen-bhan-bridging-gender-gaps-in-journalism-and-society</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wX8n8XcMBxbA6LQQXouE.jpg"><p>पत्रकारिता के जगत में शिरीन भान (<span>Shereen Bhan</span>) वह नाम है जो दृढ़ संकल्प का प्रमाण देती है. CNBC-TV18 के प्रबंध निदेशक (<span>Managing Editor</span>) के रूप में, उन्होंने पुरुष प्रधान मीडिया फील्ड में अपनी पहचान बनाई और महत्वाकांक्षी फीमेल जर्नलिस्ट्स (female journalists) के लिए प्रेरणा बनी. शिरीन का जन्म कश्मीर (Kashmir) में हुआ. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कश्मीर के केंद्रीय विद्यालय और वायु सेना बाल भारती स्कूल नई दिल्ली से पूरी की. भान ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिलोसफी में और पुणे विश्वविद्यालय से कम्युनिकेशन स्टडीज (communication studies) में डिग्री हासिल की.&nbsp;</p>
<h2>कॉर्पोरेट, वित्त, और नीति संबंधी समाचारों पर निडर नज़रिया पेश कर रहीं शिरीन भान &nbsp;</h2>
<p>भान की कार्य वर्क एथिक्स (work ethics), क्रेडिबिलिटी (credibility) और जटिल विषयों को कवर करने के निडर नज़रिये ने उन्हें सम्मान और मान्यता दिलाई. उन्होंने प्रभावशाली हस्तियों के इंटरव्यूज (interviews) के ज़रिये दर्शकों को वित्त, व्यवसाय और राजनीति (politics) जैसे क्षेत्रों की समझ बढ़ाने में मदद की. &nbsp;</p>
<p>शिरीन भान (<span>Shereen Bhan</span>) के पास करीब 20 वर्षों का अनुभव है, जिनमें से 14 वर्ष उन्होंने कॉर्पोरेट, नीति संबंधी समाचारों और घटनाओं को ट्रैक करने में बिताए. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत करण थापर (<span class="Y2IQFc" lang="en">Karan Thapar</span>) के प्रोडक्शन हाउस इन्फोटेनमेंट टेलीविजन में न्यूज़ रिसर्चर (News Researcher) के रूप में की. वह स्टार टीवी के 'वी द पीपल' और सब टीवी के 'लाइन ऑफ फायर' जैसे शो का हिस्सा रही हैं. वह दिसंबर 2000 में CNBC-TV18 में शामिल हुईं. शेरीन यंग टर्क्स की एंकर और संपादक भी रही है, जो उद्यमियों पर भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले शो में से एक है. शेरीन ने लगातार दो सालों तक 'सर्वश्रेष्ठ बिजनेस टॉक शो' पुरस्कार जीता. मीडिया में योगदान के लिए 'फिक्की वुमन ऑफ द ईयर' पुरस्कार जीता और विश्व आर्थिक मंच द्वारा उन्हें 'यंग ग्लोबल लीडर' नामित किया गया. 'न्यूज़ टेलीविज़न अवार्ड्स' में 'बेस्ट बिज़नेस एंकर अवार्ड' भी जीता.&nbsp;</p>
<h3>लैंगिक समानता पर चर्चा कर रहा 'फ्यूचर फीमेल फॉरवर्ड'&nbsp;</h3>
<p>CNBC-TV18 ने लैंगिक समानता (gender equality) पर चर्चा को बढ़ावा देने और महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए 'फ्यूचर फीमेल फॉरवर्ड' (Future Female Forward) पहल शुरू की. शेरीन भान इस पहल के ज़रिये लैंगिक अंतर को दूर कर&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-wins-future-female-forward-award"> महिलाओं </a>को सशक्त (women empowerment) बनाने वाली पहलों को आगे बढ़ा रही है. शो के ज़रिये वह&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indias-first-female-photojournalist-homai-vyarawalla-who-captured-historical-events"> लीडरशिप </a>रोल्स (female leadership) में&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/remembering-indian-female-diplomats-on-international-day-of-women-in-diplomacy-2023">महिलाओं</a> को बढ़ावा देने, कार्यस्थल में लैंगिक भेदभाव (gender discrimination) और असमान वेतन (unequal pay) जैसी चुनौतियों को दूर करने पर ज़ोर देती है.&nbsp;</p>
<p>पत्रकारिता (journalism) के अलावा, भान महिलाओं को सशक्त बनाने वाली कई पहलों का समर्थन कर रही हैं. वह इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य है, जो लैंगिक विविधता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने पर जोर देती है. वह कई युवा महिला उद्यमियों को प्रेरित कर रही है. टॉप पोज़िशन पर पहुंच वह ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को अपने साथ देखने का सपना देखती है. लैंगिक समानता के लक्ष्य के साथ काम करते हुए शिरीन कई यंग<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/black-baza-promoting-sustainable-coffee-production"> एंटरप्रेन्योर्स</a> &nbsp;(young <span class="Y2IQFc" lang="en">entrepreneurs</span>) के लिए रोल मॉडल बनी.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:41:59 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shereen-bhan-bridging-gender-gaps-in-journalism-and-society]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wX8n8XcMBxbA6LQQXouE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wX8n8XcMBxbA6LQQXouE.jpg"/></item><item><title><![CDATA[फेमिनिज्म की राह चलती FM निर्मला सीतारमण ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/first-full-time-female-fm-nirmala-sitharaman-striving-for-women-empowerment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N1azptkumLpe8bAp8NaZ.jpg"><p>भारतीय राजनीति के गतिशील लैंडस्केप में, निर्मला सीतारमण (<span>Nirmala Sitharaman</span>) वह शख्सियत है जो लैंगिक चुनौतियों को तोड़कर, धारणाओं को नया आकार देकर प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में उभरी हैं. भारत की पहली फुल-टाइम महिला वित्त मंत्री (India's first full-time female finance minister) बनने का सफ़र उनके दृढ़ निश्चय और लीडरशिप (leadership) का प्रमाण है. निर्मला सीतारमण की लीडरशिप न केवल पारंपरिक मानदंडों को चुनौती देती है, बल्कि देश में महिला सशक्तिकरण (women empowerment) की विकसित होती कहानी को भी उजागर करती है.&nbsp;</p>
<h2>महिलाओं के लिए&nbsp;बनी&nbsp;रोल मॉडल</h2>
<p>सीतारमण की उपलब्धियां महिलाओं के लिए पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान फील्ड (male-dominated field) में अपनी पहचान बनाने की क्षमता का प्रमाण हैं. सरकार में प्रमुख पदों पर रहकर, वह रोल मॉडल (role model) बनी, जो महिलाओं को&nbsp;<a href="https://www.moneycontrol.com/news/business/economy/need-to-widen-pool-of-women-directors-in-companies-says-finance-minister-nirmala-sitharaman-9188701.html"> राजनीति </a>(politics) और प्रशासन में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं. घरों में जहां अक्सर महिलाओं को पैसों से जुड़े फैसलों से दूर रखा जाता है, वहीं वित्त मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति जटिल आर्थिक मामलों के प्रबंधन में महिलाओं की क्षमताओं के बारे में शक्तिशाली संदेश देती है.</p>
<p>निर्मला सीतारमण ने कहा कि महिलाएं <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">समाज</a> में अपनी स्थिति तभी सुधार सकती हैं जब वे सभी क्षेत्रों में लीडरशिप पोसिशन्स को संभालेंगी. उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/corporate-lawyer-zia-mody-setting-benchmark-in-law-profession">इंडस्ट्री</a> (industry) में नेतृत्व की भूमिका स्वीकार कर, दूसरी महिलाओं के अधिकारों (women's rights) की सुरक्षा के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं. सामाजिक वजहों और आत्मविश्वास में कमी की वजह से महिलाएं नेतृत्व पदों पर नहीं रहना चाहतीं. एक सर्वे ने बताया कि कॉरपोरेट्स के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के कई पद खाली थे क्योंकि इन पदों के लिए योग्य महिलाएं उपलब्ध नहीं थीं.</p>
<h3>"बदलाव परिवारों के भीतर से आना चाहिए"- सीतारमण&nbsp;</h3>
<p>भाषा के ज़रिये अक्सर महिलाओं के प्रति भेदभाव को बढ़ावा दिया जाता है. 'हमने चूड़ी नहीं पहन राखी है', 'लड़कियों की तरह मत रो'- इस तरह की बातें अक्सर सुनने को मिलती है. निर्मला सीतारमण ने कहा कि भाषा को लिंग-संवेदनशील (gender sensitive language) होना चाहिए और गलत भाषा को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए. महिलाओं की सुरक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए काफी नहीं हैं. उनका मानना ​​​​है कि समाज को लड़कियों और <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/famous-female-lawyers-fighting-for-justice-and-equality">महिलाओं</a> पर अत्याचारों को रोकने के लिए विश्वास दिखाना चाहिए. बदलाव परिवारों के भीतर से आना चाहिए और लड़कियों के प्रति समाज का नज़रिया बदलना होगा.</p>
<p>नारीवाद के पश्चिमी मॉडल (westen model of feminism) को अस्वीकार करने की ज़रुरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि नारीवाद महिला-केंद्रित नहीं होना चाहिए. महिलाओं की सुरक्षा और उनमें सुरक्षा की भावना पैदा करने की प्रक्रिया से पुरुषों को बाहर नहीं किया जाना चाहिए. महिलाओं के <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-need-to-have-their-seperate-bank-accounts-said-fm-nirmala-sitharaman">फाइनेंशियल इन्क्लूशन</a> (financial inclusion) और मैटरनिटी बेनिफिट्स (maternity benefits) को बढ़ाने के उनके प्रयास सही दिशा में उठाए गए कदम हैं. निर्मला सीतारमण का योगदान दृढ़ता की शक्ति और सीमाओं को फिर से परिभाषित करने की क्षमता के प्रमाण के रूप में खड़ा है, जो समान समाज की उम्मीद जगाता है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 19 Aug 2023 10:52:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/first-full-time-female-fm-nirmala-sitharaman-striving-for-women-empowerment]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N1azptkumLpe8bAp8NaZ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N1azptkumLpe8bAp8NaZ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[संविधान को आकार देने वाली विजय लक्ष्मी पंडित ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/vijaya-lakshmi-pandit-first-women-president-of-un-general-council-and-architect-of-the-constitution</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZSTpQtRYGv79eMPNQBeg.jpg"><p>सक्रिय राजनीतिक क्षेत्र में अभी भी पुरुषों का वर्चस्व है. बहुत कम महिलाएं अपने कौशल से राजनीतिक जगत (politics) में अपनी जगह बना पाई हैं. इन्हीं में से एक हैं विजय लक्ष्मी पंडित (Vijaya Lakshmi Pandit). प्रसिद्ध नेहरू परिवार (Nehru family) की सदस्य होने के बावजूद, विजय लक्ष्मी पंडित को राजनीतिक क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. &nbsp;पंडित न केवल आज़ादी से पहले भारत में राजनीतिक पद संभालने वाली पहली <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/indian-economist-jayati-ghosh-won-galbraith-award-2023">महिला</a> थी, बल्कि संयुक्त राष्ट्र जनरल काउन्सिल (First Women President of UN General Council) की अध्यक्ष बनने वाली भी पहली महिला थी.&nbsp;</p>
<h2>AIWC का हिस्सा बन विजय लक्ष्मी पंडित ने शुरू किया था राजनीतिक करियर&nbsp;</h2>
<p>विजय लक्ष्मी पंडित वह नाम था जिससे ब्रिटिश शासन कांपता था.अमेरिका (America) जाने के लिए विजय लक्ष्मी पंडित के 1944 के पासपोर्ट (passport) आवेदन ने ब्रिटिश अधिकारियों के लिए एक दुविधा पैदा कर दी. जानी-मानी एंटी-कोलोनियल <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/uda-devi-of-lucknow-a-warrior-in-first-struggle-of-freedom-in-1857">एक्टिविस्ट</a> (anti-colonial activist) विजय लक्ष्मी के इंडिया से बाहर जाने पर डर था कि वह &nbsp;ब्रिटिश शासन के खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर प्रचार करेंगी. और अगर उन्हें जाने की अनुमति न दी जाये तो हिरासत में हुई उनके पति की मृत्यु की बात उजागर हो जाएगी.</p>
<p>विजय लक्ष्मी पंडित का जन्म 18 अगस्त 1900 को इलाहाबाद में हुआ. वह मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru) और स्वरूपरानी थुस्सू की बेटी थीं. राजनीति में उनकी रुचि कम उम्र में ही शुरू हो गई और उन्होंने 16 साल की उम्र में अपनी पहली राजनीतिक बैठक में भाग लिया. दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मजदूरों के साथ व्यवहार के विरोध पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक बैठक का आयोजन उनकी चचेरी बहन, रामेश्वरी नेहरू ने किया था. 30 के दशक की शुरुआत में, वह अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (AIWC) में शामिल होकर उन्होंने राजनीतिक करियर शुरू किया.&nbsp;</p>
<h3>संविधान की 15 महिला आर्कीटेक्ट्स में से एक थी विजय लक्ष्मी</h3>
<p>जिस समय वह कोंस्टीटूएंट असेम्ब्ली (constituent assembly) का हिस्सा बनी, उस वक़्त 299 सदस्यों में से 15 महिलाएं थीं. संविधान की इन 15 महिला आर्कीटेक्ट्स&nbsp; (women architects of the constitution) में वकील से लेकर <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/female-freedom-fighters-who-helped-india-achieve-freedom">स्वतंत्रता सेनानी</a> (<a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/tileswari-barua-was-the-youngest-martyred-during-india-freedom-struggle">freedom fighter</a>) और राजनेता तक शामिल थीं. महिलाओं के रूप में उनके अनुभवों ने संविधान में कुछ हद तक समानता सुनिश्चित की. उनके भाषणों में अल्पसंख्यक <a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/meet-ruchira-kamboj-first-indian-female-permanent-representative-at-the-un">अधिकार,</a> आरक्षण, महिला आरक्षण, धार्मिक शिक्षा और स्कूली शिक्षा जैसे विषय शामिल थे.&nbsp;</p>
<blockquote>
<p>पहली मुलाकात के दौरान चर्चिल (Churchill) ने विजय लक्ष्मी पंडित से कहा, <em>&ldquo;क्योंकि मैंने आपको स्वीकार कर लिया है, इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाओं के बारे में मेरे विचार बदल गए हैं. मैं नहीं चाहता कि आप महिलाओं के दिमाग में विचार डालें."&nbsp;</em></p>
</blockquote>
<p>विजय लक्ष्मी पंडित महिला सशक्तिकरण (women empowerment) की एक मिसाल हैं. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International politics) में आने वाली महिलाओं की पीढ़ी को रास्ता दिखाया. लक्ष्मी पंडित अपने मज़बूत नज़रिये, कड़ी मेहनत और विनम्र व्यवहार के लिए आज भी लोकप्रिय हैं.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 18 Aug 2023 18:12:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/vijaya-lakshmi-pandit-first-women-president-of-un-general-council-and-architect-of-the-constitution]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZSTpQtRYGv79eMPNQBeg.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZSTpQtRYGv79eMPNQBeg.jpg"/></item></channel></rss>