<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ प्रधानमंत्री जन धन योजना]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/prdhaanmntrii-jn-dhn-yojnaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/prdhaanmntrii-jn-dhn-yojnaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 03 Aug 2023 18:40:39 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर ग्रामीण महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/rural-women-breaking-stereotypes-and-recognizing-their-rights</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg"><h2><span>ग्रामीण भारत में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का महत्व</span></h2>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण भारत में महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, महिलाएं रूढ़िवादिता को तोड़कर अपने अधिकारों को पहचान रहीं है. SBI बैंक (<strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance">SBI Bank</a></strong>) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में महिलाओं की राशि में 4,618 रूपए की वृद्धि हुई है, जिससे उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सशक्त बनने का मौका मिल रहा है. अधिकांश महिलाएं प्रमुख डिसीजन मेकर्स के रूप में कार्यभार संभाल कर, अपने आय स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से नए उद्योगों की तलाश में है. इससे उन्हें जॉब क्रिएटर बनने का मौका मिला है.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>लोन (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/arsrlm-providing-loans-to-shg-women-for-their-business">Loan</a>)</strong>, <strong>प्रौद्योगिकी तक पहुंच</strong>, <strong>वर्ल्ड बैंक (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment">World Bank</a>)</strong> जैसी एजेंसीज, <strong>सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (self help groups)</strong> और&nbsp;<strong>नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस (NGO)</strong> और अन्य संस्थान द्वारा अधिक सक्रिय दृष्टिकोण और <strong>प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) </strong>के तहत महिला समूहों को शून्य ब्याज़ के दर पर लोन मिलने से बैंक खातों में तेजी से विस्तार हो रहा हैं. इन्हीं कुछ कारणों की वजह से ग्रामीण महिलाओं में बदलाव की शुरुआत हुई हैं. आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि <strong>ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR)</strong> 2018&nbsp; -19 में 19.7% से बढ़कर 2020-21 में 27.7% हुआ हैं. </span><span>रूरल डिपाजिट में विमेंस डिपॉजिट्स कि संख्या 25% से बढ़कर 2023 में 30% हो गई हैं. अगर हम <strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">PMJDY</a></strong> लाभार्थियों की बात करें तो&nbsp; इसमें 55% से अधिक महिलाएं हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>कुछ वर्षों पहले देखा जाए, तो महिलाएं मुख्य रूप से कृषि के काम में लगीं थीं, लेकिन अब अपने आय के स्तर को बढ़ावा देने के लिए&nbsp; वैकल्पिक रोजगार के लिए नए-नए उद्यमों की तलाश कर रहीं, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे, साथ ही अलग-अलग संसथान और बैंकों के द्वारा दी जा रहीं योजनाएं और कार्यक्रम, उन्हें आर्थिक सहायता दिलाने में मदद कर रहे हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण क्षेत्रों में ये बदलाव उदाहरण के रूप में शाबित हो रहे हैं. ऐसी ही एक कहानी हैं दरभंगा कि रहने वाली कलापा झा की, जिन्होंने अपनी भाभी उमा झा के साथ बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र से अचार और चटनी का ब्रांड स्टोर लांच किया, अब वह अपने परिवार के ख़र्चे खुद संभाल रहीं है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पुरे देश में प्रयास किये जा रहे हैं. इससे महिलाओं में आर्थिक स्वतंत्रता में सुधार आएगा. महिलाएं भी सामर्थ्य और साहस के साथ रूढ़िवादिता को छोड़कर आगे बढ़कर, सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित हो रहीं.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 03 Aug 2023 18:40:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/rural-women-breaking-stereotypes-and-recognizing-their-rights]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला सशक्तिकरण के पथ पर भारत... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/women-led-development-will-lead-to-empowerment-of-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"><p><iframe style="width: 820px; height: 460px;" src="https://www.youtube.com/embed/SfmH-rO7uac" width="820" height="460" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>भारत सरकार जब से इस देश में कार्यरत है, उन्होंने महिला साक्षरता और सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाया है. चाहे वो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना' हो, 'प्रधानमंत्री आवास योजना' हो, या, 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना', हर योजना ने 9 सालों में सिर्फ महिला सशक्तिकरण और कल्याण का परचम लहराया है .</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 25 May 2023 16:09:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/women-led-development-will-lead-to-empowerment-of-india]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला सशक्त तो देश में बरकत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/women-empowerment-will-lead-to-empowerment-of-india-9-years-of-modi-government-led-towards-women-development</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"><p dir="ltr">"<em>जब भी मैं हवाईजहाज देखती थी, हमेशा सोचती थी, की एक दिन मैं भी इसे उडाऊंगी.</em>" यह कहा, ग्यारवी क्लास में पढ़ रहीं कली ने, जिसे बड़ा होकर पायलट बनना है. Science (विज्ञान) की इस छात्रा के सपने जितने बड़े है, उतनी ही लगन और चमक दिखती है इसकी आंखों में. दूसरी तरफ एक और बेटी जिसका नाम अंशिका है, वो भी स्कूल जाती है और बड़ी होकर डॉक्टर बनाने का सपना देखती है. अंशिका की माँ ने बहुत छोटी उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन वो अपनी बेटी को हर वो सुख देना चाहती है जिसकी वो हक़दार है. अंशिका और कली दोनों की कहानियां, किसी को भी काम करने के लिए प्रेरित कर दे. यह दोनों Pardada Pardadi Educational Society की छात्राएं हैं जो गरीब परिवार की बेटियों को पढ़ाती है. उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव अनूपपुर में रहती है ये दोनों बेटियां. प्रधानमंत्री की महिला और बेटियों के लिए बनाई गयी योजनाओं की कामियाबी को दर्शाती है इन बच्चों की कहानी. </p>
<p dir="ltr">भारत सरकार जब से इस देश में कार्यरत है, उन्होंने महिला साक्षरता और सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाया है. चाहे वो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना' हो, 'प्रधानमंत्री आवास योजना' हो, या, 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना', हर योजना ने 9 सालों में सिर्फ महिला सशक्तिकरण और कल्याण का परचम लहराया है. माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के दाखिले का प्रतिशत 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 79.46 प्रतिशत हो गया. प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि कहती हैं- "<em>देश के स्कूलों में लड़कियों का प्रदर्शन लड़को से काफी बेहतर रहता है.</em>" राजनीतिक विश्लेषक और शोधकर्ता डॉ मनीषा प्रियम का मत है- "<em>शिक्षा नीति के लक्ष्य तभी पूरे होते हैं जब सरकारें लड़कियों, महिलाओं और सुविधाहीन सामाजिक वर्गों पर विशेष ध्यान देती हैं.</em>"  </p>
<p dir="ltr">अपोलो अस्पताल की संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ संगीता रेड्डी कहती हैं कि- " <em>मुझे सबसे ज्यादा इस बात का गर्व है जागरूकता बढ़ने से माध्यमिक शिक्षा में जहां पहले 76 प्रतिशत लड़कियों के नाम लिखे थे, वह अब बढ़कर 84 प्रतिशत हो गए हैं.</em>" सरकार महिलाओं को self help group से जोड़ने पर बहुत ज़ोर देती है. इन समूहों का हिस्सा बनकर लाखों महिलाओं की ज़िन्दगी बदल चुकी है. उत्तर प्रदेश की महिलाऐं समूह से जुड़कर नौकरी कर रही है जिनसे उन्हें अपने परिवार को चलाने में काफी आसानी हो रही है. छात्रा कली की मां ने बताया- "<em>मैं SHG से जुडी हुई हूं. इसी कारण मुझे शौचालय की साफ-सफाई का काम मिला. आज मैं छह हजार रुपये कमा लेती हूं.</em>" SHG की सदस्य रानी सिंह कहती हैं- "<em>फायदा हो रहा है और इसीलिए हमने कुछ जानवर खरीद लिए है. अच्छी खासी कमाई भी हो रही है.</em>"</p>
<p dir="ltr"><img style="width: 522px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/M6ezWgHKRtEpSkuwwhOa.jpg" alt="SHG Women in India"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Effectiveness Consortium on Women's Groups </em></span></p>
<p dir="ltr">India Sanitation Coalition और Rothschild and Company, India की चेयरपर्सन नैना लाल किदवई ने कहा- "<em>जो सबसे खास चीज हमने हासिल की है वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हुई है, जिसमें लगभग चार लाख ग्रामीण महिलाओं के SHGs को प्रशिक्षण के जरिए मदद की गई. इस मिशन ने गरीब और वंचित समुदायों की 8.7 करोड़ महिलाओं के 81 लाख self help group तैयार किये गए. SHG का यह अभियान को देश को बदलने में बहुत अहम भूमिका निभाएगा. हमारे SHGs जितने मजबूत होंगे उतना ही माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के लिए उन्हें कर्ज देना आसान हो जाएगा क्योंकि माइक्रोफाइनेंस ज्यादातर SHGs के जरिए ही दिया जाता है.</em>"            </p>
<p dir="ltr">डॉ संगीता रेड्डी कहती हैं- "<em>SHG आंदोलन से महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है और उनको मजबूत नेतृत्व भी मिल रहा है. प्रधानमंत्री का बहुत मशहूर बयान है कि भारत केवल महिला विकास पर नहीं बल्कि महिलाओं की अगुवाई में विकास पर ध्यान दे रहा है.</em>" एक महिला जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना के कारण आज एक घर में रह रही है बताती है- "<em>SHG वालों की तरफ महिलाएं आई और मेरा नाम योजना के तहत लिख कर ले गयी. तब हमें यह मकान मिला. टॉयलेट भी सरकार की तरफ से बना.</em>" सरकार ने पहले कुछ सालों में ही 10 करोड़ शौचालय बनवाए और इसके बाद data सामने आया कि औरतों के ऊपर होने वाले क्राइम में बहुत भारी बदलाव और गिरावट आई. SUGAR कॉस्मेटिक्स की सह-संस्थापक (Co-Founder) विनीता सिंह कहती हैं कि- "<em>यह पक्का है कि अगले 10 साल में महिला नेतृत्व एक्सप्लोड होने वाला है. मेरी जैसी कई इंटरप्रेन्योर 10 साल पहले सोच नहीं सकती थीं कि अपना खुद का बिजनेस बनाकर बड़ा करें.</em>" भारत देश में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू कि गयी सारी योजनाएं महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है. यह सच है कि अभी बहुत बदलाव की गुंजाईश है, लेकिन जिस गति से महिलाएं सशक्तिकरण की और बढ़ रही है, वह बहुत सराहनीय है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 22 May 2023 17:45:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/women-empowerment-will-lead-to-empowerment-of-india-9-years-of-modi-government-led-towards-women-development]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"/></item><item><title><![CDATA["दुनिया में बैंक सखी जैसा कुछ नही"- प्रियंका चोपड़ा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"><p>2016 में प्रियंका चोपड़ा यूनिसेफ की ग्लोबल गुडविल एम्बेसेडर बनी और उसके बाद से ही दुनिया भर में महिला सुरक्षा, आर्थिक आज़ादी और बच्चों के भविष्य निर्माण पर भी काम किये है. प्रियंका, यूनिसेफ के कौशल विकास अभियान से भी जुडी हुई है. महिला अधिकारों की बात वह हमेशा से करती आयी लेकिन गुडविल एम्बेसेडर बनने के बाद उन्होंने इस काम को और तेज़ी से किया.  </p>
<p>महिला सशक्तिकरण के लिए किये गए प्रयासों का चेहरा भी अगर कोई सशक्त महिला बने तो बात ही कुछ और होगी और ये काम प्रियंका बखूबी निभा रहीं है. प्रियंका न केवल भारत बल्कि दुनिया में जाना-पहचाना चेहरा है. इस तरह की आवाज़ अगर भारतीय महिलाओं के अचीवमेंट्स की बात करे, तो वह दूर-दूर पहुंचेगी. प्रियंका ने अपने भारत दौरे पर यही किया जब वो SHG के महत्वपूर्ण अंग, बैंक सखी कार्यक्रम को दुनिया के सामने ले आयीं.  </p>
<p>यूनिसेफ एंबेसेडर प्रियंका चोपड़ा ने भारत के अपने दौरे में महिला सुरक्षा के साथ उनकी वित्तीय स्थिरता और आर्थिक आज़ादी पर बात की. अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया की भारत में हर किसी के पास बैंक अकाउंट हो इसके लिए 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' चलाई गई है. इस तरह बैंक अकाउंट भारत के हर कोने तक पहुंच गए है. लेकिन जिस तरह कुछ इलाको में इंफ्रास्ट्रचर की समस्याएं आज भी मौजूद है, इसलिए इन इलाकों के लिए बैंक कॉरेस्पोंडेंट या बैंक सखी बनाई गई है. इसमें SHG महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है. इन बैंक सखियों के पास एक छोटा डिवाइस होता है साथ ही तीस से पचास हज़ार नकद होते है. उस डिवाइस में फिंगरप्रिंट से लॉगिन करके जिसका अकाउंट है उसका भी बायोमेट्रिक लॉगिन होता है. इस तरह उनके घरों तक पैसा पहुंच जाता है. इस तकनीक के करण महिलाओं को अब दूर एटीएम तक जाना नहीं पड़ता. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/z3CqBZXRsfElpd1typQ9.jpg" alt="Priynka chopra"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>यह सब संभव हुआ है बैंक सखी कार्यक्रम से जिसका बीड़ा SHG महिलाओं ने उठा रखा है. बैंक सखी बनने के बाद इन SHG महिलाओं में आत्मविश्वास तो आया ही है साथ ही इस ज़िम्मेदारी के साथ वो अपना रोज़मर्रा का काम भी आसानी से कर पा रही है. मदद को घर तक पहुँचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. प्रियंका ने अपनी बात ये कह के ख़तम की, "इस तरह का बैंक सखी प्रयास बहुत ही इनोवेटिव है, और इस तरह का कार्यक्रम पूरी दुनिया में आज तक नहीं देखा गया."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 24 Mar 2023 17:30:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[दुनिया के लिए मिसाल है SHG बैंक सखी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhi-program-led-by-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kybo2N6mqQX1I8EF3zdC.jpg"><p dir="ltr"><iframe style="width: 1097px; height: 615px;" src="https://www.youtube.com/embed/GLHJz8Jxuo4?t=12s" width="1097" height="615" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p dir="ltr">यूनिसेफ एंबेसेडर प्रियंका चोपड़ा ने भारत के अपने दौरे में महिला सुरक्षा के साथ उनकी वित्तीय स्थिरता और आर्थिक आज़ादी पर बात की. अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया की भारत में हर किसी के पास बैंक अकाउंट हो इसके लिए 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' चलाई गई है. इस तरह बैंक अकाउंट भारत के हर कोने तक पहुंच गए है. लेकिन जिस तरह कुछ इलाको में इंफ्रास्ट्रचर की समस्याएं आज भी मौजूद है, इसलिए इन इलाकों के लिए बैंक कॉरेस्पोंडेंट या बैंक सखी बनाई गई है. इसमें SHG महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है. इन बैंक सखियों के पास एक छोटा डिवाइस होता है साथ ही तीस से पचास हज़ार नकद होते है. उस डिवाइस में फिंगरप्रिंट से लॉगिन करके जिसका अकाउंट है उसका भी बायोमेट्रिक लॉगिन होता है. इस तरह उनके घरों तक पैसा पहुंच जाता है. इस तकनीक के करण महिलाओं को अब दूर एटीएम तक जाना नहीं पड़ता. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/z3CqBZXRsfElpd1typQ9.jpg" alt="Priynka chopra"></p>
<p dir="ltr">यह सब संभव हुआ है बैंक सखी कार्यक्रम से जिसका बीड़ा SHG महिलाओं ने उठा रखा है. बैंक सखी बनने के बाद इन SHG महिलाओं में आत्मविश्वास तो आया ही है साथ ही इस ज़िम्मेदारी के साथ वो अपना रोज़मर्रा का काम भी आसानी से कर पा रही है. मदद को घर तक पहुँचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. प्रियंका ने अपनी बात ये कह के ख़तम की, "इस तरह का बैंक सखी प्रयास बहुत ही इनोवेटिव है, और इस तरह का कार्यक्रम पूरी दुनिया में आज तक नहीं देखा गया."</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 24 Mar 2023 17:10:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhi-program-led-by-shg-women]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kybo2N6mqQX1I8EF3zdC.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kybo2N6mqQX1I8EF3zdC.jpg"/></item></channel></rss>