<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ प्रियंका चोपड़ा]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/priynkaa-copdddhaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/priynkaa-copdddhaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 04 Aug 2023 13:46:53 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[विशाल भरद्वाज की अनोखी कहानियों के अतरंगी फीमेल केरेक्टर्स ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/vishal-bharadwaj-has-given-the-best-female-characters-of-all-time-to-indian-cinema</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EcSzuxdgWdgYey6yqhxP.PNG"><h2 dir="ltr"><span>अनोखे महिला किरदार है विशाल भरद्वाज की फिल्मों के</span></h2>
<p dir="ltr"><span>एक ऐसे निदेशक जो अपनी फिल्मों में एक अलग ही दुनिया तैयार कर देते है. अपने पर्फेकशन और स्ट्रांग महिला किरदारों के लिए जाने जाते है बॉलीवुड में.&nbsp;<strong>विशाल भरद्वाज, <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/mrunal-thakur-supporting-social-causes-related-to-women-in-real-life" rel="dofollow">बॉलीवुड</a> को सबसे बेहतरीन और अनोखे महिला किरदार</strong> देने के लिए जाने जाते है. मकबूल से लेकर पटाखा तक, अपनी फिल्मों में महिलाओं को दिखाया है <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/tiss-report-lights-camera-time-for-action-recently-released-some-hard-facts-about-women-in-cinema" rel="dofollow">मेल डोमिनेंट</a> दुनिया में उनसे ज़्यादा स्ट्रांग और पावरफुल</strong>.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="maqbool tabu character" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/516x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/LgQXyi3TalcDoRQtf4mR.jpg" style="width: 516px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: ImDB</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>जिस एरा में हर <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/smart-tea-cities-in-assam-will-help-the-small-tea-producers-to-create-better-livelihood" rel="dofollow">निदेशक</a> महिलाओं को एक सिर्फ ग्लेमर का पार्ट समझते थे, <strong>विशाल भारद्वाज की फिल्म मकबूल</strong> आई. इन फिल्म में <strong>निम्मी का किरदार</strong> एक काम्प्लेक्स महिला का दिखाया है, जो जानती थी कि उसे क्या चाहिए. 'जान बोलो' तब्बू का इरफ़ान खान के साथ वाला यह सीन उसकी कॉमप्लेक्ससिटी दिखाने के लिए परफेक्ट है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="ishqiya vidya balan" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/568x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/upzEcptrrO8lMONAYZEo.jpg" style="width: 568px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: NDTV</em></span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>इश्क़िया में विद्या बालन का कैरेक्टर कृष्णा</strong> दोनों मेल कैरेक्टर पर भारी पड़ा. फिल्म में अपनी इच्छाओं को कैसे भी पूरा करना था कृष्णा का एम! भले ही कृष्णा सोसाइटी के रूल्स के हिसाब से बिलकुल भी पोट्रे नहीं की गयी हो, लेकिन उसी में इस कैरक्टर की ब्यूटी छिपी है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="kaminey sweety character" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/572x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/oEShci8lrtPlErlmVTgf.jpg" style="width: 572px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Branderls University</em></span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>कमीने मूवी में प्रियंका चोपड़ा का किरदार स्वीटी</strong> अपनी बात मनवाने के लिए झूठ भी बोलती है, जो कि असल ज़िन्दगी में सब किया करते है. उसका फ़ायरी और फीयर्सी नेचर ही था उस फिल्म की जान. एक गैंस्टर की बहन होने के बावज़ूद अपनी इच्छा को पूरा करने की हिम्मत थी स्वीटी में.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="saat khoon maaf priyanka chopra" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/539x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/GNVyA9t46t8MYWDZPhPO.jpg" style="width: 539px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Photos</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>वही <strong>सात खून माफ़ में सुज़ैन का किरदार</strong> अपने पति की गलतियों क माफ़ करने के बजाय उन्हें खत्म करना प्रेफर करती है. उनका मर्डर कर अपना हक़ जीतती है. भले ही वह किरदार नेगटिव रोल हो, लेकिन उसके प्रति सिम्पैथी फील करी दर्शकों ने.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Haider tabu character" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/538x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/F2JpfwSKlu7AjCLF8mM3.jpg" style="width: 538px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: The New York Times</em></span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>हैदर में तब्बू का किरदार गज़ला</strong> कहानी में खुद की दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए कहानी को अपने हिसाब से मोल्ड करती दिखी है. खुद को प्रायोरिटी पर रखना और आगे बढ़ाना, यह दिखाया है विशाल भरद्वाज के इस कैरेक्टर ने.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>विशाल भरद्वाज की <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/wishing-a-very-happy-birthday-to-the-bold-and-beautiful-kubbra-sait" rel="dofollow">मूवीज़</a> में महिलाओं को मिरर में खुद को देखते हुए बहुत देखा है हमनें. <strong>साथ खून माफ़, हैदर, मकबूल</strong>, इन फिल्मों में कैरेक्टर्स खुद को देखते हुए अक्सर स्माइल करती है. दर्शाना ये चाहा जाता है, कि खुद पर गर्व है उन्हें. दुनिया के हिसाब से जो सही है, ज़रूरी नहीं कि एक लड़की भी उसी बात को सही समझे और समाज के दिखाए रास्ते को चुपचाप अपना ले. वह जब ठान ले तो खुद के हिसाब से पूरी कहानी पलट सकती है. यह सिखाता है <strong>विशाल भारद्वाज का हर एक महिला किरदार</strong>.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 04 Aug 2023 13:46:53 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/vishal-bharadwaj-has-given-the-best-female-characters-of-all-time-to-indian-cinema]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EcSzuxdgWdgYey6yqhxP.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EcSzuxdgWdgYey6yqhxP.PNG"/></item><item><title><![CDATA[जेंडर नही टैलेंट से तय होनी चाहिए पे स्केल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-should-not-be-the-deciding-factor-of-the-pay-scales-in-bollywood-industry</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg"><h1>पे पैरिटी इन बॉलीवुड</h1>
<p>फिल्मी जगत, एक सपना जहां <strong>लाइट्स, कैमरा, एक्शन</strong>, पर हर इंसान की ज़िंदगी चलने और रुकने लगती है इस दुनिया में. बड़े परदे के वो एक्टर्स जिनकी पूरी दुनिया दीवानी है, वो जब सामने आए तो सपना पूरा होने जैसा लगता है. एक कलाकार को जब हम उस बड़ी सी स्क्रीन पर देखते है, तो लगता है इनकी ज़िंदगी कितनी अलग होगी. लेकिन अलसियत में ऐसा कुछ नहीं है. आम लोगों जैसी लाइफ स्टाइलहै इनकी. हां थोड़े प्रिविलाजेस तो होते है, लेकिन इसके अलावा ऐसा कुछ नहीं है जो हमसे अलग हो.</p>
<p>अगर देखा जाए तो सेलेब्रिटीज़ की लाइफ में भी आम लोगों जैसी इशूज़ और कंसर्नस है. सबसे बड़ा कंसर्न जो रिसेंटली और भी ज़्यादा डिस्कशन में आया है वो है <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/tata-technologies-limited-going-to-start-rainbow-program-for-women-workforce-to-enhance-gender-diversity" rel="dofollow"><strong>जेंडर पे गैप</strong></a>. सोच के लगता ही नहीं कि ये कॉर्पोरेट वाला टर्म बॉलीवुड में भी फैला हुआ है. लेकिन सच ये है कि एक एक्ट्रेस को आज भी मूवीज़ करने के लिए एक एक्टर से कम पे किया जाता है.</p>
<h2>जेंडर पे गैप फेस करती बॉलीवुड एक्ट्रेसेस</h2>
<p>महिलाओं को हर जगह ही कम समझना और उनको पुरुषों से कम ऐडवानटेजेस देना, ये एक ट्रेंड सा बन गया है दुनिया में. बॉलीवुड में आज जो एक्ट्रेस आ चुकी है वो इतनी बेहतरीन कलाकार है कि फिल्मों को उनके होते हुए किसी हीरो की ज़रूरत ही नहीं होती. लेकिन आज भी <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-pay-gap-in-india">पे पैरिटी</a> जैसे इशूज़ इंडस्ट्री में आए दिन की बात हो गयी है.</p>
<p><strong>अमीषा पटेल</strong> ने हाल ही में अपनी नयी फिल्म 'ग़दर 2' की रिलीज़ के बाद इंटरव्यू में कहा कि- "<em>मेल एक्टर्स हायर पे डिसर्व करते है, क्यूंकि एक फिल्म उन्ही के कारण चलती है, पे पैरिटी जैसा कुछ नहीं होता.</em>" सवाल ये है ही नहीं कि फिल्म किसके कारण चल रही है, सवाल ये है कि किसी भी कलाकार को उसकी स्क्रीन टाइम और टैलेंट के बेसिस पर क्यों नहीं जज किया जाता?</p>
<h3> बॉलीवुड की फीमेल सेंट्रिक फिल्म्स </h3>
<p><em>राज़ी में आलिया भट्ट, नाम शबाना में तापसी पन्नू, <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indian-female-ips-officers">मर्दानी </a>में रानी मुखर्जी, हाईवे और परी में अनुष्का शर्मा, कहानी में विद्या बालन, बाजीराव मस्तानी और पीकू में दीपिका पादुकोण, द स्काए इज़ पिंक और सात खून माफ़ में प्रियंका चोपड़ा, क्वीन में कंगना रनौत</em>... इन सबने साबित कर दिया है कि फिल्म सिर्फ एक फीमेल एक्ट्रेस चला भी सकती है और उससे करोड़ों की दिलों पर राज भी कर सकती है.</p>
<p><strong>अमीषा पटेल</strong> ने उसी इंटरव्यू में यह भी कहा था कि एक <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/remembering-smita-patil-known-for-her-female-centric-characters-feminism-and-perfection-in-the-bollywood-industry">लीड फीमेल एक्टर </a>की मूवी परफॉरमेंस देखे तो हमेशा एक मेल एक्टर से कम ही मिलेगी. इस तरह के थॉट प्रोसेस सोचने पर मजबूर कर देती है कि एक फीमेल एक्टर इस तरह की बात कैसे बोल रही है? यह सोच इतनी रिग्रेसिव है कि आज महिलाओं की प्रोग्रेस के साथ मैच ही नहीं कर सकती.</p>
<p>और बात आज की नहीं है, 80s और 90s के टाइम पर भी कुछ फिल्में जैसे <strong>मदर इंडिया, चालबाज़, बेटा, कहानी, दामिनी, अर्थ, पिंजर</strong>, कुछ ऐसी मूवीज़ जो अपने वक़्त में चली ही फीमेल लीडस् के कारण थी.</p>
<p><img alt="Equal pay scale for all genders" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/507x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/hyapeT7ZHKeZxCfOpxh7.jpg" class="center" style="width: 507px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Parity Consulting</em></span></p>
<h3>जेंडर बेस्ड पे पर सोच बदलना ज़रूरी</h3>
<p>सोच ये है की स्क्रीन टाइम के हिसाब से एक्टर्स को पे किया जाना चाहिए, लेकिन सच तो ये है की किसी के स्क्रीन टाइम का उनके टैलेंट से कोई रिलेशन नहीं है. पीकू मूवी में दीपिका को अमिताभ बच्चन और इरफ़ान खान से ज़्यादा पे किया गया था. और वह एक सुपरहिट फिल्म रही है. अमिताभ बच्चन को तो शायद ही कोई नहीं जनता होगा. इरफ़ान खान भी उस मूवी के लीड और भारत में बहुत फेमस एक्टर थे. लेकिन बैरियर तोड़ा गया और दीपिका को ज़्यादा पे किया गया.</p>
<p>तो यह कहना कि कोई भी फिल्म एक फीमेल के कारण कभी नहीं चलती, यह कितना सही है? इंडस्ट्री में इतने साल से काम करने वाले लोग ही अगर इस तरह की सोच रखेंगे तो बाहर वालो से क्या ही उम्मीद कर सकते है? यह बात किसी से नहीं छुपी है की महिलाएं और लड़कियां कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है. कुछ फ़ील्ड्स में तो हाल ये है कि लड़कियों की रफ़्तार को मैच ही नहीं कर पा रहे लड़के. चाहे बॉलीवुड की चमक हो या ऑफिस की भागदौड़, सोच बदलनी ज़रूरी है. महिलाओं को अगर <strong>इक्वल राइट्स</strong> देने की बात की जाती है तो, शुरुआत <strong>पे पैरिटी और जेंडर पे गैप को खत्म करने से होनी चाहिए</strong>.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 11 Jul 2023 17:26:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-should-not-be-the-deciding-factor-of-the-pay-scales-in-bollywood-industry]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg"/></item><item><title><![CDATA[दिलजीत दोसांझ बने 'कोचेला' में परफॉर्म करने वाले पहले भारतीय ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/atram-shatram/diljit-dosanjh-performs-at-coachella-2023</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Es80m5G033UW2K5DIHjK.jpg"><p>दिलजीत दोसांझ 'कोचेला' 2023 में परफॉर्म करने वाले पहले भारतीय बने। अमरीकियों ने पंजाबी बीट्स पर जमकर डांस किया । युटुबर  लिली सिंह और अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने भी लिया बीट्स का आनंद उनके साथ पसूरी फेम अली सेठी, राजाकुमारी और रवीना अरोरा ने भी किया परफॉर्म ।</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">Rohan</dc:creator><pubDate>Tue, 18 Apr 2023 19:17:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/atram-shatram/diljit-dosanjh-performs-at-coachella-2023]]></guid><category><![CDATA[अटरम शटरम]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Es80m5G033UW2K5DIHjK.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Es80m5G033UW2K5DIHjK.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बिकिनी की हिस्ट्री ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/who-wore-the-first-bikini</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"><p><iframe style="width: 988px; height: 554px;" src="https://www.youtube.com/embed/I_tjkORod8U" width="988" height="554" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p> </p>
<p>लड़कियों को पढ़ाओ उनको बढ़ाओ, उनकी इज़्ज़त करो , वो किसी से कम नहीं है , लड़कियां जो चाहे वो कर सकती है , उन्हें हर तरह की आज़ादी है, . ऐसे कितनी बातें हम सब हर दिन सुनते होंगे. कितने ही लोग अपने आप को सबसे बड़ा 'फेमिनिस्ट' बताते है. लेकिन आज भी जब एक लड़की स्कर्ट या शॉर्ट्स पहन के बहार निकल तो जाए, तो ज़्यादातर निगाहें उसे पीछे मुड़ के देखेंगी , मन ही मन सवाल उठाये जायेंगे  और कहीं न कहीं चरित्र परिभाषित कर दिया जायेगा. यह तो तथाकथित शहरी हालात है गावों की बात तो छोड़ ही दें.  </p>
<p>किसी भी लोकतांत्रिक आज़ाद देश में सोचने , बोलने , खाने पीने , पहनावे की आज़ादी होनी चाहिए. जब आज़ादी हमारे देश के हर इंसान को बराबर मिली है तो लड़कियों को अपने पसंद के कपडे पहनने से पहले क्यों सोचना पड़ता है ? घर से शॉर्ट ड्रेसेस पहन के निकलने से पहले ही घर वाले बोल देते है कि, 'ये पहन के मत जाओ '. बंदिश घर से ही शुरू होती है और बाहर उस बंदिश पर मुहर लग जाती है.  </p>
<p>अनचाहे ही लड़की खुद से ये सावल पूछने पर मजबूर हो जाती है -  ' कही गलती मेरी ही तो नहीं ? ' लेकिन हर वो नज़र जो उसे मुड़ के देख रही है वो खुद से ये सवाल क्यों नहीं कर रही ? समाज के ठेकेदारों ने तय कर लिया है कि लड़कियां क्या पहनेंगी. अगर आज एक लड़का शॉर्ट्स पहन के बाहर निकले तो कहा जाएगा कि, ' यार शॉर्ट्स कम्फर्टेबल होते है, और गर्मी भी तो कितनी है. ' और वही शॉर्ट्स अगर एक लड़की पहन के निकले तो ?</p>
<p>लड़किया जब सिर्फ शॉर्ट्स या क्रॉप टॉप पहन रही है तब ये हाल है, बिकिनी पहन ले तो हंगामा ही हो जाए. सी बीच हो या स्विमिंग पूल , फिल्म की शूट हो या कोई ऐड की, लड़की बिकिनी पहन तो ले. उसका कैरक्टर असैसिनेशन करने के लिए देश की आधी जनता तैयार होती है. लोग लड़कियों के मामले में हमेशा ये भूल जाते है कि उन्हें भी उतनी ही आज़ादी और हक़ मिला है जितना एक लड़के को. वो जब चाहे, जहां चाहे, जो चाहे वो पहन सकती है.</p>
<p>सिर्फ आज कि पीढ़ी नहीं बल्कि 1966  की फिल्म "एन इवनिंग इन पेरिस" में ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर थीं. उन्होंने भारत में सबसे पहले बिना किसी डर के कैमरा के सामने बिकिनी पहनी जो कि उस वक़्त के हिसाब से एक बहुत ही 'बोल्ड' मूव था. बिकनी में शर्मिला टैगोर जैसी कलाकार को देखकर भारत में उस समय बहुत हलचल मच गयी थी. तब से, भारतीय सिनेमा में कई दूसरी अभिनेत्रियों ने ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनी है, जिनमें "कुर्बानी" (1980) में ज़ीनत अमान और "बॉबी" (1973) में डिंपल कपाड़िया  शामिल है. </p>
<p>फैशन डिज़ाइनर लुइस रेकर्ड सबसे पहले बिकनी क्लोथिंग स्टाइल को लाया था. इन्होंने बिकिनी का नाम ' बिकिनी एटोल ' के नाम पर रखा ,  जहां 4 दिन पहले ही 'नुक्लिअर बम' का परिक्षण किया गया था. भारत में पहनावा पहले से  ही मौसम और हालात पर निर्भर रहा.  हमारे जनजातीय और सदियों पहले के समाज में पहनावे की आज़ादी ज़्यादा थी. विदेशों में बिकिनी पहनावा नया है और इसको फेमिनिस्ट मूवमेंट से जुड़ा हुआ माना गया. हॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी बिकिनी पहनने पर कई ताने नहीं मारे गए है. मैरीलीन मोनरो और मेगन फॉक्स जैसे नाम बिकिनी पहन के ही दुनिया पर छाए लेकिन वो भी लोगो कि सोच से बच नहीं पाई. और ये ही हाल है हमारे देश में जहां आए दिन कोई ना कोई अपने पहनावे को लेकर बेशरम रंग से पुता नज़र आता है.  </p>
<p>तापसी पन्नू , दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा जैसे कई नाम है जिन्हें आज पूरा देश जानता है. ये सब अपनी प्रतिभा देश दुनिया को कई बार साबित कर चुकी है लेकिन फिर भी बात उनके कपड़ों की होती है. विवाद सेलिब्रिटी कल्चर का हिस्सा है , लेकिन महिला सेलिब्रिटी ज़्यादातर अपने कपड़ों को लेकर ही विवादों में घिरती है. इन सेलिब्रिटी महिलाओं को आम लड़कियां अपनी प्रेरणा मानती है, और जब उनकी आइडल ऐसे विवादों में फंसती है तब आम लड़कियों की आज़ादी भी विवाद का उदाहरण देकर दबा दी जाती है. </p>
<p>आज के समय में तो भारतीय फिल्मो में ज़्यादातर एक्ट्रेस बिकिनी पहन के शूट करती है और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स भी आते रहते है.  समय तो बदल गया है और लड़कियों का आत्मविश्वास भी. नहीं बदली है तो सोच , नज़र और मानसिकता जो लड़की के छोटे कपड़ो को देखकर ज़्यादा छोटी हो जाती है. भले ही बदलाव हुए है , आज से 50 साल पहले हम जो सोच भी नहीं सकते थे, वो आज कर रहे है. लेकिन छोटी सोच छोटे कपड़ों पर अभी भी भारी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 03 Apr 2023 18:57:28 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/who-wore-the-first-bikini]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मै चाहे ये पहनू , मै चाहे वो पहनू , मेरी मर्ज़ी… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"><p>लड़कियों को पढ़ाओ उनको बढ़ाओ, उनकी इज़्ज़त करो, वो किसी से कम नहीं है, लड़कियां जो चाहे वो कर सकती हैं, उन्हें हर तरह की आज़ादी है, .ऐसी कितनी बातें हम सब हर दिन सुनते होंगे. कितने ही लोग अपने आप को सबसे बड़ा 'फेमिनिस्ट' बताते हैं. लेकिन आज भी जब एक लड़की स्कर्ट या शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकलती है, तो ज़्यादातर निगाहें उसका पीछा करने लगती हैं, मन ही मन सवाल उठाये जाते हैं और कहीं न कहीं चरित्र परिभाषित कर दिया जाता है. यह तो तथाकथित शहरी हालात है गावों की बात तो छोड़ ही दें.  </p>
<p>किसी भी लोकतांत्रिक आज़ाद देश में सोचने, बोलने, खाने पीने, पहनावे की आज़ादी होनी चाहिए. जब आज़ादी हमारे देश के हर इंसान को बराबर मिली है तो लड़कियों को अपने पसंद के कपड़े पहनने से पहले क्यों सोचना पड़ता है ? घर से शॉर्ट ड्रेसेस पहन के निकलने से पहले ही घर वाले बोल देते हैं, 'ये पहन कर मत जाओ '. बंदिश घर से ही शुरू होती है और बाहर उस बंदिश पर मुहर लग जाती है.  </p>
<p>अनचाहे ही लड़की खुद से ये सावल पूछने पर मजबूर हो जाती है -  ' कही गलती मेरी ही तो नहीं ? ' लेकिन हर वो नज़र जो उसे मुड़ के देख रही है वो खुद से ये सवाल क्यों नहीं कर रही? समाज के ठेकेदारों ने तय कर लिया कि लड़कियां क्या पहनेंगी. अगर आज एक लड़का शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकले तो कहा जाएगा कि, ' यार शॉर्ट्स कम्फर्टेबल होते हैं, और गर्मी भी तो कितनी है. 'और वही शॉर्ट्स अगर एक लड़की पहन के निकले तो ?</p>
<p>लडकियां जब सिर्फ शॉर्ट्स या क्रॉप टॉप पहन रही है तब ये हाल है, बिकिनी पहन ले तो हंगामा ही हो जाए. सी बीच हो या स्विमिंग पूल, फिल्म की शूट हो या कोई ऐड की, लड़की बिकिनी पहन तो ले. उसका कैरक्टर असैसिनेशन करने के लिए देश की आधी जनता तैयार हो जाएगी. लोग लड़कियों के मामले में हमेशा ये भूल जाते हैं कि उन्हें भी उतनी ही आज़ादी और हक़ मिला है जितना एक लड़के को. वो जब चाहे, जहां चाहे, जो चाहे वो पहन सकती है.</p>
<p>सिर्फ आज की पीढ़ी नहीं बल्कि 1966  की फिल्म "एन इवनिंग इन पेरिस" में ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर थीं. उन्होंने भारत में सबसे पहले बिना किसी डर के कैमरा के सामने बिकिनी पहनी जो कि उस वक़्त के हिसाब से एक बहुत ही 'बोल्ड' मूव था. बिकनी में शर्मिला टैगोर जैसी कलाकार को देखकर भारत में उस समय बहुत हलचल मच गयी थी. तब से, भारतीय सिनेमा में कई दूसरी अभिनेत्रियों ने ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनी है, जिनमें "कुर्बानी" (1980) में ज़ीनत अमान और "बॉबी" (1973) में डिंपल कपाड़िया  शामिल है. </p>
<p>फैशन डिज़ाइनर लुइस रेकर्ड सबसे पहले बिकनी क्लोथिंग स्टाइल को लाये थे. इन्होंने बिकिनी का नाम 'बिकिनी एटोल' के नाम पर रखा , जहां 4 दिन पहले ही 'नुक्लिअर बम' का परिक्षण किया गया था. भारत में पहनावा पहले से  ही मौसम और हालात पर निर्भर रहा. हमारे जनजातीय और सदियों पहले के समाज में पहनावे की आज़ादी ज़्यादा थी. विदेशों में बिकिनी पहनावा नया है और इसको फेमिनिस्ट मूवमेंट से जुड़ा हुआ माना गया. हॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी बिकिनी पहनने पर कई ताने नहीं मारे गए है. मैरीलीन मोनरो और मेगन फॉक्स जैसे नाम बिकिनी पहन के ही दुनिया पर छाए लेकिन वो भी लोगो कि सोच से बच नहीं पाई. और ये ही हाल है हमारे देश में जहां आए दिन कोई ना कोई अपने पहनावे को लेकर बेशरम रंग से पुता नज़र आता है.  </p>
<p>तापसी पन्नू , दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, आलिया भट्, प्रियंका चोपड़ा जैसे कई नाम है जिन्हें आज पूरा देश जानता है. ये सब अपनी प्रतिभा देश दुनिया को कई बार साबित कर चुकी है लेकिन फिर भी बात उनके कपड़ों की होती है. विवाद सेलिब्रिटी कल्चर का हिस्सा है, लेकिन महिला सेलिब्रिटी ज़्यादातर अपने कपड़ों को लेकर ही विवादों में घिरती है. इन सेलिब्रिटी महिलाओं को आम लड़कियां अपनी प्रेरणा मानती है, और जब उनकी आइडल ऐसे विवादों में फंसती है तब आम लड़कियों की आज़ादी भी विवाद का उदाहरण देकर दबा दी जाती है. </p>
<p>आज के समय में तो भारतीय फिल्मो में ज़्यादातर एक्ट्रेस बिकिनी पहन के शूट करती है और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स भी आते रहते है. समय तो बदल गया है और लड़कियों का आत्मविश्वास भी. नहीं बदली है तो सोच, नज़र और मानसिकता जो लड़की के छोटे कपड़ो को देखकर ज़्यादा छोटी हो जाती है. भले ही बदलाव हुए है, आज से 50 साल पहले हम जो सोच भी नहीं सकते थे, वो आज कर रहे है. लेकिन छोटी सोच छोटे कपड़ों पर अभी भी भारी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 13:41:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"/></item><item><title><![CDATA["दुनिया में बैंक सखी जैसा कुछ नही"- प्रियंका चोपड़ा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"><p>2016 में प्रियंका चोपड़ा यूनिसेफ की ग्लोबल गुडविल एम्बेसेडर बनी और उसके बाद से ही दुनिया भर में महिला सुरक्षा, आर्थिक आज़ादी और बच्चों के भविष्य निर्माण पर भी काम किये है. प्रियंका, यूनिसेफ के कौशल विकास अभियान से भी जुडी हुई है. महिला अधिकारों की बात वह हमेशा से करती आयी लेकिन गुडविल एम्बेसेडर बनने के बाद उन्होंने इस काम को और तेज़ी से किया.  </p>
<p>महिला सशक्तिकरण के लिए किये गए प्रयासों का चेहरा भी अगर कोई सशक्त महिला बने तो बात ही कुछ और होगी और ये काम प्रियंका बखूबी निभा रहीं है. प्रियंका न केवल भारत बल्कि दुनिया में जाना-पहचाना चेहरा है. इस तरह की आवाज़ अगर भारतीय महिलाओं के अचीवमेंट्स की बात करे, तो वह दूर-दूर पहुंचेगी. प्रियंका ने अपने भारत दौरे पर यही किया जब वो SHG के महत्वपूर्ण अंग, बैंक सखी कार्यक्रम को दुनिया के सामने ले आयीं.  </p>
<p>यूनिसेफ एंबेसेडर प्रियंका चोपड़ा ने भारत के अपने दौरे में महिला सुरक्षा के साथ उनकी वित्तीय स्थिरता और आर्थिक आज़ादी पर बात की. अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया की भारत में हर किसी के पास बैंक अकाउंट हो इसके लिए 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' चलाई गई है. इस तरह बैंक अकाउंट भारत के हर कोने तक पहुंच गए है. लेकिन जिस तरह कुछ इलाको में इंफ्रास्ट्रचर की समस्याएं आज भी मौजूद है, इसलिए इन इलाकों के लिए बैंक कॉरेस्पोंडेंट या बैंक सखी बनाई गई है. इसमें SHG महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है. इन बैंक सखियों के पास एक छोटा डिवाइस होता है साथ ही तीस से पचास हज़ार नकद होते है. उस डिवाइस में फिंगरप्रिंट से लॉगिन करके जिसका अकाउंट है उसका भी बायोमेट्रिक लॉगिन होता है. इस तरह उनके घरों तक पैसा पहुंच जाता है. इस तकनीक के करण महिलाओं को अब दूर एटीएम तक जाना नहीं पड़ता. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/z3CqBZXRsfElpd1typQ9.jpg" alt="Priynka chopra"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>यह सब संभव हुआ है बैंक सखी कार्यक्रम से जिसका बीड़ा SHG महिलाओं ने उठा रखा है. बैंक सखी बनने के बाद इन SHG महिलाओं में आत्मविश्वास तो आया ही है साथ ही इस ज़िम्मेदारी के साथ वो अपना रोज़मर्रा का काम भी आसानी से कर पा रही है. मदद को घर तक पहुँचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. प्रियंका ने अपनी बात ये कह के ख़तम की, "इस तरह का बैंक सखी प्रयास बहुत ही इनोवेटिव है, और इस तरह का कार्यक्रम पूरी दुनिया में आज तक नहीं देखा गया."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 24 Mar 2023 17:30:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"/></item></channel></rss>