<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ राष्ट्रीय आजीविका मिशन]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/raassttriiy-aajiivikaa-mishn</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/raassttriiy-aajiivikaa-mishn" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 22 Jun 2023 16:00:58 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[महिलाओं के जीवन में योगपीठ से बरकत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/patanjali-yogpeeth-with-ministry-of-rural-development-three-day-training-program-for-shg-women-has-ended</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2ti4zsG6Vphwx33rq8WY.jpg"><p dir="ltr"><span>जीवन में ख़ुशी और शांति एक साथ लाने का स्त्रोत है, <strong>योग</strong>. इसे सिर्फ एक्सरसाइज कहना सही नहीं है, क्यूंकि यह ज़िन्दगी को जीने का तरीका सिखाता है. <strong>दिव्य योग पीठ</strong> भी हर इंसान को एक बेहतर ज़िन्दगी देने के लिए कई सालों से काम कर रहा है और इसीलिए हाल ही में <strong>भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट को राष्ट्रीय आजीविका मिशन का नेशनल रिसोर्स आर्गेनाइजेशन बनाया</strong>. पूरे देश में स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किये गए और इसी श्रृंखला में <strong>हिमाचल प्रदेश</strong> के गैर <strong>कृषि कम्युनिटी रिसोर्सेस पर्सन</strong> के समूह का आगमन पतंजलि योगपीठ में हुआ.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="SHG women training for women" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/SkX4O8UbxflsO05FC7up.jpg"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Udaipur Kiran</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>समापन कार्यक्रम में <strong>दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण</strong> ने कहा- "<em>ग्राम को समृद्धि शाली तथा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पतंजलि योगपीठ हर वक़्त काम कर रहा है." समृद्ध ग्राम कार्यक्रम ना केवल गांव को समृद्धशाली बनाता है बल्कि ग्रामीणों की आजीविका को भी बढ़ावा देता है.</em>" पतंजलि योग पीठ का यह प्रशिक्षण तीन दिन चला. इसमें स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को <strong>स्टॉक इन्वेंटरी मैनेजमेंट</strong> से लेकर <strong>ई-कॉमर्स प्लेटफार्म</strong> तक जोड़ने की ट्रेनिंग दी गई. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से उन्हें उत्पादों की क्वालिटी को भारतीय सरकार के बनाए गए पैरामीटर्स के हिसाब से चैक करने का प्रशिक्षण भी दिया गया. कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकजुट होकर <strong>हिमाचल प्रदेश के Self Help Group</strong> को तेजी से आगे बढ़ाने की भी शपत ली गयी. योगपीठ के SHGs का विकास बहुत तेज़ी से होगा. महिलाएं भी अपनी आजीविका बढ़ाते हुए, एक सुखी और समृद्ध जीवन जी पाएंगी. </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 22 Jun 2023 16:00:58 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/patanjali-yogpeeth-with-ministry-of-rural-development-three-day-training-program-for-shg-women-has-ended]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2ti4zsG6Vphwx33rq8WY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2ti4zsG6Vphwx33rq8WY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मशरुम उगाया बिज़नेस बढ़ाया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-santoshi-devi-started-growing-dhingri-mushrooms-with-the-help-of-national-rural-livelihood-mission</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WCMfZ4ukwnSTiPTU7lG4.jpg"><p dir="ltr">महिलाओं के लिए कोई भी कार्य करना मुश्किल नहीं है, यह वे कई बार साबित कर चुकी है. घर के काम करने से लेकर, घर को ही अपना रोजगार बनाने तक, महिलाएं अब हर कार्य में निपुण हो गयी है. <strong>हिमाचल प्रदेश</strong> के करसोग उपमंडल के कलैहणी गांव की संतोषी देवी ने भी ऐसा ही कुछ कर दिखाया. उन्होंने <strong>ढींगरी मशरूम</strong> (Dhingri Mushroom) की जैविक खेती कर खुद को आगे बढ़ाने की राह पकड़ी. संतोषी देवी ने जनवरी 2023 में <strong>खंड विकास कार्यालय करसोग</strong> से <strong>राष्ट्रीय आजीविका मिशन</strong> के तहत मशरूम की जैविक खेती का 10 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त कर घर के एक कमरे में 17 बैगों में Dhingri Mushroom की खेती शुरू की.</p>
<p dir="ltr">आज वे उम्मीद से कहीं ज्यादा ढींगरी मशरूम की फसल उगा पा रहीं है. संतोषी देवी ने चार से पांच बार मशरूम की कटाई करी. संतोषी देवी करसोग बाजार में <strong>हिम ईरा</strong> नाम से दुकान भी चला रही हैं. यहां पर घर में तैयार किए जाने वाले <strong>Organic Dhingri Mushroom</strong> को 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जाता है. संतोषी का कहना है- "<em>इस काम को शुरू करने से पहले, मेरी अपनी कोई आय नहीं थी. घर के कार्यों में ही समय बीत जाता था. मुझे स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हुई महिलाओं के लिए आजीविका मिशन के तहत ढींगरी मशरूम की खेती करने संबंधी प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी खंड विकास कार्यालय करसोेग से मिली. उसके बाद मैंने यह कार्य शुरू किया.</em>" </p>
<p dir="ltr">अब वे इस कार्य से प्रतिमाह चार से पांच हजार और <strong>50 से 60 हजार रुपये वार्षिक आय</strong> अर्जित कर रही हैं. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी सही हुई है. संतोषी देवी ने साबित कर दिया कि मुश्किलें उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी. हर महिला को इनसे सीख लेनी चाहिए और Self Help Group से जुड़कर अपनी आय का स्त्रोत तैयार करना चाहिए.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 26 May 2023 18:03:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-santoshi-devi-started-growing-dhingri-mushrooms-with-the-help-of-national-rural-livelihood-mission]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WCMfZ4ukwnSTiPTU7lG4.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WCMfZ4ukwnSTiPTU7lG4.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गधे के दूध का साबुन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/soap-made-of-donkey-milk</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg"><p><iframe style="width: 1154px; height: 647px;" src="https://www.youtube.com/embed/rxobomcXPWk" width="1154" height="647" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>सुर्ख़ियों में इसीलिए क्योंकि जब पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद मेनका गांधी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्थापित उद्यमिता प्रेरणा महिला लघु उद्योग में पोषाहार बनाने की यूनिट का शुभारंभ करने पहुंची तो अपने भाषण में बोली - "कितने दिन हो गए आप लोगों को गधे देखे हुए ? कम हो गए हैं, ख़त्म हो गए हैं. धोबी का काम भी खत्म हो गया है, अब किसी को गधे से कोई काम नहीं पड़ता, मजदूर हो या धोबी सब लोगों ने अपने संसाधानों को बदल लिया है लेकिन लद्दाख में लोगों ने गधों से दूध निकालना शुरू किया और गधे के दूध से साबुन बनाया. " </p>
<p>मेनका गाँधी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है साथ ही ट्रोल भी उतना ही हो रहा है . उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं  से कहा - " गधे के दूध का साबुन औरत के शरीर को हमेशा सुंदर रखता है." दुनिया के उदहारण देते हुए कहा -  "एक बहुत मशहूर विदेशी रानी 'क्लियोपैट्रा' गधे के दूध में नहाया करती थी,  दिल्ली में गधे के दूध का साबुन 500 रुपए का एक बिक रहा हैं. क्यों ना आप लोग भी गधे के दूध का साबुन बनाए " मेनका गांधी ने सिर्फ गधे के दूध कही नहीं बल्कि पेड़ो को बचाने के लिए भी पहल करने की बात कही .  उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के वक़्त इस्तेमाल कि जाने वाली लड़की कि जगह अगर आप लोग गोबर के कंडे बेचना शुरू करें, तो पेड़ बचेंगे ही और आप लोगो की अच्छीखासी आमदनी भी हो जाएगी." लेकिन ट्रोल और सोशल मीडिया पर छाईं गधे के दूध के कारण.  मेनका गांधी यही नहीं रुकी. उन्होंने हमारे देश में वेटेरनरी डॉक्टर्स की कमी के मुद्दे को भी सबके सामने रखा. मेनका ने लोगों को कहा कि, "मैं नहीं चाहती कि आप लोग सिर्फ जानवरों को पाले, बल्कि उसे पैसा कमाए. स्वयं सहायता समूह बनाए और उसमें अपना पैसा निवेश करें. सिर्फ पशु पालन को ही अपनी आजीविका न बनाए."</p>
<p>यूनाइटेड नेशंस के खाद्य और कृषि संगठन ने भी अपने शोध में पाया कि गधी के दूध में ऐसे प्रोटीन्स होते है जो गाय और भैंस का दूध ना पीने वाले लोगों के लिए लाभदायक है. इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में भी किया जा सकता है. यूरोप में बहुत सी काम करने वाली महिलाईमन अपने नवजात बच्चों को गधी का पेस्चराइज़्ड दूध पिलाती है. भारत में अभी गधी के दूध का इतना प्रचालन नहीं है, लेकिन फिर भी लोगों के सामने बहुत सी बाते आ चुकी है जो गधी के दूध को बहुत अच्छा और इस्तेम्मल करने योग्य मानते है. </p>
<p>देश में भले ही इस बात को मज़ाक में ले रहा हो या ट्रोल आर्मी इस मुद्दे के पीछे लग गई हो , लेकिन इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि गधी का दूध आज देह दुनिया में बहुत महंगा बिक रहा है. इस दूध को कई तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जा रहा है.  ये बात किसी से छुपी नहीं है कि कॉस्मेटिक इंडस्ट्री कितनी बड़ी है और सुंदरता का कारोबार सबसे ज़्यादा फायदेमंद धंधा है. इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों कि महिलाओं को ध्यान देना चाहिए और अपने अपने SHG में गधी के दूध का उपयोग करना चाहिए. इसे वो अपना रोजगार और कारोबार का एक बहुत बड़ा साधान बना सकती है. और शायद SHG महिलाओं के कारण इस जानवर को थोड़ी इज़्ज़त मिल जाए.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 04 Apr 2023 15:33:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/soap-made-of-donkey-milk]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गधा सही मायनों में है पहलवान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/donkey-milk-soap</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg"><p>'गधा' शब्द सुनते से ही सबसे पहली चीज़ जो हमारे दिमाग में आएगी वो है, बेवकूफी. कोई भी ऐसा काम करते हुए दिखे जो बेवकूफी से भरा है, तो हम बिना सोचे समझे उसे गधा या गधी बोल देते है. लेकिन अगर देखा जाए ये जानवर बहुत ही मेहनती जानवरों में से एक है. मजदूरों के हर वज़न को ढोने वाले इसी गधे का नाम हाल ही में बहुत सुर्ख़ियों में है. इसकी बेवकूफी या मजदूरी कि लिए नहीं, बल्कि इस बार इसके दूध के कारण.</p>
<p>सुर्ख़ियों में इसीलिए क्योंकि जब पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद मेनका गांधी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्थापित उद्यमिता प्रेरणा महिला लघु उद्योग में पोषाहार बनाने की यूनिट का शुभारंभ करने पहुंची तो अपने भाषण में बोली - "कितने दिन हो गए आप लोगों को गधे देखे हुए ? कम हो गए हैं, ख़त्म हो गए हैं. धोबी का काम भी खत्म हो गया है, अब किसी को गधे से कोई काम नहीं पड़ता, मजदूर हो या धोबी सब लोगों ने अपने संसाधानों को बदल लिया है लेकिन लद्दाख में लोगों ने गधों से दूध निकालना शुरू किया और गधे के दूध से साबुन बनाया. " </p>
<p>मेनका गाँधी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है साथ ही ट्रोल भी उतना ही हो रहा है . उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं  से कहा - " गधे के दूध का साबुन औरत के शरीर को हमेशा सुंदर रखता है." दुनिया के उदहारण देते हुए कहा -  "एक बहुत मशहूर विदेशी रानी 'क्लियोपैट्रा' गधे के दूध में नहाया करती थी,  दिल्ली में गधे के दूध का साबुन 500 रुपए का एक बिक रहा हैं. क्यों ना आप लोग भी गधे के दूध का साबुन बनाए "  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/bCnKoahcbJ89D4hCn4MO.jpg" alt="donkey soap"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Photo Credits: TV9 Telugu</em></span></p>
<p>मेनका गांधी ने सिर्फ गधे के दूध कही नहीं बल्कि पेड़ो को बचाने के लिए भी पहल करने की बात कही .  उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के वक़्त इस्तेमाल कि जाने वाली लड़की कि जगह अगर आप लोग गोबर के कंडे बेचना शुरू करें, तो पेड़ बचेंगे ही और आप लोगो की अच्छीखासी आमदनी भी हो जाएगी." लेकिन ट्रोल और सोशल मीडिया पर छाईं गधे के दूध के कारण.  मेनका गांधी यही नहीं रुकी. उन्होंने हमारे देश में वेटेरनरी डॉक्टर्स की कमी के मुद्दे को भी सबके सामने रखा. मेनका ने लोगों को कहा कि, "मैं नहीं चाहती कि आप लोग सिर्फ जानवरों को पाले, बल्कि उसे पैसा कमाए. स्वयं सहायता समूह बनाए और उसमें अपना पैसा निवेश करें. सिर्फ पशु पालन को ही अपनी आजीविका न बनाए."</p>
<p>गधी के दूध से बने साबुन कि बात सिर्फ मेनका गाँधी तक ही सीमित नहीं है.आज हमारे सामने कई ऐसे उदाहारण है जहां गधी का दूध कारोबार और रोज़गार का जरिया बना.  'भारतीय महिला ऑर्गनिक उत्सव' में भी पूजा कौल नाम कि एक छात्रा ने गधे के दूध से बने साबुन को लोगों के सामने रखा. उन्होंने कहा  - "यह साबुन यूरोप में बड़े बड़े ब्यूटी ब्रांड्स इस्तेमाल करते है. गधी के दूध में स्किन नरिशमेंट, एंटी-एजिंग और स्किन-हीलिंग प्रॉपर्टीज़ होती है. यह हमारी स्किन में हुए डिफेक्ट्स, जो कि स्किन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने से हुए है, को सुधारने में मददगार है. " कोरोना काल में भी गधी के दूध को '10000 रूपए लीटर' बेचा गया, यह कहकर कि इसमें इम्युनिटी को बढ़ाने वाले तत्त्व होते है. </p>
<p>यूनाइटेड नेशंस के खाद्य और कृषि संगठन ने भी अपने शोध में पाया कि गधी के दूध में ऐसे प्रोटीन्स होते है जो गाय और भैंस का दूध ना पीने वाले लोगों के लिए लाभदायक है. इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में भी किया जा सकता है. यूरोप में बहुत सी काम करने वाली महिलाईमन अपने नवजात बच्चों को गधी का पेस्चराइज़्ड दूध पिलाती है. भारत में अभी गधी के दूध का इतना प्रचालन नहीं है, लेकिन फिर भी लोगों के सामने बहुत सी बाते आ चुकी है जो गधी के दूध को बहुत अच्छा और इस्तेम्मल करने योग्य मानते है. </p>
<p>देश में भले ही इस बात को मज़ाक में ले रहा हो या ट्रोल आर्मी इस मुद्दे के पीछे लग गई हो , लेकिन इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि गधी का दूध आज देह दुनिया में बहुत महंगा बिक रहा है. इस दूध को कई तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जा रहा है.  ये बात किसी से छुपी नहीं है कि कॉस्मेटिक इंडस्ट्री कितनी बड़ी है और सुंदरता का कारोबार सबसे ज़्यादा फायदेमंद धंधा है. इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों कि महिलाओं को ध्यान देना चाहिए और अपने अपने SHG में गधी के दूध का उपयोग करना चाहिए. इसे वो अपना रोजगार और कारोबार का एक बहुत बड़ा साधान बना सकती है. और शायद SHG महिलाओं के कारण इस जानवर को थोड़ी इज़्ज़त मिल जाए.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Apr 2023 15:25:33 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/donkey-milk-soap]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/krWzAADOb6Qq9ZHDT5DI.jpg"/></item></channel></rss>