<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ राष्ट्रपति मुर्मू]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/raassttrpti-murmuu</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/raassttrpti-murmuu" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 03 Aug 2023 17:04:44 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA['जनजाति भाषा और परंपरा को संजोना लेखकों का कर्तव्य': मुर्मू ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/at-unmesh-utkarsh-president-murmu-said-writers-need-to-preserve-tribal-tradition</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg"><h1><strong>जनजाति भाषा और परंपरा को संजोना लेखकों का कर्तव्य : मुर्मू</strong>&nbsp;</h1>
<p>"<strong>जनजाति भाषा (Tribe Language) </strong>और <strong>परंपरा </strong>(Tradition) को संजोना लेखकों का कर्तव्य है. इसे संरक्षित करना चाहिए.&nbsp;<strong>साहित्य (Literature)</strong> जुड़ता और जोड़ता है. <strong>सांस्कृतिक</strong> <strong>(Culture)</strong> धरोहर की तरफ अभी <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/role-of-women-in-water-sanitation-and-hygiene">देश</a> में बहुत ध्यान दिया जा रहा है. भारत को इस साल <strong>जी-20 (G 20) </strong>के आयोजन का मौका दिया गया.<strong>रवींद्र नाथ टैगोर</strong> <strong>(Rabindranath Tagore)&nbsp;</strong>की एक कविता में ज़िक्र है- जिसमें साहित्य ही सत्य का संभाव है." यह बात <strong>राष्ट्रपति (President)</strong> <strong>द्रोपदी<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/being-a-woman-or-a-tribal-not-a-disadvantage-says-president-murmu-while-adressing-shg-conference"> मुर्मू </a>(Dropadi Murmu) </strong>ने<strong> भोपाल</strong> <strong>(Bhopal)</strong> में आयोजित<strong> उन्मेष-उत्कर्ष</strong> आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि कही.उन्होंने कहा-<em> "साहित्य आईना दिखाता है. साहित्य ने मानवता को बचा रखा है. साहित्य वह माध्यम से जिससे अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है."</em><br><strong>साहित्य अकादमी </strong>और<strong> संगीत-नाटक अकादमी</strong> का यह आयोजन 6 अगस्त तक आयोजित होगा. &nbsp;</p>
<h2><strong>जनजाति समुदाय की धरती मध्यप्रदेश</strong>&nbsp;</h2>
<p><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/president-draupadi-murmu-applauds-the-success-of-kudumbshree-shg-in-kerala">राष्ट्रपति</a> मुर्मू</strong> <strong>(Murmu)</strong> ने आगे कहा- "साहित्य ने मानवता को बचा रखा है. साहित्य वह माध्यम से जिससे अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है. हमारे यहां 700 से ज्यादा जनजाति&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">समुदाय</a> और उससे अधिक भाषाएं हैं. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा जनजाति समुदाय के लोग रहते. साहित्य-कला-संस्कृति के ऐसे आयोजन यहां होना होना चाहिए. संथाली और उड़िया मेरी भाषा रही. अब देश की हर भाषा मेरी है. संथाली में प्रभुनाथ और रामदास जैसे साहित्यकारों ने अच्छा लिखा. अच्छे साहित्य का अनुवाद दूसरी भाषाओं में भी होना चाहिए." उन्होंने <strong>जयशंकर प्रसाद</strong>,<strong> बंकिमचंद्र </strong>जैसे रचनाकारों का भी ज़िक्र किया.</p>
<p><img alt="President Murmu sahitya" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/542x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Lf6JSZ2n2s3Po44qCOyT.JPG" style="width: 542px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>&nbsp;भोपाल में उन्मेष-उत्कर्ष आयोजन के एक दिन पहले मुख्य मार्गों से कलाकारों ने कला यात्रा निकाली (Image Credit :Mujeeb Faruqui)&nbsp; &nbsp;</em></span></p>
<h3>भारत का एक-एक पत्थर शालिग्राम</h3>
<p><strong>राष्ट्रपति मुर्मू</strong> ने कहा - <em>"उन्मेष का अर्थ आंखों का खुलना और जागरण भी होता है. स्वतंत्रता संग्राम में साहित्यकारों ने अपनी भूमिका निभाई. भारत का एक एक पत्थर भगवान शालिग्राम है और एक एक स्थान जगन्नाथपुरी है."</em><br>इस मौके पर <strong>मुख्यमंत्री (CM)</strong> <strong>शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan)&nbsp; </strong>ने कहा -"हमारे यहां जब वेद और रिचाएं रच दी गई थीं, तब दुनिया में कोई सोच नहीं सकता था.उन्मेष और उत्कर्ष जैसे आयोजन सारी दुनिया को एक करने में सक्षम होते हैं. <strong>राज्यपाल (Governor)</strong> <strong>मंगूभाई</strong> <strong>पटेल</strong> <strong>(Mangubhai Patel)</strong> ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया.</p>
<h3>भोपाल में जुटे 103 भाषाओं के 575 लेखक शामिल&nbsp;</h3>
<p><strong>भोपाल</strong> में आयोजित इस <strong>साहित्य-कला </strong>उत्सव में 103 भाषाओं के 575 <strong>लेखक (Writer)</strong> शामिल हुए. <strong>भोपाल </strong>में देशभर के 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के जनजाति व लोक कलाकार ने भाग लिया. इस अवसर पर <strong>साहित्य</strong> और <strong>संस्कृति एकेडमी </strong>के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय संयुक्त सचिव और <strong>संस्कृति मंत्री (Culture Minister)</strong> <strong>उषा ठाकुर</strong> <strong>(Usha Thakur)</strong> भी मौजूद थीं. <strong>मध्यप्रदेश साहित्य एकेडमी</strong> के <strong>अध्यक्ष विकास दवे (Vikas Dave) </strong>ने कहा- <em>"यह हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है, जहां वैश्विक स्तरीय आयोजन हो रहा.यहां देशभर के साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों की प्रस्तुति को देखने का अवसर मिलेगा."</em> राष्ट्रपति के सामने लोक संस्कृति प्रस्तुति भी दी गई. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 03 Aug 2023 17:04:44 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/at-unmesh-utkarsh-president-murmu-said-writers-need-to-preserve-tribal-tradition]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg"/></item><item><title><![CDATA[राष्ट्रपति मुर्मू ने की ट्राइबल महिलाओं से बात ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/rashtrapati-talks-to-tribal-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0TIE8gwso3mv4jOR1y9J.jpg"><p dir="ltr">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनकर इतिहास रच दिया. वह स्वतंत्रता के बाद पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति बनाने के साथ, शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति बनी. राष्ट्रपति, संथाल समुदाय से आती हैं. देश में भील और गोंड के बाद संथाल जनजाति की आबादी आदिवासियों में सबसे ज़्यादा है. उनके गृह राज्य ओडिशा, इससे लगे झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में शेड्यूल ट्राइब्स के लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है. द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने का जश्न देश के 100 से ज्यादा आदिवासी बहुल जिलों और 1 लाख 30 हजार गांवों में मनाया गया. ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक सुदूर गांव से राष्ट्रपति भवन तक के सफर में उनकी प्राथमिकताओं में जनजातीय कल्याण सबसे महत्वपूर्ण था. वो आदिवासी समुदायों के सबसे पिछड़े व्यक्तियों तक पहुंची. </p>
<p dir="ltr">राष्ट्रपति मुर्मू आदिवासी समुदायों के लिए प्रेरणा होने के साथ उनके लिए बहुत कुछ कर भी रहीं है. जैसे अभी हाल ही में त्रिपुरा की अपनी यात्रा के दौरान, वह एक चाय बागान में काम करने वाली आदिवासी महिलाओं से मिलीं. राष्ट्रपति भवन के ऑफिशियल हैंडल ने बैठक के बाद ट्वीट किया- "मैं अगरतला में दुर्गाबाड़ी टी एस्टेट की महिला चाय श्रमिकों के साथ बातचीत करके प्रसन्नता हुई. वे राज्य की सामाजिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं. मैंने उनसे उनके बच्चों, विशेषकर लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देने का आग्रह किया." </p>
<p dir="ltr">इन बैठकों के बाद राष्ट्रपति कार्यालय से जारी ऑफिसियल रिलीज़ के अनुसार, मुर्मू ने लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़ और तेलंगाना के अपने दौरे पर पर्टिक्यूलरली वल्नरेबल ट्राइबल ग्रुप्स (पीवीटीजी) से भी मुलाकात की है. विशिष्टतः असुरक्षित जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Groups-PVTGs) को विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह भी कहा जाता है. पीवीटीजी भारत में फ़ैली जनजातियों के ऐसे समूह होते हैं जो जनजातियों से सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अत्यधिक संवेदनशील हैं. सरकार ने एक पीवीटीजी सूची तैयार की हैं जो लुप्तप्राय जनजातीय समूहों के जीवन स्तर को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की सोच से बनाई गई थी. जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 75 पीवीटीजी 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं. अधिकारियों ने कहा कि इन समुदायों में विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का स्तर कम है. राष्ट्रपति जनजातीय समुदाय के सदस्यों को स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा के लाभों और अपने बच्चों को स्कूल भेजने के महत्व के बारे में जागरूक भी करते हैं. इन पीवीटीजी पर भी राष्ट्रपति मुर्मू का विशेष ध्यान हैं. </p>
<p dir="ltr">राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान कुछ दिनों पहले फूलों के रंगों के साथ गाने और नाच से सराबोर था.  राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने निवास पर देश भर में स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने वाली सैकड़ों महिलाओं नेको बुलाया था. इनमें से अधिकांश महिलाएं जनजातीय पृष्ठभूमि से आती हैं, जिनमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम, मेघालय, झारखंड, गुजरात, सिक्किम और राष्ट्रपति के गृह राज्य ओडिशा से पीवीटीजी शामिल हैं. मुर्मू प्रत्येक समूह से मिलने के लिए रुकीं और बात की. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की एक विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की महिलाओं ने जब उन्हें बीरन माला (बांस से बनी माला) भेंट की. मुर्मू ने महाराष्ट्र के भील समुदाय और छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवास समुदाय की महिलाओं से बात करने के लिए भी समय निकाला. राष्ट्रपति का ये लकदम हमारे देश की जनजातियों को आगे लाने का एक बहुत बड़ा कदम हैं. इन जनजातियों के पास बहुत कौशल हैं लेकिन इनके पास उतना साधान नहीं हैं. राष्ट्रपति मुर्मू के इस कदम से इन जातियों को अब साधान मिलने का भी प्रबंध हो गया हैं.  </p>
<p dir="ltr"> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 14 Apr 2023 18:27:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/rashtrapati-talks-to-tribal-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0TIE8gwso3mv4jOR1y9J.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0TIE8gwso3mv4jOR1y9J.jpg"/></item></channel></rss>