<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ रतलाम]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/rtlaam</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/rtlaam" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 25 Apr 2023 15:59:15 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[रतलाम कर रहा स्वच्छता में NO.1 बनने की तैयारी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"><p>इंदौर ने तो स्वच्छता में बाज़ी मारली है, और अब इंदौर से 140 किलोमीटर दूर रतलाम जिला भी स्वच्छता परिसरों का निर्माण कर स्वच्छता की इस रेस में आगे निकलने की तैयारी  कर रहा है. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रतलाम जिले मेें लगभग 6000 स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये करीब 66800 परिवारों को लाभ मिल रहा है. महिलाओं के ये समूह कई तरह की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. इस बार इन समूहों ने स्वच्छता की कमी को दूर करने की ठानी. ये समूह जिले में सार्वजनिक स्थानों पर 79 स्वच्छता परिसरों का संचालन और देखभाल कर रहे हैं. जिले में कुल 145 स्वच्छता परिसर बनाने की योजना है. </p>
<p>परिसर बस स्टैंड, हाट बाजारों इत्यादि सार्वजनिक जगहों पर बनाए जा रहे हैं. अगले महीने 66 और परिसर भी बनकर तैयार हो जाएंगे. निर्माण के साथ-साथ खुले में शौच न करने का संदेश भी दिया जा रहा है. परिसर के बाहर दो दुकानें भी बनाई जा रही हैं जिसका संचालन स्थानीय समूह कर रहे हैं. परिसरों की सफाई की ज़िम्मेदारी स्वसहायता समूहों ने उठाई. इसके बदले समूह को दुकानों का किराया नहीं देना होगा. जिले की कई पंचायतों में 465 स्क्वेयर फीट में स्वच्छता परिसरों का निर्माण 45 लाख रुपयों की लागत से किया जा रहा है. परिसर के बाहर बनी दुकानें 36-38 स्क्वेयर फीट की हैं. </p>
<p>समूह की महिलाओं ने यहां किराना, सलून, होटल,और टेलरिंग की दुकानें शुरू की हैं. कुछ परिसर फोरलेन सड़क पर बने हैं जिसकी वजह से समूहों को फायदा मिलेगा. रूपनगर फंटा, बड़ोदिया, कराडिया, करिया,बडावदी,आक्याकला, रुपडी सहित 79 गांवों के स्वच्छता परिसरों में दुकानें शुरू हो चुकी हैं. योजना के अनुसार आलोट में 33, बाजना में 25, जावरा में 20, पिपलोदा में 20, रतलाम 31, सैलाना में 16<br>स्वच्छता परिसर होंगे. साथ ही जिले में  ई-रिक्शा से कचरा संग्रहित कर गांव की स्वच्छता को बढ़ाने का काम भी चल रहा है. 84 गांवों में ही बने सेग्रीगेशन शेड में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम कर रही हैं. </p>
<p>न केवल रतलाम में स्वछता बढ़ेगी, पर महिलाओं और उनके परिवारों को इस रोज़गार से मदद भी मिल सकेगी. समय-समय पर समूहों ने सरकार की योजना को ज़मीन पर लागू करवाने में मदद की है. इस बार भी इस फैसले से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना को नई ऊंचाई मिल सकेगी.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 25 Apr 2023 15:59:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"/></item><item><title><![CDATA[ज़ुबान पर चढ़ा 'दीदी' का चटाकेदार अचार ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-making-tasty-pickle</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"><p><iframe style="width: 1428px; height: 802px;" src="https://www.youtube.com/embed/aIhFPSn3K8Q" width="1428" height="802" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>रतलाम जिले का गांव धामनोद में लगे डोम में पैर रखने की जगह तक नहीं. मंच पर मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह खड़े हैं. उनके भाषण के पहले संचालक ने नाम पुकारा सविता देवी चौहान को अधिकारी सम्मान से मंच पर लाए. भीड़ में खड़ी सविता अपनी तीन अन्य साथियों के साथ मंच पहुंची. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कहते हैं - आप ही हो न अचार वाली दीदी. सविता ने कहा - जी सर.  इतना कहते ही उसने अपने हाथों में पकड़ी अचार की पैक बॉटल सीएम को दे दी. </p>
<p>कलोरी खुर्द गांव की सविता चौहान  की कहानी बड़ी दिलचस्प है. सविता और उसके पति हीरालाल चौहान खेत मजदूरी के लिए जाते. सविता कहती है -"मेरा छोटा बेटा गोदी में था. मजदूरी कर पेट भरना ही किस्मत में था. मैं  चिलचिलाती धूप में बच्चे को पेड़ के नीचे झोली बांध कर सुलाती थी. बड़ा बेटा घर पर छोड़ कर आती. "</p>
<p>और एक दिन कलोरी खुर्द में जिला पंचायत की टीम पहुंची. ऐसे ही मजदूरों और कुछ वहां मौजूद महिलाओं को पंचायत सदस्य सरकारी स्कीमों को समझा रहे थे. अपने पैरों पर कैसे खड़ा हुआ जाए ,कैसे स्वाभिमान की ज़िंदगी जी सकें,यह सब शामिल था. शाम हो रही थी महिलाएं मजदूरी से लौट रही थी. उनमें सविता भी शामिल थी. पंचायत में चहल-पहल देख वह भी रुकी. खुद का रोजगार और कमाई की बात सुनते ही वहीं बैठ गई. हालांकि सरकारी स्कीम का सुनकर महिलाओं के गले बात पूरी तरह नहीं उतरी. सविता ने वहां बैठे अधिकारियों से कहा -"साब, परेशान तो बहुत हैं. पर हमारे पास पैसा है न कोई धंधा शुरू करने का आइडिया." अधिकारियों के समझाने पर सविता राजी  हो गई. समूह बनाया. नाम रखा जय माता दी महिला स्वसहायता  समूह. अध्यक्ष बनी पवन कुमारी.</p>
<p>सविता आगे बताती हैं -"वह अपनी साथियों के साथ थोक में केरियां खरीद कर लाईं.अचार का मसाला और  पैकेजिंग के लिए  शीशियां और सिल्वर क्वाईन भी सस्ते दामों पर इंदौर से मंगाए,जिससे मुनाफा ज्यादा मिल सके."आजीविका नाम से ये अचार स्टोर और हाट बाजार में बेच रहें हैं.सविता आगे कहती है -" पहले खेत मालिकों से कर्ज लेना पड़ता था. अब बेहतर जिंदगी जी रही है. समूह का लोन भी वह समय पर उतार चुके हैं.पति भी मजदूरी छोड़ अचार के प्रचार और सप्लाई में सहयोग करने लगे.अब उन्हें दस से 15 हजार रुपए की कमाई हो जाती है.अचार दो सौ किलो रुपए बिक रहा है.सीज़न खत्म होने पर इंदौर कोल्ड स्टोर से केरी मंगा ली. </p>
<p>महिलाओं की मेहनत ने समूह बना कर देश में अलग पहचान बना ली. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां के समूहों के उत्पादों की सराहना की है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 02 Mar 2023 17:32:29 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-making-tasty-pickle]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[अचार वाली दीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"><p dir="ltr">रतलाम जिले का गांव धामनोद में लगे डोम में पैर रखने की जगह तक नहीं. मंच पर मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह खड़े हैं. उनके भाषण के पहले संचालक ने नाम पुकारा सविता देवी चौहान को अधिकारी सम्मान से मंच पर लाए. भीड़ में खड़ी सविता अपनी तीन अन्य साथियों के साथ मंच पहुंची. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कहते हैं - आप ही हो न अचार वाली दीदी. सविता ने कहा - जी सर.  इतना कहते ही उसने अपने हाथों में पकड़ी अचार की पैक बॉटल सीएम को दे दी. आप को और अवसर और मार्केट के तरीके सिखाए जाएंगे. अधिकारियों को कह दिया है. धीरे -धीरे  वह मंच से उतर गयी. वह अभी तक कल्पना नहीं कर पा रही थी ,उसने अपनी साथियों को गले लगा कर वहीं हग कर लिया. तीन साल पहले तक खेतों में दूसरे के यहां मजदूरी करने और अपनी मेहनत के पैसे मांगने के लिए गिड़गिड़ाने वाली सविता मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने खड़ी थी. पूरे स्वाभिमान के साथ. उसकी प्रशंसा के पुल बांधे जा रहे थे. अब वह गांव में अचार वाली दीदी के नाम से पहचानी जाती है. </p>
<p dir="ltr">कलोरी खुर्द गांव की सविता चौहान  की कहानी बड़ी दिलचस्प है. सविता और उसके पति हीरालाल चौहान खेत मजदूरी के लिए जाते. सविता कहती है -"मेरा छोटा बेटा गोदी में था. मजदूरी कर पेट भरना ही किस्मत में था. मैं  चिलचिलाती धूप में बच्चे को पेड़ के नीचे झोली बांध कर सुलाती थी. बड़ा बेटा घर पर छोड़ कर आती. " ये कोई एक दिन की बात नहीं थी. इतनी मेहनत और पसीना हर रोज बहाने के बाद भी घर चलना मुश्किल हो रहा था. पति -पत्नी समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इस ज़िंदगी कि मुश्किलों से कैसे निजात पाई जाए.</p>
<p dir="ltr">और एक दिन कलोरी खुर्द में जिला पंचायत की टीम पहुंची. ऐसे ही मजदूरों और कुछ वहां मौजूद महिलाओं को पंचायत सदस्य सरकारी स्कीमों को समझा रहे थे. अपने पैरों पर कैसे खड़ा हुआ जाए ,कैसे स्वाभिमान की ज़िंदगी जी सकें,यह सब शामिल था. शाम हो रही थी महिलाएं मजदूरी से लौट रही थी. उनमें सविता भी शामिल थी. पंचायत में चहल-पहल देख वह भी रुकी. खुद का रोजगार और कमाई की बात सुनते ही वहीं बैठ गई. हालांकि सरकारी स्कीम का सुनकर महिलाओं के गले बात पूरी तरह नहीं उतरी. सविता ने वहां बैठे अधिकारियों से कहा -"साब ,परेशान तो बहुत हैं. पर हमारे पास पैसा है न कोई धंधा शुरू करने का आइडिया." अधिकारियों के समझाने पर सविता राजी  हो गई. समूह बनाया. नाम रखा जय माता दी महिला स्वसहायता  समूह. अध्यक्ष बनी पवन कुमारी.</p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती है- "सप्ताह में मिलने वाली मजदूरी के चंद रुपए भी गिनने और हिसाब करना नहीं आता था. समूह में 13 सदस्यों के साथ सब सीखा." अब थी रोजगार शुरू करने की बार. आजीविका मिशन के सुझाव और SHG ने  जीवन बदल दिया. अचार बनाने और पैकिंग के लिए मिशन के अधिकारी चार सदस्यों में शामू बाई ,अनुषा ,धापू बाई सहित सविता को मंदसौर ले गए जहां अचार बनाने के साथ कई सावधानियां सिखाई. जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने बताया कि इन महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण के लिए मंदसौर ले गए ,जहां विशेषज्ञों ने इन्हें तैयार किया. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3ee3TGUXt6D1ppwuuJra.jpeg" alt="Ratlam aachar wali didi ">    </p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती हैं -"वह अपनी साथियों के साथ थोक में केरियां खरीद कर लाईं.अचार का मसाला और  पैकेजिंग के लिए  शीशियां और सिल्वर क्वाईन भी सस्ते दामों पर इंदौर से मंगाए,जिससे मुनाफा ज्यादा मिल सके."आजीविका नाम से ये अचार स्टोर और हाट बाजार में बेच रहें हैं.सविता आगे कहती है -" पहले खेत मालिकों से कर्ज लेना पड़ता था. अब बेहतर जिंदगी जी रही है. समूह का लोन भी वह समय पर उतार चुके हैं.पति भी मजदूरी छोड़ अचार के प्रचार और सप्लाई में सहयोग करने लगे.अब उन्हें दस से 15 हजार रुपए की कमाई हो जाती है.अचार दो सौ किलो रुपए बिक रहा है.सीज़न खत्म होने पर इंदौर कोल्ड स्टोर से केरी मंगा ली. </p>
<p dir="ltr">रतलाम कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि  "जिले में आजीविका मिशन कि योजना दूसरों जिले की तुलना में देरी से शुरू हुई. बावजूद महिलाओं की मेहनत ने समूह बना कर देश में अलग पहचान बना ली. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां के समूहों के उत्पादों की सराहना की है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 02 Mar 2023 17:20:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"/></item></channel></rss>