<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Ruchira Kamboj]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/ruchira-kamboj</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/ruchira-kamboj" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 03 May 2024 17:58:05 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[दुनिया को महिला सशक्तिकरण का भारतीय मॉडल समझाती Ruchira Kamboj ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/ruchira-kamboj-shines-while-explaining-the-indian-model-of-women-empowerment-to-the-world-4533609</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png"><p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) की कहानी केवल उनके पदों और नियुक्तियों की सूची तक सीमित नहीं है; यह उनकी वकालत और मानवाधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी आवाज उठाने के प्रयासों में भी परिलक्षित होती है. उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिनिधि के रूप में सम्मान के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को दर्शाया है, और साथ ही साथ <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830" rel="dofollow">समाजिक न्याय और लैंगिक समानता के महत्व</a> को भी बल दिया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">न्याय के लिए UN में उठाई आवाज</h2>
<p style="text-align: justify;">2022 में, रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) को संयुक्त राष्ट्र (United Nations UN) में भारत का स्थायी प्रतिनिधि (Permanent Representative/Ambassador of India) नियुक्त किया गया, जो उनके करियर का एक चरम बिंदु है. इस पद पर उनकी नियुक्ति ने उनकी व्यक्तिगत योग्यताओं को तो मान्यता दी ही, साथ ही यह भी दिखाया कि भारतीय विदेश सेवा में महिलाएं कितनी प्रभावी और प्रेरणादायक हो सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) ने विश्व स्तर पर विशेष रूप से UN में महिलाओं के अधिकारों की वकालत की है. उन्होंने विदेश नीति में महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान को महत्व देने के लिए बल दिया है. उनके अनुसार, सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सच्ची प्रगति संभव है.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में समान भागीदारी प्रदान करने से भी संबंधित है. उन्होंने इस दिशा में कई पहल की हैं, जिससे महिलाएं न केवल अपने निजी जीवन में, बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी सशक्त बन सकें.</p>
<h2 style="text-align: justify;">अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला का प्रतिनिधित्व</h2>
<p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिनिधि (Permanent Representative of India at UN) के रूप में, रुचिरा ने ना सिर्फ भारत की संस्कृति और विचारों का प्रसार किया, बल्कि विश्व समुदाय के सामने भारतीय महिलाओं की क्षमता और योगदान को भी उजागर किया. उनकी यह पहल भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति नज़रिये को सकारात्मक बनाने में मदद कर रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120">रुचिरा कंबोज</a> (Ruchira Kamboj) का जीवन और करियर उन सभी महिलाओं के लिए एक ज्वलंत उदाहरण है जो समाज में बदलाव लाने और दुनिया को बेहतर बनाने की चाह रखती हैं. उनकी आवाज और कार्य ने ना केवल भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Services IFS) में, बल्कि वैश्विक दर्शन में भी महिलाओं की उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत किया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">IFS की Woman Topper रहीं है Ruchira Kamboj</h2>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) का जन्म एक संस्कृति समृद्ध परिवार में हुआ था, जहां शिक्षा और मूल्यों को बहुत महत्व दिया जाता था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया. उनकी शिक्षा ने ना केवल उन्हें ज्ञान की दृष्टि प्रदान की, बल्कि एक मजबूत नैतिक कम्पास भी दिया जिसने उनके करियर को आकार दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">1987 में भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Services) में All Women Ranking में टॉप करने के साथ उनके चयन ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी. रुचिरा की पहली पोस्टिंग पेरिस में हुई थी, जहां उन्होंने फ्रांस और यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया. उनकी कार्यशैली में जो विशेषता रही, वह थी उनका संवाद कौशल और रणनीतिक सोच.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में वापस आने पर, उन्होंने विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और भूटान में भारतीय राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने भारत के विदेशी संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">अपनी विचारधाराओं से बनीं सभी के लिए inspiration</h2>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) का जीवन और करियर युवा पीढ़ी, विशेषकर युवा महिलाओं के लिए एक उदाहरण है. उनकी कठिनाइयों को पार करने की कहानी, उनकी उपलब्धियां और उनका नेतृत्व अपने सपनों को साकार करने की अमिट सीख देता है.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) सिर्फ एक राजदूत नहीं हैं, बल्कि वह एक विजनरी भी हैं जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की आवाज को मजबूती से उठाया है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/statement-by-ambassador-ruchira-kamboj-at-the-57th-commission-on-population-and-development-4531066">जनसंख्या और विकास पर 57वें आयोग में राजदूत रुचिरा कंबोज का वक्तव्य</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Fri, 03 May 2024 17:58:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/ruchira-kamboj-shines-while-explaining-the-indian-model-of-women-empowerment-to-the-world-4533609]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png"/></item><item><title><![CDATA[जनसंख्या और विकास पर 57वें आयोग में राजदूत रुचिरा कंबोज का वक्तव्य ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/statement-by-ambassador-ruchira-kamboj-at-the-57th-commission-on-population-and-development-4531066</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/W0vTBmq3p820rWK58fXA.png"><p style="text-align: justify;">मातृ स्वास्थ्य (maternal health) सुधार के लिए भारत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. जिसका प्रमाण मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio) में उल्लेखनीय कमी है, जो 2011-13 में 167 से घटकर 2018-20 में 97 हो गया. शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) 28 पर है, जो एसडीजी (Sustainable Development Goals SDG) की दिशा में प्रगति दिखता है. आशा कार्यक्रम (ASHA program) के माध्यम से, भारत ने स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप अब लगभग 89% जन्म चिकित्सा संस्थानों में होते है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Menstrual Health Products तक पहुंच में हुआ सुधार</h2>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana PMMVY) ने 33.1 मिलियन से अधिक माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे बच्चे के जन्म के बाद स्वास्थ्य लाभ और आराम को बढ़ावा मिला. इसके अतिरिक्त, भारत द्वारा सैनिटरी नैपकिन (sanitary napkins) पर करों को समाप्त करने और उनकी कीमत को प्रति पैड लगभग एक पेंस (one pence) तक कम करने से मासिक धर्म स्वास्थ्य उत्पादों (menstrual health products) तक पहुंच में सुधार हुआ है.</p>
<p style="text-align: justify;">पोषण ट्रैकर (POSHAN Tracker) 101 मिलियन से अधिक बच्चों और माताओं की भलाई पर नज़र रखता है, जिसे आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) का साथ मिलता है, इस तरह का व्यापक चिकित्सा पैकेज वंचित महिलाओं की सहायता करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830">यौन हिंसा से निपटने में भारत के रुख पर UNSC में बोली Ruchira Kamboj</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">PMJAY से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा</h2>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana PMJAY), दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, सबसे गरीब 40% आबादी को लक्षित करती है. इसमें प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये से अस्पताल में भर्ती को कवर करते है और 22.7 मिलियन से अधिक अस्पताल में प्रवेश की सुविधा प्रदान की जाती है. यह योजना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य पहल और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत करती है, जिससे एक एकीकृत स्वास्थ्य आईडी प्रणाली बनती है. यह पहल न केवल घरेलू खर्चों को कम करती है, जो सालाना लाखों लोगों को गरीब बना देता है, बल्कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को भी आगे बढ़ाता है, जो अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल स्थापित करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme) ने गहन मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush) के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण कवरेज का काफी विस्तार किया है, जिसमें 38.6 मिलियन बच्चों और 9.68 मिलियन गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">भारत करता है SDG परियोजनाओं का समर्थन</h2>
<p style="text-align: justify;">शिक्षा में, हमारा वर्तमान ध्यान गुणवत्ता में सुधार, माध्यमिक और तृतीयक शिक्षा का विस्तार, और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और लिंग अंतर को कम करने के लिए कौशल विकास (skills development) पर है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao) कार्यक्रम जागरूकता पैदा करके और लड़कियों की शिक्षा की वकालत करके महिला सशक्तिकरण (women empowerment) को बढ़ावा देता है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत दक्षिण-दक्षिण (South-South) और त्रिकोणीय सहयोग (Triangular Cooperation) के माध्यम से सतत विकास के लिए अपनी वैश्विक साझेदारी को मजबूत कर रहा है. भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी निधि (India-UN Development Partnership Fund) के माध्यम से, भारत उन परियोजनाओं का समर्थन करता है जो एसडीजी (SDG) के ढांचे के भीतर आईसीपीडी (International Conference on Population and Development ICPD) एजेंडा की प्रगति पर नज़र रखने के लिए डेटा की उपलब्धता में सुधार करते है.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रभावी विकास योजना के लिए जनसांख्यिकीय रुझानों को अपनाना, बढ़ती आबादी को समायोजित करने के लिए विस्तार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करना और तेजी से टिकाऊ विकास की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करना, कुशल संसाधन आवंटन सुनिश्चित करना आवश्यक है.</p>
<p style="text-align: justify;">2030 एजेंडा के साथ-साथ आईसीपीडी (ICPD Programme) कार्रवाई कार्यक्रम को क्रियान्वित करने के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण कार्रवाई के लिए एक मजबूत आधार स्थापित करता है. अंत में, मैं एसडीजी की समीक्षा और कार्यान्वयन के संदर्भ में, आईसीपीडी एजेंडे के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराती हूं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120">'भारत में चमकती है नारी शक्ति' UN में बोली राजदूत रुचिरा कांबोज</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 02 May 2024 17:45:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/statement-by-ambassador-ruchira-kamboj-at-the-57th-commission-on-population-and-development-4531066]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/W0vTBmq3p820rWK58fXA.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/W0vTBmq3p820rWK58fXA.png"/></item><item><title><![CDATA['भारत में चमकती है नारी शक्ति' UN में बोली राजदूत रुचिरा कांबोज ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0M6pSWAjTK9ZB43cTSHE.jpg"><p style="text-align: justify;">United Nations UN में भारत की स्थायी प्रतिनिधि Ruchira Kamboj ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर देश के फोकस पर प्रकाश डाला, जिसके माध्यम से देश विश्व स्तर पर Gender Equality का समर्थन कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत या पूर्ण विकसित भारत के दृष्टिकोण में महिलाओं की पूर्ण और समान भागीदारी की आवश्यकता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">UN में Ruchira Kamboj ने Women Empowerment को युग की नई शुरुआत बताया</h2>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत की <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/maharashtra-tetwali-village-namita-namdev-bhurkood-bamboo-kandils-trains-tribal-women-1704859">G20</a> अध्यक्षता ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर गहरा ध्यान केंद्रित करते हुए Women Empowerment के एक नए युग की शुरुआत की है, जो एक बदलाव का प्रतीक है.&nbsp;</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/remembering-indian-female-diplomats-on-international-day-of-women-in-diplomacy-2023">Ruchira Kamboj</a> ने कहा, "<em>यह भारत में महिलाओं द्वारा किया जा रहा विकास और प्रगति है. अमृत कल की अवधारणा के माध्यम से, जहां नारी शक्ति चमकती है, भारत ने पिछले साल G20 को विश्व स्तर पर महिलाओं की प्रगति की दिशा में मार्गदर्शन किया.</em>"</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">कम्बोज ने दोहराया कि G20 में भारत की अध्यक्षता ने छह प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सुनिश्चित किए और 86 आभासी बैठक की, जो Gender Equality के लिए आशा की किरण बन गई. भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का है, जिसमें महिलाओं की पूर्ण और समान भागीदारी आवश्यक है. भारत सरकार महिलाओं की सार्थक भागीदारी की अपार शक्ति को पहचानती है, जो महिला विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ रही है.</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा, "<em>हम यह सुनिश्चित करने की उम्मीद करते हैं कि महिलाएं योगदानकर्ता के रूप में एक विकसित राष्ट्र का नेतृत्व करेंगी. विकास लाभों के निष्क्रिय प्राप्तकर्ताओं के बजाय योगदानकर्ताओं के रूप में इसके महत्व पर जोर देते हुए, कंबोज ने कहा, महिलाओं को उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और उद्यमशीलता-पूर्ण स्पेक्ट्रम, बोलने के लिए संबोधित करके सशक्त बनाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति लागू की जा रही है. इन पहलों का उद्देश्य भारत के सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को आकार देने में लैंगिक न्याय, समानता और महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना है.</em>"</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि 759 वन-स्टॉप सेंटरों का एक मजबूत नेटवर्क एकीकृत समर्थन और सहायता प्रदान करता है, जिससे 8.3 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित होती हैं. एक और उदाहरण देते हुए, कंबोज ने कहा, 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम, जो कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के मूल कारणों को लक्षित करता है, के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात में प्रति 1000 पुरुषों पर 918 से 933 महिलाओं तक सुधार हुआ है. हमारी शिक्षा प्रणाली नई शिक्षा नीति के माध्यम से लिंग संवेदनशील पाठ्यक्रम और आवश्यकता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च शिक्षा में लड़कियों और लड़कों के लिए सकल नामांकन अनुपात में समानता आती है.'.</p>
<p style="text-align: justify;">आगे, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत वैश्विक स्तर पर <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/deepa-vijayaraghavan-bringing-change-to-the-tech-world-3987073">STEM</a> (Science, Technology, Engineering and Mathematics) विषयों में 43 प्रतिशत के साथ महिलाओं के उच्चतम अनुपात में से एक है.</p>
<p style="text-align: justify;">लैंगिक गरीबी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत JAM ट्रिनिटी और वित्तीय समावेशन लक्ष्यों जैसी पहलों के माध्यम से निरंतर, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए 55 प्रतिशत से अधिक खाते महिलाओं के पास हैं. प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान को रेखांकित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, डिजिटल साक्षरता के महत्व को पहचानते हुए, 52 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने इस अभियान में नामांकन कराया है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, स्वयं सहायता समूह (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-and-child-development-ministry-haas-initiated-poshan-pakhwada-2024-which-is-starting-from-today-till-23rd-march-2024-4318777">Self Help Group</a>) लगभग 100 मिलियन महिलाओं को जोड़ते है. इसने ग्रामीण आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">बजट पर प्रकाश डालते हुए कंबोज ने कहा कि इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, इस वित्तीय वर्ष के लिए नवीनतम आवंटन 37.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है. मातृ स्वास्थ्य एक प्राथमिकता बनी हुई है. भारत में मातृ मृत्यु अनुपात में वर्तमान में 167 से 97 तक उल्लेखनीय गिरावट आई है. आशा कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से फ्रंटलाइन स्वास्थ्य देखभाल 3.31 करोड़ से अधिक माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करके गर्भवती माताओं का समर्थन करती है.</p>
<p style="text-align: justify;">मुद्रा योजना पर आगे प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से संपार्श्विक-मुक्त ऋण पांच गैर-कृषि व्यवसायों में से एक महिला उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले 45 प्रतिशत विनिर्माण उद्यमों का समर्थन करते हैं. स्टैंड अप इंडिया और स्टार्टअप इंडिया योजनाओं से महिला उद्यमियों को लाभ हुआ है, महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए 10 प्रतिशत धनराशि आरक्षित है.</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने जोर देकर कहा, '<em>भारत ने दस करोड़ घरों के लिए स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन, 14 करोड़ घरों के लिए सुरक्षित नल का पानी और 13 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण किया है, जिससे समय, गरीबी और महिलाओं पर देखभाल का बोझ कम हुआ है. इसके अलावा, भारत में सैनिटरी नैपकिन पर अब 100 प्रतिशत कर छूट है और इसे सरकारी दुकानों के माध्यम से एक रुपये प्रति पैड पर बेचा जा रहा है, जिससे पहुंच बढ़ गई है.</em>"</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए, कंबोज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में 14 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, जो पंचायतों और नगर निगमों में प्रतिनिधियों की कुल संख्या का 46 प्रतिशत हैं. महिला आरक्षण विधेयक 2023, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है, जो जमीनी स्तर पर पंचायत से लेकर केंद्र में संसद तक महिला नेताओं को सशक्त बनाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बात पर जोर देते हुए कि आज भारत में महिलाएं आसमान जीत रही हैं.</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">कंबोज ने कहा, '<em>भारत में नागरिक उड्डयन में 15 प्रतिशत महिला पायलट हैं, जो वैश्विक औसत 5 प्रतिशत से काफी अधिक है. संख्या हर दिन बढ़ रही है, लेकिन हम यहीं नहीं रुकेंगे. विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हमें अभी मीलों चलना है.</em>"</p>
</blockquote>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">निष्ठा गर्ग</dc:creator><pubDate>Wed, 20 Mar 2024 16:30:03 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0M6pSWAjTK9ZB43cTSHE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0M6pSWAjTK9ZB43cTSHE.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला डिप्लोमेट्स बना रहीं बेहतर, समान, सशक्त दुनिया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/remembering-indian-female-diplomats-on-international-day-of-women-in-diplomacy-2023</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3UFH1Z0e63M7LtRgP48M.png"><p>आज की दुनिया में देश डिप्लोमेसी के दम पर, सरहदों पार अपनी छाप छोड़ रहे हैं. डिप्लोमेसी (diplomacy) की बदौलत हम शान्ति, प्रगति, और समानता के साझा लक्ष्यों पर एकसाथ काम कर पा रहे हैं. अपनी समझ, दृढ़ निश्चय, और काबिलियत से महिला डिप्लोमेट्स देश का प्रतिनिधित्व ग्लोबल मंच पर कर रही हैं. ये महिलाएं रूढ़िवादिता की सरहदों को पार कर इंटरनेशनल रिलेशन के नए आयाम छू रही हैं. चोनिरा बेलियप्पा मुथम्मा (C.B. Muthamma) भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली पहली महिला थीं. वह भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Sevice) में शामिल होने वाली और डिप्लोमेट बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं. उन्होंने कई लड़कियों को इस फील्ड में अपनी जगह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. </p>
<p>मुथम्मा से लेकर अरुंधति घोष (Arundhati Ghosh), निरुपमा राव (Nirupama Rao), मीरा शंकर (Meera Shankar), मीरा कुमार (Meira Kumar), सुजाता सिंह (Sujata Singh) से लेकर रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) ने डिप्लोमेसी की फील्ड में अपने काम से पहचान बनाई. पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) जैसी महिला राष्ट्राध्यक्षों ने दुनिया के सामने अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में अहम भूमिका निभाई. </p>
<p>रॉयल एकेडमी ऑफ साइंस इंटरनेशनल ट्रस्ट (RASIT) द्वारा आयोजित 2023 के IDWID उद्घाटन फोरम के लिए विषय, "बाधाओं को हटाना, भविष्य को आकार देना: सतत विकास के लिए कूटनीति में महिलाएं" (“Breaking Barriers, Shaping the Future: Women in Diplomacy for Sustainable Development”) चुना गया. राजनयिक भूमिकाओं में भाग लेने वाली महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की लिए ज़रूरी हैं. </p>
<p>डिप्लोमेसी में लैंगिक समानता (gender equality) की दिशा में भारत आज़ादी के समय से ही काम कर रहा है. विजया लक्ष्मी पंडित (<span>Vijaya Lakshmi Pandit</span>) और हंसा जीवराज मेहता (<span>Hansa Jivraj Mehta</span>) जैसी महिलाएं उन डिप्लोमेट्स में से थीं जिन्होंने जेंडर रोल्स को चुनौती दी और डिप्लोमेसी की दुनिया में कदम रखा. विजया लक्ष्मी पंडित ने 1953 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा. इन ट्रैल्ब्लैज़र महिलाओं ने भारतीय महिलाओं की आने वाली पीढ़ियों को डिप्लोमेसी में प्रवेश करने का रास्ता दिखाया. 2021 में, विदेश मंत्रालय ने रीवा गांगुली दास (<span>Riva Ganguly Das</span>) को जर्मनी में पहली महिला राजदूत और शांभवी शर्मा (<span>Shambhavi Sharma</span>) को गिनी गणराज्य में पहली महिला राजदूत नियुक्त किया. इन महिलाओं का चयन उच्च रैंकिंग पदों पर लैंगिक समानता हासिल करने के लिए भारत के मज़बूत इरादों को दर्शाता है.</p>
<p>महिला डिप्लोमेट्स (women diplomats) का योगदान शांति स्थापना (peace keeping), जलवायु परिवर्तन (<span>climate change</span>), मानवाधिकार (<span>human rights</span>), आर्थिक सशक्तिकरण (financial empowerment) और सांस्कृतिक आदान-प्रदान (cultural exchange) सहित कई क्षेत्रों में फैला है. अपनी डिप्लोमेसी स्किल्स से, भारतीय महिलाओं ने मुश्किल भू-राजनीतिक चुनौतियों (geo -political challenges) को दूर करने में मदद की और वैश्विक मंच (global stage) पर भारत के दृष्टिकोण (Indian perspective) और प्राथमिकताओं (priorities) की प्रभावी ढंग से वकालत की है. </p>
<p>विदेश सेवा में 1,115 अधिकारियों में से 253 महिलाएं हैं, जिनमें से 10 राजदूत और चार उच्चायुक्त हैं. ये आंकड़ें बताते है कि डिप्लोमेसी की फील्ड में आज भी महिलाओं की भागीदारी काफी कम है. इनकी संख्या को बढ़ाकर भारत और दुनिया का महिला सशक्तिकरण (women empowerment) का लक्ष्य पूरा हो सकेगा. महिला डिप्लोमेट्स लैंगिक समानता, कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी, और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे महिलाओं से जुड़े मुद्दों को हकीकत में बदलने के लिए काम करेंगी. महिला डिप्लोमेट्स के ज़रिये समान, शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व बनाने का सपना पूरा हो सकेगा.</p>]]>
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