<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ रुचिरा कंबोज]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/ruciraa-knboj</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/ruciraa-knboj" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 15 Jun 2024 13:40:49 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[देश में महिला IFS की भर्ती में बढ़ोतरी, 2014 से 2024 में 6.6 % बढ़त ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-in-ifs-has-increased-in-past-10-years-rom-2014-to-2024-the-percentage-had-increased-by-6-point-6-percent-4759593</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/f07eET4ZVWDV5igYovsW.png"><p style="text-align: justify;">कहते है घर की महिला अगर आगे बढ़ रही है तो घर आगे बढ़ता ही है. तो ये बात अगर हम ऐसी की ऐसी देश की तरक्की पर भी लागू करे तो? देश की महिला अगर आगे बढ़ेगी तो ही देश का कल्याण संभव है. अब बात करते है एक ऐसे पेशे के बारे में जिसमें पिछले 10 सालों में बढ़त देखने को मिली है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">IFS में बढ़ रही महिलाओं की भर्ती</h2>
<p style="text-align: justify;">भारतीय विदेश सेवा (IFS) में महिलाओं की भर्ती लगातार बढ़ रही है. 2014-2022 की अवधि में इसमें 6.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह &nbsp;एक सकारात्मक बदलाव है. हालांकि अभी भी थोड़ी कसर बाकी है यह कहा जा सकता है क्योंकि बड़े या शीर्ष पदों पर महिलाओं की नियुक्ति में अभी भी कमी है. आंकड़ों के अनुसार, 2014 के IFS बैच में 31.2 प्रतिशत (32 में से 10) महिलाएं थीं, वहीँ 2022 में यह संख्या बढ़कर 37.8 प्रतिशत (37 में से 14) हो गई.</p>
<p style="text-align: justify;">विशेष रूप से, 2018, 2019 और 2020 में, विदेश सेवा में महिला भर्ती का प्रतिशत 40 प्रतिशत से अधिक रहा.</p>
<p style="text-align: justify;">2022 बैच की एक युवा महिला IFS अधिकारी ने एक इंटरव्यू में कहा, "मैं इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देखती हूं, खासकर क्योंकि IFS में महिला भर्ती का प्रतिशत आमतौर पर IPS जैसी सेवाओं से अधिक होता है."</p>
<h2 style="text-align: justify;">पहले से काफी बदले है हालात</h2>
<p style="text-align: justify;">स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में, विदेश सेवा में महिला अधिकारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उन्हें अक्सर "कठिनाई" पदों या संघर्ष क्षेत्रों के लिए नहीं चुना जाता था और उन्हें शादी करने से पहले भारतीय सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, जबकि उनके पुरुष सहयोगियों के लिए ऐसा नहीं था.</p>
<p style="text-align: justify;">सी.बी. मुथम्मा उन अग्रणी महिला राजनयिकों में से एक थीं जिन्होंने 1979 में सुप्रीम कोर्ट में इन नियमों को सफलतापूर्वक चुनौती दी. जब पूर्व राजदूत रुचि घनश्याम 1982 में IFS में शामिल हुईं, तो वे 15 के बैच में चार महिलाओं में से एक थीं. उनके भर्ती के समय तक महिलाओं पर प्रतिबंध कम हो चुके थे.</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">"<em>15 के बैच में उन चार लड़कियों के लिए कोई बड़ी शर्त नहीं थी. लेकिन 80 के दशक के बाद से IFS ने एक लंबा सफर तय किया है. बड़े पदों पर महिलाओं पर प्रतिबंध काफी हद तक कम हो गया था. मैंने खुद 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इस्लामाबाद में काम किया है.</em>" वे बताती है.</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">घनश्याम ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में राजनीतिक, प्रेस और सूचना के परामर्शदाता के रूप काम किया था.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/the-story-of-indian-women-empowerment-echoed-from-un-platform-4544375">UN के मंच से गूंजी भारत के महिला सशक्तिकरण की कहानी</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">2014 से बदले हालात</h2>
<p style="text-align: justify;">2005 से 2008 के बीच भर्ती किए गए <a href="https://theprint.in/diplomacy/women-recruits-in-ifs-up-by-6-6-from-2014-2022-but-top-posts-largely-out-of-reach/2128863/">84 IFS अधिकारियों</a> में से 24 महिलाएं थीं, यानी 29% भर्ती. 2012 के बैच में कुल 36 में से 16 महिला अधिकारी थीं, जो सबसे अधिक महिला अधिकारियों का बैच था. कुल 731 IFS अधिकारियों में से 135 महिला अधिकारी हैं, जो IFS में महिलाओं का कुल प्रतिशत 18.50% बनाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">2014 से हर साल औसतन चार महिलाएं IFS में जोड़ी जाने लगी. राजनीतिक वैज्ञानिक कांती बाजपाई का कहना है कि भर्ती की संख्या को अगर तिगुना कर दिया जाए तो बेहतर लिंग समानता हासिल की जा सकती है. कांती बाजपाई पहले भी IFS के छोटे आकार और इसकी "अत्यधिक चयनात्मक" भर्ती नीति के बारे में अपने विचार रख चुकी है.</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">"<em>भारत की विदेश सेवा की ताकत केवल 800 है, जबकि चीन में 5,000 से अधिक अधिकारी हैं. यदि IFS के लिए कम से कम 100 उम्मीदवार चुने जाते हैं, तो इससे सिविल सेवाओं में अधिक महिलाएं आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं और विदेश सेवा को 50/50 लिंग समानता के करीब लाया जा सकता है,</em>" बाजपाई ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया.</p>
</blockquote>
<h2 style="text-align: justify;">शीर्ष पदों पर नहीं है महिलाएं</h2>
<p style="text-align: justify;">दुनिया भर में भारतीय राजनयिक मिशनों की अगुवाई करने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या पर नजदीकी नजर डालने से एक ज्यादा उत्साहजनक तस्वीर सामने नहीं आती.</p>
<p style="text-align: justify;">वर्तमान में, महिलाएं आठ भारतीय राजनयिक मिशनों का नेतृत्व कर रही हैं, लेकिन उच्च-प्रोफ़ाइल राजधानी शहरों में नहीं. इनमें आर्मेनिया, कंबोडिया, साइप्रस, इटली, मॉरीशस, माल्टा, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स, पोलैंड और सर्बिया शामिल हैं. रुचिरा कंबोज, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला राजदूत थीं, ने 1 जून को सेवानिवृत्त होने पर न्यूयॉर्क में इस पद से इस्तीफा दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">स्थिति 2008 से बहुत अलग है जब महिलाएं दुनिया भर में 25 से अधिक भारतीय मिशनों और वाणिज्य दूतावासों का नेतृत्व कर रही थीं, जिसमें प्रमुख राजधानी शहर भी शामिल थे. उस समय, सुजाता सिंह ऑस्ट्रेलिया में, मीरा शंकर बर्लिन में और निरुपमा राव चीन में सेवा दे रही थीं. सिंह और राव दोनों बाद में विदेश सचिव बनीं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">भारतीय महिलाएं जो रह चुकी है IFS officer&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">पिछले वर्षों में IFS में महिलाओं की serives बढ़ी है, बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसमें शामिल होना शुरू किया है. यह है वह <a href="https://ifsdream.weebly.com/women-in-ifs.html#:~:text=Out%20of%20the%20total%20731,women%20in%20IFS%20to%2018.50%25.">लिस्ट</a> जिसमें भारतीय विदेश सेवा में महिलाओं के बारे में कई बातें आपको पता चलेंगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सी.बी. मुथम्मा</h3>
<p style="text-align: justify;">1949 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने वाली पहली महिला है सी.बी. मुथम्मा. वे पहली भारतीय महिला राजदूत/उच्चायुक्त बनीं जिन्हें भारतीय सिविल सेवाओं में लैंगिक समानता के लिए उनकी सफल लड़ाई के लिए जाना जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सुरजीत मान सिंह</h3>
<p style="text-align: justify;">एक समय था जब भारतीय विदेश सेवा शादीशुदा महिलाओं के लिए प्रतिबंधित थी और यदि किसी को शादी करनी होती थी, तो उसे अनुमति लेनी पड़ती थी या फिर इस्तीफा देना पड़ता था, जैसा कि प्रो. सुरजीत मान सिंह के मामले में हुआ, जो एक आईएफएस अधिकारी थीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">आश्चर्यजनक रूप से, वेतन भी असमान था; महिलाओं को समान पदनाम के लिए पुरुषों से कम वेतन दिया जाता था. लेकिन अब सी. मुथम्मा और रुक्मिणी मेनन जैसी पायनियर महिलाओं के कारण चीज़ें बदल चुकीं है. भारत की महिला राजनयिक आज दुनिया के मंच पर आत्मविश्वास से कदम रख रही हैं और अधिक महिलाएं IFS में शामिल होने की ओर अग्रसर हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/ruchira-kamboj-shines-while-explaining-the-indian-model-of-women-empowerment-to-the-world-4533609">दुनिया को महिला सशक्तिकरण का भारतीय मॉडल समझाती Ruchira&nbsp;Kamboj</a></p>
<h3 style="text-align: justify;">अरुंधति घोष</h3>
<p style="text-align: justify;">1963 बैच की भारतीय विदेश सेवा अधिकारी, अरुंधति घोष जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि थीं और उस क्षमता में 1996 में सीटीबीटी पर वार्ता के दौरान भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. इससे पहले, उन्होंने मिस्र में भारत के राजदूत के रूप में भी सेवा की. वे 2004 तक संघ लोक सेवा आयोग की सदस्य भी रही हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">चोकिला अय्यर</h3>
<p style="text-align: justify;">1964 बैच की IFS अधिकारी. वे भारत की पहली महिला विदेश सचिव हैं. इसके अलावा, उन्होंने UPSC की सदस्य और अनुसूचित क्षेत्र और अनुसूचित जनजातियों के राष्ट्रीय आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मीरा कुमार</h3>
<p style="text-align: justify;">लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष 1970 बैच की IFS अधिकारी थीं. उन्होंने स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस में भारतीय दूतावासों में सेवा की. बाद में वे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री बनीं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">लीला के. पोनप्पा</h3>
<p style="text-align: justify;">1970 बैच की IFS अधिकारी, जिन्होंने पहली महिला उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय की सचिव के रूप में सेवा की. उन्हें जून 2012 में CSCAP (एशिया प्रशांत में सुरक्षा सहयोग परिषद) की सह-अध्यक्ष चुना गया. वे थाईलैंड में पहली महिला राजदूत बनने का गौरव भी रखती हैं. उन्होंने नीदरलैंड्स में भी भारत की राजदूत के रूप में सेवा की.</p>
<h3 style="text-align: justify;">निरुपमा राव</h3>
<p style="text-align: justify;">वे 2001 में विदेश मंत्रालय की पहली महिला प्रवक्ता और चीन में भारत की पहली महिला राजदूत बनीं. 1973 बैच की IFS अधिकारी ने संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय राजदूत के रूप में भी सेवा की. इससे पहले, उन्होंने दो वर्षों के लिए भारत की विदेश सचिव के रूप में सेवा की.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मीरा शंकर</h3>
<p style="text-align: justify;">1973 बैच की IFS अधिकारी, वे 2009 से 2011 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत की राजदूत बनने वाली पहली महिला कैरियर राजनयिक थीं. 2009 से पहले, उन्होंने जर्मनी के बर्लिन में भारत की राजदूत के रूप में सेवा की. उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के महानिदेशक के पद को भी संभाला.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सुजाता सिंह</h3>
<p style="text-align: justify;">वर्तमान में भारत की विदेश सचिव के पद को संभालती हैं और भारतीय राजनयिक सेवा का नेतृत्व करती हैं. उन्होंने बोन्न, अक्रा, पेरिस, बैंकॉक में विभिन्न पदों पर सेवा की है और 2000-04 के दौरान मिलान में भारत की कौंसल जनरल रहीं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया (2007-2012) में भारत के उच्चायुक्त और जर्मनी (2012-2013) में राजदूत के रूप में भी सेवा की.</p>
<h3 style="text-align: justify;">दीपा गोपालन वधवा</h3>
<p style="text-align: justify;">1979 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुईं. उन्होंने किसी भी खाड़ी राज्य में पहली महिला राजदूत बनने का गौरव प्राप्त किया. वर्तमान में वे जापान में भारतीय राजदूत के पद पर हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">नेंगचा ल्हौवुम</h3>
<p style="text-align: justify;">1980 बैच की IFS अधिकारी हैं. अपने राजनयिक करियर के दौरान, उन्होंने मैक्सिको सिटी, ढाका, हवाना और न्यूयॉर्क में भारतीय मिशनों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है. वे 2007-2008 के लिए सार्वजनिक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार की प्राप्तकर्ता हैं. वर्तमान में, वे विदेश सेवा संस्थान की डीन हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>मनिमेकलाई मुरुगेसन</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">1981 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी, मनीमेकलाई को 2010-2011 में सार्वजनिक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार प्राप्त हुआ. उन्होंने लीबिया में विद्रोह के बाद 16,000 भारतीयों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.</p>
<h3><strong>रुचिरा कंबोज</strong></h3>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830">रुचिरा कंबोज</a> वर्तमान में भारत सरकार की प्रोटोकॉल प्रमुख हैं, इस पद पर नियुक्त होने वाली भारतीय विदेश सेवा की पहली महिला हैं. वे 1987 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुईं और लंदन में राष्ट्रमंडल महासचिव कार्यालय के उप प्रमुख के रूप में आखिरी बार सेवा की. इससे पहले, उन्होंने केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में उच्चायोग के मंत्री और कार्यालय प्रमुख के रूप में सेवा की.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">2024 में 1 जून को रुचिरा ने अपने retirement की घोषणा की. उन्होंने अपनी दो इंटर्न्स, काव्य जैन और सहाना रविकुमार के बारे में भी बताया और कहा की हमारे देश का भविष्य बहुत अच्छे हाथों में है. और सोचने वाली बात भी है अगर एक महिला हमारे देश को इतने बड़े मंच पर रेप्रेज़ेंट करेगी तो देश आगे नहीं बढ़ेगा बल्कि दौड़ेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 15 Jun 2024 13:40:49 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-in-ifs-has-increased-in-past-10-years-rom-2014-to-2024-the-percentage-had-increased-by-6-point-6-percent-4759593]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/f07eET4ZVWDV5igYovsW.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/f07eET4ZVWDV5igYovsW.png"/></item><item><title><![CDATA[दुनिया को महिला सशक्तिकरण का भारतीय मॉडल समझाती Ruchira Kamboj ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/ruchira-kamboj-shines-while-explaining-the-indian-model-of-women-empowerment-to-the-world-4533609</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png"><p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) की कहानी केवल उनके पदों और नियुक्तियों की सूची तक सीमित नहीं है; यह उनकी वकालत और मानवाधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी आवाज उठाने के प्रयासों में भी परिलक्षित होती है. उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिनिधि के रूप में सम्मान के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को दर्शाया है, और साथ ही साथ <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830" rel="dofollow">समाजिक न्याय और लैंगिक समानता के महत्व</a> को भी बल दिया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">न्याय के लिए UN में उठाई आवाज</h2>
<p style="text-align: justify;">2022 में, रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) को संयुक्त राष्ट्र (United Nations UN) में भारत का स्थायी प्रतिनिधि (Permanent Representative/Ambassador of India) नियुक्त किया गया, जो उनके करियर का एक चरम बिंदु है. इस पद पर उनकी नियुक्ति ने उनकी व्यक्तिगत योग्यताओं को तो मान्यता दी ही, साथ ही यह भी दिखाया कि भारतीय विदेश सेवा में महिलाएं कितनी प्रभावी और प्रेरणादायक हो सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) ने विश्व स्तर पर विशेष रूप से UN में महिलाओं के अधिकारों की वकालत की है. उन्होंने विदेश नीति में महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान को महत्व देने के लिए बल दिया है. उनके अनुसार, सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही सच्ची प्रगति संभव है.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में समान भागीदारी प्रदान करने से भी संबंधित है. उन्होंने इस दिशा में कई पहल की हैं, जिससे महिलाएं न केवल अपने निजी जीवन में, बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी सशक्त बन सकें.</p>
<h2 style="text-align: justify;">अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला का प्रतिनिधित्व</h2>
<p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिनिधि (Permanent Representative of India at UN) के रूप में, रुचिरा ने ना सिर्फ भारत की संस्कृति और विचारों का प्रसार किया, बल्कि विश्व समुदाय के सामने भारतीय महिलाओं की क्षमता और योगदान को भी उजागर किया. उनकी यह पहल भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति नज़रिये को सकारात्मक बनाने में मदद कर रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120">रुचिरा कंबोज</a> (Ruchira Kamboj) का जीवन और करियर उन सभी महिलाओं के लिए एक ज्वलंत उदाहरण है जो समाज में बदलाव लाने और दुनिया को बेहतर बनाने की चाह रखती हैं. उनकी आवाज और कार्य ने ना केवल भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Services IFS) में, बल्कि वैश्विक दर्शन में भी महिलाओं की उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत किया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">IFS की Woman Topper रहीं है Ruchira Kamboj</h2>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) का जन्म एक संस्कृति समृद्ध परिवार में हुआ था, जहां शिक्षा और मूल्यों को बहुत महत्व दिया जाता था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया. उनकी शिक्षा ने ना केवल उन्हें ज्ञान की दृष्टि प्रदान की, बल्कि एक मजबूत नैतिक कम्पास भी दिया जिसने उनके करियर को आकार दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">1987 में भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Services) में All Women Ranking में टॉप करने के साथ उनके चयन ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी. रुचिरा की पहली पोस्टिंग पेरिस में हुई थी, जहां उन्होंने फ्रांस और यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत किया. उनकी कार्यशैली में जो विशेषता रही, वह थी उनका संवाद कौशल और रणनीतिक सोच.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में वापस आने पर, उन्होंने विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका और भूटान में भारतीय राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने भारत के विदेशी संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">अपनी विचारधाराओं से बनीं सभी के लिए inspiration</h2>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) का जीवन और करियर युवा पीढ़ी, विशेषकर युवा महिलाओं के लिए एक उदाहरण है. उनकी कठिनाइयों को पार करने की कहानी, उनकी उपलब्धियां और उनका नेतृत्व अपने सपनों को साकार करने की अमिट सीख देता है.</p>
<p style="text-align: justify;">रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) सिर्फ एक राजदूत नहीं हैं, बल्कि वह एक विजनरी भी हैं जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की आवाज को मजबूती से उठाया है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/statement-by-ambassador-ruchira-kamboj-at-the-57th-commission-on-population-and-development-4531066">जनसंख्या और विकास पर 57वें आयोग में राजदूत रुचिरा कंबोज का वक्तव्य</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Fri, 03 May 2024 17:58:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/ruchira-kamboj-shines-while-explaining-the-indian-model-of-women-empowerment-to-the-world-4533609]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TKWnMP2aSpjzB2BC0vAW.png"/></item><item><title><![CDATA[यौन हिंसा से निपटने में भारत के रुख पर UNSC में बोली रुचिरा कंबोज ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L54g8dj43jEmdWpPj1Rt.png"><p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र&nbsp;(United Nations UN) में भारत की स्थायी प्रतिनिधि (Permanent Representative) <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/india-has-one-of-the-highest-proportion-of-women-in-stem-that-is-science-technology-engineering-and-mathematics-subjects-globally-at-43-per-cent-in-addition-self-help-groups-provide-training-to-approximately-100-million-women-4383120">रुचिरा कंबोज</a> (Ruchira Kamboj) महिलाओं, शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया. उन्होंने यौन हिंसा संबंधी मामलों के निदान में देश के व्यापक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया.</p>
<p style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nation Security Council UNSC) को संबोधित करते हुए कंबोज ने कहा कि भारत सरकार ने महिलाओं के लिए राष्ट्रीय और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लिए संविधान में संशोधन किया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत का महत्वपूर्ण योगदान</h2>
<p style="text-align: justify;">शीर्ष भारतीय राजनयिक कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'विसैन्यीकरण और लिंग-उत्तरदायी हथियार नियंत्रण के माध्यम से संघर्ष-संबंधित यौन हिंसा पर रोक'&nbsp;(Preventing Conflict-Related Sexual Violence (CRSV) through Demilitarisation and Gender-Responsive Arms Control) पर एक खुली बहस को संबोधित किया. उन्होंने कहा "महिला शांति और सुरक्षा एजेंडे के प्रति हमारे देश का समर्पण संघर्ष संबंधी यौन हिंसा से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण के माध्यम से प्रदर्शित होता है. इस दृष्टिकोण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, राष्ट्रीय नीति सुधार और जमीनी स्तर की पहल शामिल हैं. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और शांति और सुरक्षा नीतियों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने की आवश्यकता के बारे में बहुत मुखर रहा है."</p>
<h2 style="text-align: justify;">भारत का फोकस महिलाओं के विकास पर</h2>
<p style="text-align: justify;">CRSV पर यूएनएससी की वार्षिक बहस सदस्य देशों को सशस्त्र संघर्षों में युद्ध, यातना और आतंकवाद की रणनीति के रूप में राष्ट्र और गैर-राष्ट्र भागीदारों को यौन हिंसा से जुड़े उभरते विषयों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती है. संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों (UN peacekeeping missions) में भारत के योगदान को याद करते हुए कंबोज ने गर्व से उल्लेख किया "भारतीय महिला शांति सैनिकों ने संघर्ष संबंधी यौन हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. साथ ही हमें इस बात पर भी बहुत गर्व है कि मेजर सुमन गवानी (Major Suman Gawani) को संयुक्त राष्ट्र सैन्य लिंग अधिवक्ता (UN Military Gender Advocate) वर्ष 2019 का पुरस्कार दिया गया."</p>
<p style="text-align: justify;">कंबोज ने यौन शोषण और दुर्व्यवहार के पीड़ितों के समर्थन में भारत के सक्रिय उपायों को रेखांकित करते हुए कहा "भारत यौन शोषण और दुर्व्यवहार के पीड़ितों के समर्थन में महासचिव के ट्रस्ट फंड (Secretary-General&rsquo;s Trust Fund) में योगदान देने वाला पहला देश था."</p>
<p style="text-align: justify;">कंबोज ने <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/maharashtra-tetwali-village-namita-namdev-bhurkood-bamboo-kandils-trains-tribal-women-1704859">जी20</a> (G20) की अध्यक्षता के दौरान महिलाओं के विकास पर भारत के फोकस के बारे में बताते हुए कहा, "भारत ने महिला सशक्तिकरण (women&rsquo;s empowerment) और लैंगिक समानता (gender equality) पर ध्यान केंद्रित करते हुए महिला नेतृत्व वाले विकास पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया था."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">नंदिनी डोडिया</dc:creator><pubDate>Sat, 27 Apr 2024 18:11:11 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/ruchira-kamboj-speaks-in-unsc-on-india-stance-in-dealing-with-sexual-violence-4521830]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L54g8dj43jEmdWpPj1Rt.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L54g8dj43jEmdWpPj1Rt.png"/></item><item><title><![CDATA[Firsts of Female Diplomats ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/web-story/firsts-of-indian-female-diplomats</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3UFH1Z0e63M7LtRgP48M.png">]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 24 Jun 2023 16:42:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/web-story/firsts-of-indian-female-diplomats]]></guid><category><![CDATA[वेब स्टोरी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3UFH1Z0e63M7LtRgP48M.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3UFH1Z0e63M7LtRgP48M.png"/></item><item><title><![CDATA[लड़कियों, हम सब कर सकते हैं ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/meet-ruchira-kamboj-first-indian-female-permanent-representative-at-the-un</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AgxdCVmQdqRh9DpXG6l7.jpg"><p><iframe style="width: 1041px; height: 584px;" src="https://www.youtube.com/embed/NDjegelrbQs" width="1041" height="584" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>रुचिरा कंबोज जी वास्तव में लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्हें जून 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN)मुख्यालय में भारत की स्थायी प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया. उन्होंने राजदूत टीएस तिरुमूर्ति की जगह ली. भारतीय विदेश सेवा (IFS) 1987 बैच की ऑल इंडिया टॉपर रही कंबोज भूटान में भी भारत की पहली महिला राजदूत रह चुकी है. 2011 से 2014 तक भारत की चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल के पद पर रहींं और इस दौरान उन्होंने आतंकवाद पर पाकिस्‍तान पर निशाना साधा और कश्मीर के मुद्दे को भी UN में उठाया .</p>
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<p>"To the girls out there, we all can make it !"<br>-रुचिरा कंबोज</p>
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</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 20 Mar 2023 18:59:12 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/meet-ruchira-kamboj-first-indian-female-permanent-representative-at-the-un]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AgxdCVmQdqRh9DpXG6l7.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AgxdCVmQdqRh9DpXG6l7.jpg"/></item></channel></rss>