<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ सामूहिक शक्ति]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/saamuuhik-shkti</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/saamuuhik-shkti" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 06 Apr 2023 16:29:33 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[SHG: सामूहिक शक्ति विकसित भारत के लिए… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-have-been-making-women-financially-strong-since-70s</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0OLe1cFBQKJ5Kz2Icbut.jpg"><p class="MsoNormal"><span lang="HI">भारत की आत्मा उसके गाँव में बसती है.</span> <span lang="HI">भारत के विकास के लिए ज़रूरी है उसकी आत्मा का विकास. भारत तभी पूरी तरह विकसित होगा जब गाँव एक स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करेगा.</span><span lang="HI"> इस स्वतंत्र इकाई के मूल में जो ग्रामीण महिलाएं है वह वित्तीय रूप से सक्षम होंगी. इन महिलाओं में वित्तीय आत्मनिर्भरता लाने के लिए स्वयं सहायता समूह बनना और फिर उन्हें</span>  <span lang="HI">वित्तीय सहायता मिलना एक कारगार कदम साबित हुआ है.</span><br><br><span lang="HI">स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्य</span>, <span lang="HI">अपने साथियों की सामूहिक शक्ति से लाभान्वित होती हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन अब वह समय आ गया है </span>, <span lang="HI">जब उन्हें अपनी वित्तीय आवश्यकताओं और बैंक ऋणों तक पहुँचने के बारे में अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है.</span><br><br><span lang="HI">अभी तक इस जागरूकता को फ़ैलाने में </span>SHG <span lang="HI">लीडर या फिर सरकारी जिला पंचायत कर्मचारी ही आगे आते है.</span> <span lang="HI">लेकिन अगर किसी महिला को या समूह को अपने बैंक ऋण को म्युचुअल फंड में निवेश करना हो तो वो क्या करे </span>? <span lang="HI">या फिर शेयर बाजार की तरफ कुछ बचत का रुख करना हो तो . यह सब सोच अब ग्रामीण भारत की महिलाओं में भी आ रही है क्योंकि आर्थिक आज़ादी की राह जो </span>SHG <span lang="HI">ने दिखाई है उस से वह अपने लिए वित्तीय निर्णय खुद ले रही हैं.</span><br><br>70 <span lang="HI">के दशक से शुरू हुई इस </span>SHG <span lang="HI">क्रांति को ताक़त मिली </span>1992 <span lang="HI">में बैंकिंग प्रणाली के साथ एकीकरण के बाद. वह शुरू हुआ स्लेफ़ हेल्प ग्रुप बैंक लिंकेज प्रोग्राम (एस बी एल पी) के साथ. तब से अधिक से अधिक महिलाओं को शामिल करके समूह बनाये गए और आर्थिक आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढे. "स्व-सहायता" की अवधारणा ग्रामीण महिलाओं के बीच स्वरोजगार और गरीबी उन्मूलन को बढ़ावा देने में सफल रही है. समान सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के समूह एक दूसरे की मदद करते हुए मइक्रोक्रेडिट की सुविधा लेते है. साथ ही </span>SHG <span lang="HI">सिर्फ रुपये पैसे कमाने के ज़रिये नहीं बने बल्कि राजनितिक</span>, <span lang="HI">सामाजिक और व्यक्तित्व विकास की राह पर भी महिलाओं को लेकर आगे बढे.</span> <span lang="HI">कोई महिला जब अपने पारिवारिक कर्तव्यों को पूरा करते हुए किसी काम में लगती है और रुपये कमाती है तो वह स्वयं की आत्मनिर्भरता की पूरक बन जाती है.</span>  <br><br>SHG <span lang="HI">से आज </span>8 <span lang="HI">करोड़ से ज़्यादा महिलाओं के परिवार सशक्त बने है.</span>  <span lang="HI">देश के </span>737 <span lang="HI">ज़िलों के </span>728903 <span lang="HI">गांव तक यह नेटवर्क पहुंच चुका है जिसमें </span>17 <span lang="HI">लाख करोड़ से ज़्यादा का फण्ड बांटा जा चुका है. सरकार ने वर्ष </span>2024 <span lang="HI">से पहले समूह की प्रत्येक महिला की वार्षिक आय को बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का लक्ष्य रखा है. इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है की अधिक से अधिक ग्रामीण आबादी इस प्रयास से जुड़े.</span>  <br><br><span lang="HI">स्वयं सहायता समूह में औसतन </span>10-15 <span lang="HI">सदस्य होते हैं. इन समूहों को कुछ साधारण से नियमों का पालन करना होता है.</span> <span lang="HI">सभी सदस्य समरूपी आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के हों.</span> <span lang="HI">समूह कम से कम </span>6 <span lang="HI">माह से सक्रीय रूप से संचालित हों सदस्यों द्वारा नियमित मासिक बचत और दिए गए ऋण की भरपाई हों.</span>  <span lang="HI">लेन देन के लेखा जोखा की व्यवस्थित रजिस्टर में हों मासिक बैठक का विवरण लिखा जाए और लोकतान्त्रिक रूप से सभी सदस्य इसमें भाग लें. समूह को संचालित करने के लिए</span>, <span lang="HI">समूह सदस्यों में से तीन पदाधिकारियों का चयन किया जाता है</span>, <span lang="HI">जिसमे अध्यक्ष</span>, <span lang="HI">कोषाध्यक्ष और सचिव होते हैं. समूह के संचालन के लिए पांच सूत्र है</span> - <span lang="HI">नियमित बैठकें</span>, <span lang="HI">नियमित बचत</span>, <span lang="HI">नियमित आंतरिक ऋण</span>, <span lang="HI">नियमित वसूली और खातों का सही लेखा जोखा.</span>  <span lang="HI">स्वयं सहायत समूहों का बैंक पुनर्भुगतान </span>98 <span lang="HI">प्रतिशत से अधिक है</span>, <span lang="HI">जो उनके विश्वास और अनुशासन को बताता है .</span><br><br><span lang="HI">आर्थिक सर्वेक्षण </span>2022-23 <span lang="HI">की सिफारिश है कि स्वयं सहायता समूहों (</span>SHG) <span lang="HI">को ग्रामीण विकास के प्रयासों के केंद्र में होना चाहिए क्योंकि वह</span>  <span lang="HI">सबसे प्रभावी लोकल सामुदायिक संस्थान हैं. </span>75% <span lang="HI">से अधिक ग्रामीण महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम कर रहीं है. इसलिए महिलाओं के कौशल को बढ़ाना और कृषि से संबंधित क्षेत्रों जैसे कि खाद्य प्रसंस्करण में रोजगार पैदा करने का जरिया </span>SHG <span lang="HI">हो सकते है. स्वयं सहायता समूह आर्थिक आज़ादी</span>, <span lang="HI">आजीविका में अलग अलग क्षेत्र और कौशल विकास में ग्रामीण महिलाओं की क्षमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 06 Apr 2023 16:29:33 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-have-been-making-women-financially-strong-since-70s]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0OLe1cFBQKJ5Kz2Icbut.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0OLe1cFBQKJ5Kz2Icbut.jpg"/></item></channel></rss>