<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Samastipur]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/samastipur</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/samastipur" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 29 Jun 2023 18:08:28 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[चखाजी मॉडल ने सौर ऊर्जा से खेतों तक पहुंचाया पानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg"><p><span><strong>बिहार (Bihar)</strong> एक ऐसा राज्य जो अपने संघर्ष, संतुलन, स्वाभिमान और साहस के लिए जाना जाता है. इसी परंपरा को <strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति (Prem Sichai Vikas Samiti) </strong>नाम के महिला किसान समूह ने आगे बढ़ाया. यह समिति बिहार के <strong>समस्तीपुर (Samastipur) </strong>जिले के <strong>चंदौली (Chandauli) </strong>पंचायत की है, जिसका नेतृत्व तीन पदाधिकारियों की एक टीम करती है, जिसकी अध्यक्ष इंदु देवी, सचिव विभा कुमारी और बुककीपर रिंकू देवी है. इस समूह के सदस्य मुख्य रूप से खेती किसानी के काम से जुड़े हुए है. सबकुछ अच्छा चल रहा था की इस समूह की महिलाओं को एक चुनौती का सामना करना पड़ा, वह थी पानी की कमी. उनकी कड़ी मेहनत और कोशिशों के बाद भी, फसलें कम पानी के कारण पनप नहीं पा रही थी. धीरे धीरे रुपये - पैसे का संकट गहराहने लगा. तब इन महिलाओं के सतह आया <strong>अगा खान ग्रामीण सहायता कार्यक्रम (Aga Khan Rural Support Programme) </strong>जिसके समर्थन और साझेदारी से <strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति नामक स्वयं सहायता समूह (Self Help Group)</strong> बना. <strong>AKRSP</strong> के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को<strong> सोलर बेस्ड ग्रुप इरीगेशन (GI) स्कीम (Solar Based Group Irrigation Scheme) </strong>से परिचित कराया गया, साथ ही उनकी फसलों के लिए लगातार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उनके खेतों में <strong>सोलर पंप (Solar Pump) </strong>लगाया गया. </span><br><br><span>इन सब कोशिशों के बावजूद एक और मुश्किल सामने आ गयी, महिलाओं को परियोजना के लिए 13,000 रूपए का निवेश करने की ज़रुरत थी. खेती - किसानी करने वाली महिलाओं के लिए यह बहुत बड़ी राशि थी. अपने पति और परिवार को रुपये देने के लिए मनाना नामुमकिन था. क्योंकि पुरे गाँव का मानना था कि सिचाई पंप चलाना महिलाओं का काम नहीं है.</span><br><br><span><strong>लेकिन महिलाओं के पास थी समूह की ताक़त और इसीलिए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, हिम्मत से राह निकल ही जाती है और ऐसा ही यहां हुआ. 2018 में AKRSP के समर्थन और मार्गदर्शन से उन्होंने सोलर इरीगेशन इंटरवेंशन (Solar Irrigation Intervention) शुरू किया. </strong>इस परियोजना में 5 HP का सौर पंप, 300 फीट का बोरवेल, पम्पहाउस और भूमिगत पाइपलाइन चैनल, जो लगभग 30 - 35 एकड़ भूमि को कवर करता था उसको लगाया गया. नए सौर पंप के साथ न केवल कृषि भूमि बल्कि आसपास के क्षेत्रों में लगभग 95 - 100 किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली. निरंतर जल आपूर्ति के साथ अब किसान साल भर फसल उगा सकते है और पहले कम विकल्पों से आगे बढ़कर अपनी पसंद से काम कर सकते है. आलू और मक्के, जिन्हे पानी की कमी के कारण उगाना असंभव था वह अब खेतो में लहलहा रहे हैं.</span><br><br><span>प्रेम समूह की सफलता के बारे में बात फैल गई और जल्द ही अन्य किसानों ने उनसे 90 रूपए प्रति घंटे के हिसाब से पानी खरीदना शुरू कर दिया, जिससे उनकी सालाना आय 1.3 लाख हुई. जो की उनकी <strong>वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Independence)</strong> दिलाने में बहुत बड़ा योगदान था. <strong>सोलर इरीगेशन प्रोजेक्ट (Solar Irrigation Project)</strong> का प्रभाव खेतों से आगे तक बढ़ा लगातार पानी की आपूर्ति से जुड़े परिवारों की आहार संबंधी आदतें बदलने लगीं सब्जियों के बढ़ते उत्पादन से उन्हें पौष्टिक आहार मिला, जिससे उनके स्वास्थय में सुधार हुआ. 130 से अधिक समूहों को यहीं काम करके सफलता मिली, जिससे बिहार में 5000 से अधिक किसानों का लाभ हुआ. यह मॉडल <strong>चखाजी मॉडल (Chakhaji Model) </strong>के नाम से जाना जाता है. इस मॉडल की मदद से महिला किसान सशक्त हुई, कृषि उत्पादन और उनकी आय में भी वृद्धि हुई. AKRSP की इस सौर पहल ने गति पकड़ी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों, विशेषकर महिलाओं के जीवन में बदलाव आया. <strong>पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (Public Private Partnership) </strong>और <strong>बिहार रूरल लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जीविका) (Bihar Rural Livelihood Promotion Society)</strong> जैसे ऑर्गेनाइजेशंस के समर्थन से, सिंचाई सेवाओं का विस्तार एक वास्तविकता बन गयी.</span><br><br><span><strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति और उनकी सोलर इरीगेशन यात्रा की कहानी एक ऐसा उदाहरण ही जिसमें  कैसे किसी उद्देश्य को पाने के लिए महिला किसान एकजुट होकर चुनौतियों को पार कर सकती है और अपने जीवन को न ही केवल बदल सकती हैं बल्कि अपने समुदाय के समग्र विकास और समृद्धि में भी योगदान कर सकती हैं.</strong></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 29 Jun 2023 18:08:28 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg"/></item></channel></rss>