<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Self Help Group-SHG]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/self-help-group-shg</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/self-help-group-shg" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 05 Apr 2024 12:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[DriveX की CSR पहल से जीवन में बदलाव ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/drivex-csr-initiatives-changing-lives-of-women-and-making-them-empower-4468612</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2G7j5yYDMgGdTWtHhz10.png"><p style="text-align: justify;"><span>ड्राइवएक्स मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड (DriveX Mobility Pvt. Ltd.), भारत का पहला मल्टी-ब्रांड मोबिलिटी प्लेटफॉर्म है, जिसने अपनी <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ambuja-cements-wins-icc-social-impact-award-for-women-empowerment-at-indian-chamber-of-commerce-awards-4428022">कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी</a> (Corporate Social Responsibility CSR) गतिविधि के हिस्से के रूप में को दोपहिया वाहन देकर महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>दिल छू लेने वाले भाव में ड्राइवएक्स ने बेंगलुरु के <strong>स्पर्श स्वयं सहायता समूह</strong> (Self Help Group SHG) को एक दोपहिया वाहन की चाबी भेंट की. इस पहल का उद्देश्य उन महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाना है जो सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना करती है. यह आयोजन बेंगलुरु में प्रयास ट्रस्ट के परिसर में हुआ, जिसमें ड्राइवएक्स (DriveX) और प्रयास ट्रस्ट (Prayas Trust) &nbsp;के प्रतिनिधि उपस्थित थे.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>ड्राइवएक्स मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के एचआर प्रमुख एम सदगुरु स्वामी ने कहा -</span></p>
<blockquote>
<p><span>"हम इस प्रभावशाली पहल का हिस्सा बनकर रोमांचित है. यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. ड्राइवएक्स (DriveX) में, हम व्यक्तियों और समुदायों को सशक्त बनाने में विश्वास करते है."</span></p>
</blockquote>
<h2 style="text-align: justify;"><span>स्पर्श स्वयं सहायता समूह एवं प्रयास ट्रस्ट की ओर से आभार</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>स्पर्श स्वयं सहायता समूह ने ड्राइवएक्स को उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया. प्रयास ट्रस्ट की संस्थापक सुश्री कंथमणि ने कहा -</span></p>
<blockquote>
<p><span>&ldquo;हम वंचितों के उत्थान के हमारे मिशन में समर्थन के लिए ड्राइवएक्स (DriveX) के बहुत आभारी है. यह योगदान उनकी शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच बढ़ाकर उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा."</span></p>
</blockquote>
<h2 style="text-align: justify;"><span>सशक्तिकरण के लिए DriveX का विज़न</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>स्पर्श स्वयं सहायता समूह (Self Help Group SHG) के साथ ड्राइवएक्स (DriveX) का सहयोग कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता और स्थायी सामाजिक प्रभाव पैदा करने में विश्वास का उदाहरण है. परिवहन तक पहुंच प्रदान करके, ड्राइवएक्स (DriveX Mobility Pvt. Ltd.) का लक्ष्य <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/au-small-finance-bank-in-rajathan-has-started-their-csr-initiative-named-au-udyogini-and-are-empowering-787-women-by-giving-them-training-in-various-works-4127096">महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता</a> के अवसरों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाना है, जिससे आर्थिक स्वतंत्रता (Financial Independence) और सशक्तिकरण (Women Empowerment) को बढ़ावा मिलेगा.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">किरण मुरिया</dc:creator><pubDate>Fri, 05 Apr 2024 12:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/drivex-csr-initiatives-changing-lives-of-women-and-making-them-empower-4468612]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2G7j5yYDMgGdTWtHhz10.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2G7j5yYDMgGdTWtHhz10.png"/></item><item><title><![CDATA[BFSI सेक्टर में Financial Inclusion के नए रास्ते खोल रहा Microfinance ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-increasing-financial-inclusion-in-bfsi-sector-1508605</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zZLJLoGho7UsdcM6imP7.jpg"><p style="text-align: justify;"><strong>भारत में माइक्रोफाइनेंस</strong> ने एक लंबा सफर तय किया है. इसकी मदद से कम आय वाले परिवार अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम बने हैं. <strong>NRLM</strong> (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) द्वारा गठित <strong>स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group- SHG)</strong> की बढ़ती संख्या की वजह से<strong> NBFC - MFI </strong>की ज़रुरत में भी इज़ाफ़ा हुआ.&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: justify;">BFSI सेक्टर में अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रहा माइक्रोफाइनेंस&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://www.financialexpress.com/business/sme-macro-opportunity-microfinance-industry-is-on-course-to-become-a-larger-player-in-the-bfsi-space-3259182/"><strong>माइक्रोफाइनेंस</strong> </a>लगातार <strong>BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा)</strong> परिदृश्य में एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है. पिछले कुछ सालों में, <strong>माइक्रोफाइनांस संस्थान</strong> (microfinance institutions in India) विकसित होकर&nbsp;<strong>फाइनेंशियल इकोसिस्टम</strong> का अहम हिस्सा बन गया है. यह बदलाव न सिर्फ लोगों को सशक्त बना रहा है, बल्कि वंचित समुदायों के <strong>आर्थिक विकास</strong> और <strong>वित्तीय समावेशन</strong> में भी योगदान दे रहा है.</p>
<p><img alt="BFSI" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Ocb9ZxXcEU1awl3gNOsb.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: </em></span><em><span class="lhwhwf cS4Vcb-pGL6qe-lfQAOe" style="font-size: 8pt;">The Economic Times</span></em></p>
<p style="text-align: justify;">इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह <strong>वित्तीय समावेशन</strong> (financial inclusion) की अहमियत और उसे मान्यता मिलना है. <strong>माइक्रोफाइनांस संस्थान</strong> परंपरागत रूप से औपचारिक <strong>बैंकिंग सेवाओं</strong> से बाहर रखे गए लोगों को <strong>छोटे ऋण, बचत खाते </strong>और<strong> बीमा </strong>प्रदान करके समाज में मौजूद फाइनेंशियल गैप को कम करते हैं. इससे लाखों लोगों और छोटे उद्यमियों की आर्थिक क्षमता का विस्तार हो रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कोविड-19 महामारी के दौरान Microfinance ने निभाई अहम भूमिका&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">कोविड-19 महामारी ने<strong> माइक्रोफाइनेंस </strong>की अहमियत पर प्रकाश डाला. संकट के समय में, <strong>माइक्रोफाइनेंस संस्थानों </strong>ने कमजोर समुदायों को <strong>आपातकालीन ऋण</strong> और सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई. इससे न सिर्फ लोगों की अचानक आई ज़रूरतें पूरी हुई, बल्कि <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/akmi-hosted-microfinance-karnataka-summit-2023-in-bangalore">माइक्रोफाइनेंस</a>&nbsp;की एडेप्टेबिलिटी और सामाजिक जिम्मेदारी पूरी करने में उसकी भूमिका भी प्रदर्शित हुई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">डिजिटल सेवाओं ने बढ़ाई माइक्रोफाइनेंस तक पहुंच&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/online-microfinance-boosting-financial-inclusion">टेक्नॉलोजी माइक्रोफाइनेंस के लिए गेम-चेंजर साबित हुई</a>. डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट के आने से<strong> माइक्रोफाइनेंस संस्थानों</strong> को दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचने में सक्षम बनाया. मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की मदद से, उधारकर्ता आसानी से वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सकते हैं, जिससे फिजिकल ब्रांच की ज़रुरत कम हो जाती है.</p>
<p><img alt="BFSI" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/352x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/YPsFpoqoSy0DIjGSorXN.jpg" class="center" style="width: 352px;"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Research Dive</em></span></p>
<h3 style="text-align: justify;">Data Analytics और Artificial Intelligence से प्रक्रिया हो रही आसान&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, उधार पात्रता और रिस्क को मैनेज करने के लिए डेटा एनालिटिक्स और <strong>अर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स </strong>का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे न सिर्फ ऋण देने की प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि डिफ़ॉल्ट दरें भी कम हुई हैं, जिससे माइक्रोफाइनेंस बहुत <strong>सस्टेनेबल</strong> बना है.</p>
<p style="text-align: justify;">रेगुलेटरी सपोर्ट इस क्षेत्र के विकास की एक और मुख्य वजह है. कई देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंकों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में माइक्रोफाइनेंस के महत्व को पहचाना है और सहायक नियम बनाए हैं. ये उपाय सुनिश्चित करते हैं कि माइक्रोफाइनेंस संस्थान पारदर्शी और जिम्मेदारी से काम करें.</p>
<p><img alt="BFSI" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/n40XA9jReuQfPSW1yzXq.webp" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: <span class="lhwhwf cS4Vcb-pGL6qe-lfQAOe">IDFC FIRST Bank</span></em></span></p>
<h3 style="text-align: justify;">Financial Inclusion को बढ़ा रहा Microfinance</h3>
<p style="text-align: justify;">निवेशक भी तेजी से&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mumbai-based-swantantra-microfin-lends-at-the-lowest-rate"> माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र को सामाजिक रूप से जिम्मेदार इन्वेस्टमेंट ऑप्शन </a>के रूप में देख रहे हैं. माइक्रोफाइनेंस संस्थानों में इन्वेस्ट कर, वे उचित वित्तीय रिटर्न की उम्मीद करते हुए गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास में योगदान करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">माइक्रोफाइनेंस<strong> फाइनेंशियल इन्क्लूशन</strong> के प्रति अपनी प्रतिबद्धता, संकट के दौरान लचीलापन, टेक्नॉलोजी को अपनाने और जिम्मेदार प्रथाओं का पालन इसे सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए एक अहम शक्ति बनाता है. जैसे-जैसे <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-is-the-key-to-womens-financial-freedom">माइक्रोफाइनांस संस्थान</a>&nbsp;(importance of microfinance in india) नवाचार और सहयोग करना जारी रखते हैं, वे आर्थिक संसाधनों और ग्राहकों के बीच अंतर को कम करने की क्षमता रखते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह विकास एक ऐसी समावेशी और न्यायसंगत दुनिया का रास्ता आसान कर रहा है, जहां आर्थिक अवसर सभी के लिए सुलभ हैं, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक आइडेंटिटी कुछ भी हो.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 10 Oct 2023 11:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-increasing-financial-inclusion-in-bfsi-sector-1508605]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zZLJLoGho7UsdcM6imP7.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zZLJLoGho7UsdcM6imP7.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मुरैना में घुल रही शहद की मिठास ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"><p>मुरैना जिला यानि ख़ास स्वाद वाली गजक की पहचान. लेकिन समय के साथ मुरैना में शहद की मिठास भी घुल रही है. शहद उत्पादन को लेकर मुरैना एक नई पहचान बना रहा है. जिले आजीविका मिशन से जुड़े कई स्वयं सहायता समूह (Self Help Group- SHG) की महिलाएं भी शहद उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गईं. इसके अलावा शहद उत्पादन से कई किसान और शहद उत्पादक जुड़े, जिसमें उनके परिवार की महिलाएं प्रमुख रूप से भूमिका निभा रही. </p>
<p>मुरैना में आजीविका मिशन, जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रूचि ले रहे. इस जिले में लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन (Honey Production) से जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं भी अब इस कारोबार से जुड़ कर अलग-अलग राज्यों में शहद बेच रहीं है. </p>
<p>धूरकुडा गांव में मां संतोषी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रेखा धाकड़ कहती है - "मैंने 2018 में समूह का गठन किया. मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली. अभी मेरे पास 300 बॉक्स की कॉलोनी है.पिछले साल हमने 7 लाख रुपए का कारोबार किया था. पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट जल्दी शुरू होना चहिए, जिससे ज्यादा आदिवासी महिलाओं को काम मिल सके." गांव मिरघान के बजरंग स्वयं सहायता समूह की सदस्य माया देवी कुशवाह कहती है -" पिछले साल मेरे पास 700 बॉक्स थे. इस बार 550 बॉक्स हैं. अच्छे उत्पादन के लिए आगरा जिले के जंगल में कॉलोनी लगाई है. मैं चाहती हूं कि शहद के भाव अच्छे मिले. पिछली बार 150 रुपए किलो तक शहद के भाव थे,जबकि इस बार घट कर 70 रुपए किलो के आसपास आ गए."       <img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7D09G2yscxqoaFRnWWRY.jpeg" alt="bee day ">  </p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में SHG की महिलाओं ने इसे खास कारोबार बना लिया.अभी यहां रिकॉर्ड 35 हजार क्विंटल शहद का उत्पादन मधुमक्खी पालकों ने कर लिया.एक लाख कॉलोनी (बॉक्स का समूह जिसमें मधु मक्खी रहती हैं ) में यह उत्पादन लिया जा रहा है. आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश तोमर कहते हैं -" महिलाओं ने शहद उत्पादन में खास रूचि दिखाई. लगभग 500 महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ीं हैं,जबकि सैकड़ों महिलाएं परिवार के साथ भी इस व्यवसाय से जुड़ गईं. महिलाओं ने कई टन शहद का उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया.जिले में पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है. "        </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3YcEv7BV3K2CFap5eZSO.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले सरसों, बरशिन (मवेशियों का चारा), धनिया, अजवाइन आदि का उत्पादन अधिक होने से फ्लॉवरिंग वातावरण मिल जाता है. कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर कीट वैज्ञानिक और हनी बी विशेषज्ञ डॉ. योगेश यादव कहते हैं - " मुरैना में शहद उत्पादन को लेकर मधु मक्खियों को अनुकूल माहौल मिलता है. मुझे ख़ुशी है कि छह हजार से ज्यादा लोग खास कर महिलाएं भी शहद उत्पादन से जुड़ी हुईं है. यहां लगातार उत्पादन बढ़ रहा है. इसकी शुद्धता बढ़ाने के लिए जिले में तीन प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है. यह प्लांट जौरा में दो और पहाड़गढ़ में एक हैं. सरसों फ्लॉवरिंग अधिक होने से यह ख़ास पसंद बनी हुई है. मुरैना में ही एक लाख 70 हजार हैक्टेयर में सरसों की फसल लगाई जाती है.एक बॉक्स में रानी और 300 नर  मधु मक्खी केअलावा लगभग 60 हजार श्रमिक मधु मक्खियां रहती हैं जो फूलों का रस इकठ्ठा करती हैं. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UqKXBFFXbZTW9iqndw6Z.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी मधुमक्खी की कॉलोनी, पास में लगे सरसों के खेत (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>मधुमक्खी पालन को लेकर कई सावधानी रखना होती है. इसकी खास ट्रेनिंग के बाद ही बॉक्स दिए जाते हैं. वैज्ञानिक अशोक यादव आगे बताते हैं- "हमें भ्रम होता है कि शहद जम जाने का मतलब अशुद्ध है. शहद का प्रकृतिक नेचर है जमना. इसमें नेचुरल ग्लूकोज़ की मात्रा ज्यादा होती है. प्रोसेसिंग यूनिट से शहद का मॉइश्चर और अशुद्धि भी हट जाती है. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lzSR46tt4ZN5nGSl7xDl.jpeg" alt="bee day "></p>
<p> <em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी प्रोसेसिंग यूनिट को समझाते हुए अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में जिला प्रशासन भी महिलाओं को इस कारोबार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इच्छित गढ़पाले कहते हैं - " जिले में मधु मक्खी पालन और कारोबार में महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. मुरैना जिला शहद उत्पादन को लेकर नई पहचान बना चुका है. अच्छे भाव मिले यह भी कोशिश की जा रही है. "  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7txQigbcbnGKrRSyvPkP.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</em></span></p>
<p>इस बार शहद उत्पादन अधिक होने और भाव काम मिलने की वजह से उत्पादकों ने स्टॉक अपने पास ही रख लिया है.समूह की महिलाओं के अलावा किसानों की मांग है कि शहद के अच्छे भाव दिलवाने के लिए सरकार प्रयास करे. ग्वालियर -चंबल संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह कहते हैं -" मुरैना के किसानों खास कर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने शहद उत्पादन में नया मुकाम  हासिल किया है. विशेषज्ञों से और ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी. आने वाल दिनों कई देशों में एक्सपोर्ट देखने को मिलेगा." </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 23 May 2023 11:17:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 बैठक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/world-food-india-2023-1st-inter-ministerial-committee-meet-held</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QYTEmQNvEIdgPtSEYGkW.jpg"><p>पहली अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के सचिव (एफपीआई) अनीता प्रवीण शामिल थीं. बैठक का लक्ष्य वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 (World Food India) के लिए अब तक हुई प्रगति पर अधिकारियों को अपडेट करना और आगे होने वाले कार्यक्रम में संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संगठनों की भागीदारी पर चर्चा करना था. </p>
<p>यह मीटिंग मंत्रालय की कार्य योजना को सूचित करने, आपसी सहयोग बढ़ाने, और बातचीत को बढ़ावा देने की कड़ी में एक अहम इवेंट साबित हुई. राउंड टेबल सभा में केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. एफपीआई के सचिव ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नई दिल्ली में 3 नवंबर से 5 नवंबर, 2023 तक होने वाले मेगा फूड इवेंट में उनकी भागीदारी और साझेदारी के लिए विशिष्ट योजनाएं पेश करने का अनुरोध किया.</p>
<p>इसके अलावा, सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से आग्रह किया गया कि वे वर्ल्ड फूड इंडिया के नियोजित सत्रों के बारे में सुझाव दें और इस आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल हों. उन्हें अपने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के ज़रिये जागरूकता बढ़ाने और वरिष्ठ नीति निर्माताओं, उद्योग के सदस्यों, स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group-SHG), और अन्य प्रासंगिक हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने में मंत्रालय का समर्थन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया. इसका लक्ष्य सामूहिक रूप से इस आयोजन को सफल बनाने की दिशा में काम करना था. </p>
<p>भाग लेने वाले अधिकारियों ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (Ministry of Food Processing Industries -MoFPI) को अपना समर्थन दिया. उन्होंने तकनीकी और सेक्टोरल सेशंस में, राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ निवेश संबंधित अवसरों, बायर्स-सेलर्स बैठकों, स्टार्टअप्स के साथ बातचीत, बौद्धिक संपदा अधिकार (intellectual property rights -), और वन नेशन वन डिजिटल प्लेटफार्म के ज़रिये योगदान देने का संकल्प लिया. एफपीआई सचिव ने सभी हितधारकों को एकजुट होने और आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 22 May 2023 17:56:42 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/world-food-india-2023-1st-inter-ministerial-committee-meet-held]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QYTEmQNvEIdgPtSEYGkW.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QYTEmQNvEIdgPtSEYGkW.jpg"/></item><item><title><![CDATA["राज्य के विकास में SHG की हो भागेदारी"- सीएम शिवराज ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-said-he-wants-to-make-women-of-self-help-groups-his-partner-in-implementing-development-activities</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XqFBVRAJvNskO0g7qMvs.jpg"><p>मुख्यमंत्री (Chief Minister) <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> (Shivraj Singh Chauhan) स्वयं सहायता समूहों के <strong>संकुल स्तरीय संगठनों की अध्यक्ष बहनों </strong>से मिले. <strong>'परिचर्चा</strong>' (Paricharcha) का आयोजन <strong>मुख्यमंत्री निवास</strong> पर किया गया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने संकुल स्तरीय संगठन की अध्यक्ष बहनों से संवाद करते हुए कहा कि, <strong>"<em>महिला सशक्तिकरण मेरी जिंदगी का मिशन है</em>"</strong>. जन-सामान्य की समस्याओं और रुके हुए कामों को पूरा करने के लिए<strong> मध्यप्रदेश जन सेवा अभियान-2</strong> (Madhya Pradesh Jan Sewa Abhiyan-2) चलाया जा रहा है. अभियान को सफल बनाने और इसका फायदा समय-सीमा में पात्र लोगों तक पहुंचाने में<strong> स्वयं सहायता समूह</strong> (Self Help Group-SHG) की दीदियां सहयोग कर रही हैं. </p>
<p>बालाघाट जिले से आई <strong>कुंदा चौधरी </strong>उनके एरिया में 'रोड रोलर वाली कुंदा' के नाम से जानी जाती हैं. संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट कुंदा बताती है कि समूह से जुड़ने पर उन्होंने एम एस डब्ल्यू किया. लोन लेकर दुकान को बढ़ाया. इससे उनकी आमदनी बढ़ी. संकुल के सहयोग और बैंक (Bank) लोन से समूह ने रोड रोलर खरीदा. इससे अब तक 20 सड़कें बनवा चुकी हैं और समूह को 4 लाख रुपये की आय हुई है. मुख्यमंत्री ने योजनाओं और कार्यक्रम को लागू करवाने में स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने के लिए निश्चित चैनल विकसित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस अभियान से लोगों की जिंदगी बदलेगी, उनके चेहरे पर मुस्कान आएगी. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए SHG बहनों से हर तरह के सहयोग की अपेक्षा की.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/U84r9vXic6vQedtMgViD.jpg" alt="paricharcha"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Jansampark Bhopal</em></span></p>
<p>सीएम शिवराज ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की बहनें <strong>समाज सुधार</strong> के लिए भी आंदोलन चलाएं. बच्चों की पढ़ाई, बाल विवाह को रोकने तथा नशा-मुक्ति के लिए समूह अपने स्तर पर गतिविधियों और जागरूकता के लिए काम करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि आजीविका मिशन को मज़बूत बनाने के लिए यह ज़रूरी है कि हम अपनी जरूरत का सामान आजीविका स्टोर्स से ही लें. प्रदेश में आजीविका स्टोर और दीदी कैफे की संख्या बढ़ाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने सीएम राइज स्कूल, मेधावी विद्यार्थी योजना सहित मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में करवाने की व्यवस्था संबंधी जानकारी भी दी. </p>
<p>राजगढ़ जिले से आई <strong>अनिता दांगी </strong>ने बताया कि गांव का पैसा गांव में ही रहे, इस लक्ष्य से गांव में शुरू किये जाने वाले व्यवसायों की ट्रेनिंग महिलाओं को दी जा रही है. साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता, सहयोग और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. इससे संकुल स्तर पर करोड़ों रूपये का रोटेशन हुआ है. </p>
<p><strong>शहडोल</strong> के संकुल से जुड़ी <strong>रेखा बर्मन</strong> ने बताया कि महिलाओं को ऑडिट, बुक कीपिंग, रिकार्ड कीपिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है. अब यह महिलाएं दूसरे समूहों के ऑडिट में भी मदद कर रही हैं. आजीविका स्टोर तथा आजीविका मार्ट पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री के प्रचार-प्रसार करने और खरीददारी बढ़ाने के लिए <strong>'आजीविका के रंग -खुशियों के संग'</strong> तथा नई '<strong>उमंग'</strong> नाम से शॉर्ट विज्ञापन फिल्में भी बनाई गई हैं. इस तरह के इवेंट्स से न केवल SHG से जुड़ी महिलाओं का मनोबल बढ़ता है, पर उन्हें नई जानकारी और मार्गदर्शन भी मिलता है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 22 May 2023 12:57:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-said-he-wants-to-make-women-of-self-help-groups-his-partner-in-implementing-development-activities]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XqFBVRAJvNskO0g7qMvs.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XqFBVRAJvNskO0g7qMvs.jpg"/></item><item><title><![CDATA[फ़ूड वेन का स्वाद चखेंगे विदेशी पर्यटक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/self-help-group-in-raisen-started-food-van</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sp4gJjLGBl17SdXMQJ9p.jpg"><p>"जब मेरे कैफे फ़ूड वेन (Cafe Food Van) के पास इतने बड़े-बड़े अधिकारी खड़े थे,और जब कहा कि आप तो बहुत अच्छा मोमोज़ बनाती हो. मैं ख़ुशी से न समाई. मैं सोच ही नहीं पा रही थी कि मैं वही हेमलता हूं जो कुछ साल पहले तक खेतों में मजदूरी करती थी. सिर पर ईंट ढोती थी. मेरी और परिवार कि ज़िंदगी ही बदल गई." ख़ुशी से चमकते हुए चेहरा लिए हेमलता पाल अब सब को यह बात कहती है. हेमलता आजीविका मिशन के सरस्वती स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं. अब वे सबसे अध्यात्म,पर्यटन और बुद्ध स्तूप की पहचान वाले सांची में अपना फ़ूड ट्रक चला रही हैं. इनके फ़ूड वेन पर केंद्रीय ग्रामीण एवं पंचायत सचिव शैलेश सिंह और ग्रामीण एवं पंचायत विकास के अपर प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव पहुंचे. उन्होंने यहां कई तरह के खाने का स्वाद लिया.</p>
<p><img style="width: 580px; height: 326px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/QWY6KA0eFTXwG9yWvhBX.jpg" alt="food van"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em> केंद्रीय सचिव शैलेश सिंह और अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव ने सांची में फ़ूड वेन का शुभारंभ किया (फोटो क्रेडिट:अम्बुज माहेश्वरी)</em></span></p>
<p>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) की ओर से बनवाया गया सरस्वती स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG) चर्चा में है. यहां शासन ने देशी-विदेशी पर्यटकों को ध्यान में रखते यह मौका महिला समूह को दिया.रायसेन जिले के पर्यटक स्थल सांची पर 500 से अधिक पर्यटक रोज़ आते हैं. यहां फ़ूड वेन को शुरुआत से ही बढ़िया रिस्पॉन्स मिलने लगा. प्रशासन के जिले में नवाचार से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में उत्साह है और उनकी उम्मीद बढ़ गई. अब यहां फ़ूड वेन का स्वाद विदेशी भी चखेंगे. केंद्रीय सचिव सिंह और अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव के साथ कलेक्टर अरविंद दुबे तथा जिला पंचायत सीईओ अंजू भदौरिया भी थी. अपर प्रमुख सचिव श्रीवास्तव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में आजीविका मिशन ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया दिया.      </p>
<p>मजदूरी कर अपना घर चलाने वाली मुक्तापुर गांव की हेमलता आगे बताती है -" मैं और मेरे पति परसराम पाल खेतों में मजदूरी करते या जहां काम मिला जाता वहां मजदूरी करते. आजीविका मिशन के अधिकारियों ने हमसे समूह बनवाया. सरस्वती समूह की अध्यक्ष बनी. ग्राम संगठन जाग्रति समूह से जुड़े और लोन लेकर पहले आटा चक्की खरीदी. धीरे-धीरे हालत सुधरे. मेरे पति ने चक्की का कारोबार संभाला. मुझे फ़ूड वेन का मौका मिला तो समूह की दूसरी साथी कीर्ति पाल के साथ नई शुरुआत की. अब मैं आत्मनिर्भर हो गई."</p>
<p>आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक एम. राजा कहते हैं - " लगातार काउंसलिंग के बाद यहां कई समूह बनवाए. ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग दिलवाई. हेमलता दीदी को भोपाल भेज कर कुकिंग होटल मैनेजमेंट की खास ट्रेनिंग दिलवाई गई. वह सभी तरह की डिशेस बनाने लगी है.पर्यटकों को बहुत पसंद आने लगा है." जिले में नौ हजार से ज्यादा समूहों में महिलाएं जुड़ गईं. सांची के ब्लॉक प्रबंधक ब्रज भूषण पांडेय बताते हैं - " सांची ब्लॉक में हेमलता पाल का फ़ूड वेन का संचालन बड़ी उपलब्धि है. इनके समूह को और प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस समूह में दस मिलाएं जुड़ीं हैं." </p>
<p><br>जिला पंचायत सीईओ भदौरिया ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा -"जिले में दूसरे समूह से जुड़ी महिलाएं भी अलग-अलग रोजगार से जुड़ चुकीं हैं. यहां महिलाएं बहुत मेहनती हैं और आत्मनिर्भर होना चाहती हैं. उनको प्रोत्साहित किया जा रहा है." </p>
<p><strong>रिपोर्टर : अम्बुज माहेश्वरी </strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 22 May 2023 11:23:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/self-help-group-in-raisen-started-food-van]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sp4gJjLGBl17SdXMQJ9p.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sp4gJjLGBl17SdXMQJ9p.jpg"/></item><item><title><![CDATA[नाइजीरिया में SHG से फाइनेंशियल इन्क्लूशन आसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/self-help-groups-can-help-spread-financial-inclusion</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/OVUZKbj6dgelXVzy4WbV.jpg"><p>विश्व के भूगोल में नाइजीरिया (Nigeria) देश का एक अलग ही स्थान है. इस देश में कई ऐसी बातें है जो इस देश को अन्य देशों से अलग करती है जैसे  भाषा, रहन सहन, वेश-भूषा, संस्कृति, धर्म, और व्यवसाय. नाइजीरिया में 500 से अधिक जातीय समूह हैं जिसमें होउसा, योरूबा और ल्ग्बो मुख्य जातीय समूह है. 2019 में, नाइजीरिया के सकल घरेलु उत्पाद (GDP) में 2.3% की बढ़ोतरी देखी गई. नाइजीरिया में राजनीतिक भ्रष्टाचार (corruption) की समस्या काफी बड़ी है और बुनियादी ढांचे की कमी भी है. लेकिन हाल ही में इसकी अर्थव्यवस्था (economy) तेज़ी से बढ़ रही है. नाइजीरिया में, खासकर उत्तरी नाइजीरिया में लैंगिक असमानता (gender inequality) व्यापक है. म्यूजिक इंडस्ट्री, एजुकेशन सेक्टर, और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है. धन से संबंधित निर्णय पुरुष ही लेते हैं.  </p><p><a data-mce-href="https://leadership.ng/only-35-of-nigerian-women-own-bank-accounts-nbs/" href="https://leadership.ng/only-35-of-nigerian-women-own-bank-accounts-nbs/" rel="dofollow">2022 मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे</a> (Multiple Indicator Cluster Survey-MICS) के अनुसार, अफ्रीका (Africa) की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नाइजीरिया में 15-49 वर्ष की आयु के बीच की केवल 35 % महिलाओं के पास बैंक खाते हैं. ग्लोबल एमआईसीएस प्रोग्राम के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा 2021 में किए गए सर्वे से पता चलता है कि सर्वे में शामिल 38,806 महिलाओं में से 64.6 % (25,085) के पास बैंक खाते नहीं हैं. </p><p>महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group-SHG) की मदद से वंचित परिवारों और महिलाओं को बैंक खाते खुलवाने की जानकारी और वित्तीय शिक्षा दी जा सकती है. ग्रामीण महिलाएं अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए संसाधनों को एकत्र कर रही हैं. महिला SHG ने 35 लाख से ज़्यादा महिलाओं को उनके जीवन स्तर में सुधार करने में मदद की है. छह राज्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों ने अपने सामूहिक उपयोग के लिए 2.6 बिलियन नायरा ($ 6 मिलियन) से अधिक की बचत की है. SHG से जुड़कर उन्हें सामाजिक, वित्तीय और व्यावसायिक कौशल में प्रशिक्षण मिल रहा है, जो महिलाओं को बड़े बाजारों तक पहुंचने और उनकी आजीविका में सुधार करने में मदद कर रहे हैं.</p><p>एनबीएस रिपोर्ट से पता चला कि कानो (5.7 प्रतिशत), कैटसिना (3.8 प्रतिशत), बाउची (3.2 प्रतिशत), कडुना (3.1 प्रतिशत), जिगावा और नाइजर (2.6 प्रतिशत) वे राज्य हैं जहाँ महिलाओं के खुद के बैंक खाते नहीं होने का दर सबसे ज़्यादा है. बैंक खाते नहीं होने के कारणों पर, 14.2 % महिलाओं ने कहा कि उनके इलाके में बैंक नही हैं, 5.7 % ने कहा कि नज़दीकी बैंक पहुंचने में काफी समय लगता है, 58.6 % ने अस्थिर आय और 22.8 % ने बेरोजगारी या नौकरी खोने की वजह बताई. दूसरी वजहों में बैंकों के प्रति विश्वास की कमी, धार्मिक कारण, डॉक्यूमेंटेशन में समय की बर्बादी, और बैंक खाता होने में कोई लाभ नहीं होना जैसी वजहें शामिल थी.</p><p>एक्सपर्ट्स ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए फाइनेंशियल इन्क्लूशन (Financial inclusion) पर ध्यान देने की सलाह दी. फाइनेंशियल इन्क्लूशन या वित्तीय समावेशन अत्यधिक गरीबी को कम करने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने का कारगर उपाय है. फाइनेंशियल इन्क्लूशन सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) 2030 का अहम हिस्सा है. एनबीएस ने कहा, "वित्तीय समावेशन को एसडीजी के सात लक्ष्यों को पूरा करने और गरीबी को कम कर समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक लाभदायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है." आगे कहा, "यह गरीबी की दर को कम करने में मदद करता है, रोजगार उत्पन्न करता है, पूंजी बढ़ाता है, सामान्य कल्याण और जीवन स्तर में सुधार करता है, और समग्र आर्थिक विकास को गति देता है,"</p><p>2018 में फाइनेंशियल इन्क्लूशन दर 36.8 % से गिरकर 2020 में 35.9 % हो गया. "मोबाइल मनी एकाउंट्स (Mobile Money Accounts) के बढ़ने से महिलाओं, गरीब लोगों और अन्य समूहों को बेहतर सेवा देने के नए अवसर पैदा किए हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रखा गया है. अनुमान लगाया जा सकता है कि मोबाइल मनी एकाउंट्स लिंग अंतर को ख़त्म करने में मदद कर सकते हैं. नीति निर्माताओं को चल रहे परिवर्तन में अल्पसेवित जनसंख्या समूहों को शामिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है.</p><p>देश में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं. एनबीएस के सुझाव को माने तो ये समूह फाइनेंशियल इन्क्लूशन को बढ़ावा देने में भी मदद करेंगे. आगे चलकर, ये दुसरे विकासशील देशों के लिए उदाहरण बनेंगे. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 13:45:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/self-help-groups-can-help-spread-financial-inclusion]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/OVUZKbj6dgelXVzy4WbV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/OVUZKbj6dgelXVzy4WbV.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गुजरात की फेब्रिक आर्ट बनी पहली पसंद ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"><p>गुजरात में एक घरेलु महिला ने न केवल मेहनत कर आत्मनिर्भर बनी बल्कि अलग-अलग समूह की जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना दिया. इस महिला धर्मिष्ठा ने अलग-अलग जगह जाकर चार हजार से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी. ऐसी ट्रेंड महिलाएं अब अपना रोजगार चला रहीं हैं. ऐसी महिलाएं भी जुड़ीं जो बेसहारा,अकेली या तलाकशुदा हैं. अहमदाबाद की धर्मिष्ठा अशोक भाई चुड़ासमा गुजरात सरकार के कहने पर कई संस्थाओं में ट्रेनिंग देने जाती हैं.</p>
<p>इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव में शामिल हुई धर्मिष्ठा कहती हैं -“ मैं ट्रेडिशनल आर्ट और हैंडीक्रॉफ्ट को बचाने में लगी हूं. इस काम से जहां संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे वहीं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत भी कर पा रहे. मैंने महिलाओं को मदद करने के लिए सिद्धि विनायक संस्था बनाई. 11 सदस्य बने. मैं फैब्रिक जूलरी, मिरर फेब्रिक वर्क, एम्ब्रॉयडरी सहित कई प्रोजेक्ट से जुड़ गए. मुझे ख़ुशी है की इंदौर मालवा उत्सव में हमें लगभग 50 हजार रुपए का वर्क ऑर्डर मिला."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/GxNfaxq7UQDWYlWmTSwm.jpg" alt="Gujarat Malwa Utsav"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फेब्रिक को जमाते हुई धर्मिष्ठा (फोटो क्रेडिट :रविवार विचार) </em></span></p>
<p>अहमदाबाद सेंटर से धर्मिष्ठा अभी 300 महिलाओं के साथ काम करती है. कोरोना काल से  पति अशोक भाई अब मार्केटिंग संभालते हैं. महिलाओं को दिक्क्त न हो इसलिए उनको घर जा कर कच्चा माल दे दिया जाता है. वे घर से ही सामान तैयार कर सेंटर पर भेज देती है. इस संस्था से जुड़ी पायल परमार कहती है -" हैंडीक्रॉफ्ट आइटम और फेब्रिक हैंडवर्क से मैं आत्मनिर्भर हो गई. मेरे आर्थिक हालात सुधर गए. मैं 12 से 15 हजार रुपए महीने कमा लेती हूं." इस संस्था से 60 अधिक महिलाएं सखी मंडल ( SELF HELP GROUP -SHG )  की सदस्य हैं जिन्हें रोज काम मिल जाता है. इस संस्था की एक और महिला धर्मिष्ठा भी जुड़ गई. धर्मिष्ठा कहती है -" मेरी आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. जब से इस काम में जुटी हर महीने दस हजार रुपए महीने से ज्यादा कमा लेती हूं."</p>
<p>इस संस्था के सदस्यों के साथ संस्था अध्यक्ष धर्मिष्ठा अब तक अहमदाबाद के अलावा सूरत ,बड़ौदा ,गांधीनगर ,इंदौर ,सौराष्ट्र और दिल्ली के मेले में अपनी प्रदर्शनी लगा चुकीं  हैं. धर्मिष्ठा आगे बताती है -" सबस ज्यादा फायदा हमें कच्चा माल लेने में होता है. हम कॉटन और दूसरा फेब्रिक अहमदाबाद से ही ले लेते हैं. इस पर डिमांड के अनुसार तैयार करते हैं. मिरर वर्क ब्लाउस की कीमत 2 हजार रुपए तक होती है और महिलाएं मेले में बड़े शौक से खरीदती हैं. हम इस आर्ट को और राज्यों तक ले जाएंगें. "</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 13:20:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं के सपनों की बन रही जूलरी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/neelkanth-woman-shg-making-handmade-jewellery-to-become-financially-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg"><p>" मैं पहले से ही सिलाई का काम कर रही थी. पर मुझे लगा कि कुछ ऐसा काम करूं कि दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी काम दे सकूं. मैंने नीलकंठ सखी मंडल बनाया. इसमें दस महिलाओं का समूह (self help group-SHG) बना कर हैंडीक्रॉफ्ट आइटम (handicraft) बनाना शुरू किया. कुछ सीखा और कुछ मन से तैयार किया. मुझे ख़ुशी है कि मैं 15 दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार दे सकी.अब हम देशभर के हस्तशिल्प मेले में जाकर हिस्सा लेते हैं. हमारे प्रोडक्ट को बहुत पसंद किया जा रहा है." नीलकंठ सखी मंडल की अध्यक्ष मनीषा ने यह बात बहुत गर्व से कही. हाल ही में इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव (Malwa Utsav) में शामिल होने आए सूरत गुजरात के नीलकंठ सखी मंडल के स्टॉल पर ग्राहकों की बहुत भीड़ रही. </p>
<p>हस्तशिल्प मेले में शामिल हुए इस समूह की अध्यक्ष मनीषा बेन डोबरिया आगे कहती हैं -" हमारे समूह द्वारा तैयार प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए मेरे पति राकेश डोबरिया पूरा साथ देते हैं.हम कच्छ से ब्लॉक प्रिंट का बचा वेस्ट कपड़ा खरीद कर लाते हैं.इससे फेब्रिक जूलरी तैयार की जाती है. इसके दूसरे आइटम भी तैयार किए जाते हैं." इस समूह से जुडी हुईं कीर्ति बेन कहती हैं - "हम इस से समूह  से जुड़े तभी से हमारी आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार हुआ. हम कच्चा माल ले जाकर अपने घर से आइटम सप्लाई कर देते हैं." इसमें सभी महिलाएं अलग -अलग तरह की चीज़ें बनती हैं. इस समूह के काम से जुड़ीं मित्तल कथिरिया भी बहुत खुश है. मित्तल कहती हैं - " मैंने कभी सोचा नहीं था कि घर बैठ कर भी इतना अच्छा काम मिल जाएगा. कच्चे माल से मैं वूडन जूलरी सहित कई तरह के सामान बना लेती हूं. मुझे कहीं जाना भी नहीं पड़ता और कमाई नहीं अच्छी हो जाती है."  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Ur1lsYbgdOusl6V6qNpE.jpeg" alt="gujarat handicraft"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>समूह के सदस्यों को कई जगह अवार्ड मिल चुके हैं (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</em></span></p>
<p>गुजरात में भी रोजगार हासिल करना और आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया में स्वयं सहायता महिला समूह की भूमिका नज़र आने लगी है. नीलकंठ समूह ऐसी हैंडमेड जूलरी बना रहा जो गरीब महिलाओं के सपने और इच्छा तो पूरी कर ही रहा बल्कि समूह से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर रहा.अब तक कई जगह इस समूह को सम्मान मिल चुके हैं. समूह की मनीषा आगे बताती है -" महिलाओं को सबसे ज्यादा जूलरी पसंद है और मंहगी जूलरी पहन नहीं सकती.इसे ध्यान में रख सब आइटम बनाए. इसके अलावा सभी हैंडमेड बेल्ट,मिरर, बटंस और प्रिंट कपड़े जो प्रेस के साथ कपड़ों पर स्थाई डिज़ाइन बन जाता है,बनाए जा रहे. "</p>
<p>मनीषा सभी महिलाओं को साथ लेकर चल रही है. उनके पति राकेश कहते हैं -" मुझे ख़ुशी है  कि महिलाओं को इंदौर,बेंगलुरू, मैसूर, दिल्ली. गुजरात के कई शहर में अहमदाबाद,सूरत,बड़ौदा,पावागढ़ सहित कई शिल्प मेलों में बुलाया. समूह की सभी महिलाओं की आर्थिक हालात सुधर गए. और अब वे सभी स्वाभिमान की जिंदगी जी रहीं हैं."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 12:40:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/neelkanth-woman-shg-making-handmade-jewellery-to-become-financially-independent]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg"/></item><item><title><![CDATA['1 स्टेशन 1 प्रोडक्ट' से बिक्री NO.1 ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/one-station-one-product-scheme-helps-increase-profit-of-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LvffsfyhfcIQaZzrshRp.jpg"><p>रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) ने भारत सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' (Vocal for Local) विज़न को बढ़ावा देने के लिए 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (One Station one Product- OSOP) योजना की शुरुआत की. स्थानीय/स्वदेशी उत्पादों को बाज़ार तक पहुंच देकर, आय के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से OSOP योजना शुरू की गई. समाज के वर्गों. योजना के तहत, OSOP आउटलेट्स स्वदेशी उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए प्रोडक्ट की विजिबिलिटी बढ़ाते हैं. </p><p>योजना का पायलट पिछले साल शुरू किया गया था और अभी तक, देश भर के 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 785 OSOP आउटलेट्स के साथ 728 स्टेशनों को कवर किया गया है. देशभर में समानता कर लिए, स्टालों को राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान द्वारा डिज़ाइन करवाया गया है जो सुविधाजनक स्टोरेज की और प्रदर्शन के लिए पर्याप्त जगह देता है.</p><p>बेलगावी स्टेशन पर, मीनाक्षी स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG), चचड़ी गांव (सौंदत्ती तालुक) को OSOP आउटलेट दिया गया है. SHG सदस्य श्रीमती मीनाक्षी ने कहा कि इस स्टॉल ने SHG से जुड़ी महिला उद्यमियों को आगे आने में मदद की है और इसने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है. उन्होंने स्टाल के डिजाइन की भी प्रशंसा की जो उन्हें घर में बने खाने को आसान तरीके से स्टोर करने और प्रदर्शित करने में सक्षम बनाती है. </p><p>कर्नाटक में विभिन्न रेलवे स्टेशनों में 21 OSOP स्टॉल चालू हैं. यहां लोकल कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां, हैंडलूम, और हस्तशिल्प आदि शामिल हैं. इससे उन्हें अपनी बिक्री बढ़ाने और ग्राहक बढ़ाने में मदद मिली है. कई ग्राहक नियमित रूप से फोन पर भी ऑर्डर देकर उनके उत्पाद जैसे आयुर्वेदिक तेल खरीद रहे हैं. बेंगलुरु छावनी स्टेशन पर OSOP के ज़रिये बाजरा और जैविक शहद की बिक्री बढ़ रही है.  </p><p>रेलवे स्टेशन पर OSOP के ज़रिये जगह मिलने से स्वयं सहायता समूहों ने नई ऊंचाइयां हासिल की है. हमेशा भीड़-भाड़ वाले इस एरिया में जगह मिलने से महिलाओं के उत्पादों को नई पहचान भी मिली है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 20 May 2023 15:08:20 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/one-station-one-product-scheme-helps-increase-profit-of-shg]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LvffsfyhfcIQaZzrshRp.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LvffsfyhfcIQaZzrshRp.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जम्मू की मिठाई वाली दीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/sweet-success-story-of-mamta-devi-from-jammu</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg"><p>साईकिल वाली दीदी, पत्रकार दीदी, अचार दीदी की कुछ अलग कर दिखाने की कहानियां तो हमनें सुनी. सूपर वुमन की लिस्ट में एक नाम और जुड़ा है - मिठाई वाली दीदी. कम आय, वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली ममता देवी ने जम्मू और कश्मीर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (उम्मीद) से वित्तीय सहायता लेने के बाद उपनाम "मिठाई वाली दीदी" के नाम से फेमस हो गई. देवी बिश्नाह गांव की रहने वाली हैं. वह घर पर ही रहती थी. उनके पति मिठाई की दुकान पर काम करके रोज़ी-रोटी कमाते थे. उनके जीवन में तब बदलाव आया जब 2015 में वह 10 महिलाओं के साथ बिश्नाह स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG) में शामिल हुई.</p>
<p>थोड़ी हिचकिचाहट के बाद ममता देवी SHG में शामिल हुई और धीरे-धीरे, समूह की मदद से आर्थिक रूप से मज़बूत होने लगी. वे गृहिणी से एक सफल व्यवसायी बनी. जम्मू और कश्मीर में संसाधनों की कमी से पीड़ित ग्रामीण महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने अहम भूमिका निभाई. जरूरतमंद एसएचजी सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण मिलने से वे रोज़गार शुरू कर पाये और जल्द ही लोन भी चुका दिया. बचत कर ममता ने दो पक्के कमरे बनाए. इससे पहले, उनका परिवा कच्चे घर में रहता था और बारिश के दौरान  छत से पानी टपकने पर काफी मुश्किल होती थी.</p>
<p>ममता ने अपने पति को खुदकी मिठाई की दुकान खोलने में मदद की. साथ ही, उन्होंने समूह की महिलाओं के साथ कपड़े के थैले, ट्रैकसूट, राष्ट्रीय ध्वज बनाने, और क्लाउड किचन का काम भी शुरू किया. बिश्नाह में कुछ SHG सदस्यों ने रेडीमेड कपड़ों की दुकानें भी खोली. अपने  व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उन्हें आसानी से ऋण मिला. उन्हें पूरे जम्मू-कश्मीर, यहां तक ​​कि बाहर भी अपने काम को प्रदर्शित करने का मौका मिला. बावे (जम्मू) में एक दुकान शुरू कर ममता ने दस दिनों में 35 हज़ार रुपये कमाए. सरकार डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन, गांधी नगर, और पुलिस मुख्यालय में मिठाई की स्टॉल लगाई. </p>
<p>49 साल की उम्र में आकर उन्होंने आर्थिक रूप से मज़बूत बनने का सपना पूरा किया और वो सभी आर्थिक कठिनाइयों से बाहर आई. नौ साल लगातार मेहनत के बाद उन्हें बिश्नाह के बाहर भी लोग 'मिठाई वाली दीदी' के नाम से जानने लगे. उन्होंने महिलाओं को SHG से जुड़ने के लिए प्रेरित किया.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 19 May 2023 12:33:17 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/sweet-success-story-of-mamta-devi-from-jammu]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yCDmeubPCnFWNNgjONlh.jpg"/></item><item><title><![CDATA[6 लाख क्विंटल रागी खरीद से OMM को बढ़ावा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-employed-a-holistic-agristrategy-to-procure-6-lakh-quintals-of-ragi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AT996LJArD88NJQJvQBr.jpg"><p>ओडिशा मिलेट मिशन (Odisha millet Mission) राज्य में बाजरे की खेती को वापिस लाने और किसानों को आमदनी बढ़ाने में मदद करने के लिए ओडिशा सरकार द्वारा एक पहल है. इस प्रमुख कार्यक्रम के तहत सरकार ने बड़ी मात्रा में रागी की सफलतापूर्वक खरीद की है. ओडिशा सरकार ने खरीफ 2022-23 में ओडिशा मिलेट मिशन (OMM) के तहत 60 हज़ार से ज़्यादा किसानों से 6 लाख क्विंटल से ज़्यादा रागी की खरीद की है. फसल को 19 जिलों के 143 ब्लॉकों से 3,578 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया.</p>
<p>खरीफ मार्केटिंग सीजन 2022-23 के दौरान, कोरापुट, रायगढ़ा, मल्कानगिरी, कालाहांडी, गजपति और सुंदरगढ़ दक्षिणी ओडिशा जिलों ने ओएमएम के तहत सबसे अधिक मात्रा में रागी की खरीद की. कृषि और किसान अधिकारिता विभाग, ओडिशा सरकार ने राज्य में बाजरा को पुनर्जीवित करने के लिए 2017-18 में प्रमुख कार्यक्रम ओएमएम लॉन्च किया था.</p>
<p>हदीगुड़ा मल्कानगिरी जिले के कोरकुंडा ब्लॉक में एक आदिवासी गांव है. गांव के मूल निवासी नरहरि पात्र, जिले के 25,487 किसानों में से हैं, जिन्हें 10,421 हेक्टेयर (हेक्टेयर) में पारंपरिक बाजरे की खेती को पुनर्जीवित करने के लिए ओएमएम से प्रोत्साहन सहायता प्रदान की जा रही है. नरहरि ने 8.5 हेक्टेयर में 40 क्विंटल रागी की खेती की. यह क्षेत्र में दर्ज की गई सबसे ज़्यादा उपज थी. जिला प्रशासन ने उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ बाजरा किसान' के रूप में मान्यता देते हुए प्रमाण पत्र दिया.</p>
<p>रागी की खेती अधिकतर बंजर और कम उपजाऊ भूमि में की जाती है. पहले,  उपज मुश्किल से 2.5 क्विंटल प्रति एकड़ थी. लेकिन एसएमआई पद्धति से किसान प्रति एकड़ लगभग 5-6 क्विंटल फसल उगाने लगे. इस तरीके से, रागी के छोटे अंकुरों को 15-20 दिनों में मिट्टी के साथ उखाड़ा जाता है और बेसल के साथ 25×25 सेंटीमीटर पंक्ति में लगाया जाता है. महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रबंधित बायो-इनपुट सेंटर हंडीखाता, जीवामृत, बीजामृत, अग्निस्त्र आदि जैसे जैविक इनपुट प्रदान करते हैं.</p>
<p>मिशन शक्ति (Mission Shakti) विभाग के सहयोग से बना गंगाधर महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG) ने नुआपाड़ा जिले के सिनापाली प्रखंड में 1,271 क्विंटल रागी की खरीद की है. SHG ने अपने कमीशन और सर्विस चार्ज के हिस्से के रूप में 85,830 रुपये की कमाई की. </p>
<p>SHG संघ महिला किसानों को पोषण सुरक्षा और बाजरा (millet) के कई स्वास्थ्य लाभों के बारे में बता रहा है. ओएमएम और मिशन शक्ति की सहयोगी पहल के तहत, महिला उद्यमियों को बाजरा आधारित प्रोसेसिंग और उद्यमों की स्थापना और प्रबंधन के लिए सहयोग किया जा रहा है. स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने वाली ऐसी पहलों से महिलाओं की आजीविका में बढ़ोतरी होगी और आर्थिक आज़ादी का सपना पूरा हो सकेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 18 May 2023 15:50:29 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-employed-a-holistic-agristrategy-to-procure-6-lakh-quintals-of-ragi]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AT996LJArD88NJQJvQBr.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AT996LJArD88NJQJvQBr.jpg"/></item><item><title><![CDATA[केले के रेशे से बनेंगे सैनेटरी पेड ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-reusable-sanitary-pads-with-banana-fibre</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tnEADu5X7Mi5vaTYCXqP.jpg"><p><em>"केरल के मठ में जाकर देखा तो सोच भी नहीं पाई कि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए इतनी बड़ी पहल की गई. उनके लिए सबसे जरुरी सैनिटरी पेड को इतना हाइजेनिक और रियूज़ तरह का बनाया जा रहा था. मैंने सभी साथी दीदियों के साथ पूरे उत्साह से ट्रेनिंग ली. मुझे पूरा भरोसा था कि अपने जिले में पहुंच कर महिलाओं को इसका महत्व और उपयोग का तरीका सीखा सकूंगी. और बुरहानपुर लौट कर ऐसा ही हुआ.</em>" प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह की दीपिका सोनी ने वहां मिली ट्रेनिंग के फायदे बताए. </p>
<p>आने वाले दिनों में खासकर ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी सौगात मिलने वाली है. आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) के तहत बुरहानपुर जिले में खास तरह से बनने वाले सैनिटरी पेड (Sanitary Pad) बनाने की यूनिट लगेगी. केले के पेड से निकलने वाले रेशे से तैयार यह पेड सस्ते होने के साथ रियूज़ लायक होंगे. एक ही पेड का कोई भी महिला चार साल तक उपयोग कर सकेगी. महिलाओं को जहां एक ओर रोजगार मिलेगा वहीं गरीब महिलाओं को महंगे पेड खरीदने की मजबूरी से छुटकारा भी मिल जाएगा.केरल के मां अमृतानंद मठ यानि अम्मा के मठ में यह ट्रेनिंग दी गई. </p>
<p>लगभग 13 दिनों की इस ट्रेनिंग कैंप में छह जिले की अलग-अलग स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG) की महिलाओं को शामिल किया गया. इसमें बुरहानपुर के अलावा खंडवा,खरगोन,धार,बड़वानी, झाबुआ से भी महिलाओं को इस ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. इसी टीम में शामिल प्रियंका मंडलोई कहती है -"<em> मठ में हमें सैनेटरी पेड की उपयोगिता, उसके खास फायदे और ग्रामीण महिलाओं तक कैसे पहुंचाया जाए जैसे मुद्दों पर ट्रेनिंग दी. हमें बतौर पेड के सैंपल भी दिए गए. हमने काउंसलिंग कर ग्रामीण महिलाओं को इसके फायदे बताए. महिलाओं को इस का लाभ समझ में आने लगा है."</em></p>
<p><em><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/6CrUgpCjD9IWBdMpYFtT.jpg" alt="pads made from banana fibre"></em></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>प्रदेश की समूह से जुड़ी महिलाएं जो ट्रेनिंग के लिए केरल पहुंची </em></span></p>
<p>यदि ग्रामीण महिलाओं को इसका उपयोग करना आ गया तो समूह द्वारा ही यूनिट डाली जाएगी. आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक संतमति खलखो कहती हैं -<em>"इस पेड की खासियत हैं कि ये केले के रेशे और कॉटन के कपड़े की सिलाई से तैयार होते हैं. इसे साफ पानी में धोकर लगभग चार साल रियूज़ कर सकते हैं. यह सस्ता पड़ेगा. समूह की दीदियां इसके लिए जागरूकता अभियान चला रहीं हैं.जिले में केले का सबसे ज्यादा उत्पादन होने से बुरहानपुर को पेड निर्माण यूनिट लगाने के लिए चुना है."</em></p>
<p>केरल के अम्मा मठ से जुड़ी अंजु बिष्ट मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से वहां पहुंची महिलाओं की ट्रेनिंग और अन्य जानकारियों के लिए कोऑर्डिनेशन कर रहीं हैं. अंजु कहती हैं -<em>"प्रदेश के समूह से जुड़ी महिलाएं बेहद मेहनती हैं. अभी हर पेड की लागत केवल 350 रुपए है. जबकि ब्रांडेड पेड बहुत महंगे होने के साथ सिंगल यूज़ हैं. हम प्रयासरत हैं कि बुरहानपुर में जल्दी यूनिट लगे. हम भोपाल में राज्य आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं."          </em></p>
<p>पेड उपयोग को लेकर की जा रही काउंसलिंग और मार्केंटिंग की गुंजाईश में जहां समूह की महिलाएं अपने-अपने जिले में  व्यस्त हैं, वहीं इस इस खास पेड को लेकर इंदौर की चर्चित गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मंजुश्री भंडारी कहती हैं- <em>"यह सरकार की पहल बहुत बढ़िया है. ग्रामीण महिलाओं को इसका सीधा लाभ होगा.पर खतरा भी उतना ही है. अभी तक महिलाएं मेंस्ट्रुअल टाइम में पेड यूज़ कर फेंक देती हैं. यदि इस खास पेड की सफाई और उसका उपयोग को लेकर बहुत गंभीरता से सीखना होगा. हाइजेनिक ध्यान रखना होगा,अन्यथा इंफेक्शन का खतरा बना रहता है."</em></p>
<p>प्रशासन बुरहानपुर में इस यूनिट को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है. कलेक्टर भव्या मित्तल (Collector Bhavya Mittal) कहती हैं -<em>" समूह की महिलाएं पेड बनाने को लेकर रूचि ले रहीं हैं. सेकेण्ड फेस में प्रोडक्शन की ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी. यह इलाका केला उत्पादक है इसलिए उससे रेशे निकालना आसान होगा. इस प्रोजेक्ट में कोई समझौता नहीं किया जाएगा. यह यूनिट जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. समूह की महिलाओं को जहां आर्थिक लाभ होगा वहीं ग्रामीण महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होंगी. "  </em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 11 May 2023 18:06:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-reusable-sanitary-pads-with-banana-fibre]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tnEADu5X7Mi5vaTYCXqP.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tnEADu5X7Mi5vaTYCXqP.jpg"/></item></channel></rss>