<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ sex education]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/sex-education</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/sex-education" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 02 Mar 2024 11:10:55 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Health education से महिला सशक्तिकरण को मिलेगी एक नई दिशा! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/health-education-will-give-a-new-direction-to-women-empowerment-especially-in-the-rural-india-4128239</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hRjw8c7pL5nsj57TtrRD.jpg"><p style="text-align: justify;">ग्रामीण भारत (Rural India), जहां परंपराएं समाज का ताना-बाना बुनती हैं और दैनिक जीवन की लय अक्सर प्रकृति तय करती है. एक बदलाव लाने की अनछुई संभावना इसी ग्रामीण भारत में छिपी हुई है. यह क्षमता इन समुदायों की महिलाओं में बसी है. ये महिलाएं देखभाल करने वालों, शिक्षकों और मजदूरों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाती हैं. फिर भी उनकी समीक्षाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इस क्षमता को उजागर करने की कुंजी है स्वास्थ्य शिक्षा (rural health education). केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए ही नहीं बल्कि ग्रामीण समुदायों के समग्र विकास के लिए भी यह एक शक्तिशाली साधन है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में, healthcare facilities तक पहुंच सिमित है. साथ ही स्वास्थय को लेकर जागरूकता की कमी और समाज द्वारा बनाए गए stereotypical cultural norms अक्सर महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और स्वास्थ्य अधिकारों के मामले में अंधेरे में रखते हैं. इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे मातृ मृत्यु (maternal mortality rate), कुपोषण (malnutrition) और रोकी जा सकने वाली बीमारियों के उच्च दरों के रूप में देखा जा सकता है. इस बात से यह तो तय है कि health education ना केवल एक आवश्यकता के रूप में उभरती है बल्कि सशक्तिकरण (empowerment) और विकास (development in India) के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आती है.</p>
<p><img alt="Health Education in rural India" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tb6D4FnJAd8iZL5tUBys.jpg" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits - AKDN/Christopher Wilton-Steer</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">Rural India में health education का महत्त्व</h2>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/usha-oraon-encouraging-rural-women-towards-clean-cooking-and-financial-freedom-1707268">ग्रामीण महिलाओं</a> के लिए health education और भी ज़रूरी हो जाती है, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य, परिवार के कल्याण और समाजिक विकास, सभी में योगदान देती है.</p>
<p style="text-align: justify;">Health education से महिलाओं को कई लाभ प्राप्त होते हैं, जिसमे से कुछ हैं:</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li style="text-align: justify;"><strong>स्वास्थ्य में सुधार - </strong>स्वास्थ्य शिक्षा से <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/day-nrlm-organised-two-day-regional-workshop-to-strengthen-shg-led-food-nutrition-health-and-wash-efforts-for-its-nine-hundred-ninety-six-crore-members-2471012">महिलाओं को पोषण, स्वच्छता</a>, reproductive health, तथा आम रोगों और उनसे बचाव के बारे में जानकारी मिलेगी. यह जानकारी महिलाएं और उनके परिवार के स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करेगी.</li>
<li><strong>मातृ और बाल मृत्यु दर में कमी -</strong> Pregnancy से संबंधित देख-रेख, खासकर जन्म देने और उसके बाद किए जाने वाले उपचार के बारे में सही शिक्षा से ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ और बाल मृत्यु दर (infant mortality rate) को काफी कम किया जा सकता है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>महिला बनेंगी सशक्त -</strong> महिलाओं को उनके स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने में health education अधिक स्वायत्त बनाती है जिससे वह सशक्त और आत्मनिर्भर बनती हैं. यह निर्णय <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/male-contraceptive-risug-will-empower-indian-womens-reproductive-health-and-rights-1681813">family planning</a> से लेकर बच्चों की परवरिश से संबंधित हो सकते है. स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने से, पूरे समुदाय को स्वास्थ्य परिणामों, आर्थिक स्थिरता में लाभ होगा. साथ ही इससे gender ratio को सुधरने में भी मदद होगी.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>आर्थिक लाभ -</strong> स्वस्थ महिलाएं अपने परिवार और समुदाय में अधिक प्रभावी रूप से योगदान दे सकती हैं. बिमारियों पर नियंत्रण पाने के उपायों के माध्यम से healthcare पर अपने खर्च को कम करने से, परिवार शिक्षा और पोषण जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ध्यान दे सकते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीण भारतीय महिलाओं के लिए स्वास्थ्य शिक्षा का प्रचार और समर्थन करने से न केवल उनकी स्वास्थ्य स्थितियों में सुधार होगा बल्कि यह उनके सशक्तिकरण और समुदाय के समग्र विकास में भी योगदान देगा.</p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाओं में health education पर दिया जा रहा ज़ोर</h2>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार, NGOs और निजी संगठन कई पहलों पर काम कर रहे है.</p>
<p style="text-align: justify;">सामाजिक स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA Workers), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और healthcare professionals की मदद से कई schemes और policies लागु की गईं हैं. इनमें Polio Vaccination, Ayushman Bharat, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, मिशन इंद्रधनुष और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थय मिशन (National Rural Health Mission) जैसी schemes मौजूद है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसी के साथ आज स्कूली स्तर पर भी sex education को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे adolescence में ही reproductive health के बारे में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. यह कदम society के stereotypes को तोड़कर आने वाली पीढ़ियों को खुलकर बिमारियों और उनसे बचाव के बारे में चर्चा कर सकेंगे और शुरुआती स्तर पर ही बिमारिओं से बच सकेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">Health services और professionals की मदद से गैर सरकारी संगठन (NGOs), सरकारी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में seminars और health camps की मदद से शिक्षा लोगों तक पहुंचा रहे हैं. इसमें खास तौर पर&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/piramal-foundation-gandhi-fellow-conducted-menstrual-hygiene-awareness-campaign-program-in-chattisgarh-1674071">menstrual hygiene</a>, HIV और AIDS जैसी घातक STDs और महिलाओं में एनीमिया जैसी बिमारियों के बारे में जानकारी दी जाती है जो महिलाओं के लिए बेहद ज़रूरी हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीण भारत में health education के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हर तरफ से प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें न केवल शैक्षिक पहलू बल्कि महिलाओं के सामने आने वाली सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बाधाओं को भी दूर किया जाए. निरंतर प्रयासों के माध्यम से, स्वास्थ्य शिक्षा महिला सशक्तिकरण के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बनेगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Sat, 02 Mar 2024 11:10:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/health-education-will-give-a-new-direction-to-women-empowerment-especially-in-the-rural-india-4128239]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hRjw8c7pL5nsj57TtrRD.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hRjw8c7pL5nsj57TtrRD.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जिस्म, दिमाग और रूह की चोट जारी है! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"><p dir="ltr"><span>किसी भी तरह की हिंसा (violence) व्यक्ति समाज देश के लिए सही नहीं होती. समाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर हो रही हिंसा से देश दुनिया की मनोवृति का पता चलता है. महिलाओं के खिलाफ हो रही अलग अलग हिंसा चाहे घर में या बाहर, हर तरह से गलत और निंदनीय है. WHO द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 3 में से 1 (30%) महिला ने अपने जीवनकाल में शारीरिक तथा यौन अंतरंग साथी हिंसा या गैर- साथी यौन हिंसा का शिकार होती है. हिंसा, महिला के शारीरिक, भावनात्मक, यौन और प्रजनन स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती  है. घरों में जब हिंसा या दुर्व्यवहार की बात आती है तो समाज का ध्यान परिवार के सदस्य पर नहीं आता.  एक महिला को अपने परिवार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बहुत साहस की ज़रुरत होती है.</span><span>हमारा देश साक्षरता विज्ञान (Science) टेक्नोलॉजी (Technology) में लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ महिलाओं के साथ हो रही हिंसा में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह ऐसा अपराध है जो रुक नहीं रहा. महिलाओं को कुरीतियों में बांधकर उनके साथ कई तरह के अत्याचार किये जाते है जैसे छेड़छाड़, एसिड अटैक (acid attack), घरेलु हिंसा (domestic violence), बलात्कार (rape), दहेज़ प्रथा (dowry system), भ्रूण हत्या (femicide) आदि. महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों का कारण यह समाज एवं इसकी कुरीतियाँ भी है. यह समाज लड़की के साथ गलत होने पर भी उस लड़की को ही दोष देता है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा 12 जून को जारी 2023 जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स (GSNI) रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि दुनिया भर में दस में से नौ पुरुष और महिलाएं, महिलाओं के बायसनैस रखते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक "<em>दुनियाभर में 69 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पुरुष बेहतर राजनितिक नेता होते हैं, और 40 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं की पुरुष महिलाओं की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अधिकारी बनते है. इसी रिपोर्ट के मुताबिक एक चौकाने वाला सच सामने आया हैं जिसमे  80 देशों के 25 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पतियों द्वारा पत्नियों  को पीटना जायज हैं </em>". लैंगिक सशक्तिकरण (Gender Empowerment) आज दुनियाभर में चर्चा का विषय है. </span><span>राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission For Women) ने 2022 में घरेलु हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा श्रेणी में 6900 से अधिक शिकायते दर्ज की है. महिलाओं के खिलाफ अपराधों की विभिन्न श्रेणियों में NCW द्वारा दर्ज की गयी 30900 से अधिक शिकायतों में से ये मामले लगभग 23 % थे. COVID - 19 महामारी के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल शिकायतों की संख्या 2020 में लगभग 23700 से 30 % से अधिक बढ़कर 2021 में 30800 से अधिक हो गयी हैं. 2022 में अधिकतम शिकायतें तीन श्रेणियों में दर्ज हुई- दहेज़ सहित विवाहित महिलाओं के उत्पीड़न का मामला (15 %), घरेलु हिंसा (domestic violence) के खिलाफ महिलाओं की सुरक्षा (23 %), और सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुरक्षित करने क लिये (31 %).</span></p>
<p dir="ltr"><span>दहेज़ प्रथा एक गंभीर सामाजिक बुराई है जिसके कारण समाज में महिलाओं के प्रति यातनाएँ और अपराध उत्पन्न हुए है और साथ ही में भारतीय वैवाहिक पद्धति प्रदूषित हुई है. हाल ही में इंदौर के देपालपुर जिले में दहेज़ की लालच में शादी के महज 17 दिन बाद ही पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया.</span></p>
<p dir="ltr"><span>एक लड़की के बलात्कार होने के बाद लोग बलात्कारों को गलत साबित करने और उनको सजा दिलाने के बजाय लड़की के चरित्र पर उंगली उठाते है. उसके पहनावे को देखते है और बलात्कारों को गलत कहने के बजाए लड़की के पहनावे पर उंगली उठाते है. लोगो द्वारा यह बोलना की लड़की ने छोटे कपड़े पहने थे इसलिए उसका बलात्कार हुआ है यह उन लड़को और पुरुषों को बढ़ावा देने का काम करता है जो गंदी मानसिकता रखते है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>मेल गेज़ (male gaze), फिल्मो के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में यह 15-30 वर्ष की लड़की ज़रूर अनुभव करती है, जिसमे महिलाओं को केवल एक वस्तु के रूप में देखा जाता है. पुरुषों की नज़र महिलाओं के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है जैसे सड़क पर चलती लड़कियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित होता है की वह ऐसी तो नहीं दिख रही कि कोई पुरुष आकर उनके स्पेस में दखल दे. </span></p>
<p dir="ltr"><span>विश्व के 185 देशों में से 77 देशों में व्यवाहिक बलात्कार को अपराध माना जाता है, जबकि भारत उन 34 देशो में से एक है जो स्पष्ट रूप से व्यवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है. मैरिटल रेप (Marital Rape) या वैवाहिक बलात्कार भारत में अपराध नहीं हैं, अगर कोई पति अपनी पत्नी से उसकी सहमति के बगैर सेक्सुअल रिलेशन (sexual relation) बनाता हैं तो ये मैरिटल रेप कहा जाता है पर इसके लिए कोई सजा का प्रावधान नहीं है. IPC की धारा 375 के, अपवाद 2 में, वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया हैं और कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी ही पत्नी, जो 18 वर्ष से कम की नहीं है, के साथ उसकी सहमति के बिना यौन सम्बन्ध बनाना बलात्कार नहीं है. इसी मामले के समकक्ष में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि एक आरोपी पर दंड संहिता में छूट की परवाह किये बिना मुकदमा चलाया जाना चाहिए - "<em>एक आदमी एक आदमी है; एक कार्य एक कार्य है; बलात्कार, बलात्कार है, भले ही यह किसी , 'पति' पुरुष द्वारा महिला 'पत्नी' पर किया गया हो.</em>" महिलाओं के खिलाफ अधिकांश अपराधों में न्याय और उसका समाधान मिलने में बहुत समय लगता है जिस वजह से अधिकतर महिलाये शिकायत दर्ज ही नहीं कराती है. ZERO FIR के बारे में लोगो को शिक्षित करने की ज़रुरत है , क्यूंकि ज्यादातर महिलाये और पुरुष कानूनी अधिकारों से अनभिज्ञ हैं .</span></p>
<p dir="ltr"><span>सरकारें महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कई प्रयास कर रही है. जैसे हिम्मत app (Delhi Government), वन स्टॉप सेंटर (OCC), महिला हेल्प लाइन (WHAL), उज्ज्वला होम, स्वाधारग्रह, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहयता प्रणाली (112), माय सेफ्टी पिन, जैसे आधुनिक संगठन एप्लीकेशन बनाये गए है. आज के दौर में महिलाओं को जागरूक करने की बहुत ज़्यादा आवश्यकता है. महिलाओं को शिक्षित करने का अर्थ है पुरे परिवार को शिक्षित करना. भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या के समाधान के लिए नई शिक्षा नीति (New Education Policy) में कई प्रमुख बिन्दुओ को शामिल किया जा सकता है, जैसे व्यापक यौन शिक्षा (sex education), लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम (Gender sensitization program), सशक्तिकरण और जीवन कौशल शिक्षा (Empowerment and life skills education), सामुदायिक व्यस्तता (community engagement), मीडिया साक्षरता (media literacy), लैंगिक समानता (gender equality) तथा लैंगिक सशक्तिकरण जैसे सब्जेक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जिससे महिलाओं के प्रति दृष्टिक्रोण में सकारात्मक बदलाव आ सके. छात्रों को उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल में आत्मरक्षा कक्षाएं शुरू करनी चाहिए. महिलाओं की रोज़गार क्षमता तथा व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और परामर्श प्रदान करने की आवश्यकता है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 26 Jun 2023 18:42:24 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"/></item></channel></rss>