<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ शराबबंदी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/shraabbndii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/shraabbndii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 05 Apr 2023 13:57:31 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[नीरा को किया नशे की ज़द से बाहर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/neera-to-be-used-in-sweets-and-health-drinks-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZTvHUBT3vMC0THJJfgDW.JPG"><p dir="ltr">मिठाई की मिठास अब और बढ़ने वाली है, क्योकि इस मिठाई से अब स्वयं सहायता समूह की दीदियों को रोज़गार मिलेगा. बिहार सरकार  शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करवा रही है. जिसके बाद नीरा रोज़गार का एक अच्छा ऑप्शन बना. ताड़ और खजूर के पेड़ से जो ताजा रस निकलता है, उसे नीरा कहते हैं. गया जीविका के डीपीएम आचार्य मम्मट ने बताया कि सरकार चाहती है कि जहां लोग पहले नीरा को नशे के रूप में इस्तेमाल करते थे अब हेल्थ ड्रिंक की तरह इस्तेमाल को बढ़वा देंगे. इसे पीने से पीलिया, पेट संबंधित रोग, डिहाइड्रेशन और डायबिटीज़ में राहत मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">गया जिले ने इस वित्तीय वर्ष में 11 लाख लीटर से अधिक नीरा बनाने का गोल सेट किया. ग्रामीण क्षेत्रों में 40 से अधिक बिक्री केंद्रों पर नीरा को बेचने की योजना बनाई. मनेर प्रखंड में नीरा से एक से बढ़कर एक टेस्टी खान-पान बनाने का काम मीठी नीरधारा, शुद्ध जल और अमृत उत्पादक समूह की 120 दीदियां मिलकर कर रही हैं. ये नीरा से पेड़ा, लड्डू, तिलकुट सहित अनेक प्रकार की मिठाइयां बनाती हैं. मिठाइयों को पटना के 23 ब्लॉक में करीब 100 अस्थायी स्टालों पर बेचा जाता है. इन स्टॉल के गिनती 240 तक पहुंचाने की योजना है. दुकानों से ऑर्डर मिलना भी शुरू हो गए हैं. </p>
<p dir="ltr">बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) एमओयू पर साइन करेंगे. दोनों विश्वविद्यालयों के कृषि वैज्ञानिक मिलकर नीरा को हेल्थ ड्रिंक बनाने के लिए काम करेंगे. तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा ताड़ के पेड़ हैं जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नीरा बनाने में किया जायेगा. गया जिले के बांके बाजार प्रखंड के विशुनपुर, बाबा धाम, सैफगंज और रौशनगंज में 4 जगहों पर नीरा बिक्री केंद्र शुरू किये गए, जिससे इन इलाकों में शराबबंदी लागू करने में सहयोग मिलेगा. ग्रामीण इलाके में बड़ी संख्या में लोग ताड़ी के उत्पादन से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें नीरा के फायदे की जानकारी देकर इसके उत्पादन से जोड़ा जा रहा है. नीरा से बनीं मिठाई और हेल्थ ड्रिंक न केवल शराबबंदी करने में मदद करेंगे पर स्वयं सहायता समूहों को भी रोज़गार का नया अवसर देंगे. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 05 Apr 2023 13:57:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/neera-to-be-used-in-sweets-and-health-drinks-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZTvHUBT3vMC0THJJfgDW.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZTvHUBT3vMC0THJJfgDW.JPG"/></item><item><title><![CDATA[मीरा बनी मर्दानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"><p>अबला समझ कर महिला को आज तक बहुत दबाया गया है. उनके साथ ज़ोर ज़बरदस्ती से ना जाने कितने गलत काम भी किये गए. और इन सब अनहोनियों का सबसे बड़ा कारण कहीं न कहीं शराब बनी हैं. देश दुनिया में महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार और ज़ुल्म में शराब भी एक कारण है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत से कानून बनते रहे हैं. शराब के मामले में भी सरकार आए दिन कुछ न कुछ नया करती रहती हैं. भारत में गुजरात के बाद बिहार को 'ड्राई स्टेट' बना दिया गया . </p>
<p>भले ही बिहार और गुजरात में शराब खुलेआम नहीं बिक रही हो, लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं हैं की शराब का कला धंधा दोनों ही राज्यों में दिन दुगना रात चौगुना बढ़ रहा हैं. काला बाज़ारी के बढ़ते हुए इस जंजाल में ना जाने कितने मासूम लोग फास जाते हैं. शुरुआत किसी एक से होती हैं, और शिकार उससे जुड़ा हर व्यक्ति हो जाता हैं. जहरीली शराब इस शराबबंदी का खतरनाक पक्ष हैं. इन 'सो कॉल्ड ड्राई स्टेट्स' में जहरीली शराब कई मौतों का कारण बनी हैं.</p>
<p>महिलाओं ने बहुत सहन करा, लेकिन जब बात हद से आगे बढ़ जाए, तो लड़की हो या औरत, तो उसे महिषासुर मर्दिनी का रूप लेना पड़ता है. मीरा ने बिहार में भी यहीं रूप लिया, उसने यह बात साबित कर दी की आज महिलाएं किसी से कम या कमज़ोर नहीं है. ग्रामीण महिलाओं को एकजुट कर जब मीरा सड़क पर उतरी तो देखते ही देखते उन्होनें अवैध शराब की दर्जनों भट्टियां तबाह कर दीं. </p>
<p>अपने इलाके में पूर्ण शराब बंदी लागू होने से पहले ही मीरा ने गांव की महिलाओं को इकठ्ठा करके 200 से ज़्यादा SHG तैयार किये,  जो अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे. बात सिर्फ़ भट्टियां तबाह करने तक ही सीमित नहीं है. जो लोग इन अवैध भट्टियों को चला रहे थे, उनकी भी अच्छी खासी खबर ली गई. मीरा का डर इस कदर लोगों में मन में बैठ गया की बहुत से लोगो ने तो शराब को हाथ तक लगाना बंद कर दिया. </p>
<p>वर्ष 1996 से वर्ष 2002 तक नेट्रोडेम जमालपुर से फील्ड वर्कर के रूप में जुड़कर मीरा ने अलग-अलग गांव में 200 से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया. अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण समिति के जिला स्तरीय कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी मीरा फिलहाल आंगनवाड़ी सेविका हैं. भले ही अब वे सेविका के रूप में दुनिया के सामने हैं , लेकिन उन्होनें आज तक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम बंद नहीं किया. कोसी त्रासदी के दौरान मीरा ने सहरसा जाकर कैंप में रह रही महिलाओं को बांस से बनने वाली चीज़ों के बारे में बताया और स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया. </p>
<p>मीरा के सामाजिक कार्य को देखते हुए बिहार वैलेंट्री एसोसिएशन पटना ने उन्हें वर्ष 2008 में सम्मानित भी किया. वहीं वर्ष 2006 में दिल्ली में आयोजित महिला उनमुखी कार्यशाला में बिहार का एकमात्र महिला प्रतिनिधि प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने का अवसर मिला. मीरा ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की समस्या को प्रमुखता से सामने रखा और इसके लिए मीरा ने गांव में महिलाओं के हित के लिए अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ खुलकर आगे आईं. आंगनवाड़ी सेविका के रूप में कार्य कर रही मीरा हमेशा महिलाओं के हित की रक्षा को लेकर आज भी अपनी आवाज को बुलंद कर रही है. </p>
<p>वर्ष 2003 से 2007 तक कैथलिक चर्च बरियारपुर से जुड़कर मीरा ने क्षेत्र में 250 स्वयं सहायता समूह बना कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा. वहीं गंगा दियारा क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिविर का आयोजन कराया जिसमें महिलाओं को सत्तू, बेसन, मसाला, अगरबत्ती, पापड़ आदि बनाने का प्रशिक्षण दिलाकर काम से जोड़ा.</p>
<p>मीरा देवी ने बिहार में ऐसे कितने ही स्वयं सहायता समूह शुरू करवाए जिनमें आज महिलाएं अपनी रोज़ी रोटी कमा रही है और अपने परिवार को मदद भी कर रही है. मीरा देवी ने जो काम किया उसकी जितनी सरहाना की जाए कम है. सिर्फ़ बिहार में ही क्यों, अगर पुरे देश की महिलाएं अपने स्वयं सहायता समूह तैयार करे और ऐसे गैरकानूनी धंधो को बंद करवा दे, तो देश को सुधरने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Apr 2023 16:29:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"/></item></channel></rss>