<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ शर्मिला टैगोर]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/shrmilaa-ttaigor</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/shrmilaa-ttaigor" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 18 Aug 2023 15:19:44 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[फिल्मों, कहानियों और नज़्मों से ज़िंदगी गुलज़ार करते.... गुलज़ार ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/decoding-female-characters-of-gulzar-from-your-all-time-favourites</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N3mq5TsMUAeIiKGtRoi4.PNG"><p><strong>गुलज़ार</strong>, सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक अलग दुनिया. उनका लिखा हुआ हर गीत, चाहे वो, '<strong>मेरा कुछ सामान</strong>' हो या &nbsp;'<strong>बीड़ी जलईले</strong>' हो, एक अलग औरा तैयार करने की ताकत रखता है. शायद ही <strong>बॉलीवुड में ऐसा कोई संगीतकार</strong>&nbsp;और <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/film-personalities-kivini-shohe-and-andrea-kevich%C3%BCsa-to-represent-nagaland-at-cannes-film-festival" rel="dofollow"><strong>फिल्म निर्माता</strong></a> हो, जो इतना वर्सेटाइल हो अपने काम को लेकर की हर बार बस दिल में बस जाए. संगीत की पसंद रखने वालो लोगों के लिए गुलज़ार की लिखी हुई हर नज़्म एक तोहफ़ा है, जो उन्होंने दुनिया को दिया है. सिर्फ ग़ज़लें और गीत ही नहीं, बल्कि उनकी हर फिल्म, जिसने भी देखी, उसने महिला किरदारों के बारे में बात ना की हो ऐसा हो ही नहीं सकता.</p>
<p><img alt="Gulzar" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/501x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/yztQuNQsMrKfX6gub1r1.jpg" style="width: 501px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Hindustan Times</em></span></p>
<h2>अपनी अनोखी दुनिया में फीमेल कैरेक्टर्स के रंग भरते गुलज़ार</h2>
<p><strong>अनोखे महिला किरदारों</strong> को अपनी फिल्मों में उतार कर गुलज़ार ने दुनिया को हर कदम पर बताया है कि एक महिला पुरुषों से ज़्यादा स्ट्रांग होती है. चाहे बात&nbsp;<strong>लेकिन में डिम्पल कपाड़िया</strong> की करी जाए, या <strong>आंधी में सुचित्रा सेन</strong> की, ये किरदार तब छा रहे थे, जब एक <strong>महिला सिर्फ डिपेंडेंट <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/rakhee-gulzar-has-been-one-of-the-strongest-feminist-icon-of-bollywood" rel="dofollow">रोल्स </a>में दिखाई देती थी</strong>.</p>
<p>गुलज़ार ने उस वक़्त महिलाओं को सबसे अलग पर्दे पर रखा, जब <strong>फेमिनिज़्म का ट्रेंड देश में आया भी नहीं था </strong>शायद! उन्होंने एक फीमेल कैरेक्टर की नव्ज़ को पकड़ा, और उन्हें अपनी ज़्यादातर फिल्मों में प्रेज़ेंट किया.</p>
<p><img alt="Aandhi film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/501x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uIEuVkOjNbw6FTpu0TBH.jpg" style="width: 501px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: Goldmines Films</em></span></p>
<p>'<strong>आंधी</strong>' में सुचित्रा सेन को गुलज़ार ने पॉलिटिक्स जैसे फील्ड में रखा. बॉलीवुड की शायद कुछ ही फिल्में होंगी, जिसमें एक <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/political-women-potrayal-in-bolloywood-is-not-strong-and-dependent-on-the-male-dominated">महिला को पोलिटिकली इतना स्ट्रांग</a><strong>&nbsp;</strong>दिखाया है. भले ही वह पॉलिटिक्स में एक स्ट्रांग रोल निभा रहीं हो, लेकिन एक महिला होने के नाते वह सेंसिटिव भी है. गुलज़ार ने, <strong>पोलिटिकली स्ट्रांग और सेंसेटिव, इस किरदार को परफेक्शन के साथ बैलेंस</strong> किया है.</p>
<p><img alt="Parichay Film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/QrdhmXWv7EyJlINoilwG.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Amar Ujala</em></span></p>
<p>'<strong>परिचय</strong>' फिल्म में <strong>जया भादुड़ी</strong> का किरदार पितृसत्ता से सीधा लोहा लेती दिखी है. अपने छोटे भाई बहनों के लिए मां बाप का प्यार, और अपने दादाजी के स्ट्रिक्ट व्यवहार से उन्हें बचाकर रखना, जया के किरदार ने अपनी खुशियों को परे रख एक परिवार को संभाला. '<strong>कोशिश</strong>' फिल्म में जया के किरदार ने इमोशंस और फीलिंग्स को सबसे ऊपर रखकर भी किरदार को मेल एक्टर से कम नहीं होने दिया.</p>
<p><img alt="Kinara Film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/WkNLh6TUgQUm91RskHHx.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Indian Film History</em></span></p>
<p>'<strong>किनारा</strong>' में <strong>हेमा मालिनी</strong> ने प्रूव कर दिया की प्यार का इमोशन सबसे स्ट्रांग है और लड़की या महिला इस इमोशन को पूरी तरह रिस्पेक्ट कर कमज़ोर नहीं स्ट्रांग बन जाती है. वहीं <strong>'मीरा' फिल्म</strong> में अपने डिवोशन को इतना ऊपर रखा कि बाकी हर रिश्ता कृष्णा के आगे फीका पड़ गया.</p>
<p><img alt="Mausam Film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/501x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3pvYT8kBQHmraSoBudZg.jpg" style="width: 501px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Daily Motion</em></span></p>
<p><strong>'मौसम' फिल्म में शर्मिला टैगोर</strong> के किरदार ने अपनी करियर की चॉइस को सबसे ऊपर रखा, और दर्शाया की एक महिला किसी भी काम को कर सकती है. फीलिंग्स और इमोशंस को साइड रख वह अपनी ज़िन्दगी को बेहतर करने के लिए हर काम को उतनी ही शिद्दत से करेगी. वहीं '<strong>नमकीन</strong>' में उनके किरदार को अपने परिवार के प्रति पूरी तरह डिवोटेड बताया है गुलज़ार ने.</p>
<p><img alt="Ijaazat film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/axvp8lRhJZKRM722EsCF.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Goldmines films</em></span></p>
<p><strong>'घर'&nbsp;फिल्म में रेखा</strong> के किरदार का पोट्रेयल एक <strong>फिज़िकली और मेंटली स्ट्रोंग माहिला</strong> का है, जो रेप असॉल्ट जैसे गुनाह के बाद भी इतनी स्ट्रांग थी कि अपने परिवार को टूटने नहीं दिया. वहीं '<strong>इजाज़त</strong>' <strong>फिल्म</strong> में <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/vogue-arabia-did-a-mesmerizing-photoshoot-with-rekha-for-the-cover-page">रेखा का किरदार</a><strong>&nbsp;बॉलीवुड की हिस्टरी के शायद सबसे स्ट्रॉन्गेस्ट पोट्रेयल</strong> में से एक होगा. हर बीतता मिनिट ये सोचने पर मजबूर करता है की दोनों कैरेक्टर्स फिल्म के अंत में एक हो जाएंगे. सस्पेंस और ड्रामा का परफेक्ट मैच है इस फिल्म में.</p>
<p><img alt="Lekin Film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/454x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/RMnEqSaMux662qJjfmzH.jpg" style="width: 454px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Wikipedia</em></span></p>
<p><strong>बॉलीवुड में 'लेकिन'</strong> जैसी फिल्में बहुत कम है. <strong>डिंपल कपाड़िया</strong> का कैरेक्टर एक ऐसी आत्मा का दिखाया हैं, जो कुछ इच्छाओं के कारण टाइम ज़ोन में फंस गयी है. <strong>साइंस और सस्पैंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन</strong> हैं ये फिल्म. <strong>डिंपल का किरदार</strong> इस स्टोरी का ड्राइविंग फोर्स हैं. उसके किरदार के साथ ही फिल्म की स्टोरी चलती हैं.</p>
<p><img alt="maachis film" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/503x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/VUmXm4Tp3VTIWquFPUOX.jpg" style="width: 503px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Film Companion</em></span></p>
<p><strong>'माचिस' फिल्म में तब्बू का किरदार </strong>आतंकवाद जैसे टॉपिक से सामना करते हुए दिखाया हैं. गुलज़ार ने अपनी ज़्यादातर फिल्मों को फीमेल किरदारों के इर्द गिर्द घुमाने का बेहतरीन काम किया हैं. ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उनकी फिल्मों में अगर फीमेल किरदार नहीं भी हो तो चल जाएगा, क्योंकि हर कैरेक्टर डिफाइन करता हैं फिल्म की स्क्रिप्ट को. <strong>वर्सटैलिटी और <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/shree-devi-the-most-graceful-and-strongest-actress-on-all-time" rel="dofollow">परफेक्शन</a> गुलज़ार के दूसरे नाम हैं</strong>.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 18 Aug 2023 15:19:44 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/decoding-female-characters-of-gulzar-from-your-all-time-favourites]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N3mq5TsMUAeIiKGtRoi4.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/N3mq5TsMUAeIiKGtRoi4.PNG"/></item><item><title><![CDATA[मै चाहे ये पहनू , मै चाहे वो पहनू , मेरी मर्ज़ी… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"><p>लड़कियों को पढ़ाओ उनको बढ़ाओ, उनकी इज़्ज़त करो, वो किसी से कम नहीं है, लड़कियां जो चाहे वो कर सकती हैं, उन्हें हर तरह की आज़ादी है, .ऐसी कितनी बातें हम सब हर दिन सुनते होंगे. कितने ही लोग अपने आप को सबसे बड़ा 'फेमिनिस्ट' बताते हैं. लेकिन आज भी जब एक लड़की स्कर्ट या शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकलती है, तो ज़्यादातर निगाहें उसका पीछा करने लगती हैं, मन ही मन सवाल उठाये जाते हैं और कहीं न कहीं चरित्र परिभाषित कर दिया जाता है. यह तो तथाकथित शहरी हालात है गावों की बात तो छोड़ ही दें.  </p>
<p>किसी भी लोकतांत्रिक आज़ाद देश में सोचने, बोलने, खाने पीने, पहनावे की आज़ादी होनी चाहिए. जब आज़ादी हमारे देश के हर इंसान को बराबर मिली है तो लड़कियों को अपने पसंद के कपड़े पहनने से पहले क्यों सोचना पड़ता है ? घर से शॉर्ट ड्रेसेस पहन के निकलने से पहले ही घर वाले बोल देते हैं, 'ये पहन कर मत जाओ '. बंदिश घर से ही शुरू होती है और बाहर उस बंदिश पर मुहर लग जाती है.  </p>
<p>अनचाहे ही लड़की खुद से ये सावल पूछने पर मजबूर हो जाती है -  ' कही गलती मेरी ही तो नहीं ? ' लेकिन हर वो नज़र जो उसे मुड़ के देख रही है वो खुद से ये सवाल क्यों नहीं कर रही? समाज के ठेकेदारों ने तय कर लिया कि लड़कियां क्या पहनेंगी. अगर आज एक लड़का शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकले तो कहा जाएगा कि, ' यार शॉर्ट्स कम्फर्टेबल होते हैं, और गर्मी भी तो कितनी है. 'और वही शॉर्ट्स अगर एक लड़की पहन के निकले तो ?</p>
<p>लडकियां जब सिर्फ शॉर्ट्स या क्रॉप टॉप पहन रही है तब ये हाल है, बिकिनी पहन ले तो हंगामा ही हो जाए. सी बीच हो या स्विमिंग पूल, फिल्म की शूट हो या कोई ऐड की, लड़की बिकिनी पहन तो ले. उसका कैरक्टर असैसिनेशन करने के लिए देश की आधी जनता तैयार हो जाएगी. लोग लड़कियों के मामले में हमेशा ये भूल जाते हैं कि उन्हें भी उतनी ही आज़ादी और हक़ मिला है जितना एक लड़के को. वो जब चाहे, जहां चाहे, जो चाहे वो पहन सकती है.</p>
<p>सिर्फ आज की पीढ़ी नहीं बल्कि 1966  की फिल्म "एन इवनिंग इन पेरिस" में ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर थीं. उन्होंने भारत में सबसे पहले बिना किसी डर के कैमरा के सामने बिकिनी पहनी जो कि उस वक़्त के हिसाब से एक बहुत ही 'बोल्ड' मूव था. बिकनी में शर्मिला टैगोर जैसी कलाकार को देखकर भारत में उस समय बहुत हलचल मच गयी थी. तब से, भारतीय सिनेमा में कई दूसरी अभिनेत्रियों ने ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनी है, जिनमें "कुर्बानी" (1980) में ज़ीनत अमान और "बॉबी" (1973) में डिंपल कपाड़िया  शामिल है. </p>
<p>फैशन डिज़ाइनर लुइस रेकर्ड सबसे पहले बिकनी क्लोथिंग स्टाइल को लाये थे. इन्होंने बिकिनी का नाम 'बिकिनी एटोल' के नाम पर रखा , जहां 4 दिन पहले ही 'नुक्लिअर बम' का परिक्षण किया गया था. भारत में पहनावा पहले से  ही मौसम और हालात पर निर्भर रहा. हमारे जनजातीय और सदियों पहले के समाज में पहनावे की आज़ादी ज़्यादा थी. विदेशों में बिकिनी पहनावा नया है और इसको फेमिनिस्ट मूवमेंट से जुड़ा हुआ माना गया. हॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी बिकिनी पहनने पर कई ताने नहीं मारे गए है. मैरीलीन मोनरो और मेगन फॉक्स जैसे नाम बिकिनी पहन के ही दुनिया पर छाए लेकिन वो भी लोगो कि सोच से बच नहीं पाई. और ये ही हाल है हमारे देश में जहां आए दिन कोई ना कोई अपने पहनावे को लेकर बेशरम रंग से पुता नज़र आता है.  </p>
<p>तापसी पन्नू , दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, आलिया भट्, प्रियंका चोपड़ा जैसे कई नाम है जिन्हें आज पूरा देश जानता है. ये सब अपनी प्रतिभा देश दुनिया को कई बार साबित कर चुकी है लेकिन फिर भी बात उनके कपड़ों की होती है. विवाद सेलिब्रिटी कल्चर का हिस्सा है, लेकिन महिला सेलिब्रिटी ज़्यादातर अपने कपड़ों को लेकर ही विवादों में घिरती है. इन सेलिब्रिटी महिलाओं को आम लड़कियां अपनी प्रेरणा मानती है, और जब उनकी आइडल ऐसे विवादों में फंसती है तब आम लड़कियों की आज़ादी भी विवाद का उदाहरण देकर दबा दी जाती है. </p>
<p>आज के समय में तो भारतीय फिल्मो में ज़्यादातर एक्ट्रेस बिकिनी पहन के शूट करती है और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स भी आते रहते है. समय तो बदल गया है और लड़कियों का आत्मविश्वास भी. नहीं बदली है तो सोच, नज़र और मानसिकता जो लड़की के छोटे कपड़ो को देखकर ज़्यादा छोटी हो जाती है. भले ही बदलाव हुए है, आज से 50 साल पहले हम जो सोच भी नहीं सकते थे, वो आज कर रहे है. लेकिन छोटी सोच छोटे कपड़ों पर अभी भी भारी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 13:41:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"/></item></channel></rss>