<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ सीएसआर]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/siiesaar</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/siiesaar" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sun, 30 Apr 2023 12:00:37 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[किसानों के लिए वरदान बनेगा 'वाडी प्रोजेक्ट' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"><p dir="ltr">भारत की आधी से ज़्यादा जनसँख्या खेती-बाड़ी से किसी ना किसी रूप में जुड़ी हुई है. ऐसे देश में जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग खेती करते हों, वहां सरकार को आए दिन ऐसे परियोजनाएं लानी पड़ती है, जो किसान, महिलाएं, और इनके परिवारों को सशक्त और सक्षम बनाकर आगे बढ़ने में मदद करे. इन्हीं परियोजनाओं में एक और नाम जोड़ने के लिए ‘नाबार्ड’ (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) के साथ ‘डालमिया भारत लिमिटेड’ (डीबीएल) की ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी शाखा’ (सीएसआर), ‘डालमिया भारत फाउंडेशन’ (डीबीएफ), द्वारा शुरू की गई 'वाडी परियोजना' से ओडिशा में राजगंगपुर और कुटरा ब्लॉक की 9 ग्राम पंचायतों के 400 से ज़्यादा किसानो को मदद मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">मुख्य रूप से, भारत में आदिवासी समुदाय अपनी आजीविका के लिए कृषि, वनों और पशुओं पर निर्भर हैं और विकास के लिए संसाधनों तक उनकी पहुंचना के बराबर  है. जनजातीय विकास कोष (टीडीएफ) के तहत ‘वाडी परियोजना’ का उद्देश्य स्थायी कृषि प्रथाओं और स्थायी आजीविका के बेहतर अवसरों पर ध्यान देने के साथ आदिवासी किसानों का विकास करना है. ‘डीबीएफ’ ने वित्त वर्ष 23-24 में इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, जनजातीय विकास में मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और इन गांवों में किसानों की गरीबी को कम करना है.</p>
<p dir="ltr">डीबीएफ और नाबार्ड इस परियोजना नें किसानों को शामिल करने के लिए ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराएं है. डीबीएफ उच्च उपज वाले बीज, ग्राफ्टेड प्लांट, सिंचाई, GI मेस वायर फेंसिंग के साथ-साथ वाडी विकास और सब्जी की खेती के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करता है. यह प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), सुंदरगढ़ और अन्य सलाहकार प्रशिक्षकों के वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित किया जाता है. किसानों को विभिन्न गांवों में किसान उत्पादक संगठन की सामूहिक मार्केटिंग के माध्यम से अपनी उपज बेचने में भी सहायता प्राप्त की जा रही है. इससे उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने और अपने परिवारों के कल्याण में सुधार करने में सहायता मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">इनमें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम, जैसे प्रशिक्षण, कौशल विकास, आय-सृजन कार्यक्रम जैसे बकरी पालन, सुअर पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, केंचुआ पालन, सामुदायिक नर्सरी आदि शामिल हैं. यह पहल स्वयं सहायता समूहों और किसान परिवारों को आगे बढ़ाने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है. ओडिशा सरकार की यह पहल स्वावलम्बी भारत की तरफ एक और कदम है. सरकारों को किसानो और स्वयं सहायता समुह को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रकार की परियोजनाएं लाते रहना चाहिए. किसान और महिलाओं का विकास इसी प्रकार मुमकिन होगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 30 Apr 2023 12:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं के लिए जागरूकता की लहर है 'प्रोजेक्ट रौशनी' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/project-roshni-spreading-awareness-amongst-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kS2gbaef1iI9aVts4ScJ.png"><p dir="ltr">महिलाएं स्वस्थ तो परिवार स्वस्थ. मुंबई में 'रोश डायग्नोस्टिक्स' के सहयोग से NGO 'SHED' ( सोसाइटी फॉर ह्यूमन एंड एन्वायरमेंटल डेवेलपमेंट ) ने 'प्रोजेक्ट रौशनी' शुरू किया.  'शेड'  ने यह प्रोजेक्ट 2015 में शुरू किया. इस से पालघर जिले में वंचित महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा और आजीविका सहायता प्रदान हो रही है. यह पालघर के दो गांवों में महिलाओं के साथ कम हीमोग्लोबिन के स्तर को मैनेज करने के लिए काम कर रहा है.</p>
<p dir="ltr">यह परियोजना ग्रामीणों को किचन गार्डन विकसित करने में मदद करते हुए ब्यूटीशियन पाठ्यक्रम, सिलाई और आधुनिक कृषि प्रथाओं जैसे कौशल में प्रशिक्षण भी प्रदान करती है. रोश डायग्नोस्टिक्स इंडिया की 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी' (सीएसआर) प्रमुख मंजीरा शर्मा ने बताया - "इस परियोजना के माध्यम से, हम इन वंचित महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच प्रदान करना चाहते थे." शेड पिछले 35 वर्षों से पालघर के विभिन्न गांवों में 45,000 कम शौचालयों का निर्माण करके स्वच्छता को बढ़ावा देने, स्कूल छोड़ने वालों को गैर-औपचारिक शिक्षा प्रदान करने, वाटरशेड प्रबंधन और एचआईवी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने सहित अन्य पहलों के लिए काम कर रहा है.</p>
<p dir="ltr">इस क्षेत्र में विभिन्न सर्वेक्षण करने पर, यह महसूस किया गया कि महिलाओं का एक बड़ा प्रतिशत कुपोषण और हीमोग्लोबिन के निम्न स्तर से पीड़ित है, जिससे खराब प्रतिरक्षा, मासिक धर्म की समस्याएं, थायरॉइड की समस्याएं और बहुत कुछ होता है. परियोजना के तहत, हीमोग्लोबिन परीक्षण के लिए वर्ष में तीन बार चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं, और कम हीमोग्लोबिन स्तर वाली महिलाओं को दवाएं प्रदान की जाती हैं. टीम में चार डॉक्टर हैं यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है.</p>
<p dir="ltr">18 महीने से अधिक समय तक लाभार्थियों की गहन जांच के बाद, अच्छे हीमोग्लोबिन स्तर वाली महिलाओं को रोशनी एंबेसडर के रूप में नामित किया जाता है, जो स्थानीय आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अन्य महिलाओं के बीच एचबी परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाती हैं. इस परियोजना के तहत अब तक 700 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है. सालुंके कहते हैं, "हमने एक स्वयं सहायता समूह भी शुरू किया है जो महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे जीवन बीमा, बालिका योजनाओं, आदिवासी योजनाओं आदि के बारे में शिक्षित करता है." इन महिलाओं को किचन गार्डन उगाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिनमें से कुछ उत्पाद बाजार में भी बेचे जाते हैं. अतिरिक्त उपज को बेचकर महिलाएं प्रतिदिन लगभग 500 से 600 रुपये कमाती हैं. ऐसे और भी ओर्गानिसशंस है जो पुरे देश में महिलाओं की सेहत को लेकर जागरूकता फैला रहे है. प्रोजेक्ट रौशनी एक ऐसे पहल है जो, महाराष्ट्र की महिलाओं के लिए वरदान बन चुकी है और उम्मीद है कि यह आगे भी महिलाओं कि सेहत के लेकर जागरूकता फैलाती रहेगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 15 Apr 2023 16:30:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/project-roshni-spreading-awareness-amongst-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kS2gbaef1iI9aVts4ScJ.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kS2gbaef1iI9aVts4ScJ.png"/></item></channel></rss>