<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/sonlidd-vestt-mainejmentt</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/sonlidd-vestt-mainejmentt" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 20 May 2023 14:42:00 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[ऑटो टिपर ड्राइवर बन रखेंगी स्वछता का ध्यान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/karnataka-shg-women-learning-to-drive-auto-tippers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7q7heBfGHlmEy5IFmOpz.jpg"><p dir="ltr">देश में 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत हर शहर और राज्य की सरकार और आम लोग आगे आ रहे है. हर जगह कचरा इक्कठा करने वाली गाड़ियां और लोग मौजूद है, जो घर-घर जाकर कचरा इकठ्ठा करते है. इस जॉब में अभी तक सिर्फ पुरुष ही सामने आ रहे थे लेकिन अब पहली बार महिलाएं भी ऑटो टिपर के रूप में सामने आएंगी. कर्नाटक के हावेरी जिले में संजीवनी स्वयं सहायता समूह (SHG) के साथ ग्राम पंचायत में सूखे कचरे के प्रबंधन की देखरेख के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. आजादी के पहिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत गठित और राज्य सहकारी अधिनियम के तहत पंजीकृत Sanjeevani Self Help Group में औसतन 10 से 20 महिला सदस्य शामिल हैं, जो NRLM और Karnataka State Rural Livelihood Promotion Society (KSRLPS) के माध्यम से आजीविका प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्राप्त करती हैं. </p>
<p dir="ltr">32 महिलाओं ने विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्वच्छ वाहिनी चलाने के लिए हवेरी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) में प्रशिक्षण प्राप्त किया. उनमें से तीन महिलाएँ स्नातक हैं, जो टीचिंग फैकल्टी के रूप में पार्ट टाइम जॉब करती है. बाकियों  ने अपना Secondary School Leaving Certificate (SSLC) पूरा कर लिया है. समूह ने अपना एक महीने का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और अब महिला ड्राइवरों की तरह को नियुक्त होने को तैयार है. RSETI के निदेशक शाजीत एस ने कहा- "महिलाओं के लिए भोजन और आवास के साथ एक महीने के ड्राइविंग प्रशिक्षण का पहला बैच सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. ड्राइविंग के अलावा, हमने उन्हें जीवन कौशल और बैंकिंग सेवाओं का भी प्रशिक्षण दिया है." ड्राइविंग पाठ के साथ-साथ, उन्हें वाहनों के मुख्य भागों के बारे में भी समझाया है और उन्हें मामूली रिपेयरिंग का काम भी सिखाया.</p>
<p dir="ltr">जिला पंचायत RSETI के माध्यम से महिला चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए दूसरा बैच शुरू करने की योजना बना रही है. अधिक महिला चालकों के प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पुरुष चालकों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी. हावेरी जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद रोशन ने बताया- "18 से 45 वर्ष की महिलाओं ने अपना ड्राइवर प्रशिक्षण पूरा कर लिया है. यह महिला चालक अपने-अपने गांवों में घर-घर जाकर सूखा कचरा इकट्ठा करने और ठोस कचरा प्रबंधन इकाइयों में निपटाने के लिए स्वच्छ वाहिनी ऑटो टिपर का संचालन करेंगी."  170 ग्राम पंचायतों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के यूनिट्स भी स्थापित करने की योजना बनाई है जो सहज महिलाएं चलाएंगी. महिलाएं अब साबित कर रही है की पुरुष प्रधान कार्य जैसा कुछ नहीं है. कर्नाटक सरकार की यह पहल महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए एक बहुत बहुत बड़ा कदम साबित होगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 20 May 2023 14:42:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/karnataka-shg-women-learning-to-drive-auto-tippers]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7q7heBfGHlmEy5IFmOpz.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7q7heBfGHlmEy5IFmOpz.jpg"/></item><item><title><![CDATA['वेस्ट वॉरियर' का सफाई वॉर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/vermicomposting-pilot-project-launched-on-arunachal-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rej7REgXQHHR7gOi4r57.jpg"><p>भारत हर साल 62 मिलियन टन कचरा पैदा करता है. लगभग 43 मिलियन टन एकत्र किया जाता है, जिसमें से लगभग 12 मिलियन टन का उपचार किया जाता है, और 31 मिलियन टन को लैंडफिल साइट्स में फेंक देते हैं. यह भूस्खलन और कई तरह के बीमारियों का एक बड़ा कारण बनता है. इससे निपटने के लिए जोडी अंडरहिल, एक विदेशी, ने पहाड़ियों को साफ करने के लिए सक्रिय आंदोलन शुरू किया और एक एनजीओ का गठन किया जिसका नाम था - वेस्ट वॉरियर्स. एक युवा ब्रिटिश यात्री के रूप में, जोडी अंडरहिल ने 2008 में भारत का दौरा किया और देश की सुंदरता ने उनका दिल जीत लिया. जब उन्होंने देखा कि भारत में कचरे की समस्या कितनी गंभीर है, तो उनका दिल टूट गया था. उन्होंने 'माउंटेन क्लीनर्स' नाम से एक स्वैच्छिक संगठन शुरू किया और त्रिउंड से एक साप्ताहिक सफाई का आयोजन किया.</p>
<p>समय के साथ, और अधिक लोग जुड़ते चले गए. उन्होंने महिंद्रा स्पार्क द राइज प्रतियोगिता में उपविजेता के रूप में लगभग 1.5 लाख रुपये जीते और जल्द ही बॉलीवुड सुपरस्टार चिरंजीवी ने उनके काम से प्रभावित होकर 5 लाख रुपये दिए. 2012 में, पूरे देश को साफ करने के सपने के साथ, जोडी ने देहरादून में वेस्ट वॉरियर्स एनजीओ की शुरुआत की. जोडी को - 'गारबेज गर्ल' और 'वेस्ट वॉरियर' के नाम से भी जाना जाता है. एक ब्रिटिश पर्यटक, जिसने हिमालय की सफाई और हमारी प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/H9UBBzWJ8Vh4MfXGZs9x.jpg" alt="jodi underhill"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Nomad Lawyer</em></span></p>
<p>टूरिस्म यानि पर्यटन से भारत 13.2 लाख करोड़ रूपए कमाता है. लेकिन टूरिस्म की वजह से संवेदनशील जगहों में प्रदूषण और गंदगी की समस्याएं बढ़ती है. नीति आयोग और विश्व बैंक की रिपोर्ट का अनुमान है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) अब सालाना लगभग आठ मिलियन मीट्रिक टन कचरा पैदा करता है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने 2010 के बाद से 400 मिलियन से अधिक पर्यटकों का स्वागत किया. जब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की बात आती है तो यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रणालियों की कमी के कारण, इस कचरे का 60% पहाड़ी ढलानों, जंगलों और जल निकायों पर फेंक दिया जाता है, जिससे पानी में प्रदूषण बढ़ जाता है. स्थानीय वनस्पतियों और जीवों की 30,000 से अधिक प्रजातियों पर इसका बेहद खराब प्रभाव पड़ा है, जिनमें से कुछ दुर्लभ हैं और विलुप्त होने के कगार पर हैं. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/6pwZbTTMIiEAt6Eq66Hz.jpg" alt="waste warrior arunachal pradesh"></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Nomad Lawyer</span></em></p>
<p>वेस्ट वॉरियर्स ने 10 साल पूरे कर लिए हैं और इस दशक में कचरे से संबंधित मुद्दों से निपटने और व्यवस्थित समाधान खोजने के अपने मिशन में बहुत कुछ हासिल किया है. अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के माध्यम से, उन्होंने दिखाया है कि डेडिकेटेड लोगो की एक छोटी सी टीम कितना बड़ा प्रभाव डाल सकती है. वेस्ट वॉरियर्स के सीईओ विशाल कुमार के नेतृत्व में, टीम ने आठ अलग-अलग जगहों पर काम शुरू किया है, जहां वे कचरे से संबंधित अलग-अलग चुनौतियों से निपट रहे हैं. </p>
<p>आज देशभर में हमे ऐसे लोगों और संस्थाओं की ज़रुरत है जो पर्यावरण की ख़ूबसूरती को बचाने में सहयोग दे सके ताकि आने वाली पीढ़ी के देखने के लिए इन जगहों की ख़ूबसूरती और प्राकृतिक विरासत को बचाया जा सके.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 11:22:24 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/vermicomposting-pilot-project-launched-on-arunachal-pradesh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rej7REgXQHHR7gOi4r57.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rej7REgXQHHR7gOi4r57.jpg"/></item></channel></rss>