<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ स्वच्छ भारत अभियान]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/svcch-bhaart-abhiyaan</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/svcch-bhaart-abhiyaan" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 29 Aug 2023 18:42:07 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Waste to wealth की राखी PM के लिए ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/kamla-mohrana-of-odisha-sent-rakhi-to-pm-modi-made-with-food-products-packets</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wVJ5MJgokF2thjjAowGy.jpg"><p style="text-align: justify;"><strong>ओडिशा</strong> (Odissa) के <strong>केंद्रपाड़ा</strong> (Kendrapada) जिले की रहने वाली <strong>स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कमला मोहराना</strong> (Kamala Mohrana) <strong>प्लास्टिक वेस्ट मटेरियल </strong>(Plastic Waste Material) से उपयोगी सामान बनाती हैं.&nbsp;<strong>स्वच्छ भारत अभियान&nbsp;</strong>(Clean India Mission) में उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. जिसका जिक्र <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-will-make-and-operate-drone">PM Narendra Modi</a>) ने फ़रवरी में&nbsp;<strong>मन की बात एपिसोड</strong> (Mann Ki Baat episodes) पर किया था.&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: justify;">पीएम को भेजी खाद्य पदार्थों के पैकेट्स से बनी राखी&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">कमला एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है, रक्षाबंधन (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/uttarkhand-shgs-making-rakhis-with-bhojpatra">Rakshabandhan</a>) पर <strong>खाद्य पदार्थों के पैकेट्स</strong> (Single use plastic) से <strong>बनी राखी </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/rakshabandhan-rakhi-empowering-shg-women">rakhi</a>) उन्होंने <strong>पीएम मोदी</strong> <strong>को</strong> <strong>भेजी</strong> है. कमला के नेतृत्व में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/our-onam-our-flower-kerala-scheme-reviving-marigold-flower-field">Self Help Groups</a>) की महिलाएं घर में इस्तेमाल न होने वाले सामान जैसे&nbsp;<strong>प्लास्टिक बॉटल्स और कपड़े</strong>&nbsp;से <strong>मोबाइल फ़ोन स्टैंड, टोकरी</strong> आदि बना रहीं हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><img alt="kamla" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/501x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/J8ghfcH2HTonEBz1Wg9p.jpg" style="width: 501px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits : Gaon Connection</em></span></p>
<blockquote>
<p>कमला बताती है कि "<em>जिस दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने काम की सराहना की थी, उस दिन से मेरे जीवन में एक नया रुख आया. पीएम मेरे बड़े भाई जैसे हैं इसीलिए मैंने खाने और दूध के पैकेट्स से राखी तैयार कर डाक से<strong> </strong>भेजी<strong> </strong>है.</em>"</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">कमला बताती है कि प्लास्टिक पॉलिथीन से हमारे पर्यावरण को काफी नुक्सान होता है. इसीलिए उन्होंने इस समस्या पर ध्यान दिया. पीएम द्वारा मन की बात एपिसोड में जिक्र किये जाने के बाद लोग उनके काम की सराहना कर रहे हैं.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">प्लास्टिक से बना रहीं सजावट के सामान&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">कमला प्लास्टिक का इस्तेमाल करके सजावट के सामान बनाती है और साथ ही लोगों को कपड़ों की थैलियां इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करती हैं. सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बाद भी वह अपने आस पास सफाई रखने के लिए सभी को प्रेरित कर रही हैं. वह कूड़ेदान के साथ जरूरतमंदों के लिए उनके घर में शौचालय भी बनवा रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><img alt="art and craft ideas" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/376x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/C8OEFJaVROZvDxXEQrE8.jpg" style="width: 376px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits : Styles At Life</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">कमला को 'नारी शक्ति पुरस्कार' से किया गया सम्मानित&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">कमला को साल 2018 में उनके राज्य की स्वछता में अहम भूमिका निभाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से ' <strong>नारी शक्ति पुरस्कार </strong>' (Nari Shakti Puraskar) दिया गया. कमला को उनके काम के लिए और भी अन्य पुरस्कारों से नवाजा गया है. उन्हें&nbsp;<strong>राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों</strong> पर अपने <strong>अनुभवों को शेयर </strong>करने के लिए बुलाया जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">कमला अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन Self Help Group से जुड़कर ओडिशा राज्य को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान दे रही है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 29 Aug 2023 18:42:07 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/kamla-mohrana-of-odisha-sent-rakhi-to-pm-modi-made-with-food-products-packets]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wVJ5MJgokF2thjjAowGy.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wVJ5MJgokF2thjjAowGy.jpg"/></item><item><title><![CDATA["ग्रीन ग्वालियर, क्लीन ग्वालियर" ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/green-gwalior-clean-gwalior-planning-by-gwalior-officials</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png"><p dir="ltr">2014 में जब से प्रधानमंत्री ने 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत की, तब से देश की जनता में सफाई की प्रति एक नए जोश देखने को मिला. इंदौर इस दौड़ में 6 साल से सबसे आगे है. 'ग्रीन ग्वालियर क्लीन ग्वालियर' के नारे के साथ ग्वालियर भी इस मुहीम में आगे आने के प्रयास में लगा हुआ है.</p><p dir="ltr">ग्वालियर संभागीय आयुक्त दीपक सिंह ने बुधवार को बाल भवन में आयोजित पौधा रोपण प्लानिंग की बैठक में कहा- "शहर व उसके आस-पास वृक्षारोपण करने व सभी पौधों का संरक्षण करने के लिए सभी को मिलकर साथ आना होगा. सभी विभाग, संस्थायें एवं सामाजिक कार्यकर्ता पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और इस अभियान को घर-घर पहुँचाएं, जिससे जिले का प्रत्येक घर पौधा रोपण अभियान में जुड़ सके. जिसके यहां जगह है वह अपने आंगन अथवा भवन परिसर में और जिसके यहां जगह नहीं है वह गमलों में पौधा रोपण कर इस अभियान में सहभागी बनें." बैठक में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने कहा- "यदि हमारा ग्वालियर हरा भरा होगा तो स्वच्छ भी होगा और शहरवासी स्वस्थ रहेंगे. इसलिए सभी लोग मिलकर जिम्मेदारी के साथ अधिक से अधिक पौधा रोपण करें और पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी लें."</p><p dir="ltr">नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह ने कहा- "नगर निगम ग्वालियर द्वारा आगामी पौधा रोपण को लेकर योजना तैयार की है जिसमें हम शहर के लगभग 110 अर्धविकशित पार्कों में प्लांटेशन करेगें तथा नये रोड पर डिवाइडर व अन्य स्थानों पर जगह चिन्हित कर पौधा रोपण की योजना तैयार कर ली है." सीईओ जिला पंचायत विवेक कुमार ने कहा- "जिला पंचायत द्वारा मनरेगा के प्रोजेक्ट में तथा अन्य नई लोकेशन चिन्हित करने के साथ ही घाटीगांव के आस-पास पौधा रोपण किया जाएगा. इसके साथ ही अमृत सरोवर योजना तथा ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल व आंगनवाडी क्षेत्रों को भी चिन्हित किया जाएगा."</p><p dir="ltr">पूर्व संभागीय आयुक्त बीएम शर्मा ने कहा- "इस बार मौसम विभाग द्वारा इस क्षेत्र में कम बारिश की संभावना व्यक्त की है इसलिए हमें कम पानी वाले पौधों का चयन करें. इसके साथ ही डिवाइडर इत्यादि पर पौधे लगाते समय उसकी जिम्मेदारी समिति को दें तथा समिति को प्रशिक्षित भी करें. शहरवासियों में पर्यावरण के लिए निजी प्रयासों के आधार पर सबसे अच्छे गार्डन, टैरिफ गार्डन के बारे में सबको बताएं और उन्हें पुरुस्कार भी दें." ग्वालियर शहर की तरफ से लिया गया यह कदम एक बहुत बड़ी पहल है. देश के हर जिले में इस सोच की बहुत ज़रूरत है. जिस तरह गर्मी का स्तर बढ़ रहा है, देश में ऐसी पहल की बहुत ज़रूरत है. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी इस योजना को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. भविष्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना सिर्फ सरकार के लिए ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 29 Apr 2023 14:08:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/green-gwalior-clean-gwalior-planning-by-gwalior-officials]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png"/></item><item><title><![CDATA[झारखंड कि रानी 'मिस्त्री' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/jharkhand-shg-rani-mistri-udaypura-ranchi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg"><p dir="ltr">कौन कहता है की ईंट-कंक्रीट से जुड़े काम सिर्फ पुरुष ही कर पाते है? झारखंड की महिलाओं ने यह बात बहुत साल पहले ही गलत साबित कर दी, और साथ ही उन लोगों की सोच और मुँह पर ताला भी लगा दिया जो महिलाओं को किसी से काम समझते है. झारखण्ड में जब तक रानी मिस्त्रियों ने काम शुरू नहीं कर दिया तब तक लोग यही समझते थे कि ये सब काम तो आदमियों के है. लेकिन आज रांची कि वो रानियां जब काम करती है, तब उनके हाथों कि रफ़्तार देखकर सब दंग रह जाते है. जब तक कोई राज मिस्त्री या पुरुष मिस्त्री एक दिवार कि चिनाई करता है तक तब एक रानी मिस्त्री 2 दीवारों का काम ख़त्म कर देती है. </p>
<p dir="ltr">यह सिलसिला शुरू हुआ चार साल पहले जब उनके गांव उदयपुरा में कार्यरत स्वयं सहायता समूह को 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत सौ शौचालय बनाने का काम सौंपा गया. उम्मीद थी कि राज मिस्त्री मिल जाएंगे, लेकिन काम छोटा था तो कोई आदमी तैयार नहीं था. यह देखकर महिलाओं ने काम करने का बीड़ा उठा लिया. जिला प्रशासन की ओर से इन्हें प्रशिक्षण दिया गया, इसके बाद 20-25 महिलाओं ने मिलकर सारे शौचालयों का निर्माण कर दिया. काम करने के बाद जब इन महिलाओं को पैसे मिले तो इनके जोश में और बढ़ावा आया. बस फिर क्या था, वो दिन है और आज का दिन है, झारखंड में 50 हज़ार से ज़्यादा रानी मिस्त्री काम कर रहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी इनकी सफलता की कहानियां पहुंची और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खूंटी जिले की कुछ रानी मिस्त्रियों वे भी इनका हौसला बढ़ा चुके हैं.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/OBhaX5uAcaRU3yn8nokn.jpg" alt="Sunita devi "></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ram Nath Kovind facebook official page</em></span></p>
<p dir="ltr">इन्ही में से एक नाम है, सुनीता देवी. झारखंड के लातेहार जिले के उदयपुरा गांव की रहने वाली और अपने इलाके की मशहूर ‘रानी मिस्त्री’. वह वर्ष 2019 में भारत के राष्ट्रपति के हाथों भारत सरकार की ओर से कामकाजी महिलाओं को प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान 'नारी शक्ति पुरस्कार' से नवाजी जा चुकी हैं. इन रानी मिस्त्रियों पर 'वल्र्ड बैंक' ने हाल में एक रिपोर्ट बनाई. हजारीबाग की ही एक रानी मिस्त्री निशात जहां कहती हैं, "महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं. जो पुरुष कर सकते हैं वो महिलाएं भी कर सकती हैं और कई बार तो पुरुषों से बेहतर कर सकती हैं. रेजा-मजदूर के रूप में महिलाएं पहले भी निर्माण कार्य में लंबे समय से काम करती आयी हैं. अब उन्हें रानी मिस्त्री के रूप में काम करने का मौका मिला है तो वे यहां भी अपना हुनर और काबिलियत दिखा रही हैं." सब लोगों ने यह मान रखा है कि महिलाएं निर्माण गतिविधियों में सहायकों की भूमिका ही निभाती है. लेकिन, झारखंड में महिला मजदूरों ने मिस्त्री के काम में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ दिया है. </p>
<p dir="ltr">झारखंड उन राज्यों में से एक है जिसे 'स्वच्छ भारत अभियान' की योजना बनाने और उसको लागू करने के लिए 'विश्व बैंक' की ओर से तकनीकी मदद मिली थी. इस तकनीकी मदद के हिस्से के रूप में विश्व बैंक ने टॉयलेट बनाने के लिए मिस्त्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया था और उनमें से कई कार्यक्रमों में महिला मजदूरों ने भी हिस्सा लिया. कई रानी मिस्त्रियों के परिवार वाले इस काम को सीखने को लेकर उनके खिलाफ खड़े हो गए. पर संघर्ष कर इन रानी मिस्त्रियों ने अपना मुकाम पा ही लिया. झारखंड में यह बात साबित हो गयी कि महिलाएं किसी से भी कम नहीं है. सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि हर राज्य कि महिला इतनी ही सशक्त है कि वो कुछ भी आसानी से कर सकती है. बस चाहिए तो वो हौसला जो झारखंड महिलाओं ने दिखाया. अगर हर महिला बिना डरे काम करने लग गयी तो देश कि शिथि को बदलने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 16:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/jharkhand-shg-rani-mistri-udaypura-ranchi]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg"/></item></channel></rss>