<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ स्वसहायता]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/svshaaytaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/svshaaytaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 02 Mar 2023 16:55:13 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[वो तौलती गरीबी …मुझे मिली धुलेट के पथ पर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dhulet-indore-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UWXUUkpVx9GMuvtExJkK.jpg"><p>ठहरी जिंदगी, दो मुट्ठी सपने- धुलेट की बस यही पहचान थी. अब नही है. अनाज से भरे ट्रैक्टर पर बैठीं महिलायें दिख जाएंगी आते जाते. अनाज मंडी में मोल भाव करने जाती हैं. कम दाम मंज़ूर नहीं. इसीलिए मायके से पूछ कर निकलती हैं कि सोयाबीन का क्या भाव है.</p>
<p>मिलिये धुलेट महिला आजीविका ग्राम संगठन के स्वसहायता समूह से. पहली बार देखेंगे तो लगेगा कि किसी गुलाबी गैंग से मिल रहे हैं. लेकिन इंदौर के इस धुलेट में सब धुल गया है. वो बदल रहा है.</p>
<p>फ़सलों से भरे खेतों के बीच से गुज़रती सकरी सड़कों के बीच से हम पहुँचे धुलेट गाँव.  कुल 132 घर हैं. आबादी 548 है. कुछ कच्चे, कुछ पक्के मकान हैं. पेड़ के नीचे बैठे बुज़ुर्गों, खेलते बच्चों, और मुस्कुराती हुई दीदियों ने हमारा स्वागत किया. ये वही दीदियाँ है जो पुरुषों से घिरी अनाज मंडी में जाती हैं और अपने अनाज को सही दामों में बेच मुनाफ़ा और आत्मविश्वास की मुस्कान लिए घर लौटती हैं.</p>
<p>यहाँ खेती से पेट भरता है. जो बचता है वो गल्ला बाज़ार चला जाता है. बस इसी बाज़ार आने जाने में आजीविका मिल गई. जो छोटे किसान हैं उनके लिये मंडी अपनी छोटी उपज ले जाना घाटे का सौदा था. बाज़ार में सब अपना अनाज साथ ले जा नहीं सकते थे क्योंकि सब का वक्त और ज़रूरत अलग अलग थी. तभी दीदियों ने शुरु किया महिला शक्ति उत्पादक समूह. गांव की 15 दीदियाँ 2019 में साथ आईं. शुरुआत में किसी ने 100 ग्राम तो किसी ने आधा किलो सोयाबीन बेचा. दीदियों ने सब खरीद लिया. आज ये महिलाएं मिलकर सीज़न में 60 -70 क्विंटल फ़सल का उत्पादन ख़ुद मंडी में जाकर बेचती हैं.</p>
<p>इसी मुनाफ़े से दीदियों ने अपनी फ़सल को और उन्नत बनाने के लिए 30,000 रुपयों की बचत कर ग्रेडिंग मशीन और मॉइस्चर पूर्वानुमान मीटर खरीदा. बचत ने सपने बड़े कर दिये.</p>
<p>जो महिलाएं कभी उस गांव से शहर की तरफ़ आई तक नही थीं, कभी मंडी नहीं गई, कभी बैंक के सामने से नहीं गुज़रीं, वे आज मिलकर अपने समूह का संचालन कर रहीं है. मंडी, बैंक या सरकारी कार्यालय जाना हो, अब इनमें कोई झिझक नही. हाज़िरी का रजिस्टर हो या पैसों का हिसाब, सारे काम इन्होनें अपनी-अपनी समझ के हिसाब से आपस में बांट लिए.</p>
<p>बचत का स्वाद कुछ ऐसा है कि सास बहू साथ में हैं. इसी समूह की साथी प्रमिला दीदी बताती हैं कि उनकी सास ने समूह से जुड़ने के बाद उन्हें भी सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया. समूह की बुज़ुर्ग महिलाएं मंडी में व्यापारियों से मोल भाव करतीं है और अनाज से भरे ट्रैक्टर की ट्रॉली पर  बैठकर जाती हैं, और महिलाओं के ऊपर उठते प्रश्न चिन्हों को बड़ी सहजता से बेअसर कर देती हैं. फ़सल की दरों को मोबाइल पर देख कर या अख़बारों में पढ़कर तय करतीं है कि अनाज देवास की मंडी में जायेगा या इंदौर की मंडी में. समूह की अध्यक्ष दामिका जी आँख मिलाकर बड़े ठाठ से कहतीं है,"जहाँ का रेट ज़्यादा होगा, हमारी गाड़ी वही जाएगी."</p>
<p>चमकते सफ़ेद बाल और चहेरे पर झुर्रियों भरी मुस्कान लिए सुगन दीदी कहतीं है, "हम अपनी बहु-बेटियों को आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि वो  न तो पति पर और न ही ज़मीन पर निर्भर रहें."</p>
<p>मुखयमंत्री जीवन शक्ति योजना के तहत स्वसहायता समूह की महिलाएं घर बैठे गणवेश तैयार करने लगी हैं.  जिससे छात्र/छात्राओं को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण यूनिफ़ॉर्म उपलब्ध होंगे तथा महिलाओं को 600 रुपये प्रति छात्र/छात्रा के हिसाब से आमदनी हो सकेगी. ग्राम संगठन से उपजा द्वारकाधीश और श्री कृष्णा स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने सिलाई में भी रूचि ली और फ़िलहाल वो सिलाई सीख रहीं है. हाल ही में समूह को एक टेंडर मिला है जिसमें वह मध्य प्रदेश के 25 सरकारी स्कूलों के लिए यूनिफ़ॉर्म सिलेंगी. 3700 यूनिफ़ॉर्म सिलने का लक्ष्य इन महिलाओं का पहला इतने बड़े पैमाने का काम है. इस टेंडर ने न केवल उनके मनोबल को बढ़ाया है बल्कि उन्हें यह भी समझाया है कि सफ़लता उनके कम्फ़र्ट ज़ोन  के बाहर से आएगी. इसलिये नया सीखना होगा.</p>
<p>पपीता दीदी बतातीं है कि पिछली दिवाली मंडी में छुट्टी थी. सारी जमा पूँजी ख़त्म होने के बावजूद समूह ने हार न मानी और पैसे जुटाकर वो बीज लाये. किसी ने अपने बच्चे की गुल्लक तोड़कर, तो किसी ने अपनी घर की बचत में से पैसे जुटाकर समूह की सहायता करी. कोई बीमार हो, किसीके बच्चे की फ़ीस भरनी हों, किसी का पक्का मकान बनवाने का सपना पूरा करना हो, या किसी को साड़ी का व्यापार शुरू करना हो, समूह की महिलायें एक दूसरे का हाथ थामे रखतीं है, और ये विश्वास और साथ की ही डोर है जिसने सभी को इतनी मज़बूती से बांधे रखा है.</p>
<p>महिला शक्ति उत्पादक समूह की महिलाएं चाहतीं है कि उनका गेहूं समर्थन मूल्य पर बिके. और महिला समूहों की उपज 20 -30  रुपये के बोनस पर लिया जाए. दामिका दीदी का कहना है कि उनका समूह इस बोनस को अपने व्यापार को बढ़ाने में लगाना चाहेगा. </p>
<p>अनीता दीदी से जब पूछा गया कि इन ख़ूबसूरत गुलाबी रंग की साड़ियों की क्या कहानी है तो मुस्कुराते हुए वह कहतीं है कि, “इस गुलाबी साड़ी को पहनकर हम किसीकी बहू या किसी की पत्नी नहीं, बल्कि महिला आजीविका ग्राम संगठन के स्वसहायता समूह की सदस्य कहलाती है." गुलाबी गैंग की धुरंधर महिलाओं का यह समूह अपने रिश्तेदारों और आस पास के लोगों के लिए मिसाल हैं.</p>
<p><span class="image-inline ck-widget" contenteditable="false"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/post_attachments/4d25e0b7-d5e.jpg"></span></p>
<p><em>Photo Credits: Ravivar vichar</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 02 Mar 2023 16:55:13 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dhulet-indore-shg-women]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UWXUUkpVx9GMuvtExJkK.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/UWXUUkpVx9GMuvtExJkK.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला समूह को जन आंदोलन का रूप देना सराहनीय ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/president-murmu-addressed-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TWWJAywCxeztIbLrVTbO.jpg"><p dir="ltr">भोपाल का मोतीलाल नेहरू स्टेडियम. हज़ारों महिलाओं की भीड़ और सामने बैठी महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजयपाल मंगू भाई पटेल की निगाहें भी उसकी ओर. ऐसे में गुना जिले के गांव भरतपुर की अनीता पटेरिया जब मंच पर पहुंची तो एक हिम्मत का रंग उनके चेहरे पर नज़र आ रहा था. यह खुशग़वार रंग अनीता दीदी के चेहरे पर आया था SHG के कारण. इसकी प्रमाणिकता तब सिद्ध हुई जब उन्होंने बोला  की SHG ने मेरी जीवन की रंगत बदल दी.</p>
<p dir="ltr">सालों तक खुद को खेती मजदूरी में झोंका लेकिन फिर भी परिवार को पलने में दिक्कत का सामना करना पड़ता था. फिर अपने गाँव में महिला समूह की सदस्य बनी. सहयोग सामूहिक समूह के गठन में शामिल हुई यह सिरसी गांव का संगठन है. SHG में शामिल अनीता ने जब अपने जीवन की कठिनाइयों और बाद में मिली सफलता की कहानी सुनाई तो सभा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.उसने बताया कि वह खुद और उसके पति खेत में मजदूरी करती थे. हालात इतने मुश्किल थे कि घर चलाना तो मुश्किल था ही पर बच्चों को स्कूल भेजने की बजाए खेत में साथ ले जाती.पढ़ाने के लिए पैसा नहीं था.अपनी परेशानी को लेकर उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.एक दिन उसे स्वसहायता समूह का पता चला.उसे रोजगार और कुछ कमाई की उम्मीद जगी. वह SHG समूह की सदस्य बनी. समूह को सरकार का साथ मिला और कमाई के कई रास्ते खुल गए.मंच से अनीता ने कहा-आजीविका मिशन योजना और SHG को धन्यवाद जिसकी वजह से मैं अपने पति को खेती के लिए ट्रैक्टर तक दिला सकी. </p>
<p dir="ltr">गुना जिले के गांव भरतपुर की सहयोग सामूहिक समूह,सिरसी ने सिलसिलेवार अपनी कहानी पूरे आत्मविश्वास से सुनाई.शुरू में हिचकिचाने  वाली अनीता को जैसे ही राष्ट्रपति,मुख्यमंत्री आदि ने शाबाशी दी वैसे ही बहुत गर्व से वह अपनी कहानी बताने लगी. SHG में शामिल होकर उसने पहले भैंस खरीदी. धीरे-धीरे उसका लोन चुकाया. अनीता की हिम्मत को मिशन ने और बढ़ाया. दूसरा लोन दिया और वह आटा चक्की ले आई.अभी तक गांव के लोग अभी तक दूसरे गांव में अनाज पिसाने में जाते थे. समूह की आय बढ़ी और उधर  गांव को नई सुविधा भी मिल गई. मेहनत को देखते हुए समूह को तीसरी बार फिर लोन दिया गया. लगातार सफलता और जिंदगी के बदलाव का असर हुआ.बच्चों को स्कूल अच्छे स्कूल भेजने लगी. </p>
<p dir="ltr">अनीता की सहज बातें और आत्मविश्वास देख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा-मध्यप्रदेश में महिला स्वसहायता समूह को जनांदोलन का रूप देना सराहनीय है. इसे कार्य रूप दिया जाना प्रशंसनीय है.महिलाओं के स्वभाव में है कि कम से कम संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना जानती है.घरेलू कामकाज और देखरेख कर वह आधुनिक विकास के कार्यों में कंधा से कंधा मिला कर चल रही है.देश में समूहों में जितनी भागीदारी होगी उतना समाज और देश को लाभ होगा. मुर्मू बेहद खुश नजर आईं. उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल आने तक उन्होंने कई प्रोडक्ट के चित्र देखे.यह तो एक झलक है.चार लाख समूह और 42 लाख महिलाओं के लिए योजनाओं ने उन्हें पैरों पर खड़ा कर दिया. राज्यपाल पटेल ने स्वसहायता समूह को संरक्षण प्रोत्साहन सरकार दे रही है.समूहों को 4157 करोड़ का लोन अलग-अलग बैंकों से कराया.  समूह के उत्पादों की 535 करोड रुपए तक बिक्री हुई, जिसका सीधा लाभ समूह सदस्यों को मिला. मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि सरकार महिलाओं को ShG बनाने के लिए आगे बढ़ा रही है,जिससे घर में कमाई का जरिया बढ़े. सम्मान की जिंदगी जी सकें.</p>
<p dir="ltr"><img style="width: 487px; height: 348px;" src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Xb6nuKWhLzh2Nm1yPcdy.jpg" alt="murmu"></p>
<p dir="ltr"><em>Image Credits: Google Images</em></p>
<p dir="ltr">मुख्यमंत्री चौहान ने राष्ट्रपति मुर्मू को महिलाओं के लिए आदर्श बताया.उन्होंने भावुक तरीके से मुर्मू के जीवन के संघर्ष को बताया.चौहान ने बताया कि मुसीबतों के पहाड़ कई बार राष्ट्रपति पर टूटे. उन्हें विरासत में कुछ नहीं मिला.गरीब परिवार में जन्म लिया.पहले पति और फिर बेटे को खो देने का दर्द झेला.उन्हें प्रेरणा बताकर कहा कि महिलाएं पति के न होने पर टूट जाती हैं.जीवन खत्म सा मानती हैं.लेकिन राष्ट्रपति रुकी नहीं. पार्षद बनी,मंत्री बनी,राज्यपाल बनीं.उन्होंने महिलाओं के विकास के लिए हमेशा काम किया.मुख्यमंत्री ने स्टेडियम में मौजूद महिलाओं में जोश फूंकते हुए कहा महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा आदर्श हमारी राष्ट्रपति हैं.अब महिला सबला है.महिला जो चाहे वो कर सकती है.  कार्यक्रम में समूह सदस्यों का आत्मविश्वास देख राष्ट्रपति मुर्मू ने एक अन्य संगठन की अध्यक्ष फूलवती सिंह को भी अपनी सफलता की कहानी सुनाने का मौका दिया.उन्होंने बताया कि निर्भया संकुल संगठन में 35 गांव शामिल है.समूह में शामिल दीदियों को खेती,गणवेश,सिलाई,सेनेटाइजर,साबुन केसाथ में समूह में होने वाले खर्चे और कमाई का हिसाब-किताब रखने की ट्रेनिंग दी जा रही है.समूह साथियों ने ही मेहनत कर उन्हें जिला पंचायत सदस्य बना दिया. राष्ट्रपति मुर्मू के भाषण के बाद आयोजन स्थल पर पहुंची समूह महिलाओं में अलग उत्साह दिखाई दिया.उन्होंने कहा कि वे रोजगार और कमाई बढ़ाने के लिए और मेहनत करेंगे.हजारों की संख्या में पहुंची सदस्यों ने अब अपना आदर्श राष्ट्रपति को बताया.ये महिलाएं गांव में जाकर अन्य महिलाओं को प्रेरित करेंगी.</p>
<p dir="ltr"><iframe src="https://www.youtube.com/embed/hnSx_Scal4c?t=3479s" width="560" height="314" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p dir="ltr"><em>Image Credits: Google Images</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 24 Feb 2023 15:35:18 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/president-murmu-addressed-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TWWJAywCxeztIbLrVTbO.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TWWJAywCxeztIbLrVTbO.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG के 30 साल.... अब छूना है आसमान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/30-years-of-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6pefShcjV31ieJBNF14w.jpg"><p>स्वसहायता समूहों की शुरुआत को वर्ष 2022 में 30 वर्ष पूरे हो चुके है. आज भारत में लगभग 90 लाख महिला स्वसहायता समूह हैं. ये सभी समूह किसी न किसी बैंक से जुड़े हैं. ये महिलाएं उस खाते में बड़ी मात्रा में बचत और क़र्ज़ ट्रांसफर कर रही हैं. देश भर में ऐसे समूहों में दस करोड़ से अधिक महिलाएं शामिल हैं.</p>
<p>देखा जाए तो यह प्रयोग 1992 में शुरू हुआ था. प्रयोग की औपचारिक शुरुआत 1987 और 1992 के बीच कर्नाटक में एक गैर सरकारी संगठन MYRADA द्वारा किए गए एक प्रयोग में निहित है. उस समय स्वसहायता समूह शब्द का अस्तित्व नहीं था. दरअसल, यह एक प्रारंभिक प्रयोग था जिसमें आत्मीयता समूह का अर्थ है गांव की 15 या 20 महिलाओं का एक समूह जो एक-दूसरे को जानती हैं, हर महीने या पखवाड़े में एक बार एक साथ मिलती हैं और एक निश्चित राशि बचाती हैं.</p>
<p>अहम बात यह है कि इसकी शुरुआत सचमुच पांच और दस रुपए की बचत से हुई थी. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि समूह को किसी भी सरकारी योजना को उखाड़ फेंकने के लिए नहीं बनाया गया था. यह योजना इस विचार के साथ शुरू की गई थी कि जो पूंजी हमारे दैनिक जीवन के लिए उपयोग की जा सकती है. यह पूंजी हमारी अपनी छोटी-छोटी बचतों से ही नहीं बल्कि इन बचतों के दीर्घकालिक संचय से भी उपलब्ध होगी. इसका एक और कारण यह है कि सहकारी समितियां या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक महिलाओं को दरवाज़े पर पैर रखने की अनुमति देने के लिए वस्तुतः अनिच्छुक थे.</p>
<p><strong>पांच सौ संगठनों से शुरू हुआ प्रयोग</strong></p>
<p>पांच साल के प्रयोग के धीरे-धीरे सफल होने के बाद, शिखर बैंक नाबार्ड ने 1992 में इन समूहों और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों को जोड़ने का कार्यक्रम संभाला. इसे एसएचजी बैंक लिंकेज प्रोग्राम के नाम से जाना जाता है. शुरुआत में, नाबार्ड के पास केवल 500 समूह स्थापित करने का बहुत सीमित लक्ष्य था. इस उद्देश्य के लिए नाबार्ड और उसके संबद्ध संगठनों और गैर सरकारी संगठनों ने जिले में गैर सरकारी संगठनों के प्रशिक्षण, बैंकों के अधिकारियों के प्रशिक्षण और इस प्रकार बड़ी मात्रा में जागरूकता बढ़ाने का काम किया है. लगभग इसी समय रिजर्व बैंक ने भी इस प्रयोग की ओर ध्यान देना शुरू किया. इस तरह बैंकों ने एक महत्वपूर्ण नीति पेश की ताकि अनौपचारिक और वे समूह जो आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं हैं, बैंक के माध्यम से अपनी बचत का कई गुना ऋण प्राप्त कर सकें.</p>
<p>सन् 2000 के बाद पिछले 22 वर्षों में पूरे भारत के सभी राज्यों में चक्रवृद्धि ब्याज के साथ स्वसहायता समूहों का काम तेज़ी से बढ़ा है. पहले दस-पंद्रह साल तक यह सवाल उठता रहा कि क्या ये समूह सिर्फ़ दक्षिणी राज्यों में ही काम कर रहे हैं. हालांकि, पिछले दस-पंद्रह वर्षों में मध्य प्रदेश, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पूर्वांचल में गैर सरकारी संगठनों और बैंकों के माध्यम से छोटे गांवों और जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे स्वसहायता समूह स्थापित किए गए हैं. कई राज्य सरकारों ने इन सभी अभियानों में और योगदान दिया है.</p>
<p>कई राज्यों में उदाहरण के लिए तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, महिला आर्थिक विकास निगम (MAVIM) ने भी सहकारी आंदोलन को बड़े पैमाने पर समर्थन दिया. यह सब सहयोग प्रदान करते हुए बैंक भी इस प्रकार उत्साह दिखाते हुए आगे आए. उन्होंने देखा कि स्वसहायता समूहों में महिलाओं को ऋण देने के बाद पुनर्भुगतान दर लगभग 98-99% थी और यह समय पर थी. इसलिए, उन्हें देर से ही पता चला कि इन समूहों को बैंक से जोड़ना व्यवसाय के लिए भी फायदेमंद है.</p>
<p><br><strong>राष्ट्रीय स्तर पर हुए रचनात्मक आंदोलन</strong></p>
<p>दुर्भाग्य से, एक बार जब सरकार ने प्रयोग को अपना बताया और लक्ष्य निर्धारित किया कि कितनी संख्या में स्वसहायता समूह हर साल बनने चाहिए तो इससे स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई. एक ओर, स्वैच्छिक संगठनों द्वारा गठित मज़बूत सामाजिक और संस्थागत नींव वाले स्वसहायता समूह थे. दूसरी ओर, सरकारी योजनाओं के आवश्यक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अनेक स्थानों पर कुछ ‘सरकारी बचत समूह’ भी स्थापित किए गए. उस स्थान पर बचत शब्द की जगह ऋण शब्द ले लिया गया. इसलिए स्वसहायता समूह कई राज्यों में बचत और ऋण के रूप में जाने जा रहे हैं.</p>
<p>इसके बावजूद पिछले 30 वर्षों में, देश ने इन स्वसहायता समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन का अनुभव किया है. दिलचस्प बात यह है कि स्थापना के बाद से नाबार्ड ने हर साल स्वयं सहायता समूहों की वृद्धि की समीक्षा करते हुए एक बहुत व्यापक वार्षिक प्रगति पुस्तक प्रकाशित की है. इसलिए, इन स्वसहायता समूहों की वृद्धि कैसे, कब और किस राज्य में हुई, इसके बारे में बड़ी मात्रा में शोध सामग्री उपलब्ध है.</p>
<p>इस तरह, पांच सौ समूहों से शुरू हुआ यह स्वसहायता समूह प्रयोग आज न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी कई देशों में तेज़ी से फैल चुका है. पायलट टू स्केल प्रयोग को बढ़ाने के लिए कम से कम 20 से 30 साल की अवधि आवश्यक है, कोई रियायत या शॉर्टकट नहीं है, ऐसा महिला स्वसहायता समूहों के काम ने दिखाया है.</p>
<p><strong>सब जगह नज़र आता है बदलाव</strong></p>
<p>शुरुआती दिनों में कई ग़ैर-सरकारी संगठनों ने सरकार की नीति को पार करते हुए सहायता समूहों के निर्माण का काम अथक रूप से जारी रखा, जिसे शुरू में कुछ संदेह के तौर पर देखा गया था, सभी बैंकों और रिजर्व बैंक ने बहुत सतर्क रवैया अपनाया था. धीरे-धीरे सभी सरकारी अधिकारियों, बैंक अधिकारियों और यहां तक कि रिज़र्व बैंक को भी यह एहसास हो गया कि अगर उन्हें आखिरी पायदान पर पहुंचना है तो यह किसी भी सरकारी तंत्र में संभव नहीं है. उन तक पहुंचना तभी आसान होगा जब लोग साथ आएंगे और अपने दम पर प्रयास करेंगे.</p>
<p>पिछले 30 वर्षों में इन तमाम आंदोलनों से महिलाएं सभी मोर्चों पर तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं. पुरानी आंध्र प्रदेश सरकार में दोनों दलों के मुख्यमंत्रियों ने रियायतें खत्म करके स्वशासी समूहों की सभी महिलाओं को अपना मतदाता बनाने की कोशिश की. अनेक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्राम पंचायत एवं जिला परिषद की गतिविधियों में भाग ले रही हैं. कई गांवों में सास की उम्र की महिलाएं 25 से 30 रुपये के बचत समूह की बहू यानी दूसरी पीढ़ी के हाथों में जाने के बाद बड़े व्यवसायों की मालिक बन गई हैं.</p>
<p>30 वर्षों का एक लंबा आंदोलन है जो विकास प्रक्रिया की प्रभावशीलता को बढ़ाता है, गांव-गांव लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को शामिल करता है. साथ ही सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में छोटे बदलाव करता है और शुरुआत करता है एक बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए. यह आंदोलन एक तरह से नागरिकों का आंदोलन है. इस मौके पर इस उम्मीद में कोई आपत्ति नहीं है कि लोकतंत्र को मज़बूत करने की इस प्रक्रिया के अगले 30 साल मज़बूत और  मज़बूत होंगे.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"> शिरीष खरे </dc:creator><pubDate>Fri, 24 Feb 2023 15:27:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/30-years-of-shg]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6pefShcjV31ieJBNF14w.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6pefShcjV31ieJBNF14w.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बर्बाद सीरिया में आबाद होते SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/undp-syria-and-japan-shg-initiative</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qih56aAiDHvHNySeSjMl.jpg"><p>सीरिया में पिछले 10 सालों से बर्बादी और हिंसा का दौर है. न घर, न कमाई, और न ही दो वक्त की रोटी. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने साल 2020 में सीरिया के जापान दूतावास के साथ मिलकर स्वसहायता समूह की शुरुआत की.  8.18 मिलियन डॉलर की इस परियोजना का लक्ष्य था सीरियाई लोगों खासतौर पर महिलाओं को कमाई शुरू करने में मदद करना. UNDP ने 15 -25 महिलाओं के समूह बनायें. इस तरह सीरिया के  पांच इलाकों में 24 स्वसहायता समूहों (SHGs) की शुरुआत हुई.</p><p>जापान सरकार और UNDP ने बचत और कमाई करने के दो तरीके चुनें. पहला, एकता फंड जो अचानक आई मुसीबत में काम आता और दूसरा, उधार और बचत कोष जो समूह के सदस्यों को काम शुरू करने या बढ़ाने में सहायता करता. इन समूहों को अपने काम को बेहतर करने के लिए ट्रेनिंग भी मिली. माइक्रो फाइनेंस के सही इस्तेमाल के साथ टीम मैनेजमेंट से SHG की बात बनने लगी.</p><p>जैसे सीरिया के अल कुनेत्रा में रहने वाली 51 साल की नज़ीहा ने SHG को कमाई का इकलौता ज़रिया बनाया और अपंग पति की देखभाल भी करी. नज़ीहा आज अपने बेहतरीन साज ब्रेड के लिए जानी जाती हैं. कुछ साल पहले नज़ीहा के पास ब्रेड की भट्टी खरीदने तक के लिए पूरे पैसे नही थे. इन हालातों में वह अल-कुनैत्रा में चल रहे स्वसहायता समूहों में से एक अल-करज़ा में शामिल हुई.  समूह से मदद मिलने के बाद उन्होंने अपने ब्रेड बनाने के काम को बिज़नेस में बदला. आज वह अपने परिवार को वह सब दे पा रहीं है जिसके बारे में पहले कभी सोचा तक नहीं था.</p><p>इसी तरह अल-हसाकाह, सीरिया से कमिशली भी गर्व के साथ बताती हैं कि, "SHG से जुड़कर मैं अपने बच्चों के लिए घर बना पाई." आज कमिशली पूरे इलाके में मिसाल हैं.</p><p>नदवा को अल-अमल स्वसहायता समूह से दस लाख सीरियाई पाउंड का फंड मिला. इस से उन्होंने अपनी पशु चिकित्सा फार्मेसी को बढ़ाया. आज यह फार्मेसी पूरे इलाके में मशहूर है. नदवा, कमिशली, नज़ीहा जैसी सैकड़ों बदलाव की कहानियां सीरिया भर में मिल जायेगीं जिसके पीछे SHG हैं.</p><p>इन स्वसहायता समूहों ने युद्ध में बर्बाद सीरिया के लगभग 2500 लोगों को हौसला और सहारा दिया है. यह सब मज़बूत बन, अपने समुदाय में बदलाव ला रहीं है. समूहों ने लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारा और साथ ही उनमे एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ाया. युद्ध की तबाही के बीच ये समूह उम्मीद का बीज बो रहें हैं. दुनिया में अनेकों जगह हिंसा और निराशा के बीच जी रहीं महिलाओं के लिए ये स्वसहायता समूह विकास का ज़रिया बन सकते हैं.</p><p>इन स्वसहायता समूहों ने युद्ध में बर्बाद सीरिया के लगभग 2500 लोगों को हौसला और सहारा दिया है. यह सब मज़बूत बन, अपने समुदाय में बदलाव ला रहीं है. समूहों ने लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारा और साथ ही उनमे एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ाया. युद्ध की तबाही के बीच ये समूह उम्मीद का बीज बो रहें हैं. आज दुनिया के काफ़ी देशों में गरीबी, हिंसा और निराशा भयानक रूप ले चुकी है . जिसका सबसे ज़्यादा शिकार महिलाएं होती हैं. दुनियाभर में SHG वो पहल हो सकती है जो इन कठिनाइयों से न केवल महिलाओं बल्कि उनके परिवार को भी बाहर  निकाले.</p><p><br data-cke-filler="true"></p><p><br data-cke-filler="true"></p><p>image widget</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 15 Feb 2023 15:48:50 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/undp-syria-and-japan-shg-initiative]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qih56aAiDHvHNySeSjMl.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qih56aAiDHvHNySeSjMl.jpg"/></item></channel></rss>