<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ स्वसहायता समूह]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/svshaaytaa-smuuh</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/svshaaytaa-smuuh" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 25 Apr 2023 15:59:15 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[रतलाम कर रहा स्वच्छता में NO.1 बनने की तैयारी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"><p>इंदौर ने तो स्वच्छता में बाज़ी मारली है, और अब इंदौर से 140 किलोमीटर दूर रतलाम जिला भी स्वच्छता परिसरों का निर्माण कर स्वच्छता की इस रेस में आगे निकलने की तैयारी  कर रहा है. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रतलाम जिले मेें लगभग 6000 स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये करीब 66800 परिवारों को लाभ मिल रहा है. महिलाओं के ये समूह कई तरह की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. इस बार इन समूहों ने स्वच्छता की कमी को दूर करने की ठानी. ये समूह जिले में सार्वजनिक स्थानों पर 79 स्वच्छता परिसरों का संचालन और देखभाल कर रहे हैं. जिले में कुल 145 स्वच्छता परिसर बनाने की योजना है. </p>
<p>परिसर बस स्टैंड, हाट बाजारों इत्यादि सार्वजनिक जगहों पर बनाए जा रहे हैं. अगले महीने 66 और परिसर भी बनकर तैयार हो जाएंगे. निर्माण के साथ-साथ खुले में शौच न करने का संदेश भी दिया जा रहा है. परिसर के बाहर दो दुकानें भी बनाई जा रही हैं जिसका संचालन स्थानीय समूह कर रहे हैं. परिसरों की सफाई की ज़िम्मेदारी स्वसहायता समूहों ने उठाई. इसके बदले समूह को दुकानों का किराया नहीं देना होगा. जिले की कई पंचायतों में 465 स्क्वेयर फीट में स्वच्छता परिसरों का निर्माण 45 लाख रुपयों की लागत से किया जा रहा है. परिसर के बाहर बनी दुकानें 36-38 स्क्वेयर फीट की हैं. </p>
<p>समूह की महिलाओं ने यहां किराना, सलून, होटल,और टेलरिंग की दुकानें शुरू की हैं. कुछ परिसर फोरलेन सड़क पर बने हैं जिसकी वजह से समूहों को फायदा मिलेगा. रूपनगर फंटा, बड़ोदिया, कराडिया, करिया,बडावदी,आक्याकला, रुपडी सहित 79 गांवों के स्वच्छता परिसरों में दुकानें शुरू हो चुकी हैं. योजना के अनुसार आलोट में 33, बाजना में 25, जावरा में 20, पिपलोदा में 20, रतलाम 31, सैलाना में 16<br>स्वच्छता परिसर होंगे. साथ ही जिले में  ई-रिक्शा से कचरा संग्रहित कर गांव की स्वच्छता को बढ़ाने का काम भी चल रहा है. 84 गांवों में ही बने सेग्रीगेशन शेड में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम कर रही हैं. </p>
<p>न केवल रतलाम में स्वछता बढ़ेगी, पर महिलाओं और उनके परिवारों को इस रोज़गार से मदद भी मिल सकेगी. समय-समय पर समूहों ने सरकार की योजना को ज़मीन पर लागू करवाने में मदद की है. इस बार भी इस फैसले से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना को नई ऊंचाई मिल सकेगी.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 25 Apr 2023 15:59:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"/></item><item><title><![CDATA[पंचायती राज दिवस पर कई योजनाओं की शुरुआत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/multiple-projects-initiated-on-panchayti-raj-day</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/26ZhdxM2n61wOZgFfOZt.jpg"><p><iframe style="width: 808px; height: 453px;" src="https://www.youtube.com/embed/e7ZoHHpWHqY" width="808" height="453" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>पंचायती राज प्रणाली का उत्सव है राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस. इसे भारत में राष्ट्रीय दिवस का दर्जा दिया गया है. भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया था. इस वर्ष भी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रीवा (मप्र) में पंचायती दिवस पर महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं की. इन योजनाओं से देश की करीब 10 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल सकेगा. कुल 5.5 करोड़ महिलाओं का बीमा होगा. इनमें 2.5 करोड़ महिलाएं स्वसहायता समूह की सदस्य हैं. 3 करोड़ महिलाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा से जोड़ा जायेगा. </p>
<p>देश के 500 जिलों की 2 करोड़ महिलाओं को वित्तीय साक्षरता की ट्रेनिंग मिलेगी. उन्हें बचत, बैंकिंग व बीमा सखी बनाया जायेगा. ये अन्य महिलाओं को सुरक्षा बीमा योजना, बैंक खाते खोलना, बचत जैसी योजनाओं के बारे में जागरूक कर इन सुविधाओं से जोड़ने का काम करेंगी. करीब 7573 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन के कामों का शिलान्यास भी किया गया. देश की 50 हजार ग्राम पंचायतों में डिजिटल लेन-देन शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. इनमें उन पंचायतों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिनकी सरपंच या अन्य प्रतिनिधि महिलाएं हैं. प्रधान मंत्री ने पंचायत स्तर पर सार्वजनिक खरीद के लिए एक एकीकृत ई ग्राम स्वराज और GeM पोर्टल का उद्घाटन किया जिससे पंचायतें GeM के ज़रिये अपने सामान और सेवाओं की खरीद आसानी से  कर सकेंगे. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 4 लाख से अधिक लाभार्थियों के गृह प्रवेश करवाया गया. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 19:13:51 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/multiple-projects-initiated-on-panchayti-raj-day]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/26ZhdxM2n61wOZgFfOZt.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/26ZhdxM2n61wOZgFfOZt.jpg"/></item><item><title><![CDATA[भारत में कितने SHG कहां ? ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-count-across-states-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG"><p dir="ltr">दुनिया में ऐसे लोगों की ज़रूरत सबसे ज़्यादा रहती है जो खुद के साथ सबकी सोचें. इनकी संख्या भले ही कम हो, लेकिन उनके इरादे और काम इतने बड़े है कि वो मिसाल बन जाते है. ऐसी ही मिसाल है, स्वयं सहायता समूह.</p><p dir="ltr">हमारे देश में इस वक्त 82,76,129 स्वयं सहायता&nbsp;समूह है , जो कि देश के हर कोने में आर्थिक आज़ादी और फाइनेंशियल लिटेरिसी का परचम लहरा रहे है. कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणाचल से गुजरात तक एक भी ऐसा राज्य नहीं है जहां SHG महिलाएं दिन रात मेहनत नहीं कर रही. ये कहना गलत नहीं है कि इन महिलाओं ने आज एक ऐसी उम्मीद कि किरण जलाई है जिसमें भारत को बदलने की ताकत है.&nbsp;</p><p dir="ltr">इस वक्त देश में सबसे ज़्यादा SHGs बिहार (10,54,925) में है. SHG&nbsp; की संख्या के हिसाब से दूसरा और तीसरा नंबर आता है, बंगाल (10,51,407) और आंध्र प्रदेश (8,53,122) का. मध्यप्रदेश (4,31,962), राजस्थान (2,53 219), उत्तर प्रदेश (6,97,068), में भी SHGs की संख्या लाखों में है. कुल 8,95,18,109 महिलाएं स्वयं सहायता से जुडी हैं। &nbsp;सबसे अधिक 1,22,00,889 महिलाएं बिहार राज्य में हैं.</p><p dir="ltr">हालांकि इन राज्यों के SHG का प्रतिशत यहाँ की आबादी के मुकाबले काफी कम है. जैसे यू .पी. (आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य ) में SHG का अनुपात आबादी का 0.28% प्रतिशत है.&nbsp; म. प्र.की आबादी का 0.5 % और राजस्थान की आबादी का 0.3 %. ग्रामीण महिलाओं के जनसंख्या के अनुपात को भी अलग करके देखा जाए तब भी यह प्रतिशत काफी कम है. SHG&nbsp; की संख्या के हिसाब से सबसे बड़े राज्य बिहार में SHG का प्रतिशत 0.6 % है जो की&nbsp; बाकि सभी राज्यों से कुछ ही ज़्यादा है. और जब बिहार, मध्यप्रदेश या राजस्थान की ग्रामीण पृष्ठभूमि देखें तो यह निम्न स्तर पर है. लद्दाख, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, और हरियाणा में तो संख्या की स्थिति और भी खराब है.</p><p dir="ltr">ग्रामीण महिला जनसंख्या और SHG से जुड़ने में इस बड़े अंतर की कई वजह है. भारत में स्वयं सहायता समूहों की संख्या के पीछे कई कारण है उनमें से आर्थिक विकास, सरकार की नीतियां, सामाजिक स्थिति और मान्यताएं . ऐसा हर राज्य जहां SHG की संख्या 5 लाख से ऊपर है, वहां सामाजिक भागीदारी और चेतना ज़्यादा है.</p><p dir="ltr">बिहार राज्य सरकार ने SHG के लिए बिहार रूरल लिवेलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (BRLPS), या&nbsp; 'जीविका' जैसी पहल की. यह महिलाओं को SHG से जोड़ कर अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक और तकनीकी मदद करती है.</p><p dir="ltr">इसी तरह बंगाल में भी सरकार ने 'आनंदधारा स्कीम' और 'बांग्ला स्वनिर्भर&nbsp; कर्मसंस्थान प्रकल्प' जैसे कार्यक्रम चलाए जो की महिलाओं को आर्थिक, तकनिकी, और भी कई तरह की ट्रेनिंग देतीं है.&nbsp;</p><p dir="ltr">इस तरह मध्यप्रदेश की सरकार ने भी काफी योजनाएं चलाई जिससे मध्य प्रदेश में SHGs की संख्या में बढ़ोतरी आई . मध्यप्रदेश में आज तक़रीबन 4,31,962 SHG काम कर रहे है और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.&nbsp; इसका कारण मध्यप्रदेश सरकार का बैंकों द्वारा कम ब्याज दर रखवाना और कई तरह के प्रोत्साहन महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए जाना है. साथ ही उन्हें दी जाने वाली सहायता सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपये कर दी गयी है. इस से SHG महिलाओं को भारी ब्याज के जाल से छुटकारा पाने में बहुत मदद मिली. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने SHG को अपने आत्मनिर्भर म प्र 2023 के विज़न में सबसे ऊपर रखा है. सरकार, बैंक, और कॉर्पोरेट के इस तरह के प्रयास SHG की संख्या और स्वरुप को लगातार बढ़ाने में मददगार साबित होंगे.</p><p><br data-mce-bogus="1"></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 18:19:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-count-across-states-in-india]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG"/></item><item><title><![CDATA[बुरहानपुर :दीदियां बना रही भाभी को सशक्त ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-in-burhanpur-spreading-awareness-on-ladli-behna-yojna</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AThFZRdir8FrbagO4dbM.jpg"><div dir="auto">आपने स्वसहायता समूह और दीदियों के काम सुने होंगे. लेकिन बुरहानपुर में "भाभी सप्ताह अभियान" प्रदेश में सुर्ख़ियों में है. लाड़ली बहना योजना को कारगर बनाने के लिए अलग -अलग प्रयोग किए जा रहे. जिले में सबसे अलग लाड़ली बहना की कमान स्वसहायता समूह की दीदियों ने संभाल ली.ये दीदियां ग्राम संगठन में पदाधिकारी हैं. अपने काम के अलावा ये दीदियां अपने ही गांव की दूसरी बहनों को आर्थिक मजबूती और सम्मान दिलवाने के खातिर मैदानों में उतर गई. जिला प्रशासन ने बाकायदा इस काम के लिए समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई.इस अभियान का नाम "भाभी भी बनेगी सशक्त सप्ताह" रखा गया. </div>
<div dir="auto"> </div>
<div dir="auto">प्रदेश में सबसे अलग इस नवाचार को लेकर आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक संतमती खलखो कहती हैं -" अधिक से अधिक पात्र महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ मिले, इसके लिए स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को मदद के लिए आगे लाया गया. कलेक्टर भव्या मित्तल खुद ने ट्रेनिंग देकर इन दीदियों को प्रोत्साहित किया. इस अभियान में 158 ग्राम संगठन की साढ़े पांच सौ से अधिक दीदियां पदाधिकारी इसमें सहयोग </div>
<div dir="auto">आगे आकर रहीं हैं."</div>
<div dir="auto"><img style="width: 464px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/NcaunFTxfl19NyW2Zknz.jpg" alt="Shg burhanpur "></div>
<div dir="auto"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></div>
<div dir="auto"> </div>
<div dir="auto">जिले में अपना सहयोग दे रहीं खखनार खुर्द की सुनिता मार्को ने बताया -" मुझे ख़ुशी है कि गांव के समूह के कामों से अलग हमारे गांव की ही अन्य भाभियों और दूसरी बहनों को हम इस योजना का रजिस्ट्रेशन करवाने में मदद कर रहे. " जैनाबाद की खुशबू तिवारी कहती हैं -" समूह की दीदियां जिस तरह अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर बनी,उसी तरह गांव की योग्य महिलाओं को लाड़ली योजना का लाभ दिलाएंगे. " ट्रेनिंग के बाद समूह की महिलाएं अपने -अपने इलाकों में घर-घर संपर्क में जुट गईं. डीपीएम खलखो आगे बताती है -" इस अभियान में समूह की दीदियां लगभग तीस हजार महिलाओं तक पहुंच कर मदद करेगी." </div>
<div dir="auto"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/TCt02Q4Pmv9LnI6OAGKl.jpg" alt="SHG burhanpur "></div>
<div dir="auto"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></div>
<div dir="auto"> </div>
<div dir="auto">इस अभियान को लेकर जिला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. लाड़ली बहना योजना में स्वसहायता समूह की भूमिका को लेकर कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं -" जिले में कई महिलाएं घर से नहीं निकल पाती. कई निरक्षर हैं. हमारा प्रयास है कि पात्र हर महिला को लाड़ली बहना योजना का लाभ मिले. जिससे उसकी जरूरतों के लिए उन्हें हाथ किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े. गांव में महिलाओं को सम्मान से भाभी कह कह पुकारते हैं. यही वजह इस अभियान को "भाभी बनेगी सशक्त सप्ताह" नाम दिया. इसमें स्वसहायता समूह के सदस्य महिलाओं का रजिस्ट्रेशन में मदद कर रहीं हैं. "</div>
<div dir="auto">जिला स्वसहायता समूह के अलग-अलग कामों को लेकर भी अपनी जगह बना चुका है. </div>
<div dir="auto"> </div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 27 Mar 2023 18:23:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-in-burhanpur-spreading-awareness-on-ladli-behna-yojna]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AThFZRdir8FrbagO4dbM.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AThFZRdir8FrbagO4dbM.jpg"/></item><item><title><![CDATA[एग्रीप्रेन्योर्स हैं किसान दीदियां ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/dewas-shg-women-become-agripreneurs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZxQeK3LgtQ8fl1TVydNX.jpg"><p><iframe style="width: 999px; height: 560px;" src="https://www.youtube.com/embed/zrGX4v5ewCE" width="999" height="560" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p> </p>
<p>खेतों खड़ी में नीली साड़ी पहने और मुस्कुराती ये किसान दीदियां हैं. पिछले एक साल से देवास जिले के आगरा खुर्द,मंगरादेह, इमलीपुरा,पुतलीपुरा गांव का नज़ारा ही बदल गया. एक टाइम कभी सोचा भी न था कि कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों की हम महिलाएं मजदूरी से कभी छुटकारा भी पा सकेंगी. बरसों से मजदूरी कर रही महिलाओं की मेहनत और सरकार की योजना ने इन महिलाओं की ज़िंदगी की तस्वीर बदल दी.मजदूरी कर महिलाएं अपनी गरीबी से जूझ रही थीं. <br>अब इलाके में इनको किसान दीदी के रूप में नई पहचान मिल गई. ये खेत जमीन की मालकिन बन गई. </p>
<p>दरअसल सरकार ने बाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को फलदार पौधे देने और उनके खेतों में लगवाने का प्लान किया. बस यहीं से कई किसान दीदियों की किस्मत संवर गई.उन किसानों खासकर समूह की महिलाओं को चुना गया जिनके पास जमीन तक नहीं थी. वन विभाग ने वन भूमि के पट्टे दे दिए.हॉर्टिकल्चर विभाग ने पौधे उपलब्ध करवाए.   <br> <br>आगरा खुर्द गांव में आरती स्वसहायता समूह की मेंदु बाई कहती हैं -"मेरी तो ज़िंदगी गरीबी में बीत रही थी. एक दिन गांव में  कुछ अधिकारी आए. हमें वन भूमि का पट्टा दिया और आम,जामफल (अमरुद) के पौधे लगवाए. दो साल में इनमें फल आने लगेंगे. हम इन्हें बेच कर कमाई करेंगे. इसके अलावा सब्जी और बीच में दूसरी फसल लगा रहे."  इस समूह में दूसरी दीदियां भी मुर्गी पालन, किराने की दुकान सहित और धंधा कर रही है. </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 25 Mar 2023 17:54:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/dewas-shg-women-become-agripreneurs]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZxQeK3LgtQ8fl1TVydNX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZxQeK3LgtQ8fl1TVydNX.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मुद्रा लोन है तो रोज़गार शुरू करना मुश्किल नही ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/mudra-loan-helps-shg-women-start-their-small-business</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2fZmAz4WK2whXFATDoGQ.jpg"><p dir="ltr">आज जब भी महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की बात निकलती है तो स्वसहायता समूह का नाम सबसे पहले आता है. इन समूहों की सफलता का सबसे बड़ा कारण आसान क्रेडिट मिल पाना है, जिसके बाद ही ये अपना रोज़गार शुरू कर पाते हैं. सरकार और बैंकों की सहायता से ऐसी कई योजनाओं के तहत SHG महिलाओं को लोन दिया जाता है. यहां से शुरू होता है उनकी आर्थिक आज़ादी का सफ़र. आसान लोन का एक कारगर ऑप्शन मुद्रा लोन है. जिसे भारत सरकार ने अप्रैल 2015 में शुरू किया. </p>
<p dir="ltr">एक समय था जब बैंक खाता खोलना भी मुश्किल था पर आज देश के सबसे गरीब लोगों के पास भी जन धन बैंक खाते हैं जिसमे सरकार भुगतान राशि जमा करती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने ने कहा, "चाहे वह छोटा किसान हो, व्यवसायी हो या महिला स्वसहायता समूह, मुद्रा योजना से लोन लेना बहुत आसान हो गया है." प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना (PMMY) का मकसद छोटे-छोटे कारोबारियों को अपना नया काम शुरू करने या पहले से ही शुरू किये गए व्यवसाय को बढ़ाने के लिए बैंक से 50 हज़ार से 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. </p>
<p dir="ltr">माइक्रो यूनिट्स डिवेलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (MUDRA) लोन स्कीम भारत सरकार की एक पहल है जो व्यपारियों, SME और MSME को लोन देती है. कुल का लगभग 68% लोन महिला उद्यमियों को दिया गया. मुद्रा लोन SHG महिलाओं के लिए इसिलिए कारगर साबित हुआ क्योकि लोन लेने के लिए आवेदक को बैंकों या लोन संस्थानों को कोई सिक्योरिटी जमा कराने की ज़रूरत नहीं होती. इस लोन का भुगतान 5 साल तक किया जा सकता है. आसानी से लोन मिलने और रीपेमेंट की सहूलियत होने की वजह से ये लोन कई स्वसहायता समूहों को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर रहा है. </p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार का प्रयास है कि अमृत काल की विकास यात्रा में हर नागरिक योगदान दे और कोई भी पीछे न रहे." भारत सरकार ने अगले 25 वर्षों को भारत के लिए अमृत काल बताया. इस अमृत काल में हर तबके के नागिरकों के सहयोग से ही भारत विश्वगुरु बन सकेगा. भारतीय महिलाएं स्वसहायता समूह में संगठित होकर आज अपना योगदान दे रहीं है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 25 Mar 2023 14:33:29 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/mudra-loan-helps-shg-women-start-their-small-business]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2fZmAz4WK2whXFATDoGQ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2fZmAz4WK2whXFATDoGQ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बुरहानपुर की टेक्स सखियां... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-burhanpur-become-jal-sakhis</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg"><p><iframe style="width: 1285px; height: 720px;" src="https://www.youtube.com/embed/nn0zgIETSLc" width="1285" height="720" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>स्वसहायता समूह की ये दीदियां अपने गांव में पीने के पानी की कमान संभाले हुए है. और इसकी ख़ास वजह 'टेक्स सखी' बन कर जल कर की समय से वसूली करना.यहां की महिलाओं के काम का अंदाज़ राज्य और केंद्र सरकारों में चर्चा में बना हुआ है. यहां के नल जल व्यवस्था और कर वसूली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़िक्र किया तो कोई समूह का दिल्ली में सम्मान हो रहा. </p>
<p>आखिर बुरहानपुर जिला और यहां के समूह की दीदियों ने क्या कमाल किया आइए उनसे ही सुनते हैं. दरियापुर गांव के जय श्री कृष्णा समूह की अध्यक्ष रीना पाटिल बताती है -<em>"गांव में नल होते हुए भी पानी नसीब में न था. पंद्रह सौ नल कनेक्शन हैं. पंचायत कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए. जब हम ग्यारह दीदियों के समूह ने काम संभाला तो विरोध हुआ. हमने एक न सुनी. साढ़े तीन लाख रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया. मुझे जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया. अब गांव के पुरुष भी साथ देने लगे."       </em></p>
<p>बहादरपुर गांव की प्रगति सहायता समूह की अध्यक्ष दीपिका सोनी कहती हैं- <em>"हमारे गांव में लगभग ढाई हजार नल कनेक्शन हैं. कई सालों से घरों में टाइम पर पानी मिला ही नहीं. पानी के लिए कभी खेत तो कभी इधर -उधर भटकते.  उधर अधिकतर महिलाएं खेतों में मजदूरी करती हैं. जो पानी की व्यवस्था जुटाने में मजदूरी पर नहीं जा पाती. पंचायत टेक्स वसूल नहीं कर पाई. प्रशासन ने हमें ये काम दिया."</em></p>
<p>इस गांव में अब रोज़ पानी मिलता है. और अब तक एक साल में पांच लाख की वसूली कर चुकीं हैं.इस समूह में दस दीदियां हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 15:38:59 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-burhanpur-become-jal-sakhis]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[टेक्स सखियों ने बदली गांव की तस्वीर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-from-burhanpur-manages-water-tax</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VYIyG0MV7ZvydkIObSva.jpeg"><p>जब दिक्क्तें हद से ज्यादा गुजर गई. किसी एक गांव नहीं बल्कि कई इलाकों में पानी की जंग छिड़ गई तब महिलाओं ने जगह जगह मोर्चा संभाला. पीने के पानी की जद्दोजहद में पूरा दिन ख़त्म हो जाने से परेशान महिलाओं का मिशन कामयाब हो गया. सरकार  की मंशा भी पूरी हो गई.कई गांव और पंचायतों में  ग्रामीण महिलाएं नए कलेवर में दिखाई दे रहीं हैं. जहां-जहां महिलाओं ने ये काम संभाला वहां-वहां न पानी की किल्ल्त न टाइम की बर्बादी. ये जाबांज महिलाएं हैं बुरहानपुर जिले की. स्वसहायता समूह की ये दीदियां अपने गांव में पीने के पानी की कमान संभाले हुए है. और इसकी ख़ास वजह "टेक्स सखी" बन कर जल कर की समय से वसूली करना.यहां की महिलाओं के काम का अंदाज़ राज्य और केंद्र सरकारों में चर्चा में बना हुआ है.यहां के नल जल व्यवस्था और कर वसूली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़िक्र किया तो कोई समूह का दिल्ली में सम्मान हो रहा. </p>
<p>आखिर बुरहानपुर जिला और यहां के समूह की दीदियों ने क्या कमाल किया आइए उनसे ही सुनते हैं. दरियापुर गांव के जय श्री कृष्णा समूह की अध्यक्ष रीना पाटिल बताती है -" गांव में नल होते हुए भी पानी नसीब में न था. पंद्रह सौ नल कनेक्शन हैं. पंचायत कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए. जब हम ग्यारह दीदियों के समूह ने काम संभाला तो विरोध हुआ. हमने एक न सुनी. साढ़े तीन लाख रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया. मुझे जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया. अब गांव के पुरुष भी साथ देने लगे.       </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg" alt="water tax sakhi"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>चपोरा के समूह की सदस्य जल टेक्स वसूलती हुई (Image Credits: Ravivar Vichar)</em></span></p>
<p>बहादरपुर गांव की प्रगति सहायता समूह की अध्यक्ष दीपिका सोनी कहती हैं-<em>" हमारे गांव में लगभग ढाई हजार नल कनेक्शन हैं. कई सालों से घरों में टाइम पर पानी मिला ही नहीं. पानी के लिए कभी खेत तो कभी इधर -उधर भटकते.  उधर अधिकतर महिलाएं खेतों में मजदूरी करती हैं. जो पानी की व्यवस्था जुटाने में मजदूरी पर नहीं जा पाती. पंचायत टेक्स वसूल नहीं कर पाई. प्रशासन ने हमें ये काम दिया." </em>इस गांव में अब रोज़ पानी मिलता है. और अब तक एक साल में पांच लाख की वसूली कर चुकीं हैं.इस समूह में दस दीदियां हैं.</p>
<p>दापोरा गांव में भी स्वर्णलता सहायता समूह ने भी पानी की व्यवस्था अपने जिम्मे लेकर जीवन को पटरी पर ले आईं. सचिव संगीता चौधरी  कहती हैं -" हमारे समूह में दस दीदियां हैं. कई गरीबी से जूझ रही थी. हमने साढ़े 23 लाख रुपए से ज्यादा की वसूली की. हमें बीस प्रतिशत पैसा मिल गया. जो दीदियों के हिस्से में आया." इसी समूह की अध्यक्ष आशा महाजन बताती हैं -" मेरे पति छोड़ कर चले गए. खाने के लाले पड़ गए. पानी जुटाने में ही मजदूरी पर नहीं जा पाते. अब आजीविका मिशन ने किस्मत बदली." इस गांव में एक हजार नल कनेक्शन हैं. </p>
<p>इसी तरह गांव चापोरा ,दरियापुर और खातला में भी समूह की महिलाएं जल कर वसूली में रिकॉर्ड बना कर गांव को नई दिशा दी.चपोरा के रेणुका समूह की सचिव वैशाली संजय महाजन  कहती हैं -<em>" यहां सौलह सौ नल कनेक्शन हैं. पाइप ख़राब हो गए. गड्ढों में पाइप धंस गए. सब बदले.हाउस वाइफ थी. गांव के ने मज़ाक बनाया. पर मैंने ठान ली थी कि अब परेशानी सहन नहीं करेंगे.और  घर से निकल गए."</em> कुछ दीदियों में भारती पाटिल, गायत्री जैनकार ,गायत्री महाजन ने गड्ढे भरवा कर नई पाइप लाइन बिछवा दी.समूह ने दो लाख रुपए कि वसूली कर कमाई का जरिया बना लिया.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rq9lhKC376uRdDfz82us.jpeg" alt="water tax sakhi"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>खातला के समूह की सदस्य भी वसूली करती हुई (Image Credits: Ravivar Vichar)</em></span></p>
<p>इसी तरह खातला गांव में 715 नल कनेक्शन और पांच हजार की आबादी के लोगों को भी भरपूर पीने का पानी मिल रहा है. कल्याणी समूह कि सचिव झवरा सईद कुरैशी कहती हैं -" हमने एक लाख 60 हजार रुपए जल कर में वसूले. पहले खेत और कुओं से पानी लेने दिनभर महिलाएं भटकती रहती थीं. अब जिंदगी रफ़्तार पकड़ रही है." </p>
<p>जिले की परियोजना प्रबंधक कृष्णा रावत कहती हैं -<em>" समूह ने बहुत मेहनत और हौसले से वसूली की. गांव में नल जल योजना को सार्थक कर दिया."  </em>ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के कॉर्डिनेटर  राजेश  ठाकुर कहते हैं -<em>"जिले में 167 पंचायतों में एक-एक समूह को यह जल कर वसूली का काम सौंपा. इससे 254 गांवों को आने वाले दिनों में लाभ मिलेगा." </em><br>कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया - <em>"बुरहानपुर जिले की महिलाओं के समूह सदस्यों में आत्मविश्वास है. नया करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें अलग -अलग ट्रेनिंग दिलवाई जा रही है. प्रधानमंत्री और जल मंत्रालय से मिले सम्मान की असली हक़दार समूह की मेहनती महिलाएं हीं हैं."</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 13:42:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-from-burhanpur-manages-water-tax]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VYIyG0MV7ZvydkIObSva.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VYIyG0MV7ZvydkIObSva.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की आर्थिक क्रांति का पहला नाम NRLM ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/day-nrlm-leading-a-women-led-financial-revolution</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg"><p dir="ltr">आर्थिक रूप से कमज़ोर या कमाई का कोई रास्ता नहीं होना , ये वह कारण है जिससे भारत के करोड़ों लोगों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में शोषित जिंदगी गुज़ारने पर मजबूर होने पड़ता है . इसी शोषण से उनकी आर्थिक, सामजिक, शारीरिक और भावनात्मक स्थिति काफ़ी ख़राब हो जाती है. भारत में करीब 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं. शहरी इलाकों में 8.81% और ग्रामीण इलाकों में गरीबी अनुपात 32.75% है. सेंट्रल गवर्नमेंट ने साल 2021 में दीनदयाल अंत्योदय योजना को स्टार्ट किया. </p>
<p dir="ltr">ग्रामीण इलाकों में DAY-NRLM या 'दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' की शुरुआत 2011 में हुई जिसकी निगरानी ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है. इसी तरह शहरों में गरीबी पर पूर्णविराम लगाने के लिए DAY-NULM यानी दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन 2013 में शुरू हुआ. इसे आजीविका मिशन के नाम से भी जाना जाता है.   </p>
<p dir="ltr">NRLM का मुख्य गोल ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वसहायता समूहों (SHG) में संगठित करना है. कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग), वित्तीय समावेशन(फाइनेंशियल इन्क्लुशन) और मार्किट तक पहुंच में सहायता देकर उनके आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है. आपको बता दें कि ये NRLM सामाजिक पूंजी (सोशल केपिटल ) बनाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने पर भी फोकस करता है. आज देशभर के 70 लाख SHG में लगभग 8 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. इन स्वसहायता समूहों ने ग्रामीण गरीबों खासकर महिलाओं को स्थिर रोज़गार दिया ताकि वे आत्मनिर्भर बन खुद पैसे कमा सके.  </p>
<p dir="ltr">तकरीबन 9,00,000 उम्मीदवारों को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट दिया जायेगा. 60 हजार स्ट्रीट वेंडर और बेघर लोगों को परमानेंट घर बनाने के लिए आर्थिक राशि मिलेगी. करीब 16,00,000 स्ट्रीट वेंडर का पहचान सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. सेंट्रल गवर्नमेंट ने 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया. स्किल ट्रेनिंग की सहायता से रोजगार पाने के लिए शहरों में निवास करने वाले और इस योजना के लिए पात्रता रखने वाले लोगों को ₹15,000 दिए जाते हैं ताकि वह इन्वेस्टमेंट कर सके.</p>
<p dir="ltr">आज देश के कोने-कोने में स्वसहायता समूह आर्थिक क्रांति को नई उचाइयां दे रहे हैं. कस्बों और गांवों की महिलाएं समूह से जुड़ने के लिए नए अवसर तलाश रही हैं ताकि वो आर्थिक आज़ादी को पा सकें और आर्थिक क्रांति का हिस्सा बनें. इन समूहों से जुड़ने के लिए अपने जिले में आजीविका मिशन के अधिकारियों से मिल रही हैं. यहीं उन्हें समूह बनाने और कमाई का रास्ता दिखाया जाता है. ख़ास बात यह है कि इन नए समूहों के गठन में पुराने समूह के सदस्य मदद कर रहे हैं. जो आगे चल कर ग्राम संगठन का रूप ले लेते हैं.  <strong id="docs-internal-guid-0148f09e-7fff-29e9-447e-938e6a250298"><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 13:36:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/day-nrlm-leading-a-women-led-financial-revolution]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG की महिलाओं ने बंजर ज़मीन पर रोपी हरियाली ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/dewas-shg-women-turn-barren-land-into-bamboo-plantation</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"><p><iframe style="width: 1141px; height: 640px;" src="https://www.youtube.com/embed/sVaGJEV1pJk" width="1141" height="640" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>बंजर इलाका और गर्म हवाएं, बस ऐसा ही कुछ हाल था पुंजापुरा पहाड़ी का. देवास जिले के गांव पानकुआं के लोग बस अपनी पहाड़ी और इलाके का हाल देख खून के आंसू बहाते थे. फिर पिछले 3 साल में बदलाव की हवाएं चली और  नज़ारा कुछ ऐसा बदला कि बंजर पहाड़ी पर अब घने जंगल है और ठंडी हवाएं गांव वालों को राहत दे रही है . बड़ी बात यह की पुंजापुरा पहाड़ी अब "जंगल बैंक" साबित हो रही है. यह कमाल कर दिखाया SHG महिलाओं ने. अब यहां के ग्रामवासी विशेषकर SHG महिलाएं इस "जंगल बैंक " को संवारने और बढ़ाने में दिन-रात एक कर रहीं हैं.    </p>
<p>सिर्फ जंगल ही नहीं यहां पनपी घास भी दोहरा फायदा करा रही है. इस घास से SHG महिलाओं के पशुधन की दूध मात्रा बढ़ गई है. और चारे के लिए भी अब उन्हें दूर नही जाना पड़ता. </p>
<p>SHG महिलाओं ने अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बांस के पेड़ लगाना शुरू किए .अब जहां तक नज़र जाती है वहां तक बांस ही बांस के घने पेड़ वाला जंगल नज़र आता है. प्राकृतिक खूबसूरती से इस इलाके को नई पहचान मिल रही है.  बांस के इस जंगल ने स्वसहायता समूह SHG की उम्मीदें भी बढ़ गई.  विकास महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष किरण सौलंकी बताती हैं - "हमारे इंतज़ार के दिन ख़त्म हुए. तीन साल की कड़ी मेहनत से बांस के ये पौधे अब बड़े होंगे है . यह हमारे समूह के लिए कमाई का जरिया बन जायेंगे. समूह की महिलाओं को अभी आठ हजार रुपए महीने मिलता है.कुछ ही दिनों में बांस की कटाई शुरू हो जाएगी. हमें इसका सीधा फायदा मिलेगा."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 22 Mar 2023 17:26:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/dewas-shg-women-turn-barren-land-into-bamboo-plantation]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[स्वच्छता का अलख जगा रही दीदियों को समर्पित नवरात्र ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/up-govt-felicitates-women-workers-this-navratri</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tSibbeSMiXvqpZ35NSCY.jpg"><p>चैत्र की इस नवरात्र को उत्तर प्रदेश में  इस बार खास अंदाज़ में मनाया जा रहा है. अपनी परवाह किए बगैर कस्बे से लेकर शहरों को स्वच्छ और ताज़ी आबो-हवा दने वाली दीदियों को समर्पित कर दिया. देवी के नौ ही रूपों और उनकी खासियत को आधुनिक तरीके से शेप दिया गया. इसी फ्रेम में सफाई दीदी को हर दिन नई उपाधि से नवाज़ा जाएगा. इस अभिनव प्रयोग को देशभर में सराहा जा रहा है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये नवरात्र उन देवियों को समर्पित कर दिया जो समाज में कई बार नज़र अंदाज़ कर दी जाती हैं. </p>
<p>गुड़ी पड़वा और मां दुर्गा के नौ रूपों को अलग -अलग कैटेगरी में लेकर राज्य स्तरीय पुरस्कार सफाई मित्र दीदी को दिए जाएंगे. नवरात्र के पहले दिन शैल पुत्री को माना जाता है. स्थानीय निकाय,स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) मिशन ने यह तय किया कि प्रदेश में स्वसहायता समूह की उन दीदी को इस सम्मान में शामिल करेंगे जो स्वच्छता के साथ अन्य लोगों को जागरूक कर रही हैं. इसी तरह नवरात्र का दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी के रूप में माना जाता है. इस रूप को ज्ञान,निष्ठा और ज्ञान का प्रतीक मानते हैं. इस दिन, उन महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने न केवल अपशिष्ट प्रबंधन बल्कि इसके माध्यम से कमाई का तरीका खोजा.</p>
<p><br>तीसरे दिन, क्षमा और शांति की देवी के रूप में जानी जाने वाली देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस दिन कचरा प्रबंधन में कार्यरत महिला उद्यमियों, जिन्होंने दूसरों के लिए रोजगार के अवसर बनाए उनको सम्मानित किया जाएगा. चौथे दिन देवी कुष्मांडा को समर्पित है,जिन्हें ब्रह्मांड का निर्माता माना जाता है. इस दिन सफाई मित्र (स्वच्छता कर्मचारी) को इसी तरह सम्मानित किया जाएगा. और पांचवे दिन प्यार और मातृत्व की देवी मानी जाने वाली देवी स्कंदमाता के रूप में  दूसरों को स्वच्छता में मास्टर ट्रेनर्स को सम्मानित किया जाएगा.</p>
<p>नवरात्र के छटवें दिन बुराई का नाश करने वाली देवी कात्यायनी के नाम से पूजा जाता है.  इस दिन स्वच्छता निश्चित करने के लिए अभिनव प्रथाओं के साथ सेवाएं देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा. सातवें दिन देवी कालरात्रि को समर्पित है, जिन्हें अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली स्वरूप में जाना जाता है. इस दिन खासतौर पर खाद बनाने और दूसरों को भी प्रोत्साहित करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा.</p>
<p>उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकायों की निदेशक और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) मिशन निदेशक नेहा शर्मा ने बताया-" समाज में सबसे गुमनाम होकर भी केवल अपने इलाके बल्कि प्रदेश को सवच्छ और सुंदर बनाने में अपने जीवन समर्पित कर चुकी है उन्हें मंडल ,जिला और राज्य स्तर पुरस्कृत किया जाएगा. शर्मा आगे बताती हैं -" इसका मकसद नवरात्र में उन असली देवियों को सम्मानित करना है ,जो समाज में मिसाल बन चुकी हैं.उन्होंने बताया नवरात्र के आठवें दिन देवी महागौरी के नाम पर मिशन उन महिलाओं को सम्मानित करेगा, जिन महिलाओं के प्रयासों से शहरी निकाय को स्वच्छ और सुन्दर बनाने में मदद मिलती है. स्वच्छता के लिए सामुदायिक जागरूकता में शामिल दीदियों को नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री (इच्छाओं को पूरा करने वाली) के नाम पर सम्मानित किया जाएगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 22 Mar 2023 16:48:53 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/up-govt-felicitates-women-workers-this-navratri]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tSibbeSMiXvqpZ35NSCY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tSibbeSMiXvqpZ35NSCY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG के नाम के साथ काम में दम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/what-is-in-the-name</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg"><p dir="ltr">"नाम में क्या रखा है", ये कहा है एक बहुत ही जाने-माने नाटककार, शेक्सपियर ने, उन लोगो या समूहों के लिए, जिनको नामों से नहीं बल्कि उनके कामो से जाना जाता है. बड़े कामों की जब भी बात आती है तो स्वसहायता समूह के बारे में बोले बिना ख़त्म नहीं हो सकती. ये समूह कौनसे  राज्य या देश में है, इस बात को सोचे बिना हम सब सिर्फ ये देखते है की इन समूहों की महिलाओं ने कितने शानदार काम किये है.</p>
<p dir="ltr">भले ही नाम की अहमियत हो न हो, लेकिन बात जब हमारी भाषा की आती है, तो अपने घर की बात और स्वाद दोनों याद आ जाते है. इसिलए अपनी भाषा में बात करनी की बात ही कुछ और है.  </p>
<p dir="ltr">भारत के हर राज्य में न जाने कितने स्वसहायता समूह है जो लाखों लोगो की ज़िन्दगियों को सुधार रहे है. अब बात करे महाराष्ट्र की तो वहाँ स्वयसहायता समूह या 'गट' का बहुत समय से काम कर रहे है.  सबसे पहला गट महाराष्ट्र में अमरावती की महिलाओं ने 1947 में बनाया था और 1988 में पुणे डिस्ट्रिक्ट के चैतन्य ग्रामीण महिला बाल युवक संस्था ने महाराष्ट्र में SHGs बढ़ावा देना शुरू कर दिया था. </p>
<p dir="ltr">ऐसे ही तमिलनाडु में 1989 में 'महलीर थीत्तम' नाम से एक कार्यक्रम धरमपुरी जिले में 1979 में शुरू किया गया. 1995 में 'इंद्रा महिला योजना' आई जिसने महिला सशक्तिकरण पर पुरे भारत में बहुत काम किया. 1999 में राष्ट्रीय महिला कोष को लाया गया जिसने 2 लाख से भी ज़्यादा महिलाओं को आर्थिक मदद की. ये सारे कदम तमिलनाडु में महिलाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिए गए. </p>
<p dir="ltr">अगर बात आंध्र प्रदेश की जाए तो वहां पर भी नाम कुछ अलग ही है लेकिन काम में कोई अंतर नहीं है. तेलगु में SHGs को स्वयंसहायता संघालु कहा जाता  है. 1999, अप्रैल 1 को भारत सरकार ने 'डेवलपमेंट ऑफ़ वीमेन एंड चिल्ड्रन इन रूरल एरियाज'(डवक्रे) शुरू किया जो सबसे ज़्यादा आंध्र में ही सफल हुआ. इस मिशन का सिर्फ एक सोच थी की गांव की महिलाओ को इतना पगार मिले जीसे वो अपनी और अपने परिवार की ज़िन्दगी का गुज़ारा कर सकें.</p>
<p dir="ltr">ओडिशा में SHGs को गोष्टी कहा जाता है. आप लोगो को तो पता ही होगा की गोष्टी बातचीत करने को भी कहते है, लेकिन जैसा अपने ऊपर पढ़ ही लिया है, "नाम में क्या रखा है." यहाँ की सरकार ने 2001 के अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर "मिशन शक्ति" की शुरुवात की थी . जिसका मकसद भी महिला सशक्तिकरण था और इस मकसद को कामियाब बनाने के लिए 70 लाख महिलाए इस मिशन में जुड़ गयी. गुजरात, जहाँ इन समूहों को 'जुट' कहा जाता है, एक और राज्य है जहा महिलाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 'सखी महिला मंडल' को बनाया और हाल ही में 'प्रधानमंत्री महिला कल्याण योजना' की भी स्तापना की गयी.असम में 'दल' कहे जाने वाले स्वयं सहायता समूहों को भी वहां की सरकार ने बहुत मदद की हमारें अगर हमारे देश के बाहर की बात करे तो, जर्मनी में इन्ही समूहों को 'selpst hil fe grupen' कहते है. श्रीलंका में इन्हे 'महिला मंडल' कहा जाता है.</p>
<p dir="ltr">देखा जाए तो हर राज्य और देश में स्वसहायता समूहों के नाम एकदम अलग है लेकिन इनके कामों में कोई अंतर नहीं है. इसीलिए शेक्सपियर ने बहुत सालो पहले ही बोल दिया था, "What is in the name?"</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 20 Mar 2023 15:57:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/what-is-in-the-name]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIg6ThQpCfOoSKBUvVnX.jpg"/></item><item><title><![CDATA[अब 'वास्तु हाउसिंग'  के साथ  हमारा भी घर बनेगा… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/vastu-housing-finance-ltd</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BwPvI7cnBupJXEPAZaH1.png"><p dir="ltr">वास्तु हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड देश भर में स्वसहायता समूहों (SHG) को साथ जोड़कर सूक्ष्म (माइक्रो) होम लोन सेक्शन को बड़ा करने वाला है. भारत में मॉर्गेज लोन यानी वह लोन जो किसी चीज़ जैसे घर, ज़मीन को गिरवी रख कर लिया जाता है वह सकल घरेलु उत्पाद (GDP) का 11 % है. इस तरह यह इकॉनमी का बहुत ही छोटा हिस्सा है. इस बड़े सेगमेंट और अवसर को भुनाने की कोशिश में वास्तु फाइनेंस है.  </p>
<p dir="ltr">मॉर्गेज लोन को बढ़ाने के लिए वास्तु हाउसिंग फाइनेंस के मुताबिक़ माइक्रो हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को ज़्यादा से ज़्यादा करने की जरूरत है. यह काम प्रधानमंत्री आवास योजना और दूसरी सरकारी योजनाओं के अंतर्गत बन रहे घरों से बढ़ा तो है लेकिन अगर हाउसिंग फाइनेंस में बेहतर दर पर लोन मिले तो यह और भी तेज़ी से बढ़ेगा. हाउसिंग फाइनेंस कंपनीयों का एवरेज होम लोन टिकट यानी वो एवरेज राशि जिसका होम लोन उठाया जाता है वह ₹12.5 लाख है.  इसको क़रीब 6 - 7 लाख पर लाने की कोशिश में वास्तु हाउसिंग फाइनेंस है.  इस एवरेज तक पहुंचने और माइक्रो हाउसिंग लोन पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए SHG सबसे कारगर उपाय है.  </p>
<p dir="ltr">जैसा की हम जानते है, SHG में 15-20 महिला सदस्य शामिल होती हैं, जो पहले अपनी बचत जमा करती हैं और जरूरतमंद सदस्यों को छोटे लोन देती हैं. एक बार जब स्वयं सहायता समूह अपने खर्चो और बचत के लिए पैसे जमा कर लेता है, तो वह अपनी ज़रूरतों की मात्रा को बढ़ाने के लिए बैंक या छोटे फाइनेंस इंस्टीटूशन से उधार ले सकता है. 31 मार्च, 2022 तक, लगभग 67.4 लाख SHGs के पास ₹1,51,051 करोड़ का लोन भुगतान है.  </p>
<p dir="ltr">इस तरह संख्या बल तो SHG के पास है ही साथ ही जब महिला लोन लेती है तो वो सुरक्षित लोन हो जाता है. SHG के साथ माइक्रो हाउसिंग फाइनेंस विन विन सिचुएशन में है. घर की ज़िम्मेदारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारियों में से एक है. वास्तु हाउसिंग फाइनेंस, अगर इस कदम को SHG महिलाओं के साथ और उनके हितों को साधते हुए बढ़ता है तो ज़रूर कामयाब होगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 19 Mar 2023 12:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/vastu-housing-finance-ltd]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BwPvI7cnBupJXEPAZaH1.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BwPvI7cnBupJXEPAZaH1.png"/></item><item><title><![CDATA[SHG के साथ अब हम किसी से कम नहीं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/specially-abled-women-run-their-own-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/37w3GLC5VGh2s3NXUdv8.jpg"><p>एक बार सोचिये, अगर कोई आपको पूरा दिन आंखों पर काली पट्टी बांधने को कहे, तो आप शायद एक दिन तो दूर की बात,1 घंटे के  लिए भी मना कर देंगे. क्योकि फिर काम कैसे करेंगे ? अब एक बार उन लोगो के बारे में सोचिए, जो एक दिन नहीं बल्कि हर दिन ऐसे  ही ज़िन्दगी जी रहे हैं. परेशानियां हर इंसान की ज़िन्दगी का हिस्सा हैं, अंतर सिर्फ यह होता है कि किसीको छोटी सी दिक्कत भी बड़ी लगती है और किसी को बड़ी से बड़ी दिक्कत भी छोटी. हम जैसे आम लोगों को सीखना हो तो इन विशेष रूप से सक्षम लोगों से सीख ले सकते हैं.</p>
<p>कोई भी कहानी पढ़े, हर कहानी कहेगी, 'मुझे जीने वाला व्यक्ति किसी योद्धा से कम नहीं'. जब ऐसे बहुत सारे योद्धा मिल जाएं तो बात ही कुछ और हो. कहते भी है ना कि साथ हर मुश्किल को आसान कर देता है. बस यही बात ध्यान में रख तारा बाई ने स्वसहायता समूह बनाया जिससे आज वो ऐसे काम कर रही है, जिनके बारे में वो कभी सोच भी नहीं सकती थी. तारा बाई उस महिला का नाम है जिन्होंने 10 महीने की मासूम उम्र में, अपनी आंखें खो दी. इसी वजह से उन्होंने कभी शादी नहीं की. खुद को अपने घर में ही सीमित कर लिया. कुछ छोटे-मोटे काम कर जैसे-तैसे अपना गुज़ारा चला पाती थी. </p>
<p>लेकिन हालात कभी एक जैसे नहीं रहते. तारा बाई के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक लोकल NGO 'तरुण संस्कार' ने उन्हें अपना खुद का काम करने में मदद की, और आज वो अपने ही जैसी सैकड़ों महिलाओं के साथ मिलकर सब्ज़ी उगाने और बेचने का काम करतीं है. </p>
<blockquote>
<p>वो कहती है कि, <em>"मैं सब्ज़ियों और फलों को छूकर ही उनके बारे में सब बता देती हूं."</em> हम जैसे आम लोगों के लिए तो बिना देखे किसी भी सब्ज़ी या फल का पता लगाना नामुमकिन है, लेकिन एक महिला जिसे दिखाई नहीं देता, वो ये काम कितनी आसानी से कर रही है. और ये सिर्फ एक कहानी है, ऐसी ना जाने कितनी कहानियां है जो आपको खुद कि काबिलियत पर सवाल करने पर मजबूर कर देगी. </p>
</blockquote>
<p>रज्जो बाई भी इन्ही के समूह की एक महिला है जिन्होंने 6 साल की छोटी सी उम्र में ही अपनी आँखें खो दी थी. वो कहती है, " मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं सब्ज़ी बेच के अपना गुज़ारा कर सकूंगी. पार्वती बर्मन भी इसी समूह में है और सालों से चलने फिरने में मुश्किल का सामना करती है लेकिन समूह का साथ और हौसला मिला तो आज अपनी गुज़र बसर अच्छी तरह कर रही है .</p>
<p>इन सब महिलाओं के जीवन में स्वसहायता समूह का बहुत बड़ा हिस्सा है, क्योंकि इनकी ज़िंदगियां अपने जैसे लोगो के साथ जुड़ कर ही बदली है. ये थी मध्य प्रदेश के बुधवा और जॉली गांव के स्वसहायता समूह की बात. ऐसी ही कहानियां और हिम्मत की दास्तान पुरे देश में फैली है जहां विकलांग महिलाएं अपने SHG चलाकर मिसाल कायम कर रही हैं. जैसे तमिलनाडु के तूतीकोरिन में कुछ विशेष रूप से सक्षम लोगो ने एक कैंटीन खोली।  इस स्वसहायता समूह के सदस्यों को होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग वहां के प्रशासन ने दी. और आज पूरे  इलाके में इनकी केंटीन की चर्चा है.</p>
<p>दक्षिण भारत से रुख करते है पूर्व की तरफ जहां झारखण्ड के रांची शहर में बिरसा विकलांग स्वसहायता समूह ने ज़ोरदार तरीकों से अपनी मांगे सरकार के सामने रखीं और अपना अधिकार लेने में कामयाब हुईं. इन कुछ उदाहरणों से आप समझ ही गए होंगे कि कैसे विशेष महिलाएं अपना SHG बनाकर कामयाबी का परचम लहरा रही हैं. देश भर में ऐसे न जाने कितने स्वसहायता समूह हैं जो विशेष रूप से सक्षम लोगो ने बनाए और अपना हर अधिकार हक़ से कमाया. दुनिया इन्हें चाहे कुछ भी बोले लेकिन ये सिर्फ एक बात ही बोलते है,<em>"हम किसी से कम नहीं."</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 18 Mar 2023 16:55:03 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/specially-abled-women-run-their-own-shg]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/37w3GLC5VGh2s3NXUdv8.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/37w3GLC5VGh2s3NXUdv8.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG दीदियों ने स्नेचर्स को सिखाया सबक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-taught-a-lesson-to-bag-snatchers-in-aurangabad-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG"><p dir="ltr">स्वसहायता समूह की दीदियों की मेहनत और उनके हुनर की कहानियां तो बहुत सुनी होंगी. पर आज उनकी बहादुरी की कहानी भी सुन लीजिये. सीएम गंगटी की रहने वाली शिलांती देवी और रेणु देवी स्वसहायता समूह चलाती हैं. दोनों ने गोह में पंजाब नेशनल बैंक से समूह के 40 हज़ार रुपए निकाले. वे रुपए एक थैले में रखकर लौटने लगीं. तभी रास्ते में दो महिलाओं ने उनका थैला काट लिया. चोरी की भनक लगते ही शिलांती और रेणु आरोपी महिलाओं से भिड़ गईं और उन्हें जमकर सबक सिखाया. उन्हें सड़क पर पटक दिया और फिर लोगों की मदद से उन्हें पुलिस के हवाले किया. मामला गोह थाना एरिया का है.</p><p dir="ltr">मौके पर मौजूद आसपास के लोगों ने दोनों SHG दीदियों का साथ दिया और दोनो स्नैचर्स को पकड़ लिया. मौके पर पुलिस के पहुंचने पर लोगों ने दोनों स्नैचर्स को पुलिस को सौंप दिया. पकड़ी गई दोनो स्नैचर्स रामपति बाई और अर्चना सलोदिया मध्य प्रदेश के रामगढ़ जिले से हैं. आरोपी महिलाएं घुमंतु जाति से हैं जिनके गिरोह ने गोह के पास डेरा डाला हुआ है. FIR दर्ज कर दोनों महिलाओं से पूछताछ जारी है. पूछताछ से चोरी, छिनैती, पॉकेटमारी और लूट की कई घटनाओं का खुलासा होने की संभावना है. पूछताछ के बाद दोनो को जेल भेज दिया जाएगा. चाहे बात मेहनत की हो, सूझ-बूझ की हो या फिर बहादुरी की, स्वसहायता समूह की दीदियां हर परिस्थिति में अपना कमाल दिखाती हैं.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Mar 2023 17:56:30 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-taught-a-lesson-to-bag-snatchers-in-aurangabad-bihar]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG"/></item><item><title><![CDATA[व्हिस्पर नहीं ..... अब ज़ोर से बात होगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-improving-menstrual-hygiene-conditions-in-rural-inda</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png"><p>शश्श्श्श्श्शश्श्श्श्शश... ज़रा धीरे बोलो, पेड का नाम इतनी ज़ोर से नहीं लेते. जिस देश में सैनिटरी पेड के ब्रांड का नाम ही व्हिस्पर हो वहां  ऐसी ही बातें होंगी. आज जब हम स्वच्छता पर इतना ज़ोर दे रहे हैं वहीं महिलाओं की मासिक धर्म स्वच्छता पर बात कानों में दबी आवाज़ में ही होती है. आज कुछ महिलाएं ये चुप्पी तोड़ रही हैं और पीरियड्स जैसी नेचुरल प्रक्रिया पर खुलकर बात कर बेहतर स्वास्थ्य के लिए क़दम उठा रही हैं. वैसे तो आज पिछले 50 सालों की तुलना में महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर है पर हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में आज भी स्त्री रोगों के 70% मामले खराब मासिक धर्म स्वच्छता के कारण होते हैं. भारत में 88% ग्रामीण महिलाएं सैनिटरी पैड की जगह कपड़े, राख, घास या रेत जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करती हैं.</p>
<p dir="ltr">आज स्वसहायता समूह महिलाओं की आर्थिक आज़ादी के लिए तो चर्चित हैं हीं पर साथ ही ये समूह महिलाओं की परेशानियों पर भी ग़ौर कर उनका हल निकालने में सफ़ल है. आज कई स्वसहायता समूह सेनेटरी पैड बना रहे हैं जिससे हर तबके की महिलाओं और लड़कियों तक,  ख़ासकर ग्रामीण इलाकों में, मासिक धर्म उत्पादों तक आसानी से पहुंच हो पाए.</p>
<p dir="ltr">राजस्थान में जननी सेवा संस्थान स्वसहायता समूहों के साथ ग्रामीण इलाकों में कम लागत वाले सैनिटरी पैड का उत्पादन और वितरण कर रहे हैं. मध्य प्रदेश में महिला उमंग प्रोड्यूसर्स कंपनी एक SHG फेडरेशन द्वारा चलाई जाती है और नेचर फ्रेंडली सैनिटरी पैड, मासिक धर्म कप और कपड़े के पैड सहित कई मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद बनाती है. महाराष्ट्र में सखी सोशल एंटरप्राइज नेटवर्क स्वसहायता समूहों के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड बनाते और बांटते हैं. आस पास के SHG को ये ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश में किशोरी विकास संगठन किशोरियों और युवतियों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत के सैनिटरी पैड बना रहे हैं और  मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर प्रशिक्षण भी दे रहे हैं. </p>
<p dir="ltr">महिलाओं की सेहत और मासिक धर्म स्वच्छता को एक क़दम आगे बढ़ाया है नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डिवेलपमेंट (NABARD) के 'माई पैड माई राइट' (MPMR) प्रोजेक्ट ने. दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. यह कश्मीर क्षेत्र में इस तरह की पहली परियोजना है और इसका उद्घाटन NABARD के सीजीएम डॉ ऐ के सूद के साथ अनंतनाग के उपायुक्त (DC) डॉ. बशारत कयूम ने किया. इस प्रोजेक्ट में SHG की महिलाएं काम कर रही हैं जिससे उन्हें रोज़गार मिला और मासिक धर्म स्वच्छता पर समझ बड़ी.</p>
<p dir="ltr">यह पहल उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के शाहगुंड गांव की स्वसहायता समूह ने भी की. इनका साथ दिया JKRLM UMEED ने. कुछ ही महीनों में महिलाओं ने 'राहत' के ब्रांड नाम के तहत बड़ी संख्या में सैनिटरी नैपकिन बनाने शुरू किये. आज संस्थाएं और सरकार महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर रही हैं. आज हमे ज़रुरत है कि सब साथ मिलकर महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में भी सोचें और मासिक धर्म स्वच्छता की इस पहल को हर कस्बे, हर गांव के कौने तक लेकर जायें. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 13 Mar 2023 18:20:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-improving-menstrual-hygiene-conditions-in-rural-inda]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png"/></item><item><title><![CDATA[UN तक पहुंचाया कोदो कुटकी को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/adivasi-women-presents-at-uno</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FudyHynjUw11UeLXePfT.jpeg"><p>डिंडोरी की बैगा आदिवासी रेखा पेंड्राम की अपने गांव से न्यूयॉर्क तक की यात्रा नारी सशक्तिकरण की अनूठी कहानी है. जिले की आदिवासी महिलाओं को एक कर उन्हें स्वावलंबी बनाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है. अमेरिका में 2017 में उन्होंने खाद सुरक्षा पर मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में एक प्रेसेंटेशन दिया था. भारी करतल ध्वनि के बीच, उन्होंने दुनिया को खाद्य सुरक्षा, महिलाओं के आर्थिक- सामाजिक उत्थान और उनके स्वास्थ्य सम्बंधित विषयों पर उनके स्वसहायता समूह के महासंघ द्वारा चलाये जा रहे कार्यों का विस्तार से विवरण दिया था. रेखा का प्रयास अब जिले की हर एक महिला को SHG आंदोलन से जोड़ना है.</p>
<p>"वह एक सपना जैसा था जब न्यूयॉर्क के कैनेडी हवाई अड्डे पर हमारा हवाई जहाज़ उतरा था ", रेखा बताती है. मुझे याद है, दुबली पतली आदिवासी महिला थोड़ा ठहर के कहती हैं, 2007 के पहले में घर से बाहर कम ही निकलती थी. दूसरों से बात करने में एक झिझक होती थी और सरकारी कर्मचारियों से बात करने में थोड़ा डर ही लगता था. लेकिन स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद सब बदल गया. " एकता में शायद ये ही शक्ति होती है". रेखा की अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष द्वारा प्रायोजित थी. और रेखा का प्रेजेंटेशन संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के हेड क्वार्टर में आयोजित था. प्रेजेंटेशन का शेड्यूल 5 मिनट का था. लेकिन वह चलता रहा, रेखा बोलती रही और दुनिया सुनती रही. "शायद लोग सुनना चाहते थे कि इतनी विपन्नता के बावजूद हम कैसे संघर्ष कर रहे हैं और न केवल खुश हैं बल्कि आर्थिक सामाजिक विकास भी कर रहे हैं", रेखा कहती है. उसके बाद रेखा ने कभी पलट के नहीं देखा.<br> <br>डिंडोरी जिले के मेहंदवानी के फलवाही गांव की रेखा 2007 में तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं. जीवन को दिशा मिली तो उन्होंने गांव-गांव में महिलाओं से संपर्क साधा और महिला समूह खड़े कर दिए. मेहंदवानी विकासखंड की 24 ग्राम पंचायतों और 41 गांवों को जोड़कर एक संघ बनाया और शुरू कर दिया विलुप्त हो रही कोदो-कुटकी की खेती का काम. उस वक़्त शायद रेखा इस बात से अनिभिज्ञ  थी कि वो एक राष्ट्रीय स्तर का कार्य करने जा रही है. कुछ ही वर्षों में उनके समूह ने कोदो कुटकी को राष्ट्रीय परिदृश्य पर ला कर खड़ा कर दिया. 2013 में रेखा को तेजस्विनी महिला स्वसहायता समूह का सचिव बना दिया गया. 2007 उनके पति देव सिंह मजदूर थे लेकिन अब वो कोदो कुटकी की खेती उन्नत तरीके से करते हैं. </p>
<p>स्वसहायता समूह से जुड़ने के 7 सात साल बाद ही 2014 में रेखा को सीताराम राव एशिया पेसीफिक लाइवलीहुड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. ये सम्मान भी रेखा को उनके द्वारा किये गए खाद्य सुरक्षा, महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक उत्थान, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों, महिलाओं व बच्चों के पोषण के क्षेत्र में सराहनीय योगदान का नतीजा था.</p>
<p>"आदिवासी व गरीब -पिछड़े इलाके में जन्म, उसके बाद शादी फिर बच्चे और इस दौरान किन-किन परेशानियों का मैंने सामना किया इसे भी दुनिया के सामने रखूंगी. लेकिन मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी. मुझे जैसे ही समूह से मिलने का मौका मिला मानो जैसे शरीर में ऊर्जा का संचार  सा हो गया. पहले महिलाओं को एक करना और फिर मिलजुल विलुप्त हो रही खेती के प्रति लोगों को जागरूक किया. नतीजा आपके सामने है. </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/TmSGEXpRFramb3oidOVU.jpeg" alt="dindori kodo kutki"></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">(Image Credits: Ravivar Vichar)</span></em></p>
<p>मध्य प्रदेश महिला वित्त निगम के महाप्रबंधक अरविन्द सिंह भाल जो न्यूयॉर्क में रेखा के साथ थे कहते हैं, " पेंड्राम यूं तो केवल 10वीं तक पढ़ी हैं. लेकिन उनकी वैचारिक शक्ति बहुत मजबूत है. वो अपने धुन की पक्की है और एक मजबूत इच्छा शक्ति वाली महिला है. उन्होंने तेजस्विनी के साथ जुड़कर हजारों महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुधारा". रेखा के साथ उस वक़्त मध्य प्रदेश की महिला एवं विकास मंत्री, और विभाग की प्रमुख सचिव भी अमेरिका गयी थी. लेकिन दुनिया की नज़रों में  रेखा ही थी.</p>
<p>समूह से जुड़ने के कुछ वर्षों बाद रेखा फलवाही गांव से मेहंदवानी ब्लॉक शिफ्ट हो गयी जहां उनके संघ का दफ्तर है. रेखा संघ की सचिव हैं और उनकी देख रेख में  275 SHG  की लगभग  4000 महिलाएं काम करती हैं. रेखा का दिन सुबह 8. 30 पर शुरू हो जाता है जब वो अपने दफ्तर पहुंच जाती हैं. "उसके बाद दिन कब खत्म हो गया पता ही नहीं चलता", वो बताती हैं, "दिन भर लोगों से मिलना, समूह और महासंघ के कामो की मॉनिटरिंग दिन भर चलती रहती है. </p>
<p>" ये एक बिज़नेस हेड के काम सामान है. कोदो कुटकी के भाव पर नज़र रखनी पड़ती है. जब भाव तेज हुआ तो तुरंत माल निकालना पड़ता है. फिर कूकीज और नमकीन की सप्लाई पर ध्यान भी देना पड़ता है," अपने पल्लू से चेहरे का पसीना पोंछती हुई रेखा बताती हैं. </p>
<p>रेखा कहती हैं, स्वसहायता समूह के आंदोलन ने आदिवासी समाज के एक बड़े तबके की, जिसमे वो खुद भी शामिल हैं, ज़िंदगी बदल दी. " गरीब हम तब भी थे, गरीब हम अब भी हैं लेकिन उस और इस गरीबी में जमीन आसमान का अंतर है. अब हम मन और विचारों से गरीब नहीं हैं. अगर परेशानी है तो उसका रास्ता निकालना हमे आ गया है," और ऐसा कहते हुए रेखा के चेहरे पर एकआत्मविश्वास भरी मुस्कान थी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">देशदीप सक्सेना </dc:creator><pubDate>Fri, 10 Mar 2023 18:28:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/adivasi-women-presents-at-uno]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FudyHynjUw11UeLXePfT.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FudyHynjUw11UeLXePfT.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[फैशन का है ये जलवा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/mord-extends-mou-with-nift</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4mOE7JI0U35Qb8wie8KH.jpeg"><p dir="ltr">इंडिया में फैशन का नाम आये और NIFT की बात न हो ऐसा हो ही नहीं सकता.NIFT में फैशन की पढ़ाई होती है. 1986 से ये संस्थान फैशन टेक्नोलॉजी पढ़ा रहा है, जो आज युवाओं का पसंदीदा कोर्स बन गया. फैशन, ट्रेंड,और डिज़ाइन कहां एक जगह के होकर रहते हैं. शहरों की बात करें या ग्रामीण इलाकों की कूल बनने की आदत आज हर युवा की कहानी है. देश भर के कई स्वसहायता समूह कपड़ो, बैग, यूनिफॉर्म, और टेबल क्लॉथ वगैरह की डिज़ाइनिंग और सिलाई कर रहे हैं. पर कभी-कभी इन्हें बनाने या बाज़ार तक पहुंचने में कुछ समस्याएं आती हैं. इसका समाधान निकलने की कोशिश की है ग्रामीण विकास मंत्रालय ने. </p>
<p dir="ltr">NIFT जिस्की हम बात कर रहे थे, उसके साथ मिलकर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को अपने समझौता ज्ञापन (MOU) बढ़ाया है. अब ये NIFT दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के स्वसहायता समूहों को फैशन के पाठ पढ़ाकर उनकी  डिज़ाइन में मदद करेगा. एक बयान में कहा गया है कि NRLM, MORD और NIFT के बीच 23 अक्टूबर, 2019 को तीन साल के लिए गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे. कोविड महामारी की वजह से कुछ हो न सका. इसीलिए इस MOU को बढ़ाने के फैसला लिया गया.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/MpIUhvHIeobvhjp8haAF.jpg" alt="MOU SIGNING"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>(Image Credits: Ministry of Rural Development, GOI)</em></span></p>
<p dir="ltr">NIFT ने सरस आजीविका मेला की गैलेरी डिज़ाइनिंग और नवीनीकरण में भी मदद की. एक सरकारी बयान के अनुसार, 1 मार्च तक सरस गैलरी ने नवीनीकरण के बाद से 1 करोड़ सत्रह लाख पांच हज़ार रुपये की बिक्री की. NIFT ने NRLM के साथ जुड़कर कई बार SHG सदस्यों को उनके उत्पाद डिज़ाइन और पैकेजिंग में मार्गदर्शन दिया है. इस MOU के बढ़ने के बाद अब डिज़ाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर तरीके से हो पायेगी. इस MOU के बाद मध्य प्रदेश में भी NIFT से जुड़े युवाओं में नई उम्मीद जगी है. युवाओं का मानना है कि इस MOU से फैशन के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी प्रदेश के युवा हिस्सा ले पाएंगे.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 04 Mar 2023 14:41:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/mord-extends-mou-with-nift]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4mOE7JI0U35Qb8wie8KH.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4mOE7JI0U35Qb8wie8KH.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[फैशन का है ये जलवा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/mord-extends-mou-with-nift</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MpIUhvHIeobvhjp8haAF.jpg"><p dir="ltr">इंडिया में फैशन का नाम आये और NIFT की बात न हो ऐसा हो ही नहीं सकता.NIFT में फैशन की पढ़ाई होती है. 1986 से ये संस्थान फैशन टेक्नोलॉजी पढ़ा रहा है, जो आज युवाओं का पसंदीदा कोर्स बन गया. फैशन, ट्रेंड,और डिज़ाइन कहां एक जगह के होकर रहते हैं. शहरों की बात करें या ग्रामीण इलाकों की कूल बनने की आदत आज हर युवा की कहानी है. देश भर के कई स्वसहायता समूह कपड़ो, बैग, यूनिफॉर्म, और टेबल क्लॉथ वगैरह की डिज़ाइनिंग और सिलाई कर रहे हैं. पर कभी-कभी इन्हें बनाने या बाज़ार तक पहुंचने में कुछ समस्याएं आती हैं. इसका समाधान निकलने की कोशिश की है ग्रामीण विकास मंत्रालय ने. </p>
<p dir="ltr">NIFT जिस्की हम बात कर रहे थे, उसके साथ मिलकर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को अपने समझौता ज्ञापन (MOU) बढ़ाया है. अब ये NIFT दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के स्वसहायता समूहों को फैशन के पाठ पढ़ाकर उनकी  डिज़ाइन में मदद करेगा. एक बयान में कहा गया है कि NRLM, MORD और NIFT के बीच 23 अक्टूबर, 2019 को तीन साल के लिए गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे. कोविड महामारी की वजह से कुछ हो न सका. इसीलिए इस MOU को बढ़ाने के फैसला लिया गया.  </p>
<p dir="ltr">NIFT ने सरस आजीविका मेला की गैलेरी डिज़ाइनिंग और नवीनीकरण में भी मदद की. एक सरकारी बयान के अनुसार, 1 मार्च तक सरस गैलरी ने नवीनीकरण के बाद से 1 करोड़ सत्रह लाख पांच हज़ार रुपये की बिक्री की. NIFT ने NRLM के साथ जुड़कर कई बार SHG सदस्यों को उनके उत्पाद डिज़ाइन और पैकेजिंग में मार्गदर्शन दिया है. इस MOU के बढ़ने के बाद अब डिज़ाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर तरीके से हो पायेगी. इस MOU के बाद मध्य प्रदेश में भी NIFT से जुड़े युवाओं में नई उम्मीद जगी है. युवाओं का मानना है कि इस MOU से फैशन के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी प्रदेश के युवा हिस्सा ले पाएंगे.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 04 Mar 2023 14:13:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/mord-extends-mou-with-nift]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MpIUhvHIeobvhjp8haAF.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/MpIUhvHIeobvhjp8haAF.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सारे रसों से सराबोर... सरस आजीविका मेला' 23 ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-participates-in-saras-mela-2023-noida</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iWc5VtdOsUkawrDuVDU8.jpg"><p dir="ltr">सरस मतलब रस से भरा हुआ और सरस मेला 2023 भी कई तरह के रसों से भरपूर है.  इसमें रस है रूरल इंडिया का, इसमें रस है उस संस्कृति का जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है और सबसे मीठा रस है उन सभी SHG का जिनके आने से यहां के ज़ायके में चार चांद लग गए. आपको लग रहा होगा कि यह खाने का मेला है लेकिन नहीं, यह ज़िंदगी का मेला है. 17 फरवरी से नोएडा में शुरू हुए इस आजीविका मेले की परंपरा कई सालों से है और साल दर साल यह आगे बढ़ता जा रहा है. साथ ही अपने स्वरुप और आकार में नई ऊंचाइयां छू रहा है.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/b0Fdgnb3ROdChnRLVGbW.jpg" alt="saras Ajeevika Mela 2023"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>(Photo Credits: Press Information Bureau) </em></span></p>
<p dir="ltr">सेक्टर 33 के हाट कला केंद्र की भीड़-भाड़ और चमक-दमक देखकर मेले की सफलता का अंदाज़ा हो जाता है. सरस आजीविका मेला पर्यटन, कला और संस्कृति से तो भरपूर है ही, लेकिन SHG यानि स्वसहायता समूह इसकी जान है. इसमें भारत भर से आयी SHG महिलाओं की कई स्टॉल और डिस्प्ले है जो अपने राज्यों की कला, खान-पान के साथ संस्कृति को दर्शा रहे है. 2017 से ये मेला लोगों की पसंद बना हुआ है जिसे आजीविका मिशन की सफ़लता कहा जा सकता है.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Rnd8h9cuLquI8mWa2kkd.webp" alt="saras Ajeevika Mela 2023"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>(Image Credits: Google Images)</em></span></p>
<p dir="ltr">केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सरस मेला 2023 का उद्घाटन किया. हर दिन सुबह 11 बजे से रात 9:30 बजे तक आप मेले का आनंद ले सकते हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय स्वसहायता समूहों (SHG) के तहत और ज़्यादा महिलाओं को शामिल करने के लिए काम कर रहा है. स्वसहायता समूह पारिवारिक आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देने में सफल हो रहे हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे मेले में 27 राज्यों के 300 से ज़्यादा ग्रामीण शिल्पकारों और स्वसहायता समूह के आर्ट और देश भर के व्यंजन देखने और चखने को मिलेंगे. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/coA3W0XiSNdu6UlaKV1d.jpg" alt="saras Ajeevika Mela 2023"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>(Image Credits: Google Images)</em></span></p>
<p dir="ltr">फूड कोर्ट का भी आनंद आप ले पाएंगे. 85 से अधिक सांस्कृतिक परफॉरमेंस शामिल किए गए हैं. यदि आप कपड़े या जूतों की शॉपिंग करना चाह रहे हैं तो वो इच्छा भी यहां पूरी हो सकेगी. सबसे अच्छी बात यह कि कोई भी एंट्री फीस या पार्किंग टिकट नहीं लगेगा. आप अपने परिवार और दोस्तों से साथ ये त्योहारों का महीना एन्जॉय कर सकते हैं. </p>
<p dir="ltr"> </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 04 Mar 2023 12:52:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-participates-in-saras-mela-2023-noida]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iWc5VtdOsUkawrDuVDU8.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iWc5VtdOsUkawrDuVDU8.jpg"/></item></channel></rss>