<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ स्वसहायता समूहों]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/svshaaytaa-smuuhon</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/svshaaytaa-smuuhon" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 16 Mar 2023 12:25:46 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[हर घर बता रहे SHG - वैक्सीन है सेहत की कुंजी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-contribution-in-vaccination-and-immunization</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg"><p dir="ltr">एकदम सच है कि 'इलाज से बेहतर बचाव है'. बचाव करने का सबसे बेहतर तरीका टीका करण है.&nbsp; एक बार टीका लगवा लिया फिर बीमारी होने की कोई चिंता नहीं. बच्चे का जन्म होते ही टीका लगवाकर उसे आने वाली कई बीमारियों से बचाया जा सकता है. आज अगर कोई वैक्सीन का नाम ले तो कोरोना वैक्सीन का ध्यान सबसे पहले आता है. अभी तक इंडिया में 220 करोड़ लोगों को कोविड-19 वैक्सीन लग चुकी है. वैक्सीन को लेकर ज़ोर -शोर से हुए जागरूकता अभियान सबको याद है, पर क्या ये याद है कि कितनी SHG महिलाओं ने वैक्सीन की अहमियत लोगों को बताई और वैक्सीन को लेकर उनके शक दूर कर उन्हें सही फैक्ट्स बताये ?&nbsp;&nbsp;&nbsp;<strong></strong></p><p dir="ltr">दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 69 लाख से अधिक स्वसहायता समूहों (SHG) को ट्रेनिंग दी. इन SHG महिलाओं ने COVID-19 से बचाव के बारे में खासकर COVID-19 टीकाकरण के लिए जागरूकता फैलाई, सही फैक्ट्स लोगों तक पहुंचाए और अपने समुदाय के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया. SHG ने कमज़ोर समूहों, जैसे कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की पहचान की और उनके टीकाकरण को प्राथमिकता देते हुए उन्हें टीका लगवाने की समझाइश दी. SHG महिलाओं ने टीकाकरण कवरेज दरों को ट्रैक किया और समुदाय में हर किसी के पास टीकाकरण सेवाओं तक पहुंच को सुनिश्चित किया.</p><p dir="ltr">कोविड साल 2019 में आया पर उससे पहले पोलियो ने कई लोगों की ज़िंदगियों को बर्बाद किया. 1972 से पल्स पोलियों अभियान शुरू हुआ और 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इंडिया को पोलियो फ्री देश घोषित किया. चार दशकों की इस मुहीम में SHG महिलाओं ने बहुत सहयोग दिया और ये वहां तक पहुंची जहां स्वास्थ्य कर्मी भी नहीं जा पा रहे थे. इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक सर्वे के अनुसार, जहां सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने 64% कवरेज किया वहीं SHG 92% आबादी तक पहुंचे. जर्नल ऑफ हेल्थ, पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन ने बताया कि SHG झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले और प्रवासी श्रमिकों जैसी 85% कमज़ोर आबादी तक पहुंचे जहां सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच बस 58% आबादी तक थी. यूनिसेफ इंडिया ने भी पल्स पोलियों अभियान में मिले SHG के योगदान को सराहा.&nbsp;&nbsp;<strong></strong></p><p dir="ltr">एक और सर्वे ने बताया कि बच्चों के टीकाकरण में भी SHG महिलाओं ने बहुत सहयोग किया, ये आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले 75% बच्चों तक पहुंची और उनका टीकारण करवाया. हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, काली खांसी (पर्टुसिस), हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल रोग और&nbsp;</p><p dir="ltr">रोटावायरस जैसी कई जानलेवा बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वसहायता समूह की महिलाओं ने लोगों को न सिर्फ वैक्सीन की ज़रुरत को समझाया पर उन्हें टीकाकरण सेंटर तक भी पहुंचाया. 'पहला सुख, निरोगी काया' की कहावत को ज़मीन पर लागू कर अपनी सेहत का ख़ुद ध्यान&nbsp; रखना और समय पर बच्चे को टीका लगवाने को समाज की आदत बनाया.&nbsp;&nbsp;</p><p dir="ltr">स्वास्थ्य के बिना प्रगति कर पाना नामुमकिन है और सेहतमंद रहने के लिए टीकारण से बेहतर कोई उपाय नहीं. रविवार विचार का मानना है कि SHG महिलाओं को ट्रेनिंग देकर हर तबके के स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सकता है. समुदाय में आसान पहुंच और लोगों से जान-पेहचा होने कि वजह से उनकी बात मानी जाती है और उनकी समझाइश का गहरा प्रभाव भी पड़ता है. इन समूहों की मदद से टीकाकरण ही नहीं, परिवार नियोजन, मातृत्व स्वास्थ, और किशोरी स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सकता है. तभी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'वन अर्थ, वन हेल्थ' का सपना साकार हो सकेगा.&nbsp;&nbsp;</p><p><strong id="docs-internal-guid-3b89ea56-7fff-24f6-78e9-77fc3812d7bc"><br><br><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 12:25:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-contribution-in-vaccination-and-immunization]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SA में SHG समूहों ने साथ आकर शुरू किया नया सिलसिला ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/shg-in-sa</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1zyNjRqlL123LlY5FwRi.jpg"><p><br>दक्षिण अफ्रीका के पास वह सब कुछ रहा है जो किसी भी देश को चाहिए; प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विविधता. लेकिन यही खूबसूरती और समृद्धि पर जब वैश्विक शक्तियों की नज़र पड़ी तो अभिशाप बन गई. सदियों की गुलामी और अत्याचार ने यहां रंगभेद , लैंगिक भेदभाव,असमानता, बेरोज़गारी और गरीबी को जन्म दिया.  लेकिन इतिहास से साबित है कि दक्षिण अफ्रीकी लोगों ने परेशानियों को हराकर रास्ता निकाला और इसका सबसे बड़ा उदाहरण नेल्सन मंडेला रहे. जैसे नेल्सन मंडेला ने रंगभेद और उपनिवेशवाद से दक्षिण अफ्रीका को आज़ादी दिलाई वैसे ही लैंगिक भेदभाव के खिलाफ़ आज SHG लड़ रहे है.</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका में लाखों ग्रामीण महिलाएं संसाधनों की कमी और जानकारियों से दूर, पुरुष प्रधान समाज में रहने को मजबूर हैं, जहां घर के भीतर उनके योगदान को महत्व नहीं मिलता. इसी समस्या को देखते हुए सिनामंडला फाउंडेशन ने लगभग 2 हज़ार गरीब और कमज़ोर महिलाओं को समूहों में संगठित किया. इन समूहों ने महिलाओं से रिसोर्स मैनेजमेंट, कमाई के ज़रियों के ऑप्शन, और अपना बिज़नेस शुरु करने के तरीकों पर बात की. उनमें आत्मविश्वास जगाकर अपने समुदाय के विकास में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाया.</p>
<p>ज़िमेलेवथु फाउंडेशन ने दक्षिण अफ्रीका के क्वा-ज़ुलु नटाल प्रांत में 11 ग्रामीण समुदायों</p>
<p>के 4 हज़ार तीन सौ इकत्तर महिलाएं, युवा और पुरुषों के साथ स्वसहायता समूह तीन चरणों में शुरू किये. लक्ष्य था गरीब लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना. पहले चरण में सदस्य जोड़े, उन्हें फाइनेंशियल लिट्रेसी की ट्रेनिंग दी और बचत शुरू करवाई. छोटा ग्रुप बनाकर रिटेल दुकान, खेती, मुर्गी पालन, फ़ूड प्रोसेसिंग, और क्राफ्ट बिज़नेस शुरू किये.  दूसरे चरण में लगभग 12 स्वसहायता समूहों ने मिलकर क्लस्टर स्तरीय संघ (सीएलए) बनाया. सीएलए ने मिलकर सामाजिक परियोजनाएं शुरू की.  इसमें बाल विकास केंद्र, मरीज़ की घर पर देखभाल,अनाथालय, युवाओं के लिए जीवन कौशल और कंप्यूटर लर्निंग सेंटर खोले. तीसरे चरण में 8 से अधिक सीएलए जिसमें 12 सौ से अधिक प्रतिभागियों ने मिलकर फेडरेशंस बनाये और बड़े पैमाने पर ऐसे रोज़गार शुरू किये जो सामाजिक समस्याओं को हल करें. डिटर्जेंट बनाने, बेकिंग, सिलाई, बकरी पालन, साज सजावट और केटरिंग के काम शुरू किये.</p>
<p>SHG 'मेंबर ऑफ द ईयर' अवार्ड की विजेता 35 वर्षीय बनेलिले शेज़ी ने 500 ZAR का लोन लेकर अपना होटल शुरू किया. लोग उनके सलाद, केक, चिप्स, कॉफी के साथ भोजन का भी लुत्फ़ ले रहे हैं. बाद में 600 ZAR फिर 1000 ZAR का लोन लेकर उन्होंने 2-प्लेट स्टोव,माइक्रोवेव, और चिप्स तलने की मशीन खरीदी. समय पर लोन चुकाने के साथ उन्होंने मुनाफ़ा भी कमाया. SHG ऑफ द ईयर अवार्ड का विजेता थूथुकानी SHG के 10 सदस्यों ने एक अनोखी पहल की. उन्होंने घर पर बीमार लोगों की मदद करने के लिए घर-घर जाकर देखभाल प्रोजेक्ट शुरू किया जिसके तहत समूह ने 124 कमज़ोर बच्चों की सहायता की, ज़रूरतमंद परिवारों को 81 फूड पार्सल डोनेट किए और 10 परिवारों को सोशल ग्रांट दिलवाई.</p>
<p><img style="width: 522px; height: 348px;" src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/0B8sHdnaR8AGJNQvGQlZ.jpg" alt="africa"></p>
<p>(<em>Image Credits: Global Giving)</em></p>
<p>28 साल की बोनीसीवे हलेंग्वा पहले अपनी दादी की पेंशन पर निर्भर थी , SHG से जुड़कर उन्होंने 200 ZAR का लोन लिया और चिप्स का बिज़नेस शुरू किया. लोन चुकाने के बाद दोबारा लोन लेकर अपने बिज़नेस को बढ़ाया. चेहरे पर मुस्कान लिए कहती हैं - "मेरे घर की स्थिति अब बदल चुकी हैं इसके लिए मैं हमेशा SHG की शुक्रगुज़ार रहूंगी." SHG में बचत कर कई सदस्यों ने अपने घर बनाये, मरम्मत का काम किया, बच्चों को स्कूल यूंनीफॉर्म  दिलवाई, मेडिकल खर्चों का भुगतान किया और घर ज़रुरत का सामान भी ख़रीदा.</p>
<p>स्वसहायता समूहों ने महिलाओं को रोज़गार देकर आर्थिक आज़ादी दिलवाई और लैंगिक भेदभाव को कम करने की शुरुआत की। जब इन महिलाओं ने अपने परिवार का साथ दिया तो पुरुषों ने उनके योगदान को माना और उनकी अहमियत बढ़ी। धीरे-धीरे महिलाओं की उपस्थिति कई जगहों पर पुरुषों के साथ बराबरी में दिखना शुरू हुई। </p>
<p>दक्षिण अफ्रीका ने एक तीर से दो निशाने लगाते हुए गरीबी से बाहर निकलने के रास्ते खोजे और साथ ही सामाजिक दिक्कतों के हल निकाले. दुनियाभर में चल रहें स्वसहायता समूहों को दक्षिण अफ्रीका से सीखकर अपने इलाके में चल रहे समूहों को एक साथ लाने की कोशिश करनी चाहिए. रविवार विचार का भी प्रयास है कि वो एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन पाए जहां अलग-अलग SHG अपने विचार, योजनाएं ,और दिक्कतें एक दूसरे से बांटे और साथ मिलकर काम करें.</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/SDsVJ7DuqTHEklrpE8Pm.jpg" alt="africa"></p>
<p><em>(Image Credits: Global Giving)</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 18 Feb 2023 18:42:41 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/shg-in-sa]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1zyNjRqlL123LlY5FwRi.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1zyNjRqlL123LlY5FwRi.jpg"/></item></channel></rss>