<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ ट्रेनिंग]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/ttrening</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/ttrening" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 12 Jun 2023 17:58:10 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[गर्भ संस्कार का आधार अभिमन्यू ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/abhimanyu-garbh-sanskar-is-revolutionising-maternal-health</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png"><p><iframe style="width: 824px; height: 462px;" src="https://www.youtube.com/embed/hAn9PQDpTGU?t=1s" width="824" height="462" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>इंदौर की सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षाविद गरिमा दाहिमा ने गर्व से यह बात कही. अर्घ्य संस्थान की फाउंडर गरिमा जरूरतमंद महिलाओं को पूरे आठ महीने ख़ास तरह से ट्रेनिंग दे रहीं हैं.उनके इस प्रयोग से न केवल देश में बल्कि विदेशों से भी प्रिग्नेंट महिलाएं संपर्क कर संस्कार प्रक्रिया में हिस्सा लेती हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 12 Jun 2023 17:58:10 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/abhimanyu-garbh-sanskar-is-revolutionising-maternal-health]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png"/></item><item><title><![CDATA[गुजरात की फेब्रिक आर्ट बनी पहली पसंद ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"><p>गुजरात में एक घरेलु महिला ने न केवल मेहनत कर आत्मनिर्भर बनी बल्कि अलग-अलग समूह की जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना दिया. इस महिला धर्मिष्ठा ने अलग-अलग जगह जाकर चार हजार से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी. ऐसी ट्रेंड महिलाएं अब अपना रोजगार चला रहीं हैं. ऐसी महिलाएं भी जुड़ीं जो बेसहारा,अकेली या तलाकशुदा हैं. अहमदाबाद की धर्मिष्ठा अशोक भाई चुड़ासमा गुजरात सरकार के कहने पर कई संस्थाओं में ट्रेनिंग देने जाती हैं.</p>
<p>इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव में शामिल हुई धर्मिष्ठा कहती हैं -“ मैं ट्रेडिशनल आर्ट और हैंडीक्रॉफ्ट को बचाने में लगी हूं. इस काम से जहां संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे वहीं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत भी कर पा रहे. मैंने महिलाओं को मदद करने के लिए सिद्धि विनायक संस्था बनाई. 11 सदस्य बने. मैं फैब्रिक जूलरी, मिरर फेब्रिक वर्क, एम्ब्रॉयडरी सहित कई प्रोजेक्ट से जुड़ गए. मुझे ख़ुशी है की इंदौर मालवा उत्सव में हमें लगभग 50 हजार रुपए का वर्क ऑर्डर मिला."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/GxNfaxq7UQDWYlWmTSwm.jpg" alt="Gujarat Malwa Utsav"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फेब्रिक को जमाते हुई धर्मिष्ठा (फोटो क्रेडिट :रविवार विचार) </em></span></p>
<p>अहमदाबाद सेंटर से धर्मिष्ठा अभी 300 महिलाओं के साथ काम करती है. कोरोना काल से  पति अशोक भाई अब मार्केटिंग संभालते हैं. महिलाओं को दिक्क्त न हो इसलिए उनको घर जा कर कच्चा माल दे दिया जाता है. वे घर से ही सामान तैयार कर सेंटर पर भेज देती है. इस संस्था से जुड़ी पायल परमार कहती है -" हैंडीक्रॉफ्ट आइटम और फेब्रिक हैंडवर्क से मैं आत्मनिर्भर हो गई. मेरे आर्थिक हालात सुधर गए. मैं 12 से 15 हजार रुपए महीने कमा लेती हूं." इस संस्था से 60 अधिक महिलाएं सखी मंडल ( SELF HELP GROUP -SHG )  की सदस्य हैं जिन्हें रोज काम मिल जाता है. इस संस्था की एक और महिला धर्मिष्ठा भी जुड़ गई. धर्मिष्ठा कहती है -" मेरी आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. जब से इस काम में जुटी हर महीने दस हजार रुपए महीने से ज्यादा कमा लेती हूं."</p>
<p>इस संस्था के सदस्यों के साथ संस्था अध्यक्ष धर्मिष्ठा अब तक अहमदाबाद के अलावा सूरत ,बड़ौदा ,गांधीनगर ,इंदौर ,सौराष्ट्र और दिल्ली के मेले में अपनी प्रदर्शनी लगा चुकीं  हैं. धर्मिष्ठा आगे बताती है -" सबस ज्यादा फायदा हमें कच्चा माल लेने में होता है. हम कॉटन और दूसरा फेब्रिक अहमदाबाद से ही ले लेते हैं. इस पर डिमांड के अनुसार तैयार करते हैं. मिरर वर्क ब्लाउस की कीमत 2 हजार रुपए तक होती है और महिलाएं मेले में बड़े शौक से खरीदती हैं. हम इस आर्ट को और राज्यों तक ले जाएंगें. "</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 13:20:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[G20 के W20 फोरम पर SHG फोकस मे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"><p dir="ltr">भारत को G20 की प्रेसिडेंसी मिलना वैसे ही गर्व और सामरिक महत्व का मसला है . उसके साथ भारत ने G20 का एजेंडा महिला सशक्तिकरण सेट किया. इसी के तहत W20 की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. W20 महिला नेताओं का वो समूह है जो G20 देशों में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. वैसे तो W20,G20 का ही आधिकारिक हिस्सा है लेकिन इसकी अपनी अलग महत्ता भी है.  इसको G20 के साथ जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया है. W20 नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों से बना है. यह G20 के साथ मिलकर काम करता है जो दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के जीवन को सुधारता है.  </p>
<p dir="ltr">W20 के तहत  ही 11 -12 फरवरी 2023 को आगरा में G20 EMPOWER मीट हुई.  इस के एजेंडे का केंद्र रहा भारतीय महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण.13 सदस्य देशों और 7 अतिथि देशों के करीब 150 प्रतिनिधियों ने भागीदारी दर्ज की. G20 ने एक ऐसा मंच दिया जहां लैंगिक समानता पर काम कर रहे देशों को एक जगह लाकर, उनके विचारों और रणनीतियों को ठोस परिणामों में बदला जा सके. इस मीट का फोकस वूमेन लीडरशिप, जेंडर डिजिटल डिवाइड, एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट रहा. </p>
<p dir="ltr">भारत में करीब 140 लाख एमएसएमई और कृषि व्यवसाय को महिलाएं चला रही हैं. मैकिन्से की एक रिपोर्ट का कहना हैं कि भारत अपने GDP में 18% तक की बढ़त कर सकता है यदि देश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी शामिल हो सके. महिलाओं की फाइनेंशियल लिटरेसी पर फोकस कर उन्हें कार्यबल में शामिल करने की पहल भारत सरकार ने की. भारत के लिए SDG 5: लैंगिक समानता हासिल करने के लिए, भारत सरकार ने स्टैंड-अप इंडिया, पीएम मुद्रा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ,पोषण अभियान आदि शुरू किये. इन सभी योजनाओं को जो मज़बूत कड़ी जोड़ती हैं वो हैं SHG जिसने महिलाओं के अपना रोज़गार शुरू करने के अवसर बढ़ाये.  </p>
<p dir="ltr">जिन मध्यमवर्गीय परिवारों में महिलाओं से बैंक और पैसों के मसलों में राय तक नहीं ली जाती, वहीं SHG से बचत सीख कर और कम ब्याज दरों पर लोन लेकर, महिलाओं ने अपना रोज़गार शुरू किया. आपको बतादें कि भारत में 81 लाख स्वसहायता समूहों में 84% महिला सदस्य हैं, इनमे लगभग 90 % SC/ST महिलाएं हैं.  भारत में इन समूहों ने महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारा. लैंगिक समानता का लक्ष्य लेकर सरकार के द्वारा बनाई गई योजनाओं को SHG ने सहारा दिया है.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/eA8HfnthkJLvTt0KDYIH.jpeg" alt="W20"></p>
<p dir="ltr">जनजातीय केंद्रीय मंत्री, अर्जुन मुंडा ने दुनिया भर में महिलाओं के आर्थिक विकास पर ज़ोर देते हुए कहा कि फाइनेंशियल इन्क्लुशन को महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का उपकरण माना जाए. SHG भी फाइनेंशियल इन्क्लुशन की दिशा में काम कर रहें हैं. SHG ने अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की है जिसने उनका सामाजिक उत्थान हो पाया.   </p>
<p dir="ltr">स्वसहायता समूहों ने महिलाओं के कौशल और उनके शुरू किये व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद की. प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी वित्तीय सहायता देने वाली योजनाओं ने महिलाओं के व्यवसायों की चुनौतियों में से एक को संबोधित किया जिससे उन्हें - आसानी से कम ब्याज दर पर आवश्यकता-आधारित उधार मिल सका. तब से, 4600 लाख से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें से 56% महिलाओं के हैं. 2015 और 2022 के बीच, पीएमजेडीवाई खातों में औसत जमा राशि 1,279 रुपये से तीन गुना बढ़कर 3,761 रुपये हो गई. ऐसा कहा जा सकता है कि जन धन और स्वसहायता समूहों ने एक दुसरे का फ़ायदा किया . G20 ने इसी बात पर ज़ोर दिया. </p>
<p dir="ltr">इसी तरह, उद्यम सखी पोर्टल ने महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, नीतियों और गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर, SHG को बढ़ने में मदद की. वहीं, आजीविका मार्ट के नेटवर्क को SHG उत्पादों ने फैलाया. SHG से मिली आर्थिक आज़ादी ने न केवल महिलाओं की ज़रूरतें पूरी की पर समाज ने भी उनकी अहमियत को पहचाना. ग्रामीण परिवेश की करीब 82,31,670 महिलाएं आज स्वसहायता समूहों से जुड़ी. जिस महिला ने कभी घर के पैसों के मसलों में अपनी बात नहीं रखी थी, उन्होंने अपने  समूह शुरू कर अपने पति का बोझ बांटा. SHG ने महिलाओं को एकजुट किया और साथ मिल कर उन्होंने घरेलु हिंसा, जुआ-शराब की लत, औरतों के ख़िलाफ़ होते जुर्म जैसे मुद्दों पर जमकर आवाज़ उठाई. सरकार के आजीविका मिशन से जुड़कर अन्य सरकारी योजनाओं का ज्ञान ओर ट्रेनिंग फ़ायदेमंद साबित हुई.  </p>
<p dir="ltr">समूह से जुड़कर विकसित हुई सोच का इस्तेमाल महिलाओ ने अपने बच्चों और परिवार के लिए सही निर्णय लेने में किया. उन्होंने शिक्षा के महत्त्व को समझा और अपने बेटा-बेटी को सामान शिक्षा देने का संकल्प लिया. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को इन्होने ओर ऊंचे मक़ाम पर पहुंचाया. शिक्षा के अभाव से SHG चलाने में परेशानी महसूस करने के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल पहुंचाया. SHG महिलाओं ने पोषण अभियान को भी नई ऊचाइयों पर पहुंचाया. पोषण अभियान के तहत अपने खेतों में फल ओर सब्ज़ियां लगाकर बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन दिया ओर साथ ही उन फलों ओर सब्ज़ियों को बेचकर कमाई का ज़रिया भी बनाया.  </p>
<p dir="ltr">यह गर्व की बात है कि आज भारत को 20 देशों की अगुआई करने का मौका मिला. G20  में भारत ने महिला सशक्तिकरण जैसे ज़रूरी मुद्दे को उठाया जिसका कहीं न कहीं विकासशील देशों पर गहरा असर पड़ेगा. विकासशील देश हो या विकसित देश, महिलाओं की आर्थिक आज़ादी आज भी अधूरी है. G20 वो प्लेटफार्म है जो इस मुद्दे को सरहदों पार पूरे विश्व में ले जा सकेगा. <strong id="docs-internal-guid-d91295e0-7fff-6fad-3d54-6defad387bf1"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:34:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मैनेजमेंट और मार्केटिंग से होगी SHG की मुश्किलें आसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"><p dir="ltr">मार्केटिंग के आस पास ही घूमती है किसी भी व्यवसाय की सफ़लता. महिलाओं को आर्थिक आज़ादी की तरफ़ ले जा रहे हैं तेज़ी से बढ़ते स्वसहायता समूह. इनकी तरक्की टिकी है प्रोडक्ट को आस पास के लोगों से मिली सहमति पर. समूहों को उचित सहायता मिलने पर ये हमारे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों में और ज़्यादा योगदान दे सकेंगे. भारत ने पिछले कुछ दशकों में संचार क्रांति का अनुभव किया. भारत थर्ड वर्ल्ड के देश से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना. इस दौरान देश में बड़े पैमाने पर लोग गांव और छोटे कस्बों से शहरों की ओर आये.</p>
<p dir="ltr">बढ़ती बेरोज़गारी से निपटने के लिए पिछले कुछ दशकों में सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) को लागू किया. जिसके तहत स्वसहायता समूह योजना रोज़गार की तलाश करती महिलाओं के लिए कारगर साबित हुई. आज इन महिलाओं की आर्थिक विकास और बदलाव की कहानियां हर जगह मिल जाएगी.  </p>
<p dir="ltr">पूरे भारत में सपने साकार करते 81 लाख  स्वसहायता समूह कई प्रकार की खाने की चीज़ों, कपड़ों, कला वस्तुओं आदि बना रहे हैं.  इन उत्पादों को बेच ये महिलाएं तभी मुनाफा कमा सकेंगी जब उनके बनाये सामान को मार्केट में जगह मिलेगी. बढ़ते ग्लोबल कॉम्पीटिशन के इस दौर में तकनीकी समझ की कमी और कई सारी व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक वजहों ने SHG को दौड़ में पीछे किया है.   </p>
<p dir="ltr">मार्केट में पकड़ न बना पाने की बड़ी वजह SHG के बनाये सामान की सही पैकेजिंग का न होना है . इससे निपटने के लिए समूहों को अपने प्रोडक्ट का सही नाम व लोगो चुन ने की ट्रेनिंग और सब्सिडाइज़्ड रेट पर मशीन दी जानी चाहिए. साथ ही उन्हें कम दाम में उत्तम कच्चा माल तक पहुंच बढ़ाना चाहिए. फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी, बचत की समझ न होने और सही समय पर लोन न मिलने की वजह से रुकावटें आती है .  RBI  (भारतीय रिजर्व बैंक) और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पर काम करने वाली संस्थाओं को साथ मिलकर फाइनेंशियल लिटरेसी को बढ़ाने का काम करना होगा. महिलाओं को कम इंटरेस्ट रेट पर मिलने वाले माइक्रो फाइनेंस के बारे में बताना होगा. </p>
<p dir="ltr">महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देने वाली योजनाओं में सदस्यों की ट्रैनिंग का प्रावधान भी होना चाहिए ताकि वे टीम मैनेजमेंट, मार्केटिंग, और बचत को समझ सकें. जो स्वसहायता समूह बड़े पैमाने पर उत्पाद तैयार कर रहे है उन्हें तकनीकी जानकारी और मशीन चलाने की शिक्षा देनी होगी और साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों तक पहुंचाना होगा . गुणवत्ता नियंत्रण कर प्रचार प्रसार के आधुनिक तरीके समझाना होंगे. मार्केटिंग या विजिबिलिटी बढ़ाने की बात करें तो सोशल मीडिया को जानना ज़रूरी हो जाता है. </p>
<p dir="ltr">कोरोना महामारी के बाद प्रधानमंत्री द्वारा चलाये गए 'वोकल फॉर लोकल ' अभियान ने देशवासियों का ध्यान छोटे वेंडर्स की तरफ़ खींचा.  इस पहल ने SHG द्वारा बनाये गए उत्पादों की बिक्री को बढ़ाया है. SHGs के बने उत्पादों के लिए लोगों में सहानुभूति और समर्थन की भावना जगी. SHG उत्पादों की खरीद और बिक्री के लिए Amazon, Flipkart, Tata Cliq जैसे ऑनलाइन और मॉल के बड़े विक्रेताओं ने सोचना शुरू किया. इन बड़े विक्रेताओं की मदद से समूह उनके प्रांत की हदें पार कर अपना प्रोडक्ट बेच पाएंगे. मध्य प्रदेश सरकार के आजीविका मार्ट ने भी महिलाओं के प्रोडक्ट को अच्छी पहुंच देने में सहायता की.  इसे और भी प्रदेशों में लागू किया जाना चाहिए. स्वसहायता समूहों को मौसमी बदलावों और मार्केट में उतार-चढ़ाव से भी खतरा होता है. बड़े कॉर्पोरेट अपने सीएसआर एजेंडे के तहत इन SHG को समर्थन देने के लिए आगे आएं .</p>
<p dir="ltr">सरकारी व ग़ैर सरकारी प्रयासों से स्वसहायता समूह लगातार उन्नति कर देश की आर्थिक तरक्की को और आगे बढ़ा सकेंगे. सभी को साथ मिलकर एक दिशा में सोच कायम करनी होगी.  <strong id="docs-internal-guid-9f3fea2f-7fff-4a09-6b28-a944c7198424"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 15:01:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"/></item></channel></rss>