<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ उमरिया]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/umriyaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/umriyaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 18 Apr 2023 16:59:00 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[टाइगर से मिलवा रही लेडी गाइड ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/bandhavgarh-tiger-reserve</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JnQma3bzx43cRkoYH4fT.jpg"><p>&nbsp;</p>
<p><iframe width="910" height="510" style="width: 910px; height: 510px;" src="https://www.youtube.com/embed/seJBrnSDlik" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>"शुरू से ही मुझे प्रकृति लुभाती रही. हम इन जगलों में घूमते थे. प्राणी मात्र से लगाव था.हम लोग यहीं रचे-बसे.शादी के बाद संघर्ष किए. मैं कुछ अलग करना चाहती थी. आखिरकार मुझे बांधवगढ़ पार्क में गाइड बनने का मौका मिला गया. देश-विदेश के पर्यटकों के साथ अलग तरह का अनुभव और टाइगर से मिलवाना रोमांच पैदा करवाता है. मेरा जीवन ही बदल गया." कुछ इस अंदाज़ में दीपा सिंह ने अपने अनुभव बताए. लेडी गाइड को लेकर इन दिनों बांधवगढ़ टाइगर नेशनल पार्क चर्चा में है.</p>
<p>ती है. दीपा आगे बताती है कि- "हमें यहां पूरी तरह से ट्रैन किया गया . हम पर्यटकों को टाइगर के अलावा दूसरे बर्ड्स,बटरफ्लाई के साथ प्राणियों को दिखा कर जानकारी देते हैं. मुझे ख़ुशी है कि मेरे &nbsp;एकजुट महिला स्वयं सहायता के साथ गाइड &nbsp;बन कर भी आत्मनिर्भर बन सकी."</p>
<p>बांधवगढ़ का इतिहास भी रोचक है. यहां पर्यटकों को सिर्फ टाइगर या दूसरे प्राणी ही देखने को नहीं मिलते बल्कि यहां का इतिहास भी समझने का मौका मिलता है. पर्यटन प्रभारी और रेंज ऑफिसर रंजन सिंह परिहार कहतें है-" यह जंगल 1536 स्क्वेयर किमी में फैला है. साथ ही विंध्य की 32 पहाड़ियों से घिरा हुआ है यह पार्क. यहां लगभग दो हजार साल पुराना किला है. 12 पुराने तालाब के साथ राधा कृष्ण का मंदिर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. लेडी सभी गाइड को प्रेक्टिकल करवा कर ट्रेनिंग दी है." बायलोजिकल रिसर्चर तेजस करमरकर बताते हैं -" यहां कई तरह के पेड़ों की प्रजातियां हैं. इससे हर प्राणी के साथ बर्ड्स और बटरफ्लाई को अनुकूल माहौल मिलता है. यहां लगातार रिसर्च जारी रहती है." महिलाओं को प्रमोशन देने के लिए एसडीओ फॉरेस्ट सुधीर मिश्रा और फील्ड डायरेक्टर राजीव मिश्रा खुद मॉनिटरिंग कर रहें हैं. संचालक राजीव मिश्रा कहते हैं -" बांधवगढ़ पार्क बहुत पसंद किया जा रहा है. यहां बारह हजार से ज्यादा पर्यटक हर महीने आते हैं ,जिसमें विदेशी भी शामिल हैं.&nbsp;</p>
<p>उमरिया जिले में बांधवगढ़ नेशनल पार्क को लेकर जिला प्रशासन भी एलर्ट है. जिला पंचायत की सीईओ ईला तिवारी कहती हैं-" टाइगर पार्क में जिले की ही महिलाओं खासकर बैगा और गौंड &nbsp;समुदाय को मौका दिया. ख़ुशी की बात है कि क्षेत्र कि महिलाओं ने रूचि दिखाई. ये इस इलाके से पहले से ही परिचित है. अब ये सफलता पूर्वक काम कर रहीं हैं." यही नहीं ट्रेनिंग के बाद वन मंत्री विजय शाह खुद बांधवगढ़ पहुंचे और अपने हाथों से गाइड को सर्टिफिकेट बांटे. विजय शाह कहते&nbsp; हैं -" स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार के अवसर देने का यह प्रयास था. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ नई फील्ड में जगह देना खास मकसद है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 15 Apr 2023 18:58:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/bandhavgarh-tiger-reserve]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JnQma3bzx43cRkoYH4fT.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JnQma3bzx43cRkoYH4fT.jpg"/></item><item><title><![CDATA[लोगों को लाभ न मिले तो योजनाएं व्यर्थ :स्वतंत्र कुमार सिंह ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/umariya-mahua-sickle-cell-bandhavgarh-documentry</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rlzj34evA79df1YEW5LB.jpg"><p>उमरिया जिले में अच्छे कामों को सहेजने के लिए अब एक बड़ी डॉक्यूमेंट्री बनेगी. साथ ही जो महिलाएं अभी भी स्वयं सहायता समूह के कामकाज और मिलने वाले लाभ से वंचित है,उनको भी नए समूह बना कर अवसर दिए जाएंगे. सदस्य सचिव मप्र राज्य नीति आयोग एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान स्वतंत्र कुमार सिंह ने ताला बांधवगढ़ स्थित रिसोर्ट मे पंचायत सचिवों से बात कर उन्हें प्रोत्साहित किया. साथ ही जिले में जारी आकांक्षी विकासखण्ड कार्यकम की समीक्षा की.</p>
<p>आकांक्षी विकासखंड अंतर्गत स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और सहयोगी सेवाएं अधोसंरचना, ग्रामीण और शहरी कौशल विकास और रोजगार सामाजिक , एनआरएलएम द्वारा गठित स्व सहायता समूह द्वारा कई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं. स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा-"योजनाएं तब तक व्यर्थ जब तक उनका लाभ आम लोगों को नहीं मिले. बारहमासी सड़कें,अमृत सरोवर और सिकलसेल जैसी बीमारी पर काम जरुरी है." आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला ने जिले की गतिविधियों की जानकारी दी.उन्होंने बताया कि मानपुर के करौंदी टोला में महिलाओं द्वारा नर्सरी तैयार की गई,इसी तरह गुरूवाही में महुए से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.</p>
<p>सिकल सेल के लिए चल रहा डोर टू डोर सर्वे<br>कलेक्टर डॉ. कृष्ण देव त्रिपाठी ने कहा कि- "जिले में अनुसूचित जाति, जनजाति के छात्र-छात्राओं का अभियान चलाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है. सिकिल सेल के लिए डोर टू डोर सर्वे किया जा रहा है. टीबी बीमारी के लिए भी निक्षय अभियान संचालित किया जा रहा है. समीक्षा बैठक मे सीईओ जिला पंचायत इला तिवारी ने बताया- "शिक्षा की रैकिंग, नामांकन, विद्युत कनेक्शन, प्रयोगशाला, शौचालय कामों पर भी मॉनिटरिंग की जा रही है. बांधवगढ़ टाइगर नेशनल पार्क में लेडी गाइड की सेवाएं बड़ी उपलब्धि है." <br>इस मौके पर सयुंक्त कलेक्टर कमलेश पूरी,सलाहकार राज्य योजना एवं नीति आयोग अभिषेक मालवीय एवं अभिषेक भार्गव, एसडीएम मानपुर नेहा सोनी, जनपद पंचायत मानपुर के सीईओ राजेन्द्र शुक्ला,सीएम फैलो रूपल जैन सहित कई अधिकारी मौजूद थे. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 18 Apr 2023 16:59:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/umariya-mahua-sickle-cell-bandhavgarh-documentry]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rlzj34evA79df1YEW5LB.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rlzj34evA79df1YEW5LB.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मोरिंगा ने खोले आजीविका के रास्ते ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/drumstick-becomes-a-source-of-income-for-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"><p><iframe style="width: 1073px; height: 602px;" src="https://www.youtube.com/embed/jQCCWkqSFNo" width="1073" height="602" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>मजदूरी को किस्मत मान बैठी इन महिलाओं के लिए मुनगा के पौधे वरदान साबित हुए.महिलाओं की मेहनत ने ही उमरिया को मुनगा के सहारे नई पहचान दी. कूड़े-कचरे के ढेर में उगने वाला  सामान्य यह पौधा और इसकी फलियां सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि दुनिया का सुपर फ़ूड बन गया.अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मुनगा,मोरिंगा,ड्रमस्टिक,सुरजना,सेंजन भी कहते हैं.उमरिया जिले के गांव करौंदी टोला के दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रैमुन कुशवाह कहती हैं- "घर की ज़मीन इतनी कम है कि सालभर मेहनत के बाद भी कोई कमाई नहीं होती थी. सुरजना  के पौधे लाए. खेत के पास फालतू पड़ी ज़मीन पर लगाए.देशी गोबर खाद डाला. सालभर में तो इन पौधों में फलियां लगी और इनकम शुरू हो गई."जिले में इस समय 80 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं.देश-दुनिया में उमरिया का मुनगा धूम मचा रहा है.आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला कहते हैं -" जिले में मुनगा की खेती का नवाचार सफल रहा. अलग-अलग स्वयं सहायता समूह की 30  दीदियों ने तीन साल की मेहनत कर हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा अस्सी हजार पौधे तैयार किए. इन्हें जिले के मानपुर ,करकैली और पाली ब्लॉक के अलग-अलग समूह के सदस्यों को दिए.40 गांव पंचायतों में लगभग तीन सौ महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है."</p>
<p>लगभग तीन साल पहले शुरू हुए मुनगा खेती के प्रयोग और उत्पादन को देख शहडोल जिले की "माइकल फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी" ने जिले से अनुबंध कर लिया. कंपनी मुनगा पेड़ की सूखी पत्तियां तक सत्तर रुपए किलो में खरीद रही है. असर यह हुआ कि आदिवासी गांव के हाट बाज़ारों में ये सूखी पत्तियां अस्सी रुपए किलो तक बिकने लगीं.मुनगा के फल और पेड़ की पत्तियों के साथ छाल तक बहुत उपयोगी है. न्यूटीशिनिस्ट मेघा शर्मा ने बताया -"मोरिंगा या ड्रमस्टिक प्रोटीन,आयरन और मैग्नीशियम के साथ ही विटामिन बी,सी और ए से भरपूर है.वहीं इसकी पत्तियों का पाउडर मल्टीविटामिन सप्लीमेंट तो होता ही है साथ ही ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है." उन्होंने आगे बताया - "इसके पेड़ का हर हिस्सा खाने लायक और फायदेमंद है. सदियों से भारत में खाया जाने वाला मोरिंग को आज पूरी दुनिया सुपरफूड मानती है , यहां तक कि अविकसित देशों में भी यह प्रोटीन के साथ ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी दूर करने वाला एक अच्छा विकल्प है."  </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 06 Apr 2023 16:43:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/drumstick-becomes-a-source-of-income-for-shg-women]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[मोरिंगा ने किया मालामाल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/moringa-is-the-superfood-of-the-world</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"><p>कभी वीरान और बंजर पड़ी रहने वाली ज़मीन पर हरियाली छाई हुई है. कभी खेतों की मेढ़ तो कभी कूड़े के ढेर में जिन्हें हम हमेशा नज़र अंदाज़ करते आए,वही मुनगा के पौधे यहां लहलहा रहे हैं. यह नज़ारा देख सकते हैं उमरिया जिले के कई गांव में. यही पौधे कई महिलाओं की तक़दीर बन गए. मजदूरी को किस्मत मान बैठी इन महिलाओं के लिए मुनगा के पौधे वरदान साबित हुए.&nbsp;</p><p>महिलाओं की मेहनत ने ही उमरिया को मुनगा के सहारे नई पहचान दी. कूड़े-कचरे के ढेर में उगने वाला &nbsp;सामान्य यह पौधा और इसकी फलियां सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि दुनिया का सुपर फ़ूड बन गया.अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मुनगा,मोरिंगा,ड्रमस्टिक,सुरजना,सेंजन भी कहते हैं.</p><blockquote><p>उमरिया जिले के गांव करौंदी टोला के दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रैमुन कुशवाह कहती हैं- "घर की ज़मीन इतनी कम है कि सालभर मेहनत के बाद भी कोई कमाई नहीं होती थी. सुरजना &nbsp;के पौधे लाए. खेत के पास फालतू पड़ी ज़मीन पर लगाए.देशी गोबर खाद डाला. सालभर में तो इन पौधों में फलियां लगी और इनकम शुरू हो गई."</p></blockquote><p>इसी समूह की सचिव पुष्पा कहती हैं -" इस सुरजना &nbsp;ने हमारी ज़िंदगी बदल दी. मजदूरी की बजाए हमने इन पौधों को बच्चों की तरह पाला. और अब ये बिना काम की जमीन सोना बन गई. हम पत्तियां तक 70 रुपए किलो तक बेच रहे हैं."इस समूह में पंद्रह दीदियां सदस्य हैं जिनमें पांच दीदी सुरजना की खेती कर कमाई कर रहीं हैं. इनमें सुमित्रा ,मीरा ,निशा कुशवाह भी हैं जो मुनगा की खेती कर रहीं हैं.&nbsp;</p><p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/W3qvsihCQ7L2Q2WwHdJX.jpg" alt="moringa" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/W3qvsihCQ7L2Q2WwHdJX.jpg"></p><p><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p><p>जिले में इस समय 80 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं.देश-दुनिया में उमरिया का मुनगा धूम मचा रहा है.आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला कहते हैं -" जिले में मुनगा की खेती का नवाचार सफल रहा. अलग-अलग स्वयं सहायता समूह की 30 &nbsp;दीदियों ने तीन साल की मेहनत कर हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा अस्सी हजार पौधे तैयार किए. इन्हें जिले के मानपुर ,करकैली और पाली ब्लॉक के अलग-अलग समूह के सदस्यों को दिए.40 गांव पंचायतों में लगभग तीन सौ महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है."</p><p>लगभग तीन साल पहले शुरू हुए मुनगा खेती के प्रयोग और उत्पादन को देख शहडोल जिले की "माइकल फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी" ने जिले से अनुबंध कर लिया. कंपनी मुनगा पेड़ की सूखी पत्तियां तक सत्तर रुपए किलो में खरीद रही है. असर यह हुआ कि आदिवासी गांव के हाट बाज़ारों में ये सूखी पत्तियां अस्सी रुपए किलो तक बिकने लगीं.</p><p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jbWXKOTr2ZxSCOwXJPe4.jpg" alt="Moringa" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jbWXKOTr2ZxSCOwXJPe4.jpg"></p><p><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p><blockquote><p>&nbsp;डीपीएम प्रमोद आगे बताते हैं - इस मुनगा मॉडल को देखने डिंडौरी,कटनी शहडोल आदि जिलों से भी देखने आ रहें हैं. प्रोड्यूसर कंपनी को ही सदस्यों ने अब तक 34 लाख रुपए की मुनगा सूखी पत्तियां बेच चुकीं हैं. खास बात यह है कि नर्सरी में लगाए गए पौधों को किस्म की इंडो -जर्मन बेस है,जिसकी खासियत एक साल में ही पौधों में फली आने लगती हैं."</p></blockquote><p>मुनगा के फल और पेड़ की पत्तियों के साथ छाल तक बहुत उपयोगी है. न्यूटीशिनिस्ट मेघा शर्मा ने बताया -"मोरिंगा या ड्रमस्टिक प्रोटीन,आयरन और मैग्नीशियम के साथ ही विटामिन बी,सी और ए से भरपूर है.वहीं इसकी पत्तियों का पाउडर मल्टीविटामिन सप्लीमेंट तो होता ही है साथ ही ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है." उन्होंने आगे बताया - "इसके पेड़ का हर हिस्सा खाने लायक और फायदेमंद है. सदियों से भारत में खाया जाने वाला मोरिंग को आज पूरी दुनिया सुपरफूड मानती है, यहां तक कि अविकसित देशों में भी यह प्रोटीन के साथ ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी दूर करने वाला एक अच्छा विकल्प है." &nbsp;</p><blockquote><p>जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ईला तिवारी कहती हैं -"आदिवासी की मेहनत को सही रास्ता मिल गया. हमें ख़ुशी है कि मुनगा जैसे पौष्टिक पौधे की खेती का दोहरा फल मिल रहा है. यहां की समूह सदस्य महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो रहीं हैं. मुनगा प्लांटेशन अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा."&nbsp;</p></blockquote>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">उमा</dc:creator><pubDate>Thu, 06 Apr 2023 13:05:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/moringa-is-the-superfood-of-the-world]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[लंदन को महकाएगा उमरिया का महुआ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/london-to-make-chawanprash-from-imported-mahua</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RpAjqbGlf75tLwJ4Nybu.jpg"><p>जनजातीय समाज का जंगल और महुआ से बड़ा पुराना रिश्ता रहा है. महुआ के फूलों का नाम सुनते ही हमारे ज़हन में शराब बनाने वाले आदिवासियों का चित्र घूम जाता है. पर अब वक्त आ गया है इस पिक्चर को बदलने का .क्योंकि मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में मिलने वाले महुए के पेड़ और फूलों से लंदन महकेगा. इसके लिए उमरिया जिला प्रशासन और लंदन की एक कंपनी के साथ करार हुआ है. लंदन भेजने के लिए इन महुआ के फूलों से शराब नहीं बल्कि अच्छी सेहत के लिए च्यवनप्राश बनाया जाएग.  इस सार्थक प्रयास से जहां फूलों का बेहतर उपयोग होगा वहीं यहां के आदिवासी मुनाफा कमा कर आर्थिक रूप से ताकवर होंगे. </p>
<p>उमरिया के अनुविभागीय अधिकारी वन विभाग कुलदीप त्रिपाठी ने बताया - "कई दिनों से यह बातचीत लंदन कि कंपनी से चल रही थी. उनकी कई शर्तें थीं. महुआ कि क्वालिटी और स्वच्छता के मापदंड पर यह सब करना था ,जो विभाग ने  किए". उन्होंने आगे बताया - " जिले के पांच गांव चिन्हित किए गए जिसमें मगरधरा,अचला ,करकेली आदि शामिल है". वन विभाग ने क़रीब सात सौ आदिवासी चिन्हित किए. ये जंगल के लगभग एक हजार पेड़ों से महुआ के फूल बीन कर विभाग के माध्यम से पैकेजिंग करेंगे.इन फूलों को सोलर पैनल द्वारा सुखाया जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए लाभान्वित होने वाले आदिवासी लोगों को ट्रेनिंग दी गई. </p>
<p>जिले के डीएफओ ( वन मंडलाधिकारी ) मोहित सूद ने बताया - " हमारे यहां महुआ खरीदी का समर्थन मूल्य 33 रुपए किलो है,जबकि लन्दन की यह फारेस्ट कंपनी 110 रुपए किलो लेगी. इसका लाभ सीधे आदिवासी समूह को मिलेगा. प्रशासन ने शर्तों के अनुसार साफ और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के लिए सर्टिफिकेट लेने के लिए भोपाल भी आवेदन कर दिया है. अब ये आदिवासी महुआ के फूलों को पेड़ से नीचे नहीं गिरने देंगे बल्कि हरी नेट जाली  लगा  कर इकट्ठा करेंगे,जिससे ये फूल मिट्टी में ख़राब नहीं होंगे.".  </p>
<p>लंदन कंपनी से जुड़े अनिल पटेल ने बताया - " यह कंपनी शुरू में ही 100 टन महुआ खरीदेगी.उनके साथ वैज्ञानिक सैम रजिया भी मौजूद थे ".      </p>
<p>वन मंत्री विजय शाह ने कहा - "महुआ एकत्रण और बेचने को लेकर आदिवासियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. इससे जहां आदिवासियों की आर्थिक  स्थिति सुधरेगी वहीं जंगलों को बचाया जा सकेगा."</p>
<p>इस उपलब्धि पर कलेक्टर डॉ केडी त्रिपाठी ने कहा-"इस जिले और आसपास  के जंगलों में डेढ़ हजार से ज्यादा महुए के पेड़ हैं. जनजाति समुदाय को कैसे इसका लाभ और अधिक मिले ,इसका प्रयास किया जा रहा था. लगातार संपर्क ट्रेनिंग से आदिवासी लोगों में उत्साह जागा। परिणाम यह रहे कि सरकार की मंशा सफल हुई. हम महुआ एक्सपोर्ट कर पाएंगे.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 20 Mar 2023 14:14:19 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/london-to-make-chawanprash-from-imported-mahua]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RpAjqbGlf75tLwJ4Nybu.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RpAjqbGlf75tLwJ4Nybu.jpg"/></item></channel></rss>