<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ ऊर्जा देवी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/uurjaa-devii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/uurjaa-devii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 15 Jul 2023 16:32:15 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[उज्जवला योजना सवारेगी ग्रामीण महिलाओं की ज़िन्दगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shgs-bringing-change-into-women-lives</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png"><p><span>ऐसा कहाँ जाता है ' चेंज इस द ओनली कॉन्स्टेंट ', किसी भी चेंज या बदलाव को लाने के लिए कोई एजेंट या भूमिका की ज़रुरत होती है. इस तरह महिलाओं की ज़िन्दगी में बदलाव तभी संभव है जब महिलाएं इस बदलाव के लिए खुद कदम उठाये. ऐसी ही एक कहानी है <strong>देवास (Dewas) जिले के गांव बागली (Bagli) की, जहां स्वयं सहायता समूह (Swayam Sahayata Samuh) की महिलाएं खुद के साथ गांव में भी बदलाव </strong>ला रही है। </span></p>
<p><span>सुशीला दीदी के नेतृत्व में यहां <strong>स्वयं सहायता समूह (Self Help Group, SHG) </strong>2021 में शुरू हुआ, जिसमे 12 महिलाएं काम कर रही है. उन्हीं में से एक महिला है सीमा बड़ोदिया, जिनकी ज़िन्दगी में समूह से जुड़ने के बाद बहुत से बदलाव आये. पहले वह ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, पर समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई की. सीमा जहाँ पहले घूंघट में रहकर सिर्फ घर के काम संभालती थी और उन्हें घर से बाहर निकलने तक की आज़ादी तक नहीं थी. आज वही घर के साथ - साथ समूह के सारे काम बखूबी संभाल रही है. समूह में जुड़ने के बाद सीमा की ज़िन्दगी में काफी बदलाव हुआ पहले उन्हें परिवार से सहयोग नहीं मिल रहा था आज उन्हें वही परिवार हर काम के लिए सपोर्ट कर रहा है.  </span></p>
<h2><span><strong>प्रधान मंत्री मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/dhoni-and-sakshi-visited-tribal-shg-handicraft-stalls">PM Modi</a>)</strong> द्वारा शुरू की गई <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sabka-saath-sabka-vikas-leading-india-on-the-path-of-progress">उज्ज्वला गैस योजना</a></strong></span></h2>
<p><span>सरकार महिलाओं की ज़िन्दगी में बदलाव लाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए बहुत सी योजनाएं ला रही है. उन्ही में से <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women">ऊर्जा देवी</a> (Urja Devi)</strong> और<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women"><strong> बैंक सखी</strong> </a><strong> (Bank Sakhi)</strong> जैसी योजनाएं है. महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने के लिए <strong>प्रधान मंत्री मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/dhoni-and-sakshi-visited-tribal-shg-handicraft-stalls">PM Modi</a>)</strong> द्वारा शुरू की गई <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sabka-saath-sabka-vikas-leading-india-on-the-path-of-progress">उज्ज्वला गैस योजना</a> (Ujjwala Gas Yojana)</strong>, ऊर्जा देवी के नाम से शुरू हुई यह योजना स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के जीवन में ख़ुशी की लहर बन कर आयी है. समूह के माध्यम से अब लोगों को गांव में ही सही दाम और सही समय पर <strong>गैस सिलिंडर</strong> मिल जाते है. जिससे अब महिलाओं गाँव से बाहर जाकर पेड़ नहीं काटने पड़ते. इससे पर्यावरण की भी रक्षा होती है और साथ ही महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.</span></p>
<p><span> इसी योजना के तहत सीमा बडोडिया को चुना गया. पहले उन्हें एक महीने में <strong>सात सिलिंडर</strong> उपलब्ध कराये जाते थे. इस तरह उन्हें हर सिलेंडर पर कमीशन मिलता था. आगे बढ़ते हुए आज सीमा एक हफ्ते में चालीस सिलेंडर की सप्लाई अपने गाँव में कर रही है. सीमा, अब ऊर्जा देवी के साथ साथ बैंक सखी का भी है. <strong>बैंक सखी</strong> एक ऐसा कार्यक्रम है जहां<strong> ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो बैंक नहीं जा पाते है या बैंक की सुविधा उन तक नहीं पहुँचती वहाँ उन्हें घर पर ही छोटे बैंक ट्रांसेक्शन हो जाते है.</strong> आज इस समूह की महिलाएं अपने अलग - अलग समूह बना रही है और इस तरह गांव के विकास के लिए काम कर रही है . इस तरह के उदहारण छोटे बदलाव के साथ समाज और देश में महिला भागीदारी को बढ़ा रहे है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 15 Jul 2023 16:32:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shgs-bringing-change-into-women-lives]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png"/></item><item><title><![CDATA[फाइनेंसियल लिट्रेसी से महिलाओं को अवसर की शुरुआत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"><p><strong>जेंडर इक्वालिटी (Gender Equality), जेंडर पेरिटी (Gender Parity), जेंडर एम्पावरमेंट (Gender Empowerment) </strong>कि बातें तो सभी करते है पर इनके इम्प्लीमेंटेशन में कहीं ना कहीं कमी रह ही जाती हैं. इस तरह<strong> जेंडर फाइनेंस गैप (Gender Finance Gap) </strong>भी विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन उस पर काम कितना हो रहा है, यह सोचने का विषय है.<strong> महिलाएं जहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science and Technology), मेडिसिन (Medicine) </strong>जैसे क्षेत्रों में आगे तो बढ़ रही, लेकिन कामयाबी के यह रास्ते आज भी उनके लिए आसान नहीं है, जहां कई सेक्टर्स में समान अवसर नहीं मिलते तो अधिकतर क्षेत्रों में समान वेतन भी उन्हें नहीं मिल रहे.</p>
<p>जेंडर डायनामिक्स जहां समय के साथ थोड़े बहुत बदलते रहते हैं वही फाइनेंशियल संस्थानों (Financial Institutions) में जेंडर इक्वालिटी कैटेलिस्ट (Catalyst) या बैरोमीटर (Barometer) अभी भी निचले स्तर पर है. <strong>यह जेंडर बेस्ड फाइनेंस गैप तभी खत्म हो सकता हैं जब महिलाओं को वित्तीय सेवाएं (Financial Services) जैसे बचत, लोन (Loan), बिमा (Insurance),और वित्तीय संस्थानों के बारे में पूरा ज्ञान हो और उनकी भागीदारी इनमें बढ़ाई जाए .  </strong><br><br>फाइनेंशियल संस्थानों में महिलाओं के बिज़नेस जो की मुख्यतः SME (स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज) होते है उन्हें बिज़नेस की कम समझ और स्मॉल बिज़नेस नेटवर्क होने के कारण, वह फाइनेंशियल सेवाओं का  पूरा फायदा नहीं उठा पाती.  इसी वजह से वह अपने बिज़नेस को आगे नहीं ले जा पा रही है. महिला उघमों को पुरुषों के मुकाबले बैंक खाते (Bank Account) रखने और फाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स से लोन लेने में कम दरों में ब्याज की सुविधा प्रदान की जाती है लेकिन महिलाओं के पास पर्याप्त फाइनेंशियल ज्ञान ना होने के कारण वह इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाती. यही वजह है कि महिला उद्यमियों को आज भी वर्किंग कैपिटल (Working Capital) का पूरा उपयोग और बिज़नेस लोन (Business Loan) लेने जैसे कामों में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. फाइनेंस के मसलों से दूरी धीरे धीरे डर और हिचक के रूप में सामने आती है, जिस वजह से फॉर्मल फैनेसियल इंस्टीटूशन्स (Formal Financial Institutions)तक उनकी पहुँच कम होती है.<br><br>महिलाओं के बिज़नेस में निवेश करने के पॉजिटिव प्रभाव हो सकते हैं, जैसे महिलाओं के लिए नई नौकरियों के रास्ते खुलेंगे, जेंडर इनक्वॉलिटी कम होगी और महिलाओं का ओवरऑल डेवलॅपमेंट होगा.<strong> भारत में सरकार ने  महिला उघमों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को CLF लोन लेने की सुविधा  प्रदान करती है, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे बड़ा SHG बैंक लिंकेज मॉडल बन गया है, जिसमें 11  मिलियन से अधिक SHG बैंकिंग सेवाओं से जुड़े है. लोन की सुविधा मिलने से स्वयं सहायता समूहो में अलग अलग कार्य हो रहे हैं जैसे सिलाई, मशरुम कि खेती, अगरत्ती बनाना आदि. </strong>समूह की महिलाएं जो घर से बाहर भी नहीं निकलती थी आज वही महिलाएं बैंक सखी (Bank Sakhi), ऊर्जा देवी (Urja Devi) जैसे कार्य संभाल रही हैं. लोन की मदद से आज समूह की महिलाओं  ने अपने ही घर में सिलाई सेंटर शुरू कर लिया हैं. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आ रहा हैं.    <span class="im"><br><br>जेंडर फाइनेंस गैप के खत्म करने के लिए कई  उपाय किये जा सकते है जैसे महिला स्वामित्य वाले SME (Small Medium Enterprises) की जरूरतों को पूरा करने वाले<strong> इनोवेटिव सेवाओं और उत्पादों को ला कर, सही प्रशिक्षण देकर, वरिष्ठ बैंकिंग भूमिकाओं और बोर्ड में महिलाओं को शामिल कर , व्यवसाय में महिलाओं के लिए एक सहायक नेटवर्क बनाने के लिए फाइनेंसियल तथा नॉन फाइनेंसियल संस्थानों के साथ सहयोग कर. </strong>इन उपायों  को लागु करके हम G20 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्था महिलाओं के जेंडर एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाकर और अधिक इंक्लूसिव इकोनॉमिक विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है.</span></p>
<div class="yj6qo ajU"></div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:42:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"/></item></channel></rss>