<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ विज्ञान]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/vijnyaan</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/vijnyaan" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 07 Apr 2023 14:23:36 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[ओरा इनफिनी के साथ जगमगाया देहरादून ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ora-infini-trained-women-to-become-led-bulb-manufacturers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YJVPwqAe4YxIa2bCBwG2.jpg"><p>कहा जाता है कि बेटी घर की रोशनी होती है. अगर घर में बेटी ना हो तो सूना लगता है जैसे घर कि रौनक चली गयी हो. ये ही महिलाएं जब काम करतीं है तो खुद का और परिवार के नाम को भी रोशन कर देतीं है. देहरादून की कमलप्रीत कौर ने कुछ ऐसा ही किया जिससे उन्होंने अपने साथ 3500 दिहाड़ी मजदूर या खेतिहर महिलाओं को आर्थिक रूप से आज़ाद बना दिया. 'ओरा इनफिनी' नाम की कंपनी अब एलईडी बल्ब बनाकर और बेचकर स्थायी आजीविका अर्जित करने में सक्षम हैं.</p>
<p>कमलप्रीत कॉमर्स विषय से ग्रजुएटेड है, जिन्हें तकनीकी कौशल का कोई अनुभव नहीं था. इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट से अपना MBA पूरा करने के बाद उन्होंने इसी फील्ड में 2007-08 में नौकरी की. उस वक़्त इंडस्ट्रियल एरिया में ज़्यादा महिलाएं नौकरी नहीं करतीं थीं. कमलप्रीत ने मन में तभी ठान लिया था कि वो कुछ तो ऐसा करेंगी जिससे लोगो का यह भ्रम टूट जाए कि लड़कियां सिर्फ़ कपड़े, शिल्प और खाना पकाने के फील्ड में ही नौकरी कर सकतीं है. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/K1jjCXmvPXHg9XkykKYu.jpg" alt="ora infini"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Kamalpreet Kaur (Image Credits: Insight success)</em></span></p>
<blockquote>
<p><em>उनका यह सपना 2015 में साकार भी हुआ. महिला-केंद्रित डोमेन के बजाय, उन्होंने पुरुष-प्रधान उद्योग में कदम रखने का फैसला किया और इलेक्ट्रिकल्स में अपना व्यवसाय शुरू किया. वे कहतीं है - "महिलाएं हमेशा कपड़े, शिल्प और खाना पकाने में शामिल होती हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है कि हम कुछ और नहीं कर सकते. हमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी अपनाने का मौका देने की जरूरत है; एलईडी इसमें एक प्रवेश मात्र है. इसी सोच के साथ मैंने एलईडी लाइट का बिजनेस शुरू किया, जिसके लिए करीब 3,500 महिलाओं को ट्रेनिंग दी. हम स्वयं सहायता समूहों और जेलों में महिला कैदियों के साथ भी काम कर रहे हैं." वे आगे कहती हैं - ''जब सबने मिलकर काम करना शुरू किया तो हम आगे बढ़ने लगे.”</em></p>
</blockquote>
<p>देहरादून में 'एलईडी बल्ब प्रशिक्षण पहल' इस बात का एक चमकदार उदाहरण है. SHG की महिलाएं इससे एक बहुत बड़ी सीख ले सकती है। वो चाहे तो इस तरीके के प्रशिक्षण अपनी समूह की महिलाओं को भी दिलवा सकती है जिससे उनके लिए एक नई दिशा में काम करने की उम्मीद जागेगी। तकनिकी क्षेत्र में महिलाओं के लिए काम की कोई कमी नहीं है। अभी भी यह फील्ड में महिलाओं की एंट्री नहीं हुई। महिलाएं, चाहे विज्ञान हो या रसोई का ज्ञान, अगर ठान ही ले तो सब कुछ कर सकतीं है. देहरादून के इस महिला समूह ने यह बात साबित कर दी. बस मौका मिलने का इंतज़ार रहता है महिलाओं को. वब मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो, हासिल करने का ठान ले तो कर के ही मानती है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 07 Apr 2023 14:23:36 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ora-infini-trained-women-to-become-led-bulb-manufacturers]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YJVPwqAe4YxIa2bCBwG2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YJVPwqAe4YxIa2bCBwG2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला का ज्ञान है विज्ञान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/the-contributions-of-shg-women-in-the-field-of-science</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6o3gxqG2RdSKzUU1h6YQ.jpeg"><p>आपके हाथ में मोबाइल, रसोई में मिक्सर या फ्रिज,नीचे खड़ी कार,याआपकी कलाई पे बंधी घड़ी में क्या समानता है ? ये सभी चीज़ें विज्ञान या साइंस की देन है. ये वही साइंस है जिसने हमारे बीच की दूरी को कम किया और जीवन को आसान बनाया. 28 फरवरी को साइंस डे मनाया जाता हैऔर दुनिया का हर ज्ञान महिला से ही पनपा है. तो साइंस और महिला का भी निरन्तता का रिश्ता है. वैसे 28 फरवरी 1928 को भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने 'रमन प्रभाव' की खोज की इसीलिए इस दिन को नेशनल साइंस डे के रूप में मनाया जाता है. रमन इफ़ेक्ट के लिए ही उन्हें साल 1930 में फिज़िक्स में नोबेल मिला. &nbsp;</p><p>रमन अपने समय के महान साइंटिस्ट ज़रूर रहे लेकिन इन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस (IISc ) में कमला सोहनी जैसी महिलाओं के दाखिलों में उनकी लड़की होने की वजह से अड़चने पैदा की. इस सोच को कुछ हद तक बदलने के लिए आगे जाकर अदिति पंत, जानकी अम्मल, बी विजयलक्ष्मी, असीमा चटर्जी, इरावती कर्वे जैसी कितनी महिला साइंटिस्ट ने देश दुनिया में नाम कमाया. इसी काम को स्वसहायता समूह गांवों तक लेकर गए. जी हाँ, SHG की महिलाओं के साइंस के कुछ हिस्सों को भारत के ग्रामीण परिवेश तक पहुंचने में मदद की. ख़ासतौर पर वहां जहां अपने कामों को आसान बनाना था, वहां साइंटिफिक अप्रोच कारगर तरीके से लाई गयी.</p><p>SHG आमतौर पर माइक्रोफाइनेंस और महिलाओ के रोज़गार से जुड़े हैं,पर भारत में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. भारत के कई ग्रामीण इलाकों में बिजली की पहुंच सीमित है. SHG महिलाएं बिजली के पारंपरिक स्रोतों के विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं. बिहार के अजीता महिला स्वसहायता समूह ने अपने गांव में सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइटें लगाई, जिससे महिलाएं रात में कही भी आने-जाने में सुरक्षित महसूस करती हैं.</p><p>स्वसहायता समूह की महिलाएं सरकार के साथ मिलकर अपने समुदायों में जल संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा दे रही हैं. महाराष्ट्र में महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP) ने महिलाओं को वर्षा जल संचयन और वाटरशेड प्रबंधन जैसी जल संरक्षण तकनीकों में प्रशिक्षित किया.नतीजतन, स्वसहायता समूह अपने गांव में पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार करवा रहा है.कई SHG महिलाओं को पारंपरिक चिकित्सा और उपचार पद्धतियों की गहरी समझ है. आंध्र प्रदेश के SHG संजीवनी महिला संघ ने इन पारंपरिक प्रथाओं को दस्तावेज़ कर उन्हें बचाया और मॉडर्न चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकृत भी किया. समूह ने एक औषधीय गार्डन बनाया और अपने समुदाय में प्रशिक्षित पारंपरिक चिकित्सकों का एक नेटवर्क तैयार किया.</p><p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Dj3a3ngMbsAQIijM5tUq.jpeg" alt="Women Scientist National Science Day " data-mce-src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Dj3a3ngMbsAQIijM5tUq.jpeg"></p><p>SHG महिलाएं अपने समुदायों में, विशेषकर युवा लड़कियों के बीच विज्ञान शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने में शामिल रही हैं. उत्तर प्रदेश में किशोरी विकास स्वसहायता समूह ने लड़कियों के लिए विज्ञान क्लब और विज्ञान कैंप स्थापित किए. बच्चों के लिए विज्ञान की किताबों और सामग्रियों के साथ एक पुस्तकालय भी बनाया. SHG महिलाओं ने विज्ञान शिक्षा की ज़रुरत को पहचाना और आज वे अपने बच्चों को विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरित कर रही हैं. &nbsp;&nbsp;</p><p>कृषि सखी बन स्वसहायता समूह की महिलाओं ने भारत में खेती को साइंस से जोड़ा. ट्रेनिंग लेकर और नई तकनीक सीखकर स्थानीय फसलों और वहां के जीवों और पौधों का संरक्षण किया जिससे किसानों की आजीविका में सुधार आया. महाराष्ट्र के SHG ने नीम और गोमूत्र का उपयोग करके एक पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) समाधान निकला, जो कीट और रोगों से बचाव करने में उपयोगी हैं. &nbsp;इस तरीके को आसपास के किसानों ने भी अपनाया. स्वसहायता समूहों ने सोशल मीडिया, नेटवर्किंग, और ई-कॉमर्स सीख कर अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग बखूबी की. नई तकनीक से पैकेजिंग और लेबलिंग कर बाज़ार में ख़ूब मुनाफ़ा कमाया. नए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर कंप्यूटर पर हिसाब किताब सीखा.&nbsp;</p><p>स्वसहायता समूहों को यदि विज्ञान और नई तकनीक पर ट्रेनिंग मिले तो उनके आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा, बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट व रिन्यूएबल ऊर्जा का इस्तेमाल हो सकेगा. कहते है न किसी भी समस्या का हल एक महिला से बेहतर कोई नहीं निकाल सकता. रविवार का मानना हैं कि SHG महिलाओं को बढ़ावा देकर विज्ञान के क्षेत्र में उनके अनुभवन को इस्तेमाल कर हम ग्रामीण इलाकों में विज्ञान की क्रांति ला सकते है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 01 Mar 2023 15:20:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/the-contributions-of-shg-women-in-the-field-of-science]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6o3gxqG2RdSKzUU1h6YQ.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6o3gxqG2RdSKzUU1h6YQ.jpeg"/></item></channel></rss>