<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ विश्व बैंक]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/vishv-baink</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/vishv-baink" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Workspace में समान अधिकारों के लिए महिलाओं की लड़ाई आज भी जारी! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"><p style="text-align: justify;">कल्पना कीजिए एक ऐसी working space, जहां हर कामकाजी महिला को उसकी योग्यता और क्षमता के अनुसार समान अवसर और सम्मान मिले; जहां वेतन में कोई भेदभाव ना हो और हर महिला को उसके काम के लिए उचित मेहनताना मिले. दुर्भाग्यवश, वास्तविकता इस कल्पना से काफी दूर है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में, महिलाओं को workplace पर समान अधिकार प्राप्त करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. इनमें वेतन का अंतर, working hours में असमानता, लीडरशिप रोल्स से दूरी, कानूनी अधिकारों के प्रति गैर ज़िम्मेदारी और करियर में उन्नति के अवसरों में भेदभाव मुख्या रूप से देखने को मिलते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/taliban-rule-ending-the-existence-of-afghan-women-by-snatching-their-basic-human-rights-and-now-reintroducing-its-capital-punishment-of-stoning-women-to-death-in-cases-of-adultery-as-per-the-shariya-laws-4469485">अफ़गानी महिलाओं के अस्तित्व को ख़त्म करता 'तालिबान शासन'!</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">समान अधिकारों की कमी एक सामाजिक समस्या</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों (Equal Work Rights) की स्थिति आज भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है. यह विषय सिर्फ कानूनी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या के रूप में भी उभरता है. विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, दुनिया की सभी राष्ट्रों में, यहां तक कि सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में भी, एक महत्वपूर्ण लैंगिक अंतर (gender gap) मौजूद है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं को पुरुषों के समान रोज़गार के अवसर प्राप्त ही नहीं होते हैं और उनके पास कानूनी अधिकार भी कम होते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, केवल कानूनी उपायों से इस समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सकता. सामाजिक मान्यताओं और रूढ़िवाद के कारण, महिलाओं को अक्सर उच्च पदों या बेहतर वेतन वाली नौकरियों में कम ही प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है. इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियों और जॉब की मांगों के बीच संतुलन बनाने में भी महिलाएं अधिक दबाव का सामना करना पड़ता हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">इस संघर्ष के हैं कई कारण</h2>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं द्वारा अपने हक़ के लिए लड़ाई आज भी जारी हैं जिसके लिए कई पहलू ज़िम्मेदार हैं.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सामाजिक मान्यताएं और लिंग भेदभाव:</strong> भारतीय समाज में प्रचलित लिंग आधारित भूमिकाएं महिलाओं को परंपरागत रूप से निचले स्थान पर रखती हैं. इसके कारण महिलाओं को उच्च पदों पर पहुंचने और उनके व्यावसायिक कौशल को मान्यता देने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>वेतन में असमानता:</strong> महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है, यहां तक कि जब वे समान काम करती हैं. इस वेतन अंतर का मुख्य कारण लिंग आधारित रूढ़िवाद सोच है. कई बार तो इस बात को यह कहकर ताल दिया जाता है कि महिलाओं को कमाने की ख़ास ज़रूरत नहीं होती. और अगर कहीं महिला एक पुरुष से ज़्यादा कमा लेती है तो वह बात पुरुष के "ego" को ठेस पहुंचाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कार्य और घर की जिम्मेदारियों का दोहरा बोझ:</strong> महिलाओं से अक्सर घरेलू जिम्मेदारियों और ऑफिस के कामों दोनों की अपेक्षा की जाती है. इससे उनके करियर के विकास में बाधा आती है. समाज को यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अगर कोई महिला विवाहित है और उसका कोई बच्चा भी है, तो यह पति और पत्नी दोनों की ज़िम्मेदारी होती है कि वह मिलकर चीज़ें संभालें ना कि किसी एक पर सारा बोझ झोंक दिया जाए.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पेशेवर विकास के अवसरों में भेदभाव:</strong> महिलाओं को अक्सर प्रमोशन और व्यावसायिक विकास के समान अवसर नहीं दिए जाते हैं, जो उन्हें पुरुष सहकर्मियों के समान पदों तक पहुंचने से रोकता है. इससे होता यह है कि पुरुषों के लिए कभी किसी महिला का आगे आना एक चौकाने वाली बात बन जाती है और वहां शायद उनकी ईर्ष्या बढ़ जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कानूनी और नीतिगत समर्थन की कमी:</strong> भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून मौजूद ज़रूर हैं, लेकिन इन कानूनों का पालन अक्सर कमजोर पड़ जाता है. इससे महिलाओं को उनके अधिकारों का पूरा लाभ उठाने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल पर असुरक्षा:</strong> महिलाओं को कार्यस्थल पर अक्सर यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो उनकी नौकरी में बने रहने और प्रोफेशनल तरक्की की संभावनाओं को प्रभावित करता है. आज इससे निपटने के लिए कई क़ानून और कदम उठाये जा रहे हैं परन्तु क्या यह कदम केवल एक कागज़ पर लिखे शब्दों से आगे बढ़ पाएं हैं?</li>
</ul>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/a-14-year-old-girl-in-mumbai-commits-suicide-because-of-the-stress-of-her-first-period-4440778">Periods के stress के वजह से की आत्महत्या...</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाओं को समान अवसर ना मिलना है चिंता का विषय</h2>
<p>World Economic Forum के 2023 के Global Gender Gap Index (GGG) में भारत को 146 राष्ट्रों में से 127वें स्थान पर रखा गया है. World Inequality Report 2022 दिखाती है कि भारत में पुरुषों के पास श्रम आय का 82% हिस्सा है, जबकि महिलाओं की आय केवल 18% है.</p>
<p>ये आंकड़े भारत में लिंग आधारित असमानताओं (gender based differences) की गहराई को उजागर करते हैं. इस प्रकार के अंतराल से महिलाओं के समाज में और अधिक सक्रिय और सफल होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं. इसके निवारण के लिए, नीति निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि लिंग आधारित असमानताओं को कम किया जा सके और महिलाओं को उनके योग्य स्थान दिलाया जा सके. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, और कानूनी अधिकारों में सुधार, साथ ही साथ सामाजिक जागरूकता और बदलाव आवश्यक हैं.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/shg-got-work-opportunity-women-tried-to-find-shortcuts-in-seoni-3828653">Seoni SHG को रोजगार का मौका दिया, ढूंढने लगी शॉर्टकट</a></p>
<p>भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों की स्थिति विश्व बैंक (World Bank) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों में बार-बार चिंताजनक रूप से सामने आती है. भारत सरकार ने भी महिलाओं के कार्यस्थल पर समानता सुनिश्चित करने के लिए कई कानूनी उपाय किए हैं. उदाहरण के लिए, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और इसके संशोधनों ने महिलाओं को अधिक समर्थन और सुरक्षा प्रदान की है.</p>
<p>इसी तरह, यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून, 2013 महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए लागू किया गया है. मगर आज भी यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर भेदभाव एक प्रमुख समस्या है, जो उनके आर्थिक विकास और सामाजिक समानता में बाधक है.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/these-shg-women-from-sambalpur-district-were-betrayed-by-sambalpur-municipal-corporation-not-taking-them-to-puri-parikrama-project-3647680">Puri Parikrama project में जाने से रोका SHG महिलाओं को !</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471]]></guid><category><![CDATA[शर्मिन्दा]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"/></item><item><title><![CDATA[SHG दीदियां बनी 'लखपति' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/20-percent-of-tripura-shgs-became-millionaires-cm-manik-saha-announced-it-on-the-independence-day</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XlrUBvu1fQJM9e6vuBxg.jpg"><p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>सरकार ने इस स्वतंत्रता दिवस पर महिलाओं को लखपति बनाने की बात पर बहुत ज़ोर दिया था. वे drone देने की बात की थी प्रधानमंत्री ने और इस विषय पर काम शुरू भी किया जा चुका है. महिलाएं तेज़ी से आगे बढ़ रही है. सरकार की योजनाएं लाभकारी है इसे साबित करने के लिए एक मज़बूत कड़ी बनकर यह खबर&nbsp; इस स्वतंत्रता दिवस पर देश के सामने आए है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr" class="center"><span><img alt="Tripura SHG females" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/4WSj3mZr5XnXFHP8W5i9.jpg" style="width: 500px;" class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits:The Wire</em></span></span></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>20 % महिलाएं बनी लखपति</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-took-part-in-van-bhojan-festival-in-agartala-tripura">त्रिपुरा के CM</a> ने हाल ही में यह बताया कि- "<em>राज्य ने स्वयं सहायता समूह (SHG) की 20 प्रतिशत महिलाओं, जिन्हें "दीदी" भी कहा जाता है, को करोड़पति घोषित किया है. माणिक साहा ने सशक्तिकरण के लिए अपने दृष्टिकोण को सबके सामने रखते हुए यह घोषणा की कि इस वर्ष 80 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं Self Help Groups में शामिल होने के लिए तैयार हैं.</em>"</span><b></b></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-shg-yapiri-village-organization-in-tripura-is-growing-5-types-of-maize-on-their-land">मुख्यमंत्री</a> ने आदिवासी समुदायों</strong> के जीवन में विकास को गति देने के उद्देश्य से <strong>त्रिपुरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकास और सतत सेवा वितरण परियोजना</strong> में 1,400 करोड़ रुपये के योगदान के लिए <strong>विश्व बैंक</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/digital-literacy-is-essential-for-financial-inclusion-says-womens-world-banking" rel="dofollow">World Bank</a>) को धन्यवाद् भी किया.&nbsp;</span><b></b><span>कहा जाता है कि <strong>स्वयं सहायता समूह या एसएचजी आंदोलन</strong> एक वैकल्पिक विकास रणनीति का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया शामिल है. त्रिपुरा राज्य की महिला एसएचजी को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रहा है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Tripura SHG women lakhpati" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/502x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/OFkZWIrJAOm2PwoRLL5A.jpg" style="width: 502px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr" class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Her Circle</em></span></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>4 लाख से ज़्यादा महिलाएं जुड़ेंगी SHG आंदोलन से</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>मई में एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए, <strong>सीएम साहा</strong> ने कहा था- "<em>हमारे राज्य की 4,20,066 से अधिक महिलाएं SHG आंदोलन में जुटी हैं. ये समूह राज्य भर में 1,950 VO (ग्राम संगठन) और 88 CLF (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) में बटा हैं. इन समूहों को 724.92 करोड़ रुपये का ऋण मिला है, और आप सभी को यह जानकर आश्चर्य होगा कि केवल 2.74 प्रतिशत ऋण NPA पाए गए हैं. इसका मतलब है कि सभी बाधाओं के बावजूद, जो महिलाएं अभियान में आगे हैं, वे ऋण चुका रही हैं</em>."</span><b></b></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ngo-the-nudge-foundation-in-ranchi-jharkhand-making-women-empowered">त्रिपुरा में सरकार</a> की तरफ से उठाए गए कदम महिलाओं के लिए बहुत फाएदेमंद साबित हुए है. हर प्रदेश की सरकार भी इसी कोशिश में लगी है कि वह देश को आगे बढ़ाने के काम को महिलाओं द्वारा करवाए. देश कि उन्नति तभी तय है जब हर महिला सशक्त होगी.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 29 Aug 2023 18:30:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/20-percent-of-tripura-shgs-became-millionaires-cm-manik-saha-announced-it-on-the-independence-day]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XlrUBvu1fQJM9e6vuBxg.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XlrUBvu1fQJM9e6vuBxg.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिला वित्तीय साक्षरता में कॉर्पोरेट का साथ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-and-inclusion-should-be-at-core-of-csr</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png"><p class="MsoNormal">‘<span lang="HI">जब महिलाएं अर्थव्यवस्था में भाग लेती हैं</span>,<span> </span><span lang="HI">तो सभी का लाभ होता है. जब महिलाएं शांति-निर्माण और शांति-स्थापना में भाग लेती हैं</span>,<span> </span><span lang="HI">तो दुनिया अधिक सुरक्षित होती है. और जब महिलाएं अपने देशों की राजनीति में भाग लेती हैं तो वे बदलाव ला सकती है<span> </span></span>' -<span> </span><strong><span lang="HI">हिलेरी क्लिंटन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इसी बात को आगे बढ़ाते यह कहना गलत नहीं होगा की जब महिलाएं समुदाय और सामाजिक विकास में भाग लेती है तो देश का विकास होता है. महिला सह-भागिता को बढ़ाने का मुख्य और असरकारक ज़रिया कॉर्पोरेट <strong>सोशल रेस्पोंसिबिल्टी प्रोग्राम</strong> (</span>CSR)<span> </span><span lang="HI">हो सकते है.<span> </span></span>CSR<span> </span><span lang="HI">में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता से रखने की आवश्यकता है.</span> </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">हमारे सामने ऐसे कई उदहारण है जहां <strong>महिला स्वयं सहायता समूह </strong>की मेंबर<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">जमा खाता हिसाब वगैरह सँभालते हुए आज क्लस्टर लेवल की लीडर बन चुकी है।  इस तरह<span> </span></span>Self Help Group<span> </span><span lang="HI">की महिला आज समाज में <strong>लीडरशिप रोल</strong> में आ रही है<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">जिनके पास समाज और जीवन में बदलाव लाने की क्षमता है। इस तरह वह अपने समुदायों के अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता और वित्तीय पहुंच को बढ़ावा दे रही है।<span> </span></span>SHG<span> </span><span lang="HI">से जुड़ी इन महिलाओं ने अपने परिवार और समुदाय के बेहतर भविष्य के लिए दुर्गम सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">स्वयं सहायता समूहों ने<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">धीरे-धीरे इस मिथक को तोड़ने में मदद की है कि कमाना पुरुषों का काम है. घरेलू स्तर पर महिलाएं निर्णय लेने में अधिक से अधिक शामिल हो रही है. बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय लेनदेन के मामलों में पुरुषों पर निर्भरता का स्तर भी कम हुआ है. साथ ही<span> </span></span>SHG<span> </span><span lang="HI">से जुड़ी महिलाओं ने समुदाय सामाजिक और आर्थिक मूल्यों से जोड़ने के लिए गहरी मंशा दिखाई है. सरपंच और ग्रामीण पुरुषों को बीमा और पेंशन नीतियों</span>,<span> </span><span lang="HI">बैंक में खाता खोलने</span>,<span> </span><span lang="HI">अपने बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी योजनाओं की सलाह लेने और अपने पैसे को बचाने और सही निवेश करने की जाग्रति इनमें बढ़ रही है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="HI">वित्तीय स्वतंत्रता</span>, </strong><span lang="HI"><strong>जागरूकता और महिलाओं सशक्तिकरण</strong> भारत के समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है. बढ़ती असमानताओं और शक्ति के केंद्रीयकरण के कारण इसे नजरंदाज कर पाना अब और भी मुश्किल है. इसका उदाहरण <strong>विश्व बैंक</strong> द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए फिनडेक्स से पता चलता है कि भारत में 68% महिलाएं<span> </span></span>'<strong><span lang="HI">फाइनेंशियली इंक्लूडेड</span></strong>'<span> </span><span lang="HI">है यानी औपचारिक बैंकिंग चैनलों से जुड़ी हुई है. दूसरी ओर</span>,<span> </span><span lang="HI">यह पता चला है कि 23% पुरुष खाताधारकों की तुलना में 32% महिला खाताधारकों ने अपने खातों का उपयोग नहीं किया है. इसके अलावा</span>,<span> </span><span lang="HI">35% पुरुषों की तुलना में केवल 20% महिलाओं के पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड है. अधिकांश विवरणों के अनुसार वित्तीय स्वतंत्रता</span>,<span> </span><span lang="HI">अवसर और कमाने की क्षमता से जुड़ी हुई है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की हर चार में से तीन महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं है. भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर लगातार गिर रही है और आज बमुश्किल 20% से ऊपर है. सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद</span>,<span> </span><span lang="HI">भारत मानव विकास सूचकांक पर 189 देशों में से 131वें स्थान पर है. इसलिए</span>,<span> </span><span lang="HI">लैंगिक अंतर को पाटना और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना न केवल रैंकिंग में सुधार के लिए</span>,<span> </span><span lang="HI">बल्कि बेहतर सामाजिक परिणामों और प्रगति के लिए भी अनिवार्य है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI"><img alt="CSR activities " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/urPL3d1qPwLKsjjChifr.jpg"></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size: 8pt;"><em><span lang="HI">Image Credits: CSRuniverse</span></em></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इन परिभाषाओं से वित्तीय जागरूकता की धारणा का पता चलता है. यहां तक कि एक महिला जो काम करती है और कमाती है</span>,<span> </span><span lang="HI">वह वित्तीय रूप से स्वतंत्र नहीं हो सकती है</span>,<span> </span><span lang="HI">क्योंकि अधिकांश महिलाओं (शहरी और ग्रामीण) में <strong>वित्तीय साक्षरता</strong> की कमी है. महिलाओं को वित्तीय तौर पर जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि वे औपचारिक और सुरक्षित माध्यमों से बचत कर सकें. उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को खुद से स्पष्ट करने और उनके हिसाब से विभिन्न उत्पादों का चयन करने</span>,<span> </span><span lang="HI">उत्पादक उद्देश्यों के लिए ऋण प्राप्त करने और अपने भविष्य को सुरक्षित करने में सक्षम हो जाए. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">कंपनियां और उनके सीएसआर प्रोग्राम इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते है. यह सच है की ग्रामीण महिलाओं को वित्त के बारे में जागरूक होने और उस तक पहुंचने में कई चुनौतियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है</span>,<span> </span><span lang="HI">फिर भी जब बात मेहनत की कमाई को बचाने की आती है तो वे सबसे अच्छा मोल तौल करती है. साथ ही <strong>वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण</strong> एक ऐसी ताकत है</span>,<span> </span><span lang="HI">जो जाति और धर्म की बाधाओं को तोड़कर सभी सामाजिक स्तरों पर महिलाओं को एकजुट करती है. स्वतंत्र रूप से वित्तीय विकल्प और निर्णय लेने की क्षमता महिलाओं को पहचान और सम्मान की भावना प्रदान करती है</span>,<span> </span><span lang="HI">खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में. और इस तरह महिला सशक्तिकरण निस्संदेह व्यापक समुदाय और अर्थव्यवस्था पर एक बदलाव लाने वाला प्रभाव डालता है.</span></p>
<p class="MsoNormal">Corporate Social Responsibility (CSR)<span> </span><span lang="HI">के तहत अगर <strong>वित्तीय साक्षरता और समावेशन</strong> (इन्क्लूसन) पर काम किया जाए तो न सिर्फ <strong>महिला सशक्तिकरण </strong>बल्कि सामुदायिक और सामाजिक विकास में खुद ब खुद तेज़ी आएगी.  कई<span> </span></span>CSR<span> </span><span lang="HI">प्रोग्राम इस ओर काम भी कर रहे है जैसे<span> </span></span>L&T Financial Services<span> </span><span lang="HI">ने<span> </span></span>'<span lang="HI">डिजिटल सखी</span>' (Digital Sakhi )<span> </span><span lang="HI">शुरू की<span> </span></span>, ICICI Bank Limited<span> </span><span lang="HI">भी वित्तीय साक्षरता को लेकर बड़े स्तर पर काम कर रहा है. </span>Home Credit India (HCIN )<span> </span><span lang="HI">भी महिलाओं के बीच वित्तीय साक्षरता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया प्रोजेक्ट "सक्षम" पर काम कर रहा है.  बंधन बैंक (</span>Bandhan Bank),<span> </span><span lang="HI">क्रिसिल (</span>Crisil)<span> </span><span lang="HI">जैसे कई कॉर्पोरेट्स आज अपनी<span> </span></span><strong>CSR </strong><span lang="HI"><strong>एक्टिविटी</strong> के साथ इस ओर आगे बढ़ रहे है. ज़रुरत है ऐसे ओर प्रयासों की मुख्यतः कॉर्पोरेट दुनिया से क्योंकि महिलाओं के पास चाह है और राह भी दिख रही है बस इंतज़ार है उस राह पर आगे ले जाने वाले साथ की.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Mon, 19 Jun 2023 17:53:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-and-inclusion-should-be-at-core-of-csr]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png"/></item><item><title><![CDATA[दीदी ओ दीदी... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/didi-ki-rasoi-initiative-of-women-shg-supported-by-jeevika-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg"><p dir="ltr">माँ के हाथ के खाने का स्वाद, बस यही तो चाहिए हर जगह ! स्कूल हो, कॉलेज हो, बैंक हो, या हॉस्पिटल, व्यक्ति को अगर एक प्लेट स्वादिष्ट खाना मिल जाए तो उसका दिन बन जाता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पहली बार 2018 में विश्व बैंक (World Bank) समर्थित बिहार परिवर्तनकारी विकास परियोजना के हिस्से के रूप में 'दीदी की रसोई' की शुरुआत हुई. यह 'बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी' (JEEVIKA) द्वारा किए गए कई उद्यम प्रोत्साहन पहलों (enterprise promotion initiative) में से एक है. पहली 'Didi ki Rasoi' बिहार के वैशाली जिले में स्थापित हुई, जो राज्य के सभी 38 जिलों में खाने के सेवाएं पहुंचा रही थी. अभी किए समय में  83 से ज़्यादा ऐसे व्यवसाय बिहार में सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, बैंकों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में चल रहें हैं. इस पहल में 1,200 से अधिक महिला कार्यकर्ता और 150 फूलटाइम कर्मचारी हैं. </p>
<p dir="ltr">'JEEVIKA' महिलाओं को यह रसोई शुरू करने के लिए ब्याज देता है, जबकि Cluster Level Federations (CLF) मशीनें और बर्तन प्राप्त करवाते हैं. CLF में स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाएं शामिल हैं, जो स्वच्छता, बहीखाता पद्धति और ग्राहक सेवा के साथ तकनीकी और मैनेजमेंट के की सात दिन की ट्रेनिंग लेती है. सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, स्कूलों, बैंकों और अन्य संस्थानों में घर जैसे स्वाद का खाना मिलता है जो ना ही किफायती है बल्कि कई ज़्यादा पौष्टिक भी है. खाना बनाने के लिए ज़्यादातर कच्चा माल स्थानीय किसानों और 'JEEVIKA' के सपोर्ट से चल रहे समूहों से लिया जाता है. Self Help Groups की महिलाओं के लिए ऐसी पहल बहुत बड़ा कदम साबित होती है. बिहार के बहुत सी महिलाएं इस पहल से जुड़कर अपना घर और अपने जीवन को सुधार पाई है. देश एक अन्य राज्यों में भी इस तरह की पहल शुरू होनी चाहिए ताकि महिलाएं सशक्त बना पाएं.<strong id="docs-internal-guid-46543ce9-7fff-91d1-5a3a-35dd0e158c07"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 09 May 2023 13:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/didi-ki-rasoi-initiative-of-women-shg-supported-by-jeevika-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg"/></item><item><title><![CDATA[झारखंड कि रानी 'मिस्त्री' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/jharkhand-shg-rani-mistri-udaypura-ranchi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg"><p dir="ltr">कौन कहता है की ईंट-कंक्रीट से जुड़े काम सिर्फ पुरुष ही कर पाते है? झारखंड की महिलाओं ने यह बात बहुत साल पहले ही गलत साबित कर दी, और साथ ही उन लोगों की सोच और मुँह पर ताला भी लगा दिया जो महिलाओं को किसी से काम समझते है. झारखण्ड में जब तक रानी मिस्त्रियों ने काम शुरू नहीं कर दिया तब तक लोग यही समझते थे कि ये सब काम तो आदमियों के है. लेकिन आज रांची कि वो रानियां जब काम करती है, तब उनके हाथों कि रफ़्तार देखकर सब दंग रह जाते है. जब तक कोई राज मिस्त्री या पुरुष मिस्त्री एक दिवार कि चिनाई करता है तक तब एक रानी मिस्त्री 2 दीवारों का काम ख़त्म कर देती है. </p>
<p dir="ltr">यह सिलसिला शुरू हुआ चार साल पहले जब उनके गांव उदयपुरा में कार्यरत स्वयं सहायता समूह को 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत सौ शौचालय बनाने का काम सौंपा गया. उम्मीद थी कि राज मिस्त्री मिल जाएंगे, लेकिन काम छोटा था तो कोई आदमी तैयार नहीं था. यह देखकर महिलाओं ने काम करने का बीड़ा उठा लिया. जिला प्रशासन की ओर से इन्हें प्रशिक्षण दिया गया, इसके बाद 20-25 महिलाओं ने मिलकर सारे शौचालयों का निर्माण कर दिया. काम करने के बाद जब इन महिलाओं को पैसे मिले तो इनके जोश में और बढ़ावा आया. बस फिर क्या था, वो दिन है और आज का दिन है, झारखंड में 50 हज़ार से ज़्यादा रानी मिस्त्री काम कर रहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी इनकी सफलता की कहानियां पहुंची और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खूंटी जिले की कुछ रानी मिस्त्रियों वे भी इनका हौसला बढ़ा चुके हैं.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/OBhaX5uAcaRU3yn8nokn.jpg" alt="Sunita devi "></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ram Nath Kovind facebook official page</em></span></p>
<p dir="ltr">इन्ही में से एक नाम है, सुनीता देवी. झारखंड के लातेहार जिले के उदयपुरा गांव की रहने वाली और अपने इलाके की मशहूर ‘रानी मिस्त्री’. वह वर्ष 2019 में भारत के राष्ट्रपति के हाथों भारत सरकार की ओर से कामकाजी महिलाओं को प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान 'नारी शक्ति पुरस्कार' से नवाजी जा चुकी हैं. इन रानी मिस्त्रियों पर 'वल्र्ड बैंक' ने हाल में एक रिपोर्ट बनाई. हजारीबाग की ही एक रानी मिस्त्री निशात जहां कहती हैं, "महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं. जो पुरुष कर सकते हैं वो महिलाएं भी कर सकती हैं और कई बार तो पुरुषों से बेहतर कर सकती हैं. रेजा-मजदूर के रूप में महिलाएं पहले भी निर्माण कार्य में लंबे समय से काम करती आयी हैं. अब उन्हें रानी मिस्त्री के रूप में काम करने का मौका मिला है तो वे यहां भी अपना हुनर और काबिलियत दिखा रही हैं." सब लोगों ने यह मान रखा है कि महिलाएं निर्माण गतिविधियों में सहायकों की भूमिका ही निभाती है. लेकिन, झारखंड में महिला मजदूरों ने मिस्त्री के काम में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ दिया है. </p>
<p dir="ltr">झारखंड उन राज्यों में से एक है जिसे 'स्वच्छ भारत अभियान' की योजना बनाने और उसको लागू करने के लिए 'विश्व बैंक' की ओर से तकनीकी मदद मिली थी. इस तकनीकी मदद के हिस्से के रूप में विश्व बैंक ने टॉयलेट बनाने के लिए मिस्त्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया था और उनमें से कई कार्यक्रमों में महिला मजदूरों ने भी हिस्सा लिया. कई रानी मिस्त्रियों के परिवार वाले इस काम को सीखने को लेकर उनके खिलाफ खड़े हो गए. पर संघर्ष कर इन रानी मिस्त्रियों ने अपना मुकाम पा ही लिया. झारखंड में यह बात साबित हो गयी कि महिलाएं किसी से भी कम नहीं है. सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि हर राज्य कि महिला इतनी ही सशक्त है कि वो कुछ भी आसानी से कर सकती है. बस चाहिए तो वो हौसला जो झारखंड महिलाओं ने दिखाया. अगर हर महिला बिना डरे काम करने लग गयी तो देश कि शिथि को बदलने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 16:32:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/jharkhand-shg-rani-mistri-udaypura-ranchi]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4gRMiJJMkoJ92pl0oQ9y.jpg"/></item></channel></rss>