<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ वित्तीय साक्षरता]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/vittiiy-saakssrtaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/vittiiy-saakssrtaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 09 Oct 2025 16:11:16 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[वेदांता एल्यूमिनियम का ‘Project Sakhi’: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता की दिशा में एक ठोस कदम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/vedanta-aluminiums-project-sakhi-a-concrete-step-towards-economic-empowerment-of-rural-women-10544768</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/10/09/untitled-design-2025-10-09-15-45-03.png"><p style="text-align: justify;">भारत के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी लंबे समय से सीमित रही है. शिक्षा, संसाधनों और निर्णय लेने के अवसरों की कमी के कारण महिलाएँ अक्सर श्रम का हिस्सा तो होती हैं, पर आर्थिक स्वायत्तता से वंचित रहती हैं. ऐसे समय में वेदांता एल्यूमिनियम का &lsquo;Project Sakhi&rsquo; एक ऐसा मॉडल बनकर उभरा है, जिसने ओडिशा के कालाहांडी ज़िले में महिलाओं के जीवन और सोच दोनों को गहराई से बदल दिया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>प्रोजेक्ट सखी की शुरुआत और उद्देश्य</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">वेदांता एल्यूमिनियम ने साल 2015 में Project Sakhi की शुरुआत की थी. इस पहल का मूल उद्देश्य था &ndash; ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की महिलाओं को संगठित कर आर्थिक सशक्तिकरण, नेतृत्व क्षमता और वित्तीय साक्षरता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना.&nbsp;<br>प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं को Self Help Groups (SHGs) के रूप में संगठित किया गया ताकि वे सामूहिक बचत, ऋण सुविधा, और छोटे स्तर पर उद्यमिता के अवसरों तक पहुँच बना सकें.</p>
<h2><strong>प्रभाव का पैमाना: 4,600 से अधिक महिलाएँ और 5 करोड़ का वित्तीय प्रवाह</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">अब तक 4,600 से अधिक महिलाएँ इस प्रोजेक्ट से जुड़ चुकी हैं. इनके माध्यम से 444 स्वयं सहायता समूह (SHGs) सक्रिय हैं.<br>इन समूहों ने मिलकर 5 करोड़ रुपये से अधिक की बचत और वित्तीय लेनदेन का चक्र तैयार किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि 1,880 से अधिक महिलाएँ अब तक 1,300 से ज़्यादा छोटे उद्यम (micro-enterprises) शुरू कर चुकी हैं &mdash; जिनमें कृषि आधारित गतिविधियाँ, डेयरी, पोल्ट्री, बागवानी, किराना, सिलाई-कढ़ाई, और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कार्य शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पिछले एक वर्ष में ही इन समूहों ने 3.84 करोड़ रुपये का बैंक ऋण और वित्तीय सहायता प्राप्त की, जिससे लगभग 1,000 महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हुआ.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और नेतृत्व विकास</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">Project Sakhi केवल वित्तीय सहायता देने की पहल नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण विकास मॉडल है.&nbsp;वेदांता ने इन महिलाओं को तीन स्तरों पर प्रशिक्षित किया है &mdash;</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>कौशल विकास (Skill Development):</strong> पोल्ट्री पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई आदि में प्रशिक्षण.</li>
<li><strong>वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy):</strong> बैंक खाता संचालन, ऋण प्रक्रिया, और बचत योजनाओं की समझ विकसित की गई.</li>
<li><strong>नेतृत्व प्रशिक्षण (Leadership Training):</strong> <a href="https://ravivarvichar.in/tags/shg">SHG</a> प्रतिनिधियों को निर्णय लेने, समूह प्रबंधन और वार्तालाप कौशल में सशक्त किया गया ताकि वे सामाजिक रूप से भी आत्मविश्वास पा सकें.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">इसके अतिरिक्त, प्रोजेक्ट के अंतर्गत 3,000 से अधिक महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया है &mdash; जैसे जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, बाल बचत योजनाएँ और श्रम कल्याण लाभ.</p>
<h2><strong>एक उदाहरण: बालभद्रपुर गाँव की सफलता कहानी</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">कालाहांडी जिले के बालभद्रपुर गाँव में &ldquo;मां शिवानी स्वयं सहायता समूह&rdquo; को पोल्ट्री प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया. इस समूह ने मिलकर एक पोल्ट्री यूनिट स्थापित की, जिसने ₹1.27 लाख से अधिक का राजस्व उत्पन्न किया.</p>
<p style="text-align: justify;">इस पहल ने केवल आय का स्रोत नहीं बनाया, बल्कि समूह की <a href="https://ravivarvichar.in/tags/self-help-group-kii-mhilaaon">महिलाओं</a> को गाँव में एक नई पहचान दी. अब वे अपने घर के साथ-साथ समुदाय में भी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन रही हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>सामाजिक बदलाव और चुनौतियाँ</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">&lsquo;Project Sakhi&rsquo; ने आर्थिक रूप से तो महिलाओं को सशक्त किया ही है, साथ ही उनके भीतर <a href="https://ravivarvichar.in/tags/aarthik-aur-saamaajik-sthiti">सामाजिक</a>&nbsp;आत्मविश्वास भी जगाया है. कई महिलाएँ अब अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू वित्तीय निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.&nbsp;हालाँकि, कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं &mdash;</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>ग्रामीण बाज़ारों तक उत्पादों की पहुँच सीमित है.</li>
<li>प्रशिक्षण के बाद उद्यमों की दीर्घकालिक स्थिरता एक बड़ा सवाल है.</li>
<li>सामाजिक मान्यताओं और पितृसत्तात्मक सोच से निपटना अभी भी एक निरंतर प्रक्रिया है.</li>
<li>इन चुनौतियों के बावजूद, प्रोजेक्ट ने एक ऐसा आधार तैयार किया है, जिससे ग्रामीण महिलाएँ अब आत्मनिर्भरता के रास्ते पर अग्रसर हैं.</li>
</ul>
<h2><strong>एक व्यापक दृष्टिकोण: CSR से सशक्तिकरण की दिशा में</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में <a href="https://ravivarvichar.in/tags/konrporett-soshl-risponnsibilittii">कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी</a> (CSR) को अक्सर दान या परोपकार के रूप में देखा जाता है. लेकिन Project Sakhi यह दिखाता है कि जब CSR को विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाए, तो उसका असर कहीं अधिक स्थायी और गहरा हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">वेदांता एल्यूमिनियम का यह मॉडल इस बात का प्रमाण है कि कंपनियाँ केवल आर्थिक वृद्धि में ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन में भी भागीदार बन सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">Project Sakhi यह दर्शाता है कि सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, निर्णय क्षमता और सामुदायिक नेतृत्व भी है.&nbsp;कालाहांडी जैसे पिछड़े जिले में यह पहल महिलाओं के लिए न केवल आय का साधन, बल्कि परिवर्तन का प्रतीक बन चुकी है.&nbsp;यदि भारत को वास्तविक रूप से &lsquo;महिला-प्रधान अर्थव्यवस्था&rsquo; की दिशा में बढ़ना है, तो ऐसे प्रोजेक्ट्स को नीति समर्थन और सामाजिक सहयोग दोनों की आवश्यकता है &mdash; ताकि हर &ldquo;सखी&rdquo; अपने गाँव की कहानी बदल सके.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">Rohan</dc:creator><pubDate>Thu, 09 Oct 2025 16:11:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/vedanta-aluminiums-project-sakhi-a-concrete-step-towards-economic-empowerment-of-rural-women-10544768]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/10/09/untitled-design-2025-10-09-15-45-03.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/10/09/untitled-design-2025-10-09-15-45-03.png"/></item><item><title><![CDATA[महिला वित्तीय साक्षरता में कॉर्पोरेट का साथ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-and-inclusion-should-be-at-core-of-csr</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png"><p class="MsoNormal">‘<span lang="HI">जब महिलाएं अर्थव्यवस्था में भाग लेती हैं</span>,<span> </span><span lang="HI">तो सभी का लाभ होता है. जब महिलाएं शांति-निर्माण और शांति-स्थापना में भाग लेती हैं</span>,<span> </span><span lang="HI">तो दुनिया अधिक सुरक्षित होती है. और जब महिलाएं अपने देशों की राजनीति में भाग लेती हैं तो वे बदलाव ला सकती है<span> </span></span>' -<span> </span><strong><span lang="HI">हिलेरी क्लिंटन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इसी बात को आगे बढ़ाते यह कहना गलत नहीं होगा की जब महिलाएं समुदाय और सामाजिक विकास में भाग लेती है तो देश का विकास होता है. महिला सह-भागिता को बढ़ाने का मुख्य और असरकारक ज़रिया कॉर्पोरेट <strong>सोशल रेस्पोंसिबिल्टी प्रोग्राम</strong> (</span>CSR)<span> </span><span lang="HI">हो सकते है.<span> </span></span>CSR<span> </span><span lang="HI">में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता से रखने की आवश्यकता है.</span> </p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">हमारे सामने ऐसे कई उदहारण है जहां <strong>महिला स्वयं सहायता समूह </strong>की मेंबर<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">जमा खाता हिसाब वगैरह सँभालते हुए आज क्लस्टर लेवल की लीडर बन चुकी है।  इस तरह<span> </span></span>Self Help Group<span> </span><span lang="HI">की महिला आज समाज में <strong>लीडरशिप रोल</strong> में आ रही है<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">जिनके पास समाज और जीवन में बदलाव लाने की क्षमता है। इस तरह वह अपने समुदायों के अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता और वित्तीय पहुंच को बढ़ावा दे रही है।<span> </span></span>SHG<span> </span><span lang="HI">से जुड़ी इन महिलाओं ने अपने परिवार और समुदाय के बेहतर भविष्य के लिए दुर्गम सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">स्वयं सहायता समूहों ने<span> </span></span>,<span> </span><span lang="HI">धीरे-धीरे इस मिथक को तोड़ने में मदद की है कि कमाना पुरुषों का काम है. घरेलू स्तर पर महिलाएं निर्णय लेने में अधिक से अधिक शामिल हो रही है. बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय लेनदेन के मामलों में पुरुषों पर निर्भरता का स्तर भी कम हुआ है. साथ ही<span> </span></span>SHG<span> </span><span lang="HI">से जुड़ी महिलाओं ने समुदाय सामाजिक और आर्थिक मूल्यों से जोड़ने के लिए गहरी मंशा दिखाई है. सरपंच और ग्रामीण पुरुषों को बीमा और पेंशन नीतियों</span>,<span> </span><span lang="HI">बैंक में खाता खोलने</span>,<span> </span><span lang="HI">अपने बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी योजनाओं की सलाह लेने और अपने पैसे को बचाने और सही निवेश करने की जाग्रति इनमें बढ़ रही है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="HI">वित्तीय स्वतंत्रता</span>, </strong><span lang="HI"><strong>जागरूकता और महिलाओं सशक्तिकरण</strong> भारत के समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है. बढ़ती असमानताओं और शक्ति के केंद्रीयकरण के कारण इसे नजरंदाज कर पाना अब और भी मुश्किल है. इसका उदाहरण <strong>विश्व बैंक</strong> द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए फिनडेक्स से पता चलता है कि भारत में 68% महिलाएं<span> </span></span>'<strong><span lang="HI">फाइनेंशियली इंक्लूडेड</span></strong>'<span> </span><span lang="HI">है यानी औपचारिक बैंकिंग चैनलों से जुड़ी हुई है. दूसरी ओर</span>,<span> </span><span lang="HI">यह पता चला है कि 23% पुरुष खाताधारकों की तुलना में 32% महिला खाताधारकों ने अपने खातों का उपयोग नहीं किया है. इसके अलावा</span>,<span> </span><span lang="HI">35% पुरुषों की तुलना में केवल 20% महिलाओं के पास डेबिट या क्रेडिट कार्ड है. अधिकांश विवरणों के अनुसार वित्तीय स्वतंत्रता</span>,<span> </span><span lang="HI">अवसर और कमाने की क्षमता से जुड़ी हुई है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की हर चार में से तीन महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं है. भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर लगातार गिर रही है और आज बमुश्किल 20% से ऊपर है. सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद</span>,<span> </span><span lang="HI">भारत मानव विकास सूचकांक पर 189 देशों में से 131वें स्थान पर है. इसलिए</span>,<span> </span><span lang="HI">लैंगिक अंतर को पाटना और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना न केवल रैंकिंग में सुधार के लिए</span>,<span> </span><span lang="HI">बल्कि बेहतर सामाजिक परिणामों और प्रगति के लिए भी अनिवार्य है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI"><img alt="CSR activities " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/urPL3d1qPwLKsjjChifr.jpg"></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size: 8pt;"><em><span lang="HI">Image Credits: CSRuniverse</span></em></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इन परिभाषाओं से वित्तीय जागरूकता की धारणा का पता चलता है. यहां तक कि एक महिला जो काम करती है और कमाती है</span>,<span> </span><span lang="HI">वह वित्तीय रूप से स्वतंत्र नहीं हो सकती है</span>,<span> </span><span lang="HI">क्योंकि अधिकांश महिलाओं (शहरी और ग्रामीण) में <strong>वित्तीय साक्षरता</strong> की कमी है. महिलाओं को वित्तीय तौर पर जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि वे औपचारिक और सुरक्षित माध्यमों से बचत कर सकें. उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को खुद से स्पष्ट करने और उनके हिसाब से विभिन्न उत्पादों का चयन करने</span>,<span> </span><span lang="HI">उत्पादक उद्देश्यों के लिए ऋण प्राप्त करने और अपने भविष्य को सुरक्षित करने में सक्षम हो जाए. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">कंपनियां और उनके सीएसआर प्रोग्राम इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते है. यह सच है की ग्रामीण महिलाओं को वित्त के बारे में जागरूक होने और उस तक पहुंचने में कई चुनौतियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है</span>,<span> </span><span lang="HI">फिर भी जब बात मेहनत की कमाई को बचाने की आती है तो वे सबसे अच्छा मोल तौल करती है. साथ ही <strong>वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण</strong> एक ऐसी ताकत है</span>,<span> </span><span lang="HI">जो जाति और धर्म की बाधाओं को तोड़कर सभी सामाजिक स्तरों पर महिलाओं को एकजुट करती है. स्वतंत्र रूप से वित्तीय विकल्प और निर्णय लेने की क्षमता महिलाओं को पहचान और सम्मान की भावना प्रदान करती है</span>,<span> </span><span lang="HI">खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में. और इस तरह महिला सशक्तिकरण निस्संदेह व्यापक समुदाय और अर्थव्यवस्था पर एक बदलाव लाने वाला प्रभाव डालता है.</span></p>
<p class="MsoNormal">Corporate Social Responsibility (CSR)<span> </span><span lang="HI">के तहत अगर <strong>वित्तीय साक्षरता और समावेशन</strong> (इन्क्लूसन) पर काम किया जाए तो न सिर्फ <strong>महिला सशक्तिकरण </strong>बल्कि सामुदायिक और सामाजिक विकास में खुद ब खुद तेज़ी आएगी.  कई<span> </span></span>CSR<span> </span><span lang="HI">प्रोग्राम इस ओर काम भी कर रहे है जैसे<span> </span></span>L&T Financial Services<span> </span><span lang="HI">ने<span> </span></span>'<span lang="HI">डिजिटल सखी</span>' (Digital Sakhi )<span> </span><span lang="HI">शुरू की<span> </span></span>, ICICI Bank Limited<span> </span><span lang="HI">भी वित्तीय साक्षरता को लेकर बड़े स्तर पर काम कर रहा है. </span>Home Credit India (HCIN )<span> </span><span lang="HI">भी महिलाओं के बीच वित्तीय साक्षरता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया प्रोजेक्ट "सक्षम" पर काम कर रहा है.  बंधन बैंक (</span>Bandhan Bank),<span> </span><span lang="HI">क्रिसिल (</span>Crisil)<span> </span><span lang="HI">जैसे कई कॉर्पोरेट्स आज अपनी<span> </span></span><strong>CSR </strong><span lang="HI"><strong>एक्टिविटी</strong> के साथ इस ओर आगे बढ़ रहे है. ज़रुरत है ऐसे ओर प्रयासों की मुख्यतः कॉर्पोरेट दुनिया से क्योंकि महिलाओं के पास चाह है और राह भी दिख रही है बस इंतज़ार है उस राह पर आगे ले जाने वाले साथ की.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Mon, 19 Jun 2023 17:53:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-and-inclusion-should-be-at-core-of-csr]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ScJNlGvwUfp3F7dUVnig.png"/></item></channel></rss>