<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ व्यवसाय]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/vyvsaay</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/vyvsaay" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 21 Aug 2023 17:05:49 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[ग्रीन स्टार्टअप 14: 'मूविंग  वीमेन' आगे बढ़ा रहीं सशक्तिकरण की गाड़ी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/jai-bharathi-started-mowo-moving-women-social-initiatives-to-help-women-learn-driving-and-take-up-jobs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0Agqn489rgFecMcDGisV.jpg"><p>इंजीनियरिंग से लेकर क्रिएटिव फील्ड में लीडरशिप भूमिकाओं तक, महिलाएं बदलाव ला रही हैं, रूढ़िवादिता को चुनौती देकर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित कर रही हैं. इसी तरह, मोबिलिटी सेक्टर (mobility sector) में भी महिलाओं की मौजूदगी कई लैंगिक मानदंडों (gender norms) को चुनौती दे रही हैं. जय भारती वह नाम है जिन्होंने इस सेक्टर में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने महिलाओं को गाड़ी चलाना सीखने और मोबिलिटी सेक्टर में नौकरियां लेने में सक्षम बनाने के लिए 2019 में MOWO (मूविंग वीमेन) सामाजिक पहल शुरू की. 2022 में, उन्होंने MOWO फ्लीट (Moving Women Fleet) की शुरुआत की, जो तकनीकी-सक्षम महिला ड्राइवरों (female drivers) का समूह है.</p>
<p>महिलाओं की ड्राइविंग स्किल्स (driving skills) पर सवाल उठाने वाले लोगों को मुंह तोड़ जवाब दे रही हैं MOWO फ्लीट की फीमेल ड्राइवर्स. 2019 में, जय भारती 17 हज़ार किलोमीटर के एक्सपीडिशन पर जाने वाली चार महिला राइडर्स के ग्रुप का हिस्सा बनी. उस वक़्त उन्हें समझ आया कि गतिशीलता महिलाओं के जीवन को कैसे बदल सकती है. उत्तरी थाईलैंड में उन्होंने महिलाओं को टैक्सी ड्राइवर और डिलीवरी ड्राइवर के रूप में देखा. ऐसा कुछ भारत में भी किया जा सकता है- इस ख़्याल को सपने में, और सपने को हकीकत में बदला MOWO के साथ.</p>
<h2>महिलाओं को मोबिलिटी सेक्टर में रोज़गार दे रहा MOWO</h2>
<p>MOWO (मूविंग वुमेन) सोशल इनिशिएटिव्स, एक गैर-लाभकारी संगठन है जो महिलाओं को मोबिलिटी सेक्टर (women in mobility sector) में रोज़गार के ज़रिये<strong> </strong>सशक्त बना रहा है. जय भारती (Jai Bharathi) पेशे से आर्किटेक्ट (architect) है और <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/meet-sikkim-cop-eksha-who-is-a-supermodel-boxer-and-a-bike-rider">बाइक राइडिंग</a> (female bike rider) का जुनून रखती है. वह 2030 तक दस लाख महिलाओं को गतिशीलता में सक्षम बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है. उनका मानना ​​है कि इस पहल में निम्न आय वर्ग की महिलाओं को शामिल करना ज़रूरी है, जिनके पास स्कूटर तक नहीं है. मोबिलिटी सेक्टर में रोज़गार इन महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी (financial freedom) हासिल करने के अवसर खोल सकती हैं.</p>
<p><img alt="MOWO" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/569x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/eB61Nrucf7beS5Pg8vUX.PNG" style="width: 569px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: yourstory.com</em></span></p>
<p>जय भारती कहती है कि ड्राइविंग स्किल सीख महिलाएं वह कर सकती हैं जो वह चाहती हैं - अपना व्यवसाय &nbsp;शुरू कर सकती हैं, अपने बच्चों को स्कूल छोड़ सकती<strong> </strong>हैं, या इस स्किल को आजीविका कौशल के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं. अब तक, MOWO हैदराबाद (Hyderabad) में 2,500 से ज़्यादा महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने और 200 से ज़्यादा महिलाओं को इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा चलाने के लिए ट्रेनिंग दे चुका है. MOWO सोशल महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए तेलंगाना (Telangana) सरकार के महिला एवं बाल कल्याण विभाग (Women and Child Welfare Department) के मोटर ट्रेनिंग सेंटर का सहयोग लेता है. स्टार्टअप ने 50 महिलाओं को ब्लू डार्ट और उबर में जॉब हासिल करने में भी मदद की.</p>
<h3>सस्टेनेबल स्टार्टअप पर्यावरण का भी रख रहा ध्यान&nbsp;</h3>
<p>इनमें से ज़्यादातर महिलाएं पहली बार नौकरी हासिल कर परिवार की आय में सीधे 50% की बढ़ोतरी कर रही हैं. वह लगभग 15,000-17,000 रुपये कमा रही हैं. MOWO फ्लीट पूरी तरह से ईवी है, जिससे फ्यूल की बचत<strong> </strong>होती है और पर्यावरण पर किसी भी तरह का गलत प्रभाव नहीं पड़ता. यह <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/black-baza-promoting-sustainable-coffee-production">सस्टेनेबल</a> स्टार्टअप (sustainable startup) पर्यावरण को ध्यान में रख फीमेल ड्राइवर्स से जुड़े मानदंडों को तोड़ते हुए, मोबिलिटी सेक्टर में भारी बदलाव ला रहा है.&nbsp;</p>
<p>ऐसे कई और <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/marine-biologist-introduced-sustainable-fish-catching-method">स्टार्टअप्स</a> ट्रेडिशनल बिज़नेस तरीकों में बदलाव लाने के साथ ग्रीन और क्लीन भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं. रविवार विचार ऐसे <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/startup-igloopupa-offers-eco-friendly-travel-stay-options">सस्टेनेबल</a> स्टार्टअप्स की जानकारी साझा करता रहेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 21 Aug 2023 17:05:49 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/jai-bharathi-started-mowo-moving-women-social-initiatives-to-help-women-learn-driving-and-take-up-jobs]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0Agqn489rgFecMcDGisV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0Agqn489rgFecMcDGisV.jpg"/></item><item><title><![CDATA[G20 के W20 फोरम पर SHG फोकस मे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"><p dir="ltr">भारत को G20 की प्रेसिडेंसी मिलना वैसे ही गर्व और सामरिक महत्व का मसला है . उसके साथ भारत ने G20 का एजेंडा महिला सशक्तिकरण सेट किया. इसी के तहत W20 की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. W20 महिला नेताओं का वो समूह है जो G20 देशों में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. वैसे तो W20,G20 का ही आधिकारिक हिस्सा है लेकिन इसकी अपनी अलग महत्ता भी है.  इसको G20 के साथ जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया है. W20 नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों से बना है. यह G20 के साथ मिलकर काम करता है जो दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के जीवन को सुधारता है.  </p>
<p dir="ltr">W20 के तहत  ही 11 -12 फरवरी 2023 को आगरा में G20 EMPOWER मीट हुई.  इस के एजेंडे का केंद्र रहा भारतीय महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण.13 सदस्य देशों और 7 अतिथि देशों के करीब 150 प्रतिनिधियों ने भागीदारी दर्ज की. G20 ने एक ऐसा मंच दिया जहां लैंगिक समानता पर काम कर रहे देशों को एक जगह लाकर, उनके विचारों और रणनीतियों को ठोस परिणामों में बदला जा सके. इस मीट का फोकस वूमेन लीडरशिप, जेंडर डिजिटल डिवाइड, एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट रहा. </p>
<p dir="ltr">भारत में करीब 140 लाख एमएसएमई और कृषि व्यवसाय को महिलाएं चला रही हैं. मैकिन्से की एक रिपोर्ट का कहना हैं कि भारत अपने GDP में 18% तक की बढ़त कर सकता है यदि देश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी शामिल हो सके. महिलाओं की फाइनेंशियल लिटरेसी पर फोकस कर उन्हें कार्यबल में शामिल करने की पहल भारत सरकार ने की. भारत के लिए SDG 5: लैंगिक समानता हासिल करने के लिए, भारत सरकार ने स्टैंड-अप इंडिया, पीएम मुद्रा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ,पोषण अभियान आदि शुरू किये. इन सभी योजनाओं को जो मज़बूत कड़ी जोड़ती हैं वो हैं SHG जिसने महिलाओं के अपना रोज़गार शुरू करने के अवसर बढ़ाये.  </p>
<p dir="ltr">जिन मध्यमवर्गीय परिवारों में महिलाओं से बैंक और पैसों के मसलों में राय तक नहीं ली जाती, वहीं SHG से बचत सीख कर और कम ब्याज दरों पर लोन लेकर, महिलाओं ने अपना रोज़गार शुरू किया. आपको बतादें कि भारत में 81 लाख स्वसहायता समूहों में 84% महिला सदस्य हैं, इनमे लगभग 90 % SC/ST महिलाएं हैं.  भारत में इन समूहों ने महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारा. लैंगिक समानता का लक्ष्य लेकर सरकार के द्वारा बनाई गई योजनाओं को SHG ने सहारा दिया है.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/eA8HfnthkJLvTt0KDYIH.jpeg" alt="W20"></p>
<p dir="ltr">जनजातीय केंद्रीय मंत्री, अर्जुन मुंडा ने दुनिया भर में महिलाओं के आर्थिक विकास पर ज़ोर देते हुए कहा कि फाइनेंशियल इन्क्लुशन को महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का उपकरण माना जाए. SHG भी फाइनेंशियल इन्क्लुशन की दिशा में काम कर रहें हैं. SHG ने अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की है जिसने उनका सामाजिक उत्थान हो पाया.   </p>
<p dir="ltr">स्वसहायता समूहों ने महिलाओं के कौशल और उनके शुरू किये व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद की. प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी वित्तीय सहायता देने वाली योजनाओं ने महिलाओं के व्यवसायों की चुनौतियों में से एक को संबोधित किया जिससे उन्हें - आसानी से कम ब्याज दर पर आवश्यकता-आधारित उधार मिल सका. तब से, 4600 लाख से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें से 56% महिलाओं के हैं. 2015 और 2022 के बीच, पीएमजेडीवाई खातों में औसत जमा राशि 1,279 रुपये से तीन गुना बढ़कर 3,761 रुपये हो गई. ऐसा कहा जा सकता है कि जन धन और स्वसहायता समूहों ने एक दुसरे का फ़ायदा किया . G20 ने इसी बात पर ज़ोर दिया. </p>
<p dir="ltr">इसी तरह, उद्यम सखी पोर्टल ने महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, नीतियों और गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर, SHG को बढ़ने में मदद की. वहीं, आजीविका मार्ट के नेटवर्क को SHG उत्पादों ने फैलाया. SHG से मिली आर्थिक आज़ादी ने न केवल महिलाओं की ज़रूरतें पूरी की पर समाज ने भी उनकी अहमियत को पहचाना. ग्रामीण परिवेश की करीब 82,31,670 महिलाएं आज स्वसहायता समूहों से जुड़ी. जिस महिला ने कभी घर के पैसों के मसलों में अपनी बात नहीं रखी थी, उन्होंने अपने  समूह शुरू कर अपने पति का बोझ बांटा. SHG ने महिलाओं को एकजुट किया और साथ मिल कर उन्होंने घरेलु हिंसा, जुआ-शराब की लत, औरतों के ख़िलाफ़ होते जुर्म जैसे मुद्दों पर जमकर आवाज़ उठाई. सरकार के आजीविका मिशन से जुड़कर अन्य सरकारी योजनाओं का ज्ञान ओर ट्रेनिंग फ़ायदेमंद साबित हुई.  </p>
<p dir="ltr">समूह से जुड़कर विकसित हुई सोच का इस्तेमाल महिलाओ ने अपने बच्चों और परिवार के लिए सही निर्णय लेने में किया. उन्होंने शिक्षा के महत्त्व को समझा और अपने बेटा-बेटी को सामान शिक्षा देने का संकल्प लिया. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को इन्होने ओर ऊंचे मक़ाम पर पहुंचाया. शिक्षा के अभाव से SHG चलाने में परेशानी महसूस करने के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल पहुंचाया. SHG महिलाओं ने पोषण अभियान को भी नई ऊचाइयों पर पहुंचाया. पोषण अभियान के तहत अपने खेतों में फल ओर सब्ज़ियां लगाकर बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन दिया ओर साथ ही उन फलों ओर सब्ज़ियों को बेचकर कमाई का ज़रिया भी बनाया.  </p>
<p dir="ltr">यह गर्व की बात है कि आज भारत को 20 देशों की अगुआई करने का मौका मिला. G20  में भारत ने महिला सशक्तिकरण जैसे ज़रूरी मुद्दे को उठाया जिसका कहीं न कहीं विकासशील देशों पर गहरा असर पड़ेगा. विकासशील देश हो या विकसित देश, महिलाओं की आर्थिक आज़ादी आज भी अधूरी है. G20 वो प्लेटफार्म है जो इस मुद्दे को सरहदों पार पूरे विश्व में ले जा सकेगा. <strong id="docs-internal-guid-d91295e0-7fff-6fad-3d54-6defad387bf1"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:34:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मैनेजमेंट और मार्केटिंग से होगी SHG की मुश्किलें आसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"><p dir="ltr">मार्केटिंग के आस पास ही घूमती है किसी भी व्यवसाय की सफ़लता. महिलाओं को आर्थिक आज़ादी की तरफ़ ले जा रहे हैं तेज़ी से बढ़ते स्वसहायता समूह. इनकी तरक्की टिकी है प्रोडक्ट को आस पास के लोगों से मिली सहमति पर. समूहों को उचित सहायता मिलने पर ये हमारे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों में और ज़्यादा योगदान दे सकेंगे. भारत ने पिछले कुछ दशकों में संचार क्रांति का अनुभव किया. भारत थर्ड वर्ल्ड के देश से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना. इस दौरान देश में बड़े पैमाने पर लोग गांव और छोटे कस्बों से शहरों की ओर आये.</p>
<p dir="ltr">बढ़ती बेरोज़गारी से निपटने के लिए पिछले कुछ दशकों में सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) को लागू किया. जिसके तहत स्वसहायता समूह योजना रोज़गार की तलाश करती महिलाओं के लिए कारगर साबित हुई. आज इन महिलाओं की आर्थिक विकास और बदलाव की कहानियां हर जगह मिल जाएगी.  </p>
<p dir="ltr">पूरे भारत में सपने साकार करते 81 लाख  स्वसहायता समूह कई प्रकार की खाने की चीज़ों, कपड़ों, कला वस्तुओं आदि बना रहे हैं.  इन उत्पादों को बेच ये महिलाएं तभी मुनाफा कमा सकेंगी जब उनके बनाये सामान को मार्केट में जगह मिलेगी. बढ़ते ग्लोबल कॉम्पीटिशन के इस दौर में तकनीकी समझ की कमी और कई सारी व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक वजहों ने SHG को दौड़ में पीछे किया है.   </p>
<p dir="ltr">मार्केट में पकड़ न बना पाने की बड़ी वजह SHG के बनाये सामान की सही पैकेजिंग का न होना है . इससे निपटने के लिए समूहों को अपने प्रोडक्ट का सही नाम व लोगो चुन ने की ट्रेनिंग और सब्सिडाइज़्ड रेट पर मशीन दी जानी चाहिए. साथ ही उन्हें कम दाम में उत्तम कच्चा माल तक पहुंच बढ़ाना चाहिए. फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी, बचत की समझ न होने और सही समय पर लोन न मिलने की वजह से रुकावटें आती है .  RBI  (भारतीय रिजर्व बैंक) और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पर काम करने वाली संस्थाओं को साथ मिलकर फाइनेंशियल लिटरेसी को बढ़ाने का काम करना होगा. महिलाओं को कम इंटरेस्ट रेट पर मिलने वाले माइक्रो फाइनेंस के बारे में बताना होगा. </p>
<p dir="ltr">महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देने वाली योजनाओं में सदस्यों की ट्रैनिंग का प्रावधान भी होना चाहिए ताकि वे टीम मैनेजमेंट, मार्केटिंग, और बचत को समझ सकें. जो स्वसहायता समूह बड़े पैमाने पर उत्पाद तैयार कर रहे है उन्हें तकनीकी जानकारी और मशीन चलाने की शिक्षा देनी होगी और साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों तक पहुंचाना होगा . गुणवत्ता नियंत्रण कर प्रचार प्रसार के आधुनिक तरीके समझाना होंगे. मार्केटिंग या विजिबिलिटी बढ़ाने की बात करें तो सोशल मीडिया को जानना ज़रूरी हो जाता है. </p>
<p dir="ltr">कोरोना महामारी के बाद प्रधानमंत्री द्वारा चलाये गए 'वोकल फॉर लोकल ' अभियान ने देशवासियों का ध्यान छोटे वेंडर्स की तरफ़ खींचा.  इस पहल ने SHG द्वारा बनाये गए उत्पादों की बिक्री को बढ़ाया है. SHGs के बने उत्पादों के लिए लोगों में सहानुभूति और समर्थन की भावना जगी. SHG उत्पादों की खरीद और बिक्री के लिए Amazon, Flipkart, Tata Cliq जैसे ऑनलाइन और मॉल के बड़े विक्रेताओं ने सोचना शुरू किया. इन बड़े विक्रेताओं की मदद से समूह उनके प्रांत की हदें पार कर अपना प्रोडक्ट बेच पाएंगे. मध्य प्रदेश सरकार के आजीविका मार्ट ने भी महिलाओं के प्रोडक्ट को अच्छी पहुंच देने में सहायता की.  इसे और भी प्रदेशों में लागू किया जाना चाहिए. स्वसहायता समूहों को मौसमी बदलावों और मार्केट में उतार-चढ़ाव से भी खतरा होता है. बड़े कॉर्पोरेट अपने सीएसआर एजेंडे के तहत इन SHG को समर्थन देने के लिए आगे आएं .</p>
<p dir="ltr">सरकारी व ग़ैर सरकारी प्रयासों से स्वसहायता समूह लगातार उन्नति कर देश की आर्थिक तरक्की को और आगे बढ़ा सकेंगे. सभी को साथ मिलकर एक दिशा में सोच कायम करनी होगी.  <strong id="docs-internal-guid-9f3fea2f-7fff-4a09-6b28-a944c7198424"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 15:01:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/management-and-marketing-is-a-need-of-shgs]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJdumnHJbeQoclLXOGuH.jpg"/></item></channel></rss>