<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ WHO]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/who</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/who" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 07 Jan 2026 21:04:47 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[AIIMS का मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम, हर 8 मिनट में एक मौत से बचाव की कोशिश ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/womens-health/aiims-is-starting-free-cervical-cancer-screening-for-programme-for-women-as-1-woman-dies-every-8-minutes-in-india-10979863</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/aiims-delhi-free-cervical-cancer-screening-programme-2026-01-07-20-58-47.jpg"><p><span>भारत में सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे समय रहते रोका और नियंत्रित किया जा सकता है. इसके बावजूद यह बीमारी हर साल हजारों महिलाओं की जान ले रही है. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत में </span><strong><span>हर 8 मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर से मर जाती है</span></strong><span>. यह स्थिति केवल चिकित्सा व्यवस्था की नहीं, बल्कि नीति, सामाजिक चुप्पी और महिलाओं के स्वास्थ्य को लगातार नजरअंदाज करने की भी कहानी है.</span></p>
<p><span>जनवरी 2026 में AIIMS, नई दिल्ली द्वारा शुरू किया गया </span><strong><span>मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम</span></strong><span> (Free cervical cancer screening programme) इस गंभीर संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.</span><span></span></p>
<h2><span>सर्वाइकल कैंसर क्या है?</span></h2>
<p><span><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/status-of-women-visible-in-resolution-and-justice-letter-manifesto-of-political-parties-4488664">सर्वाइकल कैंसर</a> (Cervical cancer India) गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होने वाला कैंसर है. यह कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होता है. शुरुआती चरणों में इसके लक्षण बेहद मामूली या बिल्कुल नहीं होते, इसी कारण अधिकतर मामलों में इसका पता देर से चलता है.</span></p>
<h3><span>सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण</span></h3>
<p><span>लगभग सभी मामलों में सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण </span><strong><span>ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)</span></strong><span> होता है.</span></p>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>HPV एक सामान्य वायरस है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>यह मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>अधिकतर मामलों में शरीर इसे खुद ही खत्म कर देता है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>लेकिन यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह कैंसर का कारण बन सकता है.</span></p>
</li>
</ul>
<h2><span>भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति: आंकड़े क्या कहते हैं?</span></h2>
<p><span>भारत में <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/women-changed-the-thoughts-of-imliya-village-about-mestrual-hygiene">सर्वाइकल कैंसर</a> महिलाओं में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है.</span></p>
<h3><span>महत्वपूर्ण आंकड़े</span></h3>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>हर साल लगभग </span><strong><span>1.23 लाख नए मामले</span></strong><span> सामने आते हैं.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>अनुमानित </span><strong><span>35,000 से 80,000 महिलाओं की मृत्यु</span></strong><span> प्रतिवर्ष होती है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>दुनिया के कुल सर्वाइकल कैंसर मामलों का लगभग </span><strong><span>20 प्रतिशत भारत में</span></strong><span> पाया जाता है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>नियमित स्क्रीनिंग कराने वाली महिलाओं की संख्या </span><strong><span>2 प्रतिशत से भी कम</span></strong><span> है.</span></p>
</li>
</ul>
<h2 data-start="141" data-end="159">समस्या कहां है?</h2>
<p data-start="161" data-end="692">भारत में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी का पता अक्सर बहुत देर से चलता है. सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण या तो बेहद मामूली होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते. नतीजतन, अधिकांश महिलाएँ तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुँचतीं, जब तक असामान्य रक्तस्राव, लगातार दर्द या गंभीर संक्रमण जैसे लक्षण सामने नहीं आ जाते. चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार भारत में सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले तीसरे या चौथे चरण में पहचाने जाते हैं, जहाँ इलाज जटिल, महँगा और कम प्रभावी हो जाता है.</p>
<p data-start="694" data-end="1168">इस देर से पहचान के पीछे एक बड़ी वजह ग्रामीण और गरीब इलाकों में जांच की सुविधाओं का अभाव भी है. देश की बड़ी महिला आबादी गाँवों और छोटे कस्बों में रहती है, जहाँ HPV DNA टेस्ट या पैप स्मियर जैसी जांच या तो उपलब्ध नहीं हैं या नियमित रूप से नहीं हो पातीं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, लंबी दूरी तय करने की मजबूरी, काम छोड़ने का आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच &mdash; ये सभी कारण मिलकर महिलाओं को समय पर जांच से दूर कर देते हैं.</p>
<p data-start="1170" data-end="1622">इसके साथ-साथ सामाजिक झिझक और जानकारी की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है. सर्वाइकल कैंसर प्रजनन अंगों से जुड़ा होने के कारण अब भी कई परिवारों और समुदायों में इस पर खुलकर बात करना असहज माना जाता है. कई महिलाएँ जांच को शर्म, डर या सामाजिक सवालों से जोड़कर देखती हैं, वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं होती कि नियमित <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indias-first-hiv-aids-researcher-and-activist-dr-suniti-solomon-1715430">स्क्रीनिंग</a> और HPV वैक्सीन उनके जीवन को बचा सकती है. इस चुप्पी और अज्ञान के बीच बीमारी बिना शोर के आगे बढ़ती रहती है.</p>
<h2><span><strong>मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम</strong> का मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम</span></h2>
<p><span><a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/pm-narendra-modi-launches-swasth-nari-sashakt-parivar-abhiyan-on-his-75th-birthday-10476144">AIIMS</a>, नई दिल्ली ने जनवरी 2026 में एक विशेष अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मुफ्त जांच और रोकथाम की सुविधा देना है.</span></p>
<h3><span>इस कार्यक्रम में क्या शामिल है?</span></h3>
<h4><span>महिलाओं के लिए स्क्रीनिंग</span></h4>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>आयु वर्ग: 30 से 65 वर्ष.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>जांच: WHO द्वारा अनुशंसित HPV DNA टेस्ट.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>समय: सोमवार से शुक्रवार.</span></p>
</li>
</ul>
<h4><span>बच्चियों के लिए HPV टीकाकरण</span></h4>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>आयु वर्ग: 9 से 14 वर्ष.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>शनिवार को मुफ्त टीकाकरण.</span></p>
</li>
</ul>
<h4><span>सामुदायिक पहल</span></h4>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>झज्जर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में स्क्रीनिंग शिविर.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>नर्सिंग स्टाफ और प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग की भागीदारी.</span></p>
</li>
</ul>
<h2><span>सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे संभव है?</span></h2>
<h3><span>HPV वैक्सीन</span></h3>
<p><span>HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है.</span></p>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>यह लगभग </span><strong><span>90 प्रतिशत मामलों में कैंसर को रोक सकती है</span></strong><span>.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>भारत में स्वदेशी वैक्सीन </span><strong><span>CERVAVAC</span></strong><span> उपलब्ध है.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>टीकाकरण सबसे प्रभावी किशोरावस्था में होता है.</span></p>
</li>
</ul>
<h3><span>नियमित स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?</span></h3>
<p><span>सर्वाइकल कैंसर के पहले शरीर में प्री-कैंसरस बदलाव आते हैं, जिन्हें जांच के जरिए समय रहते पहचाना जा सकता है.</span></p>
<h4><span>जांच के प्रमुख तरीके</span></h4>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>HPV DNA टेस्ट.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>पैप स्मियर टेस्ट.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>एसिटिक एसिड द्वारा दृश्य परीक्षण.</span></p>
</li>
</ul>
<h2><span>यह केवल स्वास्थ्य नहीं, सामाजिक मुद्दा भी है!</span></h2>
<p><span>महिलाओं के स्वास्थ्य को अक्सर परिवार और समाज में प्राथमिकता नहीं दी जाती. सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियां इसी चुप्पी और उपेक्षा में पनपती हैं. जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है.</span></p>
<p><span>AIIMS जैसे संस्थानों की पहल तभी सफल होगी जब समाज, सरकार और परिवार मिलकर महिलाओं के <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/poshan-pakhwada-spreads-awareness-on-nutrition-and-health">स्वास्थ्य</a> को प्राथमिकता देंगे.</span></p>
<h2><span>WHO का 90-70-90 लक्ष्य और भारत</span></h2>
<p><span>विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए तीन लक्ष्य तय किए हैं:</span></p>
<ul data-spread="false">
<li>
<p><span>90 प्रतिशत लड़कियों का HPV टीकाकरण.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>70 प्रतिशत महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग.</span></p>
</li>
<li>
<p><span>90 प्रतिशत मरीजों को समय पर इलाज.</span></p>
</li>
</ul>
<p><span>भारत के लिए यह केवल एक स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन से जुड़ा प्रश्न है. सर्वाइकल कैंसर कोई अनिवार्य मृत्यु नहीं है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसे समय पर जांच, सही नीति और सामाजिक जागरूकता से रोका जा सकता है. AIIMS का मुफ्त स्क्रीनिंग कार्यक्रम एक शुरुआत है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब महिलाओं के स्वास्थ्य को वास्तविक प्राथमिकता दी जाएगी.</span></p>
<h2 data-start="160" data-end="195">अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)</h2>
<h3 data-start="197" data-end="247">क्या सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?</h3>
<p data-start="248" data-end="333">हाँ, शुरुआती अवस्था में पता चलने पर इसका इलाज संभव है और सफलता दर काफी अच्छी होती है.</p>
<hr data-start="335" data-end="338">
<h3 data-start="340" data-end="385">HPV पॉजिटिव होने का मतलब क्या कैंसर है?</h3>
<p data-start="386" data-end="480">नहीं. इसका मतलब केवल वायरस मौजूद है. ज्यादातर मामलों में शरीर इसे खुद ही नियंत्रित कर लेता है.</p>
<hr data-start="482" data-end="485">
<h3 data-start="487" data-end="519">क्या जांच दर्दनाक होती है?</h3>
<p data-start="520" data-end="584">अधिकतर मामलों में जांच हल्की असुविधा ही देती है, दर्द नहीं होता.</p>
<hr data-start="586" data-end="589">
<h3 data-start="591" data-end="642">क्या अविवाहित महिलाओं को भी जांच करानी चाहिए?</h3>
<p data-start="643" data-end="719">हाँ. उम्र और जोखिम के हिसाब से सभी महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए.</p>
<hr data-start="721" data-end="724">
<h3 data-start="726" data-end="774">क्या पुरुषों को भी HPV वैक्सीन लेनी चाहिए?</h3>
<p data-start="775" data-end="859">हाँ. यह संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद करती है और पुरुषों में भी सुरक्षा देती है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 07 Jan 2026 21:04:47 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/womens-health/aiims-is-starting-free-cervical-cancer-screening-for-programme-for-women-as-1-woman-dies-every-8-minutes-in-india-10979863]]></guid><category><![CDATA[हेल्थ]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/aiims-delhi-free-cervical-cancer-screening-programme-2026-01-07-20-58-47.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/aiims-delhi-free-cervical-cancer-screening-programme-2026-01-07-20-58-47.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जिस्म, दिमाग और रूह की चोट जारी है! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"><p dir="ltr"><span>किसी भी तरह की हिंसा (violence) व्यक्ति समाज देश के लिए सही नहीं होती. समाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर हो रही हिंसा से देश दुनिया की मनोवृति का पता चलता है. महिलाओं के खिलाफ हो रही अलग अलग हिंसा चाहे घर में या बाहर, हर तरह से गलत और निंदनीय है. WHO द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 3 में से 1 (30%) महिला ने अपने जीवनकाल में शारीरिक तथा यौन अंतरंग साथी हिंसा या गैर- साथी यौन हिंसा का शिकार होती है. हिंसा, महिला के शारीरिक, भावनात्मक, यौन और प्रजनन स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती  है. घरों में जब हिंसा या दुर्व्यवहार की बात आती है तो समाज का ध्यान परिवार के सदस्य पर नहीं आता.  एक महिला को अपने परिवार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बहुत साहस की ज़रुरत होती है.</span><span>हमारा देश साक्षरता विज्ञान (Science) टेक्नोलॉजी (Technology) में लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ महिलाओं के साथ हो रही हिंसा में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह ऐसा अपराध है जो रुक नहीं रहा. महिलाओं को कुरीतियों में बांधकर उनके साथ कई तरह के अत्याचार किये जाते है जैसे छेड़छाड़, एसिड अटैक (acid attack), घरेलु हिंसा (domestic violence), बलात्कार (rape), दहेज़ प्रथा (dowry system), भ्रूण हत्या (femicide) आदि. महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों का कारण यह समाज एवं इसकी कुरीतियाँ भी है. यह समाज लड़की के साथ गलत होने पर भी उस लड़की को ही दोष देता है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा 12 जून को जारी 2023 जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स (GSNI) रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि दुनिया भर में दस में से नौ पुरुष और महिलाएं, महिलाओं के बायसनैस रखते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक "<em>दुनियाभर में 69 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पुरुष बेहतर राजनितिक नेता होते हैं, और 40 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं की पुरुष महिलाओं की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अधिकारी बनते है. इसी रिपोर्ट के मुताबिक एक चौकाने वाला सच सामने आया हैं जिसमे  80 देशों के 25 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पतियों द्वारा पत्नियों  को पीटना जायज हैं </em>". लैंगिक सशक्तिकरण (Gender Empowerment) आज दुनियाभर में चर्चा का विषय है. </span><span>राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission For Women) ने 2022 में घरेलु हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा श्रेणी में 6900 से अधिक शिकायते दर्ज की है. महिलाओं के खिलाफ अपराधों की विभिन्न श्रेणियों में NCW द्वारा दर्ज की गयी 30900 से अधिक शिकायतों में से ये मामले लगभग 23 % थे. COVID - 19 महामारी के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल शिकायतों की संख्या 2020 में लगभग 23700 से 30 % से अधिक बढ़कर 2021 में 30800 से अधिक हो गयी हैं. 2022 में अधिकतम शिकायतें तीन श्रेणियों में दर्ज हुई- दहेज़ सहित विवाहित महिलाओं के उत्पीड़न का मामला (15 %), घरेलु हिंसा (domestic violence) के खिलाफ महिलाओं की सुरक्षा (23 %), और सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुरक्षित करने क लिये (31 %).</span></p>
<p dir="ltr"><span>दहेज़ प्रथा एक गंभीर सामाजिक बुराई है जिसके कारण समाज में महिलाओं के प्रति यातनाएँ और अपराध उत्पन्न हुए है और साथ ही में भारतीय वैवाहिक पद्धति प्रदूषित हुई है. हाल ही में इंदौर के देपालपुर जिले में दहेज़ की लालच में शादी के महज 17 दिन बाद ही पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया.</span></p>
<p dir="ltr"><span>एक लड़की के बलात्कार होने के बाद लोग बलात्कारों को गलत साबित करने और उनको सजा दिलाने के बजाय लड़की के चरित्र पर उंगली उठाते है. उसके पहनावे को देखते है और बलात्कारों को गलत कहने के बजाए लड़की के पहनावे पर उंगली उठाते है. लोगो द्वारा यह बोलना की लड़की ने छोटे कपड़े पहने थे इसलिए उसका बलात्कार हुआ है यह उन लड़को और पुरुषों को बढ़ावा देने का काम करता है जो गंदी मानसिकता रखते है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>मेल गेज़ (male gaze), फिल्मो के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में यह 15-30 वर्ष की लड़की ज़रूर अनुभव करती है, जिसमे महिलाओं को केवल एक वस्तु के रूप में देखा जाता है. पुरुषों की नज़र महिलाओं के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है जैसे सड़क पर चलती लड़कियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित होता है की वह ऐसी तो नहीं दिख रही कि कोई पुरुष आकर उनके स्पेस में दखल दे. </span></p>
<p dir="ltr"><span>विश्व के 185 देशों में से 77 देशों में व्यवाहिक बलात्कार को अपराध माना जाता है, जबकि भारत उन 34 देशो में से एक है जो स्पष्ट रूप से व्यवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है. मैरिटल रेप (Marital Rape) या वैवाहिक बलात्कार भारत में अपराध नहीं हैं, अगर कोई पति अपनी पत्नी से उसकी सहमति के बगैर सेक्सुअल रिलेशन (sexual relation) बनाता हैं तो ये मैरिटल रेप कहा जाता है पर इसके लिए कोई सजा का प्रावधान नहीं है. IPC की धारा 375 के, अपवाद 2 में, वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया हैं और कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी ही पत्नी, जो 18 वर्ष से कम की नहीं है, के साथ उसकी सहमति के बिना यौन सम्बन्ध बनाना बलात्कार नहीं है. इसी मामले के समकक्ष में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि एक आरोपी पर दंड संहिता में छूट की परवाह किये बिना मुकदमा चलाया जाना चाहिए - "<em>एक आदमी एक आदमी है; एक कार्य एक कार्य है; बलात्कार, बलात्कार है, भले ही यह किसी , 'पति' पुरुष द्वारा महिला 'पत्नी' पर किया गया हो.</em>" महिलाओं के खिलाफ अधिकांश अपराधों में न्याय और उसका समाधान मिलने में बहुत समय लगता है जिस वजह से अधिकतर महिलाये शिकायत दर्ज ही नहीं कराती है. ZERO FIR के बारे में लोगो को शिक्षित करने की ज़रुरत है , क्यूंकि ज्यादातर महिलाये और पुरुष कानूनी अधिकारों से अनभिज्ञ हैं .</span></p>
<p dir="ltr"><span>सरकारें महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कई प्रयास कर रही है. जैसे हिम्मत app (Delhi Government), वन स्टॉप सेंटर (OCC), महिला हेल्प लाइन (WHAL), उज्ज्वला होम, स्वाधारग्रह, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहयता प्रणाली (112), माय सेफ्टी पिन, जैसे आधुनिक संगठन एप्लीकेशन बनाये गए है. आज के दौर में महिलाओं को जागरूक करने की बहुत ज़्यादा आवश्यकता है. महिलाओं को शिक्षित करने का अर्थ है पुरे परिवार को शिक्षित करना. भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या के समाधान के लिए नई शिक्षा नीति (New Education Policy) में कई प्रमुख बिन्दुओ को शामिल किया जा सकता है, जैसे व्यापक यौन शिक्षा (sex education), लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम (Gender sensitization program), सशक्तिकरण और जीवन कौशल शिक्षा (Empowerment and life skills education), सामुदायिक व्यस्तता (community engagement), मीडिया साक्षरता (media literacy), लैंगिक समानता (gender equality) तथा लैंगिक सशक्तिकरण जैसे सब्जेक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जिससे महिलाओं के प्रति दृष्टिक्रोण में सकारात्मक बदलाव आ सके. छात्रों को उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल में आत्मरक्षा कक्षाएं शुरू करनी चाहिए. महिलाओं की रोज़गार क्षमता तथा व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और परामर्श प्रदान करने की आवश्यकता है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 26 Jun 2023 18:42:24 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"/></item><item><title><![CDATA['फ़ूड सेफटी' में SHG का योगदान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-helps-india-achieve-food-security</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qu6KGDuI6kiCpdiG2Wl2.jpg"><div>खाद्य सुरक्षा (food safety), भोजन बर्बाद ना करना, पौष्टिक खाने की पहचान, भोजन और स्वास्थ्य का कनेक्शन जैसे अहम मुद्दों पर समझ को बढ़ाने के लिए   2019 से वर्ल्ड फ़ूड सेफ्टी डे (World Food Safety Day) मनाया जाने लगा. ये शुरुआत WHO (World Health Organisation) और FAO -फूड एंड एंग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (Food and Agriclture Organisation) ने मिलकर की. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल वैश्विक तौर पर 10 में से एक व्यक्ति दूषित खाना खाकर बीमार पड़ता है. कोई देश इससे अछूता नहीं है. 200 से ज्यादा बीमारियां खाने में बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट और केमिकल्स की वजह से होती हैं. </div>
<div> </div>
<div>भारत में स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) की महिलायें फ़ूड प्रोसेसिंग (Food Processing) और आर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) के क्षेत्र तकनीक को जोड़ने का काम कर रही हैं. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/indias-g20-presidency-boost-nutrition-sensitive-policies-in-agriculture-nutritional-security-for-the-poor"> 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' </a>(International Year of Millet) को बढ़ावा देने के लिए<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/millet-cafe"> SHG महिलायें मिलेट कैफ़े खोल </a> मिलेट से नए तरह के पकवान बना रही हैं. उनके इन प्रयासों की वजह से मिलेट वापिस थालियों में लौट रहा है.  </div>
<div> </div>
<div>कोविड-19 की सबसे बड़ी चुनौती- गरीबी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए मेघालय की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ फ़ूड प्रोसेसिंग का काम शुरू किया. लुमुरियाप और थडियालॉन्ग गांवों की लाहलुती और क्षोखतिलंग महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) में शामिल महिलाओं ने खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण (Food Processing Training) में भाग लिया. इस ट्रेनिंग में उन्होंने बेकरी उत्पाद और अचार बनाना सीखा. साथ ही पैकेजिंग और लेबलिंग करना भी जाना. खाद्य प्रसंस्करण ने इन महिलाओं को आजीविका कमाने का अवसर दिया और वित्तीय समस्याओं को हल किया. </div>
<div> </div>
<div>मेघालय के अलावा ओडिशा राज्य की बीरा हनुमान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिड डे मील की ज़िम्मेदारी संभाली. वे बच्चों के पोषण और स्वच्छ भोजन का ध्यान रखती हैं. नयागढ़ जिले के भापुर प्रखंड के छोटे से गांव मितुआनी में अपने स्कूल में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम संचालित करती हैं. </div>
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<div>स्वयं सहायता समूहों द्वारा फ़ूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/inauguration-of-telangana-food-conclave-includes-more-than-58000-jobs"> तेलंगाना सरकार ने 'फ़ूड कॉन्क्लेव' </a>(Food Conclave) का आयोजन किया. इस कॉन्क्लेव ने 7000 करोड़ रुपयों के निवेश को आकर्षित किया और 58000 से ज़्यादा नौकरियों के रास्ते खोले. मिनिस्ट्री ऑफ़ फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज फ़ूड प्रोसेसिंग से जुड़ी SHG महिलाओं, FPOs, और निर्माता सहकारी समितियों (producer cooperatives) को बढ़ावा देता है. SHG को अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए ट्रेनिंग और निवेश में ख़ास मदद का भी प्रावधान है. </div>
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<div>देशभर में ऐसे कई SHG हैं जो फ़ूड प्रोसेसिंग के ज़रिये न सिर्फ आर्थिक आज़ादी हासिल कर रहे हैं, पर खाद्य सुरक्षा में भी योगदान दे रहे हैं. </div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 07 Jun 2023 13:02:43 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-helps-india-achieve-food-security]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qu6KGDuI6kiCpdiG2Wl2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Qu6KGDuI6kiCpdiG2Wl2.jpg"/></item><item><title><![CDATA['हर 7 सेकंड में 1 मां या नवजात शिशु की मौत' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/one-pregnant-woman-or-newborn-dies-every-7-seconds-says-new-un-report</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIOXV46kFsZierUClOCE.png"><p>कोविड-19 महामारी, बढ़ती ग़रीबी, और मानवीय संकटों की वजह से दुनियाभर की स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव पड़ा है. 10 देशों में से केवल एक के पास अपनी वर्तमान स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त धन है. ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं पर महामारी के प्रभावों को हाल में में आई <a href="https://news.un.org/en/story/2023/05/1136457">डब्ल्यूएचओ (WHO) सर्वे रिपोर्ट</a> से समझा जा सकता है. सर्वे के अनुसार, लगभग 25 % देशों में अभी भी बीमार बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और पोस्ट-नेटल देख-रेख के पर्याप्त इंतिज़ाम नही हैं. </p>
<p>"<em>दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की उच्च दर पर मृत्यु हो रही है. COVID-19 महामारी से स्वास्थ्य प्रणाली को गहरा झटका लगा है", </em>WHO के 'मातृ, नवजात शिशु, बाल और किशोर स्वास्थ्य डायरेक्टर' (Director of Maternal, Newborn, Child and Adolescent Health and Ageing ) डॉ. अंशु बनर्जी (Dr. Anshu Banerjee) ने बताया.</p>
<p>रिपोर्ट से पता चलता है कि हर साल 45 लाख से ज़्यादा महिलाओं और शिशुओं की मौत गर्भावस्था, प्रसव या जन्म के बाद पहले हफ्तों के दौरान हो जाती है. ये हर सात सेकंड में एक मौत के बराबर है. यदि समय पर उचित देखभाल की जाए तो ये आंकड़े कम किये जा सकते हैं, क्योंकि ज़्यादातर मौतें उपचार योग्य वजहों से हुई हैं. </p>
<p>फंडिंग लॉस और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में निवेश की कमी से हेल्थ सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. प्रीमैच्योरिटी पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह है. एक तिहाई से भी कम देशों में छोटे और बीमार बच्चों के इलाज के लिए पर्याप्त न्यूबोर्न केयर यूनिट्स (newborn care units) हैं.</p>
<blockquote>
<p>संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund -UNFPA) में टेक्निकल डिवीज़न (Technical Division) के डायरेक्टर डॉ. जुलिटा ओनाबैंजो ने कहा, "<em>गर्भावस्था या प्रसव के दौरान किसी भी महिला या युवा लड़की की मृत्यु उनके मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है." उन्होंने आगे कहा, "मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए मानव अधिकार और लैंगिक समानता पर बल देने वाली एप्रोच अपनानी होगी. साथ ही खराब मातृ स्वास्थ को बढ़ावा देने वाले कारण जैसी सामाजिक-आर्थिक असमानता, भेदभाव, गरीबी और अन्याय से निपटने के लिए काम करना होगा.</em>"</p>
</blockquote>
<p>आवश्यक दवाओं और पानी-बिजली के साथ कुशल स्वास्थ्य कर्मियों, खासकर दाइयों (midwives) की ज़रुरत है. अपनी प्लानिंग में गरीब महिलाओं और खराब स्थितियों में रह रही महिलाओं को टारगेट कर योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य बनाना होगा.  </p>
<p>भारत में महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का सहारा लिया जा सकता है. ये महिलाएं ज़मीनी स्तर पर वेक्सीन, स्वच्छता, मेंस्ट्रुअल हाइजीन जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं. ये महिलाएं अपने समुदाय में अच्छी जान-पहचान और पकड़ रखती हैं, जिस वजह से इनकी बात को सुना और माना जाता है. इसका फायदा उठाते हुए, SHG महिलाओं को प्रशिक्षित कर मातृ स्वास्थ और नवजात शिशु की सही तरीके से देख-भाल के विषयों पर समुदाय में सही जानकारी दी जा सकती है.    </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 19 May 2023 15:37:26 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/one-pregnant-woman-or-newborn-dies-every-7-seconds-says-new-un-report]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIOXV46kFsZierUClOCE.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cIOXV46kFsZierUClOCE.png"/></item><item><title><![CDATA[हर घर बता रहे SHG - वैक्सीन है सेहत की कुंजी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-contribution-in-vaccination-and-immunization</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg"><p dir="ltr">एकदम सच है कि 'इलाज से बेहतर बचाव है'. बचाव करने का सबसे बेहतर तरीका टीका करण है.&nbsp; एक बार टीका लगवा लिया फिर बीमारी होने की कोई चिंता नहीं. बच्चे का जन्म होते ही टीका लगवाकर उसे आने वाली कई बीमारियों से बचाया जा सकता है. आज अगर कोई वैक्सीन का नाम ले तो कोरोना वैक्सीन का ध्यान सबसे पहले आता है. अभी तक इंडिया में 220 करोड़ लोगों को कोविड-19 वैक्सीन लग चुकी है. वैक्सीन को लेकर ज़ोर -शोर से हुए जागरूकता अभियान सबको याद है, पर क्या ये याद है कि कितनी SHG महिलाओं ने वैक्सीन की अहमियत लोगों को बताई और वैक्सीन को लेकर उनके शक दूर कर उन्हें सही फैक्ट्स बताये ?&nbsp;&nbsp;&nbsp;<strong></strong></p><p dir="ltr">दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 69 लाख से अधिक स्वसहायता समूहों (SHG) को ट्रेनिंग दी. इन SHG महिलाओं ने COVID-19 से बचाव के बारे में खासकर COVID-19 टीकाकरण के लिए जागरूकता फैलाई, सही फैक्ट्स लोगों तक पहुंचाए और अपने समुदाय के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया. SHG ने कमज़ोर समूहों, जैसे कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की पहचान की और उनके टीकाकरण को प्राथमिकता देते हुए उन्हें टीका लगवाने की समझाइश दी. SHG महिलाओं ने टीकाकरण कवरेज दरों को ट्रैक किया और समुदाय में हर किसी के पास टीकाकरण सेवाओं तक पहुंच को सुनिश्चित किया.</p><p dir="ltr">कोविड साल 2019 में आया पर उससे पहले पोलियो ने कई लोगों की ज़िंदगियों को बर्बाद किया. 1972 से पल्स पोलियों अभियान शुरू हुआ और 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इंडिया को पोलियो फ्री देश घोषित किया. चार दशकों की इस मुहीम में SHG महिलाओं ने बहुत सहयोग दिया और ये वहां तक पहुंची जहां स्वास्थ्य कर्मी भी नहीं जा पा रहे थे. इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक सर्वे के अनुसार, जहां सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने 64% कवरेज किया वहीं SHG 92% आबादी तक पहुंचे. जर्नल ऑफ हेल्थ, पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन ने बताया कि SHG झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले और प्रवासी श्रमिकों जैसी 85% कमज़ोर आबादी तक पहुंचे जहां सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच बस 58% आबादी तक थी. यूनिसेफ इंडिया ने भी पल्स पोलियों अभियान में मिले SHG के योगदान को सराहा.&nbsp;&nbsp;<strong></strong></p><p dir="ltr">एक और सर्वे ने बताया कि बच्चों के टीकाकरण में भी SHG महिलाओं ने बहुत सहयोग किया, ये आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले 75% बच्चों तक पहुंची और उनका टीकारण करवाया. हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, काली खांसी (पर्टुसिस), हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल रोग और&nbsp;</p><p dir="ltr">रोटावायरस जैसी कई जानलेवा बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वसहायता समूह की महिलाओं ने लोगों को न सिर्फ वैक्सीन की ज़रुरत को समझाया पर उन्हें टीकाकरण सेंटर तक भी पहुंचाया. 'पहला सुख, निरोगी काया' की कहावत को ज़मीन पर लागू कर अपनी सेहत का ख़ुद ध्यान&nbsp; रखना और समय पर बच्चे को टीका लगवाने को समाज की आदत बनाया.&nbsp;&nbsp;</p><p dir="ltr">स्वास्थ्य के बिना प्रगति कर पाना नामुमकिन है और सेहतमंद रहने के लिए टीकारण से बेहतर कोई उपाय नहीं. रविवार विचार का मानना है कि SHG महिलाओं को ट्रेनिंग देकर हर तबके के स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सकता है. समुदाय में आसान पहुंच और लोगों से जान-पेहचा होने कि वजह से उनकी बात मानी जाती है और उनकी समझाइश का गहरा प्रभाव भी पड़ता है. इन समूहों की मदद से टीकाकरण ही नहीं, परिवार नियोजन, मातृत्व स्वास्थ, और किशोरी स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सकता है. तभी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'वन अर्थ, वन हेल्थ' का सपना साकार हो सकेगा.&nbsp;&nbsp;</p><p><strong id="docs-internal-guid-3b89ea56-7fff-24f6-78e9-77fc3812d7bc"><br><br><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 12:25:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-contribution-in-vaccination-and-immunization]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gyahFeWX0luQEiZu7UU1.jpg"/></item><item><title><![CDATA['ईयर ऑफ द मिलेट्स 2023' के साथ SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shgs-working-for-year-of-the-millets-2023</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/msAvV6xFkC7izZ0zlvKA.jpeg"><p dir="ltr">मिलेट्स को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान तब गया जब आधुनिक मान लिए जाने वाले धान,गेहूं का उपयोग खाने में बढ़ गया. नतीजा बीमारी जैसे दुष्परिणाम देखने को मिले. आखिरकार दुनिया ने मोटे अनाज की तरफ रुख किया. WHO ने साल 2023 को 'ईयर ऑफ द मिलेट' घोषित किया. भारत में तो इसे प्राचीन कल्चर फ़ूड के रूप में लोग उपयोग करते रहे. जुवार,बाजरा,कोदो,कुटकी जैसे अनाज का हमारे आदिवासी और ग्रामीणों का पुराना रिश्ता रहा. भारत में कई स्वसहायता समूहों ने मिलेट्स के उत्पादन में बढ़ चढ़कर योगदान दिया। SHG ने मिलेट्स की खेती को बढ़ावा दिया, नई रेसिपी खोजी, किसीने कुकीज़ तो किसीने डोसा बनाया।  </p>
<p><iframe style="width: 1226px; height: 688px;" src="https://www.youtube.com/embed/aP6HVGbf94Y?t=4s" width="1226" height="688" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 03 Mar 2023 18:37:47 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shgs-working-for-year-of-the-millets-2023]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/msAvV6xFkC7izZ0zlvKA.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/msAvV6xFkC7izZ0zlvKA.jpeg"/></item></channel></rss>