<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ World Bank]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/world-bank</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/world-bank" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Workspace में समान अधिकारों के लिए महिलाओं की लड़ाई आज भी जारी! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"><p style="text-align: justify;">कल्पना कीजिए एक ऐसी working space, जहां हर कामकाजी महिला को उसकी योग्यता और क्षमता के अनुसार समान अवसर और सम्मान मिले; जहां वेतन में कोई भेदभाव ना हो और हर महिला को उसके काम के लिए उचित मेहनताना मिले. दुर्भाग्यवश, वास्तविकता इस कल्पना से काफी दूर है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में, महिलाओं को workplace पर समान अधिकार प्राप्त करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. इनमें वेतन का अंतर, working hours में असमानता, लीडरशिप रोल्स से दूरी, कानूनी अधिकारों के प्रति गैर ज़िम्मेदारी और करियर में उन्नति के अवसरों में भेदभाव मुख्या रूप से देखने को मिलते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/taliban-rule-ending-the-existence-of-afghan-women-by-snatching-their-basic-human-rights-and-now-reintroducing-its-capital-punishment-of-stoning-women-to-death-in-cases-of-adultery-as-per-the-shariya-laws-4469485">अफ़गानी महिलाओं के अस्तित्व को ख़त्म करता 'तालिबान शासन'!</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">समान अधिकारों की कमी एक सामाजिक समस्या</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों (Equal Work Rights) की स्थिति आज भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है. यह विषय सिर्फ कानूनी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या के रूप में भी उभरता है. विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, दुनिया की सभी राष्ट्रों में, यहां तक कि सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में भी, एक महत्वपूर्ण लैंगिक अंतर (gender gap) मौजूद है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं को पुरुषों के समान रोज़गार के अवसर प्राप्त ही नहीं होते हैं और उनके पास कानूनी अधिकार भी कम होते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, केवल कानूनी उपायों से इस समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सकता. सामाजिक मान्यताओं और रूढ़िवाद के कारण, महिलाओं को अक्सर उच्च पदों या बेहतर वेतन वाली नौकरियों में कम ही प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है. इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियों और जॉब की मांगों के बीच संतुलन बनाने में भी महिलाएं अधिक दबाव का सामना करना पड़ता हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">इस संघर्ष के हैं कई कारण</h2>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं द्वारा अपने हक़ के लिए लड़ाई आज भी जारी हैं जिसके लिए कई पहलू ज़िम्मेदार हैं.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सामाजिक मान्यताएं और लिंग भेदभाव:</strong> भारतीय समाज में प्रचलित लिंग आधारित भूमिकाएं महिलाओं को परंपरागत रूप से निचले स्थान पर रखती हैं. इसके कारण महिलाओं को उच्च पदों पर पहुंचने और उनके व्यावसायिक कौशल को मान्यता देने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>वेतन में असमानता:</strong> महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है, यहां तक कि जब वे समान काम करती हैं. इस वेतन अंतर का मुख्य कारण लिंग आधारित रूढ़िवाद सोच है. कई बार तो इस बात को यह कहकर ताल दिया जाता है कि महिलाओं को कमाने की ख़ास ज़रूरत नहीं होती. और अगर कहीं महिला एक पुरुष से ज़्यादा कमा लेती है तो वह बात पुरुष के "ego" को ठेस पहुंचाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कार्य और घर की जिम्मेदारियों का दोहरा बोझ:</strong> महिलाओं से अक्सर घरेलू जिम्मेदारियों और ऑफिस के कामों दोनों की अपेक्षा की जाती है. इससे उनके करियर के विकास में बाधा आती है. समाज को यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अगर कोई महिला विवाहित है और उसका कोई बच्चा भी है, तो यह पति और पत्नी दोनों की ज़िम्मेदारी होती है कि वह मिलकर चीज़ें संभालें ना कि किसी एक पर सारा बोझ झोंक दिया जाए.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पेशेवर विकास के अवसरों में भेदभाव:</strong> महिलाओं को अक्सर प्रमोशन और व्यावसायिक विकास के समान अवसर नहीं दिए जाते हैं, जो उन्हें पुरुष सहकर्मियों के समान पदों तक पहुंचने से रोकता है. इससे होता यह है कि पुरुषों के लिए कभी किसी महिला का आगे आना एक चौकाने वाली बात बन जाती है और वहां शायद उनकी ईर्ष्या बढ़ जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कानूनी और नीतिगत समर्थन की कमी:</strong> भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून मौजूद ज़रूर हैं, लेकिन इन कानूनों का पालन अक्सर कमजोर पड़ जाता है. इससे महिलाओं को उनके अधिकारों का पूरा लाभ उठाने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल पर असुरक्षा:</strong> महिलाओं को कार्यस्थल पर अक्सर यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो उनकी नौकरी में बने रहने और प्रोफेशनल तरक्की की संभावनाओं को प्रभावित करता है. आज इससे निपटने के लिए कई क़ानून और कदम उठाये जा रहे हैं परन्तु क्या यह कदम केवल एक कागज़ पर लिखे शब्दों से आगे बढ़ पाएं हैं?</li>
</ul>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/a-14-year-old-girl-in-mumbai-commits-suicide-because-of-the-stress-of-her-first-period-4440778">Periods के stress के वजह से की आत्महत्या...</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाओं को समान अवसर ना मिलना है चिंता का विषय</h2>
<p>World Economic Forum के 2023 के Global Gender Gap Index (GGG) में भारत को 146 राष्ट्रों में से 127वें स्थान पर रखा गया है. World Inequality Report 2022 दिखाती है कि भारत में पुरुषों के पास श्रम आय का 82% हिस्सा है, जबकि महिलाओं की आय केवल 18% है.</p>
<p>ये आंकड़े भारत में लिंग आधारित असमानताओं (gender based differences) की गहराई को उजागर करते हैं. इस प्रकार के अंतराल से महिलाओं के समाज में और अधिक सक्रिय और सफल होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं. इसके निवारण के लिए, नीति निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि लिंग आधारित असमानताओं को कम किया जा सके और महिलाओं को उनके योग्य स्थान दिलाया जा सके. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, और कानूनी अधिकारों में सुधार, साथ ही साथ सामाजिक जागरूकता और बदलाव आवश्यक हैं.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/shg-got-work-opportunity-women-tried-to-find-shortcuts-in-seoni-3828653">Seoni SHG को रोजगार का मौका दिया, ढूंढने लगी शॉर्टकट</a></p>
<p>भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों की स्थिति विश्व बैंक (World Bank) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों में बार-बार चिंताजनक रूप से सामने आती है. भारत सरकार ने भी महिलाओं के कार्यस्थल पर समानता सुनिश्चित करने के लिए कई कानूनी उपाय किए हैं. उदाहरण के लिए, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और इसके संशोधनों ने महिलाओं को अधिक समर्थन और सुरक्षा प्रदान की है.</p>
<p>इसी तरह, यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून, 2013 महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए लागू किया गया है. मगर आज भी यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर भेदभाव एक प्रमुख समस्या है, जो उनके आर्थिक विकास और सामाजिक समानता में बाधक है.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/these-shg-women-from-sambalpur-district-were-betrayed-by-sambalpur-municipal-corporation-not-taking-them-to-puri-parikrama-project-3647680">Puri Parikrama project में जाने से रोका SHG महिलाओं को !</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471]]></guid><category><![CDATA[शर्मिन्दा]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"/></item><item><title><![CDATA[आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर ग्रामीण महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/rural-women-breaking-stereotypes-and-recognizing-their-rights</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg"><h2><span>ग्रामीण भारत में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का महत्व</span></h2>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण भारत में महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, महिलाएं रूढ़िवादिता को तोड़कर अपने अधिकारों को पहचान रहीं है. SBI बैंक (<strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance">SBI Bank</a></strong>) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में महिलाओं की राशि में 4,618 रूपए की वृद्धि हुई है, जिससे उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सशक्त बनने का मौका मिल रहा है. अधिकांश महिलाएं प्रमुख डिसीजन मेकर्स के रूप में कार्यभार संभाल कर, अपने आय स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से नए उद्योगों की तलाश में है. इससे उन्हें जॉब क्रिएटर बनने का मौका मिला है.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>लोन (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/arsrlm-providing-loans-to-shg-women-for-their-business">Loan</a>)</strong>, <strong>प्रौद्योगिकी तक पहुंच</strong>, <strong>वर्ल्ड बैंक (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment">World Bank</a>)</strong> जैसी एजेंसीज, <strong>सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (self help groups)</strong> और&nbsp;<strong>नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस (NGO)</strong> और अन्य संस्थान द्वारा अधिक सक्रिय दृष्टिकोण और <strong>प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) </strong>के तहत महिला समूहों को शून्य ब्याज़ के दर पर लोन मिलने से बैंक खातों में तेजी से विस्तार हो रहा हैं. इन्हीं कुछ कारणों की वजह से ग्रामीण महिलाओं में बदलाव की शुरुआत हुई हैं. आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि <strong>ग्रामीण महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR)</strong> 2018&nbsp; -19 में 19.7% से बढ़कर 2020-21 में 27.7% हुआ हैं. </span><span>रूरल डिपाजिट में विमेंस डिपॉजिट्स कि संख्या 25% से बढ़कर 2023 में 30% हो गई हैं. अगर हम <strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">PMJDY</a></strong> लाभार्थियों की बात करें तो&nbsp; इसमें 55% से अधिक महिलाएं हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>कुछ वर्षों पहले देखा जाए, तो महिलाएं मुख्य रूप से कृषि के काम में लगीं थीं, लेकिन अब अपने आय के स्तर को बढ़ावा देने के लिए&nbsp; वैकल्पिक रोजगार के लिए नए-नए उद्यमों की तलाश कर रहीं, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे, साथ ही अलग-अलग संसथान और बैंकों के द्वारा दी जा रहीं योजनाएं और कार्यक्रम, उन्हें आर्थिक सहायता दिलाने में मदद कर रहे हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण क्षेत्रों में ये बदलाव उदाहरण के रूप में शाबित हो रहे हैं. ऐसी ही एक कहानी हैं दरभंगा कि रहने वाली कलापा झा की, जिन्होंने अपनी भाभी उमा झा के साथ बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र से अचार और चटनी का ब्रांड स्टोर लांच किया, अब वह अपने परिवार के ख़र्चे खुद संभाल रहीं है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पुरे देश में प्रयास किये जा रहे हैं. इससे महिलाओं में आर्थिक स्वतंत्रता में सुधार आएगा. महिलाएं भी सामर्थ्य और साहस के साथ रूढ़िवादिता को छोड़कर आगे बढ़कर, सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित हो रहीं.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 03 Aug 2023 18:40:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/rural-women-breaking-stereotypes-and-recognizing-their-rights]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Kll1OHppCUWW3PJTe22i.jpg"/></item><item><title><![CDATA[वर्ल्ड बैंक के साथ NRLM के लक्ष्य हो रहे पूरे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg"><p>ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने विश्व बैंक (World Bank) और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) के साथ <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024"> ग्रामीण विकास पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया </a>- 'इवॉल्विंग इंडिया: री-इमेजिनिंग रूरल डेवलपमेंट फॉर शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी' (‘Evolving India: Re-imagining Rural Development for Shared Prosperity’). विश्व बैंक एक लम्बे अरसे से भारतीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का सहयोगी बना रहा है. वर्ल्ड बैंक ने भारत का, निवेश, साझेदारी विकास, डाटा इकट्ठा करने और अहम मुद्दों पर समझ बढ़ाने में केंद्र और राज्य सरकारों का समर्थन किया है. </p>
<p>विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर अगस्टे तानो कौमे (World Bank Country Director, India Shri Auguste Tano Koume) ने कहा कि भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच साझेदारी से भारत के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि उभरता हुआ भारत ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के अवसरों की खोज में है. ग्रामीण परिवेश में आजीविका की खोज NRLM द्वारा गठित स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़कर पूरी हो रही हैं. </p>
<p>वर्ल्ड बैंक ने भारत के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका परियोजना (NRLP), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) समेत बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना (BRLP), आंध्र प्रदेश ग्रामीण समावेशी विकास परियोजना (APRIGP), और तमिलनाडु ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (TNRTP) जैसे प्रोजेक्ट्स का समर्थन किया है. विश्व बैंक द्वारा समर्थित इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य  भारत में ग्रामीण समुदायों की आजीविका अवसरों को बढ़ाना है. वर्ल्ड बैंक के द्वारा चलाये जा रहे प्रोजेक्ट्स के ज़रिये स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को क्षमता निर्माण, बैंक लिंकेज, कौशल विकास, समेत मैनेजमेंट ट्रेनिंग भी दी जा रही है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 09 Jun 2023 14:07:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG मुहिम में 1 करोड़ परिवार होंगे शामिल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg"><p><strong>ग्रामीण महिलाएं </strong>(rural women)<strong> आर्थिक क्रांति</strong> (financial revolution) की अगुवाई कर रही हैं. ये ताकत उन्हें <strong>स्वयं सहायता समूह</strong> (Self Help Group) से मिली. इनकी सफलता को देखते हुए, सरकार और महिलाओं को समूह (SHG) से जोड़ने की प्लानिंग कर रही है. <strong>राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन</strong> (NRLM) को <strong>ग्रामीण विकास मंत्रालय</strong> (Ministry of Rural Development) ने, ग्रामीण परिवारों के <strong>आर्थिक बदलाव और समृद्धि </strong>हासिल करने का सबसे कारगर ज़रिया माना. इस मिशन से आ रहे बदलावों और प्रगति को देखते हुए सरकार की अगली कोशिश इस दायरे को बढ़ाने की होगी. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uTqxUKXpQNcSyDiFv6Sc.jpg" alt="10 crore SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Jagran</em></span></p>
<p>देशभर में <strong>नौ करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण परिवेश की महिलाएं</strong> स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group) से जुड़ी हैं. इनके <strong>आर्थिक बदलाव</strong> को देखते हुए, सरकार <strong>2024 से पहले इस संख्या को दस करोड़ (10 Crore) तक पहुंचाना</strong> चाहती है. जिसके बाद स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये <strong>दस करोड़ ग्रामीण परिवार</strong> इस योजना का लाभ ले सकेंगे. इसी लक्ष्य के साथ<strong> 'देश की समृद्धि में गांवों की भागीदारी' </strong>बढ़ाने पर <strong>नई दिल्ली </strong>में <strong>दो दिन का सम्मेलन</strong> शुरू किया गया. <strong>विश्व बैंक</strong> (World Bank) और <strong>बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन</strong> (Bill & Melinda Gates Foundation) के सहयोग से सम्मलेन का  आयोजन किया गया. इवेंट का शुभारंभ <strong>केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह</strong> (Giriraj Singh) ने किया. </p>
<p>ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की <strong>आजीविका में 19% और बचत में 28% की बढ़ोतरी </strong>हुई है. मंत्रालय और कार्यक्रम से जुड़े <strong>अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े.</strong> गिरिराज सिंह ने उन्हें दस करोड़ पात्र महिलाओं को 2024 से पहले, स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य दिया. देश की समृद्धि में गांवों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए नै नीतियां बनाई जायेंगी. </p>
<p>केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि समूह की महिलाओं से देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. आने वाले दिनों में, महिला स्वयं सहायता समूह भारत में बदलाव का अहम ज़रिया बनेंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 08 Jun 2023 17:46:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg"/></item><item><title><![CDATA[दीदी ओ दीदी... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/didi-ki-rasoi-initiative-of-women-shg-supported-by-jeevika-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg"><p dir="ltr">माँ के हाथ के खाने का स्वाद, बस यही तो चाहिए हर जगह ! स्कूल हो, कॉलेज हो, बैंक हो, या हॉस्पिटल, व्यक्ति को अगर एक प्लेट स्वादिष्ट खाना मिल जाए तो उसका दिन बन जाता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पहली बार 2018 में विश्व बैंक (World Bank) समर्थित बिहार परिवर्तनकारी विकास परियोजना के हिस्से के रूप में 'दीदी की रसोई' की शुरुआत हुई. यह 'बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी' (JEEVIKA) द्वारा किए गए कई उद्यम प्रोत्साहन पहलों (enterprise promotion initiative) में से एक है. पहली 'Didi ki Rasoi' बिहार के वैशाली जिले में स्थापित हुई, जो राज्य के सभी 38 जिलों में खाने के सेवाएं पहुंचा रही थी. अभी किए समय में  83 से ज़्यादा ऐसे व्यवसाय बिहार में सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, बैंकों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में चल रहें हैं. इस पहल में 1,200 से अधिक महिला कार्यकर्ता और 150 फूलटाइम कर्मचारी हैं. </p>
<p dir="ltr">'JEEVIKA' महिलाओं को यह रसोई शुरू करने के लिए ब्याज देता है, जबकि Cluster Level Federations (CLF) मशीनें और बर्तन प्राप्त करवाते हैं. CLF में स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाएं शामिल हैं, जो स्वच्छता, बहीखाता पद्धति और ग्राहक सेवा के साथ तकनीकी और मैनेजमेंट के की सात दिन की ट्रेनिंग लेती है. सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, स्कूलों, बैंकों और अन्य संस्थानों में घर जैसे स्वाद का खाना मिलता है जो ना ही किफायती है बल्कि कई ज़्यादा पौष्टिक भी है. खाना बनाने के लिए ज़्यादातर कच्चा माल स्थानीय किसानों और 'JEEVIKA' के सपोर्ट से चल रहे समूहों से लिया जाता है. Self Help Groups की महिलाओं के लिए ऐसी पहल बहुत बड़ा कदम साबित होती है. बिहार के बहुत सी महिलाएं इस पहल से जुड़कर अपना घर और अपने जीवन को सुधार पाई है. देश एक अन्य राज्यों में भी इस तरह की पहल शुरू होनी चाहिए ताकि महिलाएं सशक्त बना पाएं.<strong id="docs-internal-guid-46543ce9-7fff-91d1-5a3a-35dd0e158c07"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 09 May 2023 13:37:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/didi-ki-rasoi-initiative-of-women-shg-supported-by-jeevika-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/I0F9PP51i6YGDt8BYu8b.jpg"/></item></channel></rss>