<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ World Economic Forum]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/world-economic-forum</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/world-economic-forum" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Workspace में समान अधिकारों के लिए महिलाओं की लड़ाई आज भी जारी! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"><p style="text-align: justify;">कल्पना कीजिए एक ऐसी working space, जहां हर कामकाजी महिला को उसकी योग्यता और क्षमता के अनुसार समान अवसर और सम्मान मिले; जहां वेतन में कोई भेदभाव ना हो और हर महिला को उसके काम के लिए उचित मेहनताना मिले. दुर्भाग्यवश, वास्तविकता इस कल्पना से काफी दूर है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में, महिलाओं को workplace पर समान अधिकार प्राप्त करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. इनमें वेतन का अंतर, working hours में असमानता, लीडरशिप रोल्स से दूरी, कानूनी अधिकारों के प्रति गैर ज़िम्मेदारी और करियर में उन्नति के अवसरों में भेदभाव मुख्या रूप से देखने को मिलते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/taliban-rule-ending-the-existence-of-afghan-women-by-snatching-their-basic-human-rights-and-now-reintroducing-its-capital-punishment-of-stoning-women-to-death-in-cases-of-adultery-as-per-the-shariya-laws-4469485">अफ़गानी महिलाओं के अस्तित्व को ख़त्म करता 'तालिबान शासन'!</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">समान अधिकारों की कमी एक सामाजिक समस्या</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों (Equal Work Rights) की स्थिति आज भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है. यह विषय सिर्फ कानूनी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक समस्या के रूप में भी उभरता है. विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, दुनिया की सभी राष्ट्रों में, यहां तक कि सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में भी, एक महत्वपूर्ण लैंगिक अंतर (gender gap) मौजूद है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं को पुरुषों के समान रोज़गार के अवसर प्राप्त ही नहीं होते हैं और उनके पास कानूनी अधिकार भी कम होते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, केवल कानूनी उपायों से इस समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सकता. सामाजिक मान्यताओं और रूढ़िवाद के कारण, महिलाओं को अक्सर उच्च पदों या बेहतर वेतन वाली नौकरियों में कम ही प्रतिनिधित्व का मौका मिलता है. इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियों और जॉब की मांगों के बीच संतुलन बनाने में भी महिलाएं अधिक दबाव का सामना करना पड़ता हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">इस संघर्ष के हैं कई कारण</h2>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं द्वारा अपने हक़ के लिए लड़ाई आज भी जारी हैं जिसके लिए कई पहलू ज़िम्मेदार हैं.</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>सामाजिक मान्यताएं और लिंग भेदभाव:</strong> भारतीय समाज में प्रचलित लिंग आधारित भूमिकाएं महिलाओं को परंपरागत रूप से निचले स्थान पर रखती हैं. इसके कारण महिलाओं को उच्च पदों पर पहुंचने और उनके व्यावसायिक कौशल को मान्यता देने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>वेतन में असमानता:</strong> महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है, यहां तक कि जब वे समान काम करती हैं. इस वेतन अंतर का मुख्य कारण लिंग आधारित रूढ़िवाद सोच है. कई बार तो इस बात को यह कहकर ताल दिया जाता है कि महिलाओं को कमाने की ख़ास ज़रूरत नहीं होती. और अगर कहीं महिला एक पुरुष से ज़्यादा कमा लेती है तो वह बात पुरुष के "ego" को ठेस पहुंचाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कार्य और घर की जिम्मेदारियों का दोहरा बोझ:</strong> महिलाओं से अक्सर घरेलू जिम्मेदारियों और ऑफिस के कामों दोनों की अपेक्षा की जाती है. इससे उनके करियर के विकास में बाधा आती है. समाज को यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अगर कोई महिला विवाहित है और उसका कोई बच्चा भी है, तो यह पति और पत्नी दोनों की ज़िम्मेदारी होती है कि वह मिलकर चीज़ें संभालें ना कि किसी एक पर सारा बोझ झोंक दिया जाए.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पेशेवर विकास के अवसरों में भेदभाव:</strong> महिलाओं को अक्सर प्रमोशन और व्यावसायिक विकास के समान अवसर नहीं दिए जाते हैं, जो उन्हें पुरुष सहकर्मियों के समान पदों तक पहुंचने से रोकता है. इससे होता यह है कि पुरुषों के लिए कभी किसी महिला का आगे आना एक चौकाने वाली बात बन जाती है और वहां शायद उनकी ईर्ष्या बढ़ जाती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कानूनी और नीतिगत समर्थन की कमी:</strong> भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून मौजूद ज़रूर हैं, लेकिन इन कानूनों का पालन अक्सर कमजोर पड़ जाता है. इससे महिलाओं को उनके अधिकारों का पूरा लाभ उठाने में कठिनाई होती है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल पर असुरक्षा:</strong> महिलाओं को कार्यस्थल पर अक्सर यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जो उनकी नौकरी में बने रहने और प्रोफेशनल तरक्की की संभावनाओं को प्रभावित करता है. आज इससे निपटने के लिए कई क़ानून और कदम उठाये जा रहे हैं परन्तु क्या यह कदम केवल एक कागज़ पर लिखे शब्दों से आगे बढ़ पाएं हैं?</li>
</ul>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/a-14-year-old-girl-in-mumbai-commits-suicide-because-of-the-stress-of-her-first-period-4440778">Periods के stress के वजह से की आत्महत्या...</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाओं को समान अवसर ना मिलना है चिंता का विषय</h2>
<p>World Economic Forum के 2023 के Global Gender Gap Index (GGG) में भारत को 146 राष्ट्रों में से 127वें स्थान पर रखा गया है. World Inequality Report 2022 दिखाती है कि भारत में पुरुषों के पास श्रम आय का 82% हिस्सा है, जबकि महिलाओं की आय केवल 18% है.</p>
<p>ये आंकड़े भारत में लिंग आधारित असमानताओं (gender based differences) की गहराई को उजागर करते हैं. इस प्रकार के अंतराल से महिलाओं के समाज में और अधिक सक्रिय और सफल होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं. इसके निवारण के लिए, नीति निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि लिंग आधारित असमानताओं को कम किया जा सके और महिलाओं को उनके योग्य स्थान दिलाया जा सके. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, और कानूनी अधिकारों में सुधार, साथ ही साथ सामाजिक जागरूकता और बदलाव आवश्यक हैं.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/shg-got-work-opportunity-women-tried-to-find-shortcuts-in-seoni-3828653">Seoni SHG को रोजगार का मौका दिया, ढूंढने लगी शॉर्टकट</a></p>
<p>भारत में महिलाओं के समान कार्य अधिकारों की स्थिति विश्व बैंक (World Bank) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों में बार-बार चिंताजनक रूप से सामने आती है. भारत सरकार ने भी महिलाओं के कार्यस्थल पर समानता सुनिश्चित करने के लिए कई कानूनी उपाय किए हैं. उदाहरण के लिए, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और इसके संशोधनों ने महिलाओं को अधिक समर्थन और सुरक्षा प्रदान की है.</p>
<p>इसी तरह, यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून, 2013 महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए लागू किया गया है. मगर आज भी यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर भेदभाव एक प्रमुख समस्या है, जो उनके आर्थिक विकास और सामाजिक समानता में बाधक है.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/these-shg-women-from-sambalpur-district-were-betrayed-by-sambalpur-municipal-corporation-not-taking-them-to-puri-parikrama-project-3647680">Puri Parikrama project में जाने से रोका SHG महिलाओं को !</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Thu, 25 Apr 2024 18:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/sharminda/women-struggle-for-equal-rights-and-opportunities-in-the-workplace-continues-even-today-4517471]]></guid><category><![CDATA[शर्मिन्दा]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Mk6FQxy0zBSOqpX7ufME.png"/></item><item><title><![CDATA[महिला उत्थान में CSR का महत्व ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/importance-of-csr-in-women-empowerment-4506608</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JWSOHr9lybEbc5ptIPQX.png"><p style="text-align: justify;"><span>कॉर्पोरेट एक ऐसी दुनिया जहां लाभ (Profit) ही सबकुछ है, वहां कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility CSR) सामाजिक विकास का लाभ कमाने के साथ सकारात्मक बदलाव के प्रतीक के रूप में उभरा है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>बढ़ती CSR गतिविधियों ने व्यवसाय और समाज दोनों पर प्रभाव डाला है. वैश्विक परिदृश्य से लेकर देश के CSR पर नज़र डाले तो देखने में आता है कि CSR में महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित पहलों में उल्लेखनीय वृद्धि है. विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की एक रिपोर्ट के अनुसार 80% से अधिक सीईओ व्यवसाय और सामाजिक जिम्मेदारी के आवश्यक एकीकरण में विश्वास रखते है. बड़े कॉर्पोरेट्स अब <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/government-increasing-women-participation-women-led-development-and-women-empowerment-by-implementing-women-centric-schemes-in-india-2049502">महिलाओं के उत्थान के लिए बनाई गई पहलों</a> पर विशेष जोर देते हुए व्यापक रणनीतियां बना रहे है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>2021 में, ग्लोबल सीएसआर ट्रैकर (Global CSR Tracker) से पता चला की सामाजिक पहल (social initiatives) पर कॉर्पोरेट खर्च में 15% की बढ़ोतरी के साथ यह 22.9 बिलियन डॉलर तक पहुंचा. इसमें महत्वपूर्ण यह है की, 32% विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने कार्यक्रमों के लिए आवंटित किया गया. इससे सतत विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित होती है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>भारत में 2013 के कंपनी अधिनियम (The Companies Act of 2013) ने CSR पहल को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस कानूनी आदेश ने कंपनियों को अपने मुनाफे का एक प्रतिशत CSR के लिए आवंटित करने को अनिवार्य किया. भारत के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने खुलासा किया कि 2020-21 के दौरान CSR पर 18,904 करोड़ रुपये (लगभग 2.5 बिलियन डॉलर) खर्च किए गए. इसका 20% महिला शिक्षा, महिला स्वास्थ्य और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर खर्च किया गया.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/state-level-organisation-of-nayi-chetna-2-has-been-organized-in-raipur-chhattisgarh-2023039">भारत की बेटियों के लिए Nayi Chetna-2.0 की शुरुआत</a></span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><span>महिला सशक्तिकरण पर CSR पहल</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>विश्व स्तर पर कंपनियां लैंगिक अंतर (gender gap) को पाटने वाली पहल में निवेश करके बदलाव ला रहे है. विकासशील देशों में महिलाओं को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए डिजिटल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाले कार्यक्रमों के साथ यह पहल आगे बढ़ रही है. महिलाओं के लिए बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं में CSR सबसे महत्वपूर्ण है. वैश्विक स्तर पर टीकाकरण अभियान इसका उदाहरण है. साथ ही महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास भी लगातार CSR के माध्यम से हो रहे है. महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करने के केंद्र में CSR है. CSR के माध्यम से हो रही ऐसी पहल, ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना रही है. महिला उद्यमिता (entrepreneurship) की भावना को बढ़ने के लिए कई CSR अभियान शुरू हुए है. डिजिटल लिंग अंतर (digital gender gap) एक गंभीर वैश्विक चिंता है. 'वीमेन विल' (Women Will) और 'स्किल टू सक्सीड' (Skill to Succeed) जैसी CSR पहल, इस अंतर को पाटने के लिए सक्रिय है.</span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><span>CSR का सफर</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>20वीं सदी के अंत तक, CSR ब्रांड वैल्यू (brand value) बढ़ाने और सस्टेनेबिलिटी (sustainability) को बढ़ावा देने का एक साधन बन गया. दुनिया भर की सरकारों ने CSR की आवश्यकता को पहचाना. भारत के कंपनी अधिनियम (Companies Act) जैसे कानून ने न केवल CSR गतिविधियों को अनिवार्य किया बल्कि उन्हें औपचारिक रूप भी दिया. उन्हें व्यावसायिक नीतियों में एकीकृत किया गया, जो सामाजिक कल्याण के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता को दर्शाता है. CSR ने मुनाफे, लोगों और समाज के बीच सामंजस्य स्थापित किया. व्यवसायों ने सफलता को न केवल वित्तीय दृष्टि से, बल्कि सतत विकास को बढ़ावा देने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय योगदान से भी मापना शुरू कर दिया. CSR ने अपना दायरा बढ़ाया, जिम्मेदारी का एक धागा बुना जो संपूर्ण व्यवसाय और उत्पाद को शामिल करता है.</span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><span>CSR का भविष्य</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>उभरती वैश्विक चुनौतियों के बावजूद CSR का विकास जारी रहने की उम्मीद है. CSR समाज में कॉर्पोरेट्स की बदलती भूमिका को प्रतिबिंबित करता है. सस्टेनेबिलिटी (sustainability) और एथिकल प्रेक्टिस (ethical practices) की आवश्यकता को पहचानते हुए, कॉर्पोरेट्स की जिम्मेदारी और जवाबदारी CSR की अनेक पहल पूरी हुई है और भविष्य के लिए नए दरवाज़े खोलती है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/self-help-groups-promoting-women-empowerment-and-feminism-in-rural-india-2036313">भारतीय नारीवाद और ग्रामीण भारत</a></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">शिवरंजिनी देवांगन</dc:creator><pubDate>Wed, 24 Apr 2024 11:45:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/importance-of-csr-in-women-empowerment-4506608]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JWSOHr9lybEbc5ptIPQX.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JWSOHr9lybEbc5ptIPQX.png"/></item></channel></rss>