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वर्ल्ड रिकॉर्ड ग्रहण करते महंत स्वामी और सीएम पटेल और डॉ.यादव
गुजरात के बड़ौदरा में इतिहास रच दिया गया. कहने को तो महंत का 92 वां जन्मोत्सव था. पर न कोई केक कटा और न ही रिसेप्शन के अंदाज़ में मंच पर पहुंचने की होड़...हज़ारों हरि भक्त पर न कोई गुत्थम गुत्था.आकाश में रौशनी की अनूठी छटां बिखरती रही. BAPS स्वामी नारायण संस्था द्वारा गुरु हरि महंत स्वामी जन्म जयंती महोत्सव में अद्भुत नज़ारा देखने को मिला.यह असाधारण था. संस्था से जुड़े बच्चों ने सतसंग दीक्षा ग्रंथ के 315 संस्कृत के श्लोकों की प्रस्तुति दी. महज 3 से 13 साल के बीच के 15 हज़ार 666 शामिल इन बच्चों का उच्चारण संयमित और शुद्ध था. आखिरकार वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के डायरेक्टर स्वप्निल डांगरिकर ने यह 'समकालीन हिन्दू ग्रन्थ पाठ' रिकॉर्ड सर्टिफिकेट महंत स्वामी को सौंपा. यह सामान्य खबर नहीं हो सकती.
सजाया उम्मीदों का नया आकाश
दुनिया के न जाने कितने देशों में इस भव्य आयोजन का लाइव प्रसारण हुआ. इसमें संस्कारों और अध्यात्म की खुश्बू के साथ उम्मीदों का नया आकाश सजा दिया गया.दरअसल बड़ौदरा में हुए इस आयोजन में सिर्फ यह एक रिकॉर्ड ही नहीं बना,बल्कि यहां की प्रस्तुतियों ने देश को उस समय नई उम्मीद दी,जब युवा हो या समाज नकारात्मकता के माहौल से गुजर रहा हो.
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खास बात इस कार्यक्रम में गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल और मप्र के सीएम डॉ.मोहन यादव विशेष रूप से मौजूद रहे.
महंत स्वामी ने 2024 की दीपावली पर सतसंग दीक्षा ग्रंथ के 315 श्लोक को कंठस्थ करवाने की इच्छा जताई.देखते ही देखते बच्चे एक या दो नहीं बल्कि हज़ारों में संस्कृत के दीवाने हो गए.
इस उपलब्धि में मप्र के उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया जो हाल ही में सामूहिक गीता पुरुषोत्तम श्लोक का रिकॉर्ड बनाया गया था.
कलाम के किस्सों से हुए भाव विभोर, ज़िंदगी में भर गए नए रंग
इस अयोजन में प्रेरक प्रसंगों ने सभा स्थल को और ऊर्जा से भर दिया. देश के मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने प्रमुख स्वामी महाराज से 8 बार मुलाकात की.अपनी लिखी पुस्तक में उन्होंने अहसास किया कि पदों पर रहते कई लोगों से मिला परंतु स्वामी महाराज से मिलाकर जीवन में सोच का तरीका बदल गया.
यही नहीं टीवी कलाकार और हरि भक्त दिलीप जोशी (जेठालाल) ने बताया कैसे मासूम मनन मोदी का जीवन बदला. सतसंग दीक्षा ग्रंथ के श्लोक क्रमांक 31-32 और 26-27 को समझाते हुए जीवन में सामाजिक परिवर्तन के उदाहरण प्रस्तुत किए. अनीति,उपेक्षा हो या व्यसन जैसी कुरुति...केवल छह साल की एक बेटी द्वारा कई परिवारों के सदस्यों के व्यसन छुड़ाने का अभियान हो,का ज़िक्र किया गया.
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इन सभी प्रसंगों से साबित हुआ कि यहां बाल प्रवृति संस्कारों को नया जन्म मिला. मानव सेवा और समाज सेवा के लिए आदिवासी इलाकों में मोबाइल विद्यालय संचालित करने की घोषणा की गई.जो शिक्षा का अलख जगाएगी.
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने गुरु परंपरा की व्याख्या की,वहीं सीएम पटेल ने शुभकामनाएं दी. महंत स्वामी ने ईश्वर से जुड़ना और अध्यात्म का उल्लेख कर अपने आशीर्वचन दिए.
इस आयोजन ने साबित किया संस्कार ही जीवन जीने की शैली तय करते हैं.
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