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गूगल मीट में मिशन कार्यों की समीक्षा करती CEO Harshika Singh (file)
शासन ने मिलेट्स और कोदो-कुटकी को बढ़ावा देने के लिए और नए कदम उठाए.घर पहुंच सेवा के लिए पोर्टल तैयार करवाया जा रहा. हालांकि इस काम में कुछ समय लगेगा. प्रदेश के ग्रामीण स्वयं सहायता समूह सदस्य महिलाओं के लिए नई उम्मीद मानी जा सकती है.
350 प्रोडक्ट्स की लिस्ट और 27 जगह हाट बाज़ार
प्रदेश में भोपाल मुख्यालय पर ग्रामीण हाट बाजार अंतर्गत आजीविका मिशन द्वारा फिलहाल 40 दुकानों पर मिलेट्स उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं.सेल्फ हेल्प ग्रुप सदस्यों कहना था यहां पर्याप्त संख्या में कस्टमर नहीं मिल पाते.
मिशन प्रशासन ने प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में 27 ऐसे ही हाट बाज़ार बना दिए.
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अब यहां से कोदो-कुटकी,रागी सहित ज्वार,बाज़ार और मक्का भी ऑर्गेनिक रूप में मिलेगी.
मिलेट्स की 350 वैराइटी को सूचीबद्ध किया.
ख़ास इसमें खास ज़िले के ख़ास प्रोडक्ट जैसे शिवपुरी का मुगफली का तेल,मुरैना का सरसों का तेल, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम और हरदा का अनाज भी समूह सदस्य द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा.
यहां तक की डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए योजना बनाई गई है.
'पलाश के संग होली के रंग' आएंगे नज़र
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह ने पिछले कुछ समय से कई तरह के सकारात्मक नवाचार किए.भोपाल के ग्रामीण हाट बाजार में बधाई गई रौनक समूह सदस्य महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का कारण रही.
सुश्री सिंह का यह प्रयोग ही समूह की महिलाओं को नया बज़ार दिलवाने में मददगार साबित होगा.
प्रदेश की साड़ियों में लोकप्रिय चंदेरी,महेश्वरी,बाग़ हो या बटिक प्रिंट सभी को समूह के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कार्ययोजना जल्दी ही मूर्तरूप लेगी.
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ख़ास बात समूह की महिलाएं पलाश (टेंसू) के फूलों से प्राकृतिक रंग भी तैयार कर होली खेलने के लिए उपलब्ध कराएंगी.
Mission CEO Harshika Singh ने स्वयं सहायता समूह को और अधिक आर्थिक मजबूती देने के लिए लगातार प्रशिक्षण और शासन की योजनाओं को लाभ मिल सके,ऐसे विशेषज्ञ उपलबध करवाए.
उम्मीद की जा रही है कि यह प्रयोग समूह की महिलाओं के लिए जीवन में बदलाव और सुविधाजनक साबित होंगे.
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"मुझे प्रसन्नता है कि समूह की महिलाएं मेहनती हैं.शासन की इंडिया पोस्ट से चर्चा हुई है.कुरियर मेथड से समूह की महिलाएं स्वयं द्वारा तैयार ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स हो या अन्य सामग्री को कस्टमर तक भेज सकेगी. ग्रामीण हाट बाज़ार की संख्या भी बढ़ाई जा रही."
हर्षिका सिंह, सीईओ. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन
भोपाल
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