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मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से एकलव्य पुरस्कार लेते अर्जुन -Image Credits :Ravivar
मध्य प्रदेश के Tribal जिला Khargone अंतर्गत कसरावद ब्लॉक का छोटा सा गांव नायदड़. किसी समय गुमनाम सा यह गांव आज चर्चित है. यहां के एक किसान परिवार के बेटे ने वह कर दिखाया जिसका अनुसरण कई बच्चे करने को आतुर हैं. एथलीट अर्जुन वास्कले के संघर्ष और सफलता की अनूठी कहानी खेल दिवस पर विशेष.
खेत की मेढ़ से विदेशी मैदान तक दौड़ में सफलता के झंडे
नायदड़ तक चौथी पास करने के बाद अर्जुन को पास में ही ठीकरी गांव के स्कूल में भर्ती कर दिया.
अर्जुन वास्कले बताते हैं- "मैंअपने पिताजी के साथ गांव में खेत की मेढ़ तक नंगे पैर दौड़ जाता.ठीकरी के स्कूल में भी दौड़ने का शौक बढ़ गया.स्पोर्ट्स टीचर ने मुझे हौसला दिया. मुझे स्टेट लेवल खेलने का अवसर भोपाल में मिला.यहीं मैंने MP Sports Academy में एडमिशन मिल गया.
यहां लगातार मेहनत की नतीजा मुझे International world championship में खेलने के लिए कोलंबिया जाने का मौका मिला.इसके बाद world university games के लिए चाइना और फिर जर्मनी भी अपने खेल का प्रदर्शन किया."
आभाव नहीं, हौसला तय कर देता हार और जीत
केवल 1 मिनिट और 48 सेकेण्ड में 800 मीटर रेस पूरी करने वाले अर्जुन के हौसले हमेशा बुलंद रहे. 21 वर्षीय अर्जुन 1500 मीटर रेस भी केवल 3 मिनिट 42 सेकेण्ड में पूरी कर लेते हैं.
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अर्जुन का कहना है-"ज़िंदगी में कोई भी खिलाड़ी या युवा अभावों से नहीं हारता.खिलाड़ी का हौसला तय कर देता है किसी भी प्रतिस्पर्धा की हार या जीत.मैंने ठान लिया था Athelte बनाना ही है.कभी हौसला नहीं खोया.अभी मैं एशियन गेम्स में सहभागी होने के लिए प्रेक्टिस कर रहा हूं.मुझे विश्वास है कि भारत अच्छा प्रदर्शन करेगा."
इन दिनों अर्जुन एकेडमी के कोच डीके प्रसाद के गाइडेंस में अपनी प्रेक्टिस कर रहे हैं.अर्जुन यहां पिछले छह साल से प्रेक्टिस कर रहे.
पिता के पास केवल तीन एकड़ ज़मीन है और बड़ा परिवार,बावजूद Akalvya Award विजेता अर्जुन ने साबित कर दिया युवाओं का संकल्प ही उसे मंज़िल तक पहुंचता है.