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कृष्णगिरि तीर्थ जहां देवी पद्मावती देवी विराजित हैं -Image: Raviavar Social Media
वैसे देवी पद्मावती का जन्म वर्ष या अस्तित्व की कोई तिथि नहीं है, परंतु 6वीं - 8वीं में पूजा-मूर्तियों के प्रमाण मिलते हैं. वहीं 9 वीं से 12 वीं सदी के बीच व्यापक उपासना का इतिहास भी दिखाई देता है. इसलिए देवी पद्मावती को अनादि-अनंत दिव्य सत्ता का प्रतिरूप माना जा सकता है.
जैन धर्मावलंबियों में तीर्थंकरों को सर्वोच्च भगवान के रूप पूज्य माना गया, परंतु 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के साथ अधिष्ठात्री यक्षिणी (शासन देवी) के रूप में देवी पद्मावती को माना गया. जिनकी उपासना का महत्व भी बताया गया.
तमिलनाडु में कृष्णागिरी ज़िले में स्थित तीर्थ आज उपासना का सबसे बड़ा स्थल बन चुका है.
मां पद्मावती का समकक्ष महत्व ही सबसे बड़ा Woman Empoerment
सरकारें और शासन पूरे देश में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं को आर्थिक मजबूत बनाने के साथ उनके आत्मविश्वास को लौटने के लिए कई तरह के नवाचार कर रही है. जिसमें खासकर स्वयं सहायता समूह से महिलाओं को जोड़कर घरेलु लघु उद्योग, कृषि सहित कई क्षेत्रों में अहम् भूमिका में जोड़ा जा रहा है. कुछ वर्षों में साबित हुआ कि महिलाओं को यदि अवसर मिले तो वे हर मुकाम पर श्रेष्ठ साबित हो सकती है.
महिलाओं के नैसर्गिक गुण करुणा और सहयोग की भावनाओं के साथ उनके आत्मविश्वास के कई सकारात्मक उदाहरण देखे जा सकते हैं.
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यह जानकर आश्चर्य होगा कि सदियों पहले जैन धर्म और पवित्र पुस्तकों, संत प्रवचनों में 23 वें तीर्थंकर के साथ श्रेष्ठाधारिणी देवी पद्मावती का उल्लेख मिलता है.
देवी पद्मावती की करुणा-दया का ही पर्याय आज उनकी उपासना बन चुका है. यही वजह देवी का समकक्ष महत्व ही सबसे बड़ा Woman Empoerment उदाहरण मन जा सकता है.
शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र कृष्णागिरी शक्तिपीठ
कृष्णागिरी जिले के Orappam में स्थापित शक्तिपीठ शक्ति साधना, आध्यात्मिक तपस्या सहित तपोभूमि स्थल के रूप में उभर चुका है,जहां बड़ी संख्या में उपासक पहुंचते हैं. कृष्णागिरी तीर्थ के अनुयायी शौक़ीन जैन, नीमच कहते हैं- "यह एक अद्भुत स्थल है,जहां सुकून और जीवन में आंतरिक बदलाव व्यक्ति खुद महसूस करता है.यहां का वैभव और सेवा प्रकल्प अनुकरणीय है."
उल्लेखनीय है कि यहां अन्नदान,स्वास्थ्य कैंप सहित कई योजनाएं लागू की जा रहीं हैं.
एक अन्य अनुयायी राजू सोनी बताते हैं- "यहां सेवा स्वरूप गौसेवा, अन्न प्रसादी जैसे अनुष्ठान लगातार जारी होते हैं. अनुयायियों को दिक्क्त न हों उसका पूरा ध्यान रखा जा जाता है.
तीर्थ शिल्पकार बने कृष्णागिरी पीठाधीश्वर वसंत गुरुदेव
पूज्य कृष्णगिरि पीठाधीश्वर श्री वसंत विजयानंद गिरी महाराज. यही वो संत हैं जिन्होंने कुछ साल पहले तक अनुयायियों के लिए कृष्णगिरि तीर्थ को अपनी तपस्या से नै पहचान दिलाई.बताया जाता है कुछ सालों तक यह स्थान अपेक्षाकृत अपरिचित सा था. गुरुदेव ने अन्य पवित्र स्थलों के साथ यहां साधना की. कुछ समय में ही यहां भगवान पार्श्वनाथ एवं देवी पद्मावती की सयुंक्त उपासना की जाती है.
गुरुदेव के प्रयासों से ही यहां अति आकर्षक और नक्काशीदार मंदिर निर्मित हुआ. यहां मान्यता है देवी पद्मावती की उपासना से सौभाग्य, संकट निवारण सहित मन को शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति मिलती है.
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पूरे देश के साथ कई देशों में वसंत गुरुदेव विदेशों में भी 'आनंद योगम' और 'मंत्र योगम' के माध्यम से सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का अलख जगा रहे हैं. गुरुदेव स्वयं वुमन इम्पॉवरमेंट का सबसे बड़ा प्रतीक देवी पद्मावती को मानते हैं. उन्हें प्रसन्नता है कि युवाओं में भी अध्यात्मिक चेतना बढ़ी है.
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