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अपने खेत में काम करती हुई महिला किसान- Image : Ravivar AI
"छोटी सी शुरुआत और हमेशा बड़ा विज़न ही किसी मिशन के सफलता का राज है. इसका उदाहरण हम मध्य प्रदेश में कई सफल नवाचारों से समझ सकते हैं. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में 'कृषि कल्याण वर्ष' मनाने का निर्णय और किसानों के हित में इस फैसले को लागू कर साबित किया कि सरकार और शासन किसानों के लिए बहुआयामी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है. इस दूर दृष्टि सोच को हम कई आयामों से समझ सकते हैं. 'रीज़नल इंडस्ट्रीज़ कॉन्क्लेव' हो या राजधानी से बाहर छोटे स्थानों पर कैबिनेट का आयोजन इसकी बुनियाद है. अब प्रदेश के साथ किसान परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल रही है. कृषि आधारित मंथन के लिए ब्रिक्स भी अब इस अहम कड़ी में जुड़ गया."
बढ़ती GDP यानी उम्मीदों की खिलती नई बालियां
यह जानकर आपको सुखद लगेगा कि हम देश में कृषि के क्षेत्र में अन्य राज्यों की तुलना में हमारी जीडीपी की दर बढ़ी है. यहां हमारी सहभागिता बढ़ी है. यह बढ़ता जीडीपी का ग्राफ मतलब किसी खेत में खिलती गेहूं की बालियों के साथ नई उम्मीद जैसा है. इसीलिए सरकार ने किसान और कृषि को फोकस किया. सरकार की सोच किसान को बीज वितरण कर अपनी औपचारिकता पूरी करना नहीं है बल्कि बीज से लगाकर उसके उत्पादन को बढ़ाने और मार्केटिंग को कैसे बढ़ावा देने तक की है. इस काम के लिए सरकार ने अपनी परंपरागत पॉलिसी तक को बदल दिया.
सरकार ने अपनी केबिनेट मीटिंग बंद कमरों से निकल कर दूर दराज़ के आदिवासी जिला अंतर्गत नागलवाड़ी में आयोजित की.जिसका मुख्य एजेंडा भी कृषि और सुधारात्मक बिंदु रखे.
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ठेठ जंगल और ट्राइबल इलाकों से बाहर भी अब हमारी हेल्थ के पर्यावरण संरक्षण को लेकर हम सजग हुए और प्राकृतिक व जैविक खेती में किसानों का रुझान कुछ सालों में बढ़ा. प्रदेश में क्लस्टर के साथ एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइज़ेशन) के गठन के बाद हज़ारों किसान सदस्य बने और अपनी खेती के उत्पाद के वाजिब दाम मिलने लगे. यह भी 'कृषि कल्याण वर्ष' की बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है.
बंज़र खेत भी होंगे अब पानीदार! एक करोड़ हैक्टेयर ज़मीन होगी तर...
अभी तक प्रदेश में लगभग 55 लाख हैक्टेयर में सिचाई रकबा है. सरकार लगातार प्रदेश में नई प्रस्तावित योजनाओं पर काम कर रही है. आने वाली दिनों में बंज़र खेत भी किसानों के पानीदार होंगे. एक अनुमान के मुताबिक एक करोड़ हैक्टेयर में खेती की ज़मीनें सिंचित होंगी. इस काम के लिए 63 योजनाओं पर काम चल रहा.एक योजना पर महाराष्ट्र सरकार से अनुबंध प्रक्रिया में है.उत्पादन बढ़ने के साथ ही किसानों को पशुपालन (एनीमल हसबेंडरी) के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा. आंबेडकर कामधेनु योजना सहित अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है.अभी देश में दूध उत्पादन में हमारी हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है जो बढ़कर 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है. डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए भी प्रोजेक्ट्स बनाए गए.गौ शालाओं में अनुदान के साथ स्वावलंबी योजना का बदलाव धरातल पर नज़र आने लगा.
दूर दराज़ तक हर विधानसभा में लगेंगे समृद्धि के उद्योग
सरकार का यह निर्णय वरदान साबित होगा. आगामी दिनों में चाहे दूर दराज़ का विधान सभा क्षेत्र हो, वहां भी उद्योग क्रांति दिखाई देगी. यहांसरकार समृद्धि के उद्योग लगाएगी. हर इलाके में भौगोलिक परिस्थिति और फसल सहित अन्य उत्पाद के अनुरूप इकाइयां स्थापित की जाना प्रस्तावित है. एग्रीकल्चर इन्वेस्टमेंट फंड जैसी योजनाओं को सफल बनाने में सरकार ने ताकत झोंक दी. इससे किसान सहित छोटे और मझले उद्योगपतियों को आर्थिक लाभ मिलेगा. सबसे बड़ा उदाहरण धार ज़िले में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी गई, जो क्षेत्रीय उत्पाद खासकर कपास कारोबारियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय मूल्य मिल सकेगा.
मंडी के आधुनिकरण के साथ भावान्तर योजना, मिलेट्स अंतर्गत कोदो-कुटकी बाजार तैयार किए गए.
बैलेंस्ड यूज़ ऑफ़ फ़र्टिलाइज़र और ई-विकास प्रणाली टोकन ने किसानों को जहां फ़र्टिलाइज़र की उपलब्धता आसान की वहीं प्रधानमंत्री सूक्ष्म कृषि खाद्य उद्यमी योजना को लागू किया.
महिला सखियों ने प्रदेश की लिखी नई तक़दीर
इन सबसे अलग प्रदेश में कृषि को नई ऊंचाई देने में स्वयं सहायता समूह और कृषि सखियां और महिला सदस्य अहम भूमिका निभा रहीं हैं. नमो ड्रोन पॉयलट योजना और एफपीओ जैसी संस्थाओं में शामिल होकर परिवार की आर्थिक रीढ़ मजबूत कर रही है.
लगभग समूह की आठ लाख महिला सदस्यों ने प्रदेश की कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में नई तकदीर लिख रही हैं.
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डॉ.सुदाम खाड़े, आयएएस,कमिश्नर, संभाग इंदौर
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