मासूम बेटी को छोड़ा मरने के लिए, वही बचा रही दूसरों का जीवन

दुल्हन विदा हो रही थी.हाथों में सुंदर मेहंदी और हल्दी.मायके के नाम पर सिर्फ एक क्लास वन लेडी ऑफिसर  और एक अन्य ऑफिसर खड़ीं थीं. भावुक कर देने वाली वाली सच्ची घटना.

New Update
ChatGPT Image Mar 13, 2026, 02_36_43 PM

ठुकराई बेटी की ज़िंदगी के मोड़ - Image :AI

जीवन के थपेड़े खाने के बाद प्रिया (परिवर्तित नाम) की आंखों में खुशियों के आंसू थे. एक नज़र उसने दोनों अधिकारियों को देखा और भावुक हो गई. और मां कहती हुई गले से जा लगी. बारात विदा हो गई. मायका बना बंगला सूना हो गया. 
महिला एवं बाल विकास विभाग की जॉइंट डायरेक्टर डॉ.संध्या व्यास और सखी निवास (वर्किंग वीमन हॉस्टल) की अधीक्षिका रोल मॉडल बन गई. डॉ.व्यास की आंखों में प्रिया की पूरी ज़िंदगी कुछ पल में ही घूम गई. 

मां ने रची मासूम बेटी के लिए साजिश, सहेली ने बचाया

ये कहानी कोई फ़िल्मी नहीं और न किसी कहानी की काल्पनिक स्क्रिप्ट, लेकिन किसी फ़िल्मी कहानी से कम भी नहीं. कुछ साल पहले एक शहरी महिला ने अपनी मर्जी से आदिवासी अंचल में शादी की. एक खूबसूरत बेटी को जन्म दिया. पर रोज़ लड़ाई-झगड़े और विवाद के बीच ये शादी ज्यादा टिकी नहीं. महिला अपनी बेटी को लेकर वापस अपने मायके शहर लौट आई.
कुछ समय में ही महज 6-7 साल की यह बेटी प्रिया बोझ लगने लगी. महिला अपनी मां (प्रिया की नानी) के बहकावे में आ गई.
ऐसी साजिश रची कि कोई मां तो ठीक हर किसी का मन पसीज जाए. प्रिया की मां ने अपनी सहेली को भरोसे में लेकर प्रिया को वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालु की भीड़ में अकेले छोड़ आने की बात की. और खुद महिला ने एक अन्य व्यक्ति से दूसरे प्रांत गुपचुप शादी रचा ली.  

ChatGPT Image Mar 13, 2026, 02_31_56 PM


सहेली सुनीता (परिवर्तित नाम) का दिल पसीज गया. वह इस मासूम को वैष्णो देवी मंदिर ले जाने की जगह दूसरे परिचित के घर छोड़कर आ गई.जहां वह सुरक्षित रह सके...पर प्रिया को तो और कठिन परीक्षा देनी थी.  
इस नए घर प्रिया का जीवन फिर पटरी पर आते दिखने लगा. वह स्कूल भी जाने लगी. इस घर में एक अधेड़ महिला और लगभग 34 साल का एक बेटे के साथ प्रिया बड़ी होने लगी. शुरू में सब  ठीक रहा लेकिन दो बाद साल प्रिया की खूबसूरती देख 34 साल का यह व्यक्ति बेटी प्रिया ने बुरी नज़र रखने लगा. आखिर अधेड़ उम्र की मां को अपने बदमाश बेटे की करतूत को भांपने में देर न की. और इस बच्ची को अपनी ही बेटे से  बचाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया.  

जीवन में बदला फिर आसरा, दिखने लगी नई रौशनी 

प्रिया की जीवन को करीब से समझने वाली SAKHI NIWAS (Working Women Hostel) Indore की अधीक्षिका शुभांगी मजूमदार कहती हैं-"प्रिया को एक महिला जीवन ज्योति सेंटर छोड़ कर गई. प्रिया बेहद परेशान थी. संस्था ने उसे हौसला दिया.नया जीवन शुरू हुआ और सुरक्षा भी मिली. देखते ही देखते प्रिया जितनी सुंदर थी उससे कहीं पढ़ाई में होनहार. क्लास 12 th में 87 प्रतिशत बना कर खुद की काबिलियत साबित कर दी. हम लोगों ने उसे आगे पढ़ाने का संकल्प लिया."
प्रिया की इच्छा डॉक्टर बनने की थी.परंतु परिस्थिति और बढ़ती उम्र की वजह से उसे फिज़ियोथेरी में ग्रेजुएशन करवाया.

ChatGPT Image Mar 13, 2026, 02_19_33 PM


फीस लाखों में थी.इस चुनौती से निपटते हुए अधिकारियों ने गुमनाम पहले साल की फीस जमा की. प्रिया का सफ़ेद कोट का पहने का सपना अधीक्षिका शुभांगी मजूमदार और डॉ व्यास ने पूरा कर दिया. जिस मासूम बेटी को मरने के लिए छोड़ा वही बेटी अब दूसरों का जीवन बचाने में जुटी है. 
शुभांगी बताती है-"एक समय ठुकराई गई इस प्रिया के लिए पढ़ाई पूरी होते ही हमारे पास एमएस और एमडी डॉक्टर्स द्वारा शादी के प्रस्ताव प्रिया के लिए आए.लेकिन प्रिया ने अपने साथी मित्र से शादी करने की इच्छा जताई.हमने प्रिया की शादी में कोई कसर बाकी न रखी."
मुख्यमंत्री सखी प्रोत्साहन योजना के तहत प्रिया यह पढ़ाई पूरी कर सकी. संस्था के अनुसार प्रिया को सबकुछ हकीकत पता होने का बावजूद इस बेबसी को उसने अपनी ताकत बना ली.  

IMG_20260313_154948
Dr.Sandhya Vyas

"जीवन में डॉमेस्टिक वायलेंस से पीड़ित कई महिलाओं को करीब से देखा.लेकिन दुनियादारी से बेखबर मासूम प्रिया का जीवन और उसके संघर्ष ने हमें अंदर तक हिला कर रख दिया. प्रसन्नता इस बात की है कि समाज की विसंगतियों के बीच प्रिया को न केवल बचा सके बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाने में हम सहयोग कर सके."

डॉ.संध्या व्यास 
जॉइंट डाइरेक्टर 
महिला एवं बाल विकास, संभाग इंदौर   
     

indore Working Women Hostel