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महिलाओं की सुरक्षा में योगदान के लिए मेजर स्वाति को UN पुरस्कार Photograph: (Twitter)
साउथ सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) के तहत तैनात भारतीय सेना की अधिकारी मेजर स्वाति शांति कुमार को वर्ष 2025 का UN Secretary General Award दिया गया है. यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के दौरान असाधारण योगदान देने वालों को प्रदान किया जाता है.
मेजर स्वाति को यह सम्मान उनके प्रोजेक्ट ‘Equal Partners, Lasting Peace’ के लिए मिला है, जिसकी वजह से साउथ सूडान में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूती मिली. इस पहल के जरिए उन्होंने वहां तैनात भारतीय टीम की क्षमताओं का सही उपयोग करते हुए स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत तालमेल बनाया.
31 वर्षीय मेजर स्वाति के नेतृत्व में भारतीय टीम ने जल, थल और हवाई मार्गों से पेट्रोलिंग कर दूरदराज इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की. इन प्रयासों से 5 हजार से अधिक महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बना और उन्हें अपने समुदाय में जागरूक रूप से भाग लेने का अवसर मिला.
‘Equal Partners, Lasting Peace’ प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सराहा. पुरस्कार की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि इस मिशन ने UNMISS में Gender Inclusive Approach को और मजबूत किया है. यह सम्मान उन पहलों को मान्यता देता है, जो लैंगिक समानता के साथ शांति स्थापना को आगे बढ़ाती हैं.
चार फाइनलिस्ट्स में सबसे ज्यादा वोट हासिल कर मेजर स्वाति इस पुरस्कार की विजेता बनीं. भारतीय सेना की Electronics and Mechanical Engineers (EME) Corps की अधिकारी स्वाति के पिता आर. शांता कुमार ने कहा कि उन्हें बेटी पर गर्व है कि वह देश की सेवा कर रही है, हालांकि कठिन परिस्थितियों में काम करने को लेकर चिंता भी रहती है. उन्होंने कहा,
यह पुरस्कार उसकी मेहनत और अनुशासन का सम्मान है, जिससे हमें बेहद खुशी और गर्व महसूस हुआ.
शांता कुमार ने बताया कि स्वाति ने बेंगलुरु से पढ़ाई की है. न्यू होराइजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया.
कौन हैं मेजर स्वाति?
करीब 15 महीनों से साउथ सूडान में तैनात मेजर स्वाति अगले महीने भारत लौट सकती हैं. इसके बाद उनकी पोस्टिंग सिकंदराबाद में होने की संभावना है. उनके पिता शांता कुमार आईटीसी में कार्यरत थे और तीन साल पहले सेवानिवृत्त हुए. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि स्वाति उनके परिवार की पहली सदस्य हैं, जिन्होंने सेना में सेवा का रास्ता चुना.
बेंगलुरु के लिंगराजापुरम की रहने वाली मेजर स्वाति ने सेंट चार्ल्स हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा ली. इसके बाद क्राइस्ट कॉलेज से प्री-यूनिवर्सिटी (PU) और फिर न्यू होराइजन कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की.
उनकी मां राजमणि एक सरकारी स्कूल की रिटायर्ड हेडमिस्ट्रेस हैं. वह बताती हैं कि कैंपस सिलेक्शन के जरिए स्वाति का चयन आईबीएम में हुआ था, जहां उन्होंने करीब एक साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में जाने का फैसला लिया. स्वाति तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं. दूसरी बहन धृति फ्रांस में मास्टर्स कर रही हैं, जबकि सबसे छोटी बहन मैत्री रामैय्या कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं.
SSB परीक्षा पास करने के बाद मेजर स्वाति ने OTA से ट्रेनिंग पूरी की और फिर भारतीय सेना की EME कोर में शामिल हुईं. साउथ सूडान में उनकी टीम की सदस्य नीतू का कहना है कि स्वाति अपनी भूमिका को बेहद जिम्मेदारी से निभाती हैं और पूरी टीम को सशक्त बनाए रखती हैं.
गौरतलब है कि हिंसा से बुरी तरह प्रभावित दुनिया के सबसे नए देशों में शामिल साउथ सूडान में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए संयुक्त राष्ट्र की शांति सेनाएं तैनात हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बल वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के कुल 14 शांति अभियानों में से 7 में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
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