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सम्मानित साहित्यकार और आयोजक संस्था पदाधिकारी-Image :Ravivar
साहित्य का विस्तरण करना राष्ट्रहित का काम है क्योंकि साहित्य हमें समाज और देश से जोड़ता है.यही सेतु है. कवि पं.श्रीधर जोशी जी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित करने की पृष्ठभूमि में यही उद्देश्य निहित है. जोशी जी का परिवार उनके स्मृति में पिछले सात वर्षों से सम्मान समारोह आयोजित कर यही संदेश दे रहा है. यह बात साहित्यकार डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्ल ने पंडित श्रीधर जोशी स्मृति सम्मान समारोह में कही.
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मालवा के कवि नरेंद्र मांडलिक ने कहा- "साहित्य में परिवारवाद होना अच्छी परंपरा है और इस पर परंपरा को जोशी परिवार कई पीढ़ियां से अच्छे से निभा रहा है.उन्होंने जोशी जी को संवेदनाओं का कवि बताया और कहा जोशी जी की कविताओं में उनका व्यक्तित्व झलकता है."
साहित्य समाज का आईना
कार्यक्रम की विशेष अतिथि डीएवीवी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सोनाली नरगुंदे ने कहा- "साहित्य समाज का आईना है और आईने को हमेशा साफ स्वच्छ रखा जाना चाहिए. जोशी जी की रचनाओं ने साहित्य को समृद्ध किया है."
साहित्यकार सदाशिव कौतुक ने कहा जोशी जी जहां खड़े हो जाते थे वहां ठहाके लगना स्वाभाविक था, वे बातों बातों में ही हास्य ढूंढ लेते थे.लघु कथाकार पुरुषोत्तम दुबे ने कहा- "आजकल जोशी जी जैसे साहित्यकार मिलना मुश्किल है जो स्वांतः सुखाय एवं साहित्य सेवा के लिए लिखते थे उन्होंने कभी भी अपने नाम के लिए नहीं लिखा"
सम्मान के साथ "मेरा मधुबन" का लोकार्पण
इस अवसर पर वरिष्ठ पांच साहित्यकारों सदाशिव कौतुक, डॉ पुरुषोत्तम दुबे, श्रीमती कुसुमलता मंडलोई, डॉ विमल सक्सेना और पवन निम को " पंडित श्रीधर जोशी स्मृति सम्मान" प्रदान किया गया.इस अवसर पर श्रीधर जोशी जी की पत्नी ललिता जोशी जी की पुस्तक "मेरा मधुबन" का लोकार्पण भी किया गया. कार्यक्रम का संचालन सुषमा दुबे ने किया स्वागत भाषण मुकेश तिवारी ने दिया. धीरेंद्र जोशी ने श्रीधर जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. सरस्वती वंदना सुषमा व्यास "पारिजात" ने प्रस्तुत की, संस्था परिचय अर्चना दुबे ने दिया. आभार श्री शैलेंद्र जोशी ने माना.अतिथियों का स्वागत लतिका जोशी ,ममता जोशी, मनीषा जोशी, रघुनंदन जोशी ने किया.
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इस अवसर पर इंदौर एवं महू के साहित्यकार हरेराम वाजपेई,संतोष जी मोहंती, ज्योति जैन, पदमा राजेंद्र, देवेंद्रसिंह सिसोदिया, माधुरी व्यास, विनीत तिवारी, संध्या राय चौधरी, मनोहर दुबे, मंजुला भूतड़ा, सुधा चौहान, अमिता मराठे, शोभारानी तिवारी, अरुणा खरगोनकर, सुरेखा भारती, शिशिर उपाध्याय, शशि निगम, मुन्नी गर्ग रामचन्द्र अवस्थी, भुवनेश दशोत्तर, मित्रा शर्मा,कुमुद मारू, इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी, संजय त्रिपाठी, रामलाल प्रजापति, ललित उपमन्यु, लक्ष्मीकांत पंडित, प्रोफेसर अखिलेश राव, इंदु पाराशर सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे.
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