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पेड़ पर लदे खूबसूरत पीले पलाश के फूल - Image Credits :Ravivar Photograph: (पेड़ पर लदे खूबसूरत पीले पलाश के फूल - Image Credits :Ravivar)
फाग उत्सव और बासंती बयार के बीच जंगल और सड़क किनारे पलाश के फूल खिलते हुए होली का अहसास करा देते हैं. ये पलाश जिसे बोलचाल की भाषा में टेसू भी कहते हैं,अक्सर लाल और नारंगी रंग के दिख जाएंगे.
सड़क किनारे लाल नारंगी रंग की छठा बिखरी हुई है. साल के इस वक़्त जैसे दुनिया में चेरी ब्लॉसम होता है, वैसे ही मध्य भारत को पलाश रंगीन कर देता. होली के रंगीन कैनवास को प्रकृति भी पलाश के लाल नारंगी पीले रंग इस रंग देती है.
दुर्लभ पीले पलाश के पेड़ को दी खास सुरक्षा!
कटते हुए जंगलों के साथ ये पीले पलाश के पेड़ दुर्लभ हो गए. उत्सव और खुशियों का प्रतीक माने जाने वाले पलाश के पेड़ों को बचाने के लिए खास तरह के इंतजाम किए गए हैं. निमाड़ इलाके में सतपुड़ा खरगोन के घने जंगलों में इन दिनों पेड़ पलाश के फूलों से लदे कुछ इस तरह के खास पेड़ को स्पेशल सुरक्षा दी गई.
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यह व्यवस्था खरगोन के वन विभाग ने की. इस पेड़ को कटने से बचाने के लिए आसपास फेंसिंग कर दी गई. जिससे इसे बचाया जा सके. सतपुड़ा इलाके और खरगोन जिले के इक्का-दुक्का जगह पर ही पीले रंग के खूबसूरत पलाश के पेड़ बचे हैं. वन माफियों से बचाने के लिए यह सब कयावद की गई है. पीला रंग दोस्ती, अपनत्व और पॉसिटिविटी का प्रतीक माना जाता है.
पेड़ की रखवाली कर रहे ग्रामीण
वनस्पति शास्त्री डॉ पुष्पा पटेल कहती हैं -"जंगल में मेडिसनल प्लांट सर्च के दौरान देखा कि सतपुड़ा के घने जंगल कम हो गए.सबसे ज्यादा पीले रंग के खिलने वाले पलाश के पेड़ लगभग पूरे कट गए. उन्होंने फारेस्ट विभाग को सूचना दी. विभाग ने इसे दुर्लभ श्रेणी में मान कर पेड़ के आसपास तारों कि फेंसिंग करा दी. आसपास रहने वाले ग्रामीण खुद इस पेड़ कि रखवाली कर रहे हैं."
दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि इन्हीं घने जंगल के इलाकों में ग्रामीणों ने सफ़ेद कलर के पलाश के पेड़ भी देखे.
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इनमें एक ख़ास तरह के सफ़ेद कलर के होते हैं, भगवान महादेव को अर्पित करने की प्रथा है, लेकिन कटते हुए जंगलों के साथ ये पेड़ दुर्लभ हो गए.
MY Hospital Indore के डर्मेटोलॉजिस्ट एवं प्रोफेसर डॉ.राहुल नागर कहते हैं- "यह नॉन केमिकल है. इससे तैयार रंग से होली खेलना चाहिए. यह स्किन के लिए पूरी तरह सेफ है.कई बार केमिकल रंगों का उपयोग जानलेवा हो सकता है."
वहीं गीतकार हरीश दुबे कहते हैं-" प्रकृति का नष्ट होना चिंताजनक है.पलाश को खूबसूरती और प्रेम का प्रतीक माना जाता है.लेखन में फूलों के सौंदर्य का ज़िक्र कर गीतों और रचनाओं को और भावपूर्ण रचा जाता है."
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