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असम सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्वरोजगार पहल को तेज़ी से लागू कर रही है. इस योजना का लक्ष्य है कि राज्य की लगभग 40 लाख महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर दिए जाएँ, लेकिन अब तक लगभग 15 लाख महिलाओं को इस कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है.
योजना का उद्देश्य और स्वरूप
यह पहल असम सरकार की उन योजनाओं में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य है—
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना.
छोटे व्यवसाय, उद्यमिता और स्वरोजगार के माध्यम से महिलाओं को लाभकारी अवसर देना.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाना और महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाना.
योजना के अनुसार लाभार्थियों को वित्तीय सहायता सहित अन्य सहायक संसाधन मुहैया कराए जाते हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय को स्थापित कर सकें और स्थायी रूप से आमदनी अर्जित कर सकें.
40 लाख महिलाओं का लक्ष्य: चौतरफा रणनीति
असम सरकार ने इस योजना को महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ लागू किया है — राज्य की 40 लाख महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देना. इस लक्ष्य का प्रमुख मकसद है महिलाओं के आजीविका स्तर को बदलना और उन्हें “लखपति दीदी” के रूप में आर्थिक रूप से मजबूत बनाना. मुख्य बिंदु यह है कि—
अब तक लगभग 15 लाख महिलाएँ स्वरोजगार अवसर से जुड़ चुकी हैं.
बाकी की महिलाओं को योजना के अगले चरणों में शामिल करना लक्ष्य है.
इस योजना के तहत महिलाओं को छोटे व्यवसाय जैसे सिलाई, कुटीर उद्योग, खुदरा दुकान, पशुपालन आदि में सहायता दी जाती है.
योजना का ज़मीनी असर
स्वरोजगार योजना का एक सकारात्मक प्रभाव यह है कि इससे महिलाओं के आर्थिक आत्मविश्वास में सुधार दिख रहा है, खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में.
इस पहल के असर के कुछ संकेत हैं—
महिलाएँ अब छोटे-छोटे उद्यम शुरू कर रही हैं.
स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से महिलाएँ अपने उद्यम को संगठित कर रही हैं.
ग्रामीण समुदायों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है.
इसके अलावा सरकार ने अन्य योजनाओं के रूप में भी महिलाओं के लिए Seed Capital/स्टार्टअप निधि जैसे कार्यक्रमों का इस्तेमाल किया है, जो उन्हें वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ बैंक से जुड़ने में भी मदद करते हैं.
राजनीतिक और विकासात्मक संदर्भ
यह पहल बिलकुल चुनावों से पहले तेज़ गति से लागू की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि असम सरकार इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समर्थन बढ़ाने वाली योजना के रूप में देख रही है.
ऐसे सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों का राजनीति से पहले दिलचस्पी से समय-बद्ध रूप से जोड़ना आम है, खासकर जब इसमें महिलाओं की बड़ी आबादी को लाभ पहुँचाने का दावा हो.
महिला सशक्तिकरण और उसकी आवश्यकता
स्वरोजगार योजना केवल वित्तीय सहायता तक ही सीमित नहीं है; यह महिलाओं को आर्थिक निर्णय क्षमता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान देने की दिशा में कदम है.
विश्वविद्यालय शोध के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और संगठनात्मक कौशल मिलना, उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ज़रूरी है.
असम सरकार ने राज्य की 40 लाख महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल के तहत अब तक लगभग 15 लाख महिलाएँ कार्यक्रम से जुड़ चुकी हैं. यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास मानी जा रही है, जैसा कि नवभारत टाइम्स ने भी रेखांकित किया है. साथ ही, इस योजना का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है, क्योंकि इसे आगामी चुनावों से पहले तेज़ी से लागू किया जा रहा है, जिससे यह साफ़ होता है कि महिला मतदाताओं और सामाजिक समर्थन को ध्यान में रखते हुए इस पहल को प्राथमिकता दी जा रही है.
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