DRDA से जुड़ महिलाओं ने शुरू किए 1555 उद्योग यूनिट्स

जोगुलांबा गडवाल जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) के सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर, पंडरी कोटेस्वरम्मा बताते है कि वर्तमान में जोगुलांबा गडवाल जिले में 310 संगठन हैं, जिससे 90,800 सक्रिय महिला सदस्य लोन लेती हैं. समूह से जुड़ी 1555 उद्योग यूनिट्स है.

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मिस्बाह
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महिलाओं पर डाली गई जिम्मेदारियां घर- परिवार और बच्चों की देखभाल, उनके वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा के रास्ते में रुकावट बनकर खड़ी हो जाती है.

स्वयं सहायता समूह से मिली पैसों के सही प्रबंधन में मदद 

जोगुलांबा गडवाल जिले के राजोली ब्लॉक के पचरला गांव की रहने वाली पैतीस साल की सरथला पद्मा अपने परिवार के लोगों को संभालने के साथ कृषि मजदूरी भी करती है और हर दिन चार सौ रूपए कमातीं है. पति की दारू की लत की वजह से इन पैसों के लिए भी उन्हें जूझना पड़ता है. 

पद्मा पैसों के सही ढंग के प्रबंधन के लिए स्वयं सहायता समूह (self help group) से जुड़ी. समूह, वित्त प्रबंधन कौशल, बचत तक पहुंच और ज़रूरत पड़ने पर लोन भी देता है.

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रजौली ब्लॉक में हर बचत संघ खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए समूह से दस से बीस लाख तक का लोन लेते है. पद्मा ने लोन लेकर अपनी दुकान शुरू की. पद्मा जैसी और भी महिलाएं ब्लॉक में अपने व्यवसाय शुरू किया है. महिलाएं बैंक लोन को दो साल के अंदर ही चुका देती है. खुद आर्थिक रूप से सशक्त होकर, दूसरी 10 महिलाओं के लिए भी आय के अवसर दिलवा रही है. ब्लॉक में महिलाएं बचत संघ का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

310 संगठन की 90,800 महिला सदस्यों ने लोन की मदद से शुरू किए 1555 उद्योग यूनिट्स

जोगुलांबा गडवाल जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA- district rural development agency) के सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर, पंडरी कोटेस्वरम्मा बताते है कि वर्तमान में जोगुलांबा गडवाल जिले में 310 संगठन हैं, जिससे 90,800 सक्रिय महिला सदस्य लोन लेती हैं. समूह से जुड़ी 1555 उद्योग यूनिट्स है.

द सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ़ रूरल पावर्टी (SERP) डिस्ट्रिक्ट वाइज क्रेडिट फ्लो रिपोर्ट 30 सितंबर तक 2023 -2024, 4074 स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 170 .72 करोड़ रूपए तक की सहायता दी है.

महिलाएं अपने व्यवसाय शुरू कर अच्छा लाभ कमा रही हैं, जबकि मजदूरी में उनकी बचत नहीं हो पाती थी. 48 साल की राजोली समुदाय समन्वयक बोइना बुचन्ना बताती है कि 2021 में उन्होंने एक लाख रुपए अपने व्यवसाय में निवेश किया था और वह तीन लाख रुपए सालाना कमा रही है.

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साल 2009 में पावला वड्डी योजना की शुरुआत हुई, जिसके तहत समय पर लोन जमा करने वाली महिलाओं का ब्याज माफ़ कर दिया जायेगा. पर इसे पिछले तीन सालों से संचालित नहीं किया गया है.

जोगुलांबा गदवाल डिस्ट्रिक्ट के इतिक्याला ब्लॉक में हैं सबसे ज्यादा चालीस बचत समूह

मलदकल ब्लॉक के डीआरडीए अधिकारी, मला सरोजा बताती है कि, "जोगुलांबा गदवाल जिले में बचत समूहों ने 2021-22 में कुल 148.13 करोड़ रुपये के बैंक लिंकेज लोन सुरक्षित किए हैं. खासकर महिलाओं ने पहले ही बैंकों को 141 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं. राज्य सरकार 2009 से 2019-20 तक महिलाओं द्वारा दिए गए ब्याज में से तीन-चौथाई हिस्से को वापस कर चुकी है."

2018-19 और 2019-20 में, जोगुलांबा गदवाल की महिलाओं ने ब्याज की कुल राशि सात करोड़ रुपये पैंडिंग थी, लेकिन इसे मई और जून में चुका दिया गया है. जबकि 2020-21 और 2021-22 वित्तीय वर्षों में जमा किए गए लोन पर ब्याज माफ़ी अभी नहीं हुई है.

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जोगुलांबा गदवाल डिस्ट्रिक्ट में बारह ब्लॉक है. इतिक्याला ब्लॉक में सबसे ज्यादा चालीस बचत समूह, घट्टू में पैतीस, गदवाल में तैंतीस, ईजा में तैंतीस, धरुर में तीस, मनोपद में बाईस, राजोली में सोलह, केती दोड्डी में उन्नीस, उंदावल्ली में उन्नीस, अलमपुर में सत्रह, वड्डेपल्ली ब्लॉक में बारह समूह हैं.  

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झांसीरानी समूह ने 7.50 लाख रुपये का लिया साझा लोन

कोटेस्वरम्मा का मानना है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के व्यवसाय स्थापित करा कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनमें स्वाभिमान को बढ़ाता है (SHGs promoting women entrepreneurs).

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झांसीरानी समूह ने पिछले साल अक्टूबर में 7.50 लाख रुपये का साझा लोन लिया, जो सभी सदस्यों में बराबर बांटा गया. अब उनके पास दो बैंक खाते हैं - एक जिसमे वह बचत करती है और एक लोन के लिए. लोन पर हर महीने EMI 3,000 रुपये बनती है. हर महीने समूह से महिलाएं बचत खाते में सौ रुपये जमा करती हैं, जिसके लिए बैंक उन्हें 2.7% ब्याज देता है. यह राशि उनके नए लोन की पात्रता को बढ़ाती है. 

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