नवाचार: "वाश ऑन व्हील" से आयएएस ऑफिसर ने बदली स्वच्छता की तस्वीर

एक छोटी सी कल्पना कैसे धरातल पर उतर कर लोगों की ज़िंदगी बदल देती है, यह कर दिखाया एक आयएएस ऑफिसर ने. "वाश ऑन व्हील" इसी एक कल्पना का नाम है यानी महिलाओं की ज़िंदगी में दिखा आर्थिक बदलाव.

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Chindwara

एक कार्यक्रम में स्वच्छता साथी से चर्चा करते हुए पीएम मोदी Image: File

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले में महज पौने दो साल पहले एक अफसर ने अपने ग्रामीण दौरे में देखा कि गांव के स्कूल और अन्य संस्थाओं के शौचालय पर्याप्त स्वच्छ नहीं रहते. पता लगा कि यहां कोई स्वछता कर्मचारी उपलब्ध ही नहीं है. बस यहीं से एक बेचैनी और नवाचार की ऐसी बुनियाद एक आयएएस अफसर ने रखी जिसकी न केवल देशभर में सराहना हुई बल्कि मध्य प्रदेश में यह रोल मॉडल बन गया. यह आयएएस ऑफिसर हैं शीलेन्द्र सिंह... छिंदवाड़ा कलेक्टर रहने के दौरान यह काम अब कई राज्यों में मिसाल बना हुआ है.वर्तमान में  शीलेन्द्र सिंह, शासन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव पद पर भोपाल में सेवाएं दे रहे हैं. 

स्वछता साथियों ने रचा इतिहास,संभाल ली स्वछता की कमान   

तत्कालीन कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह जिन ज़िलों में पदस्थ रहे, उनकी कार्यशैली सख्त और अनुशासनप्रिय अधिकारी की रही.जनहित के मुद्दों के त्वरित निराकरण की वजह से आम जनता में लोकप्रिय रहे. यही अंदाज़ छिंदवाड़ा के लिए वरदान बन गया.
दरअसल ये भी बड़ी दिलचस्प कहानी है. 
छिंदवाड़ा ज़िले के ग्रामीण स्वच्छता मिशन के प्रोजेक्ट ऑफिसर सुधीर कृषक बताते हैं- " सितंबर 2024 में शीलेन्द्र सिंह एक गांव और जनपद के निरीक्षण पर अचानक पहुंचे. यहां स्कूल सहित छत्रावास, जनपद कार्यालय, अधिकांश संस्थाओं के शौचालय साफ नहीं थे. वजह कर्मचारियों का नहीं होना था. बस यहीं से एक कार्ययोजना बनाई गई. देखते ही देखते यह सफल हुई और स्वच्छता साथी के नाम से सेवाएं देने वाली महिलाएं और अन्य सदस्य लखपति की श्रेणीं में आ गए."
यह योजना अभी भी सफलता पूर्वक क्रियान्वित है.जहां स्वच्छता साथियों ने स्वछता की की कमान संभाल रखी है.

60 साथी, 70 हज़ार यूनिट सफाई और 80 लाख की आय ! 

इस योजना में शुरुआत में जिला प्रशासन ने मदद की. परंतु योजना सफल होते देख कई महिलाएं और युवा भी जुड़ गए. इस योजना को लेकर सुधीर कृषक बताते हैं- "हमने इच्छुक पहली समूह की महिला अनामिका बेलवंशी और अन्य को व्हीकल सहित पीपी किट, ग्लव्स, हेलमेट, इलेक्ट्रिक वॉटर प्रेशर उपलब्ध करवाए. नतीजा यह हुआ कि 60 सदस्य बन गए और स्वयं ने सभी यंत्र और सुविधा जुटा ली. अब तक 70 हज़ार यूनिट सफाई कर चुके. इस काम में सदस्यों ने 80 लाख रुपए से अधिक कमा लिए. जनपदों के अनुसार क्लस्टर बनाए गए."
लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए शीलेन्द्र सिंह ने ऑफिशियल एप लॉन्च करवाया. नतीजा यह हुआ कि जिसे जरूरत हुई वह संस्था बुक कर स्वच्छता साथी को बुलवा लेता है.

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अपने साधन के साथ स्वछता साथी अनामिका Image: File

   
इस काम से जुड़ी अनामिका बेलवंशी कहती हैं- "मेरा सौभाग्य है कि ज़िले के स्वछता अभियान में मैं साथी बन सकी. प्रति यूनिट 200 रुपए और दूर स्थित संस्था के लिए 250 रुपए चार्ज लिया जाता है. केवल सात महीने में ही मैंने दो लाख रुपए से अधिक रुपए कमा लिए"  
वर्तमान जिला पंचायत के सीईओ अग्रिम कुमार इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर साथियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं.    

पीएम मोदी ने समझा प्रोजेक्ट, गवर्नर ने पीठ थपथपाई, यूनिसेफ इंडिया में शामिल   

योजना के लिए कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने ग्रामीण भारत स्वच्छता मिशन को सुझाव दिए. स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य को यह प्रोजेक्ट बताया. यह प्रोजेक्ट सेल्फ मोड के साथ के साथ रोजगार और हाइजीन मेंटेन परिकल्पना से तैयार किया गया.
खास बात कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के इस रोजगारोन्मुखी के साथ जीवाणु रहित सफाई प्रोजेक्ट के लिए राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने सिंह की पीठ थपथपाई. यहां तक कि कुछ समय पूर्व भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता साथी अनामिका से पूरे प्रोजेक्ट को समझा. प्रभावित हुए. 

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प्रोजेक्ट की शुरुआत करने के बाद साथियों से चर्चा करते हुए गवर्नर पटेल Image: File

तत्कालीन कलेक्टर छिंदवाड़ा एवं वर्तमान में सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शीलेंद्र सिंह बताते हैं- "ग्रामीण इलाकों में गंदे शौचालय देख मन आहत हुआ. मैंने तत्काल इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए मन बनाया. शुरुआत में स्वयं सहायता समूह सदस्य को यह योजना समझे जो तैयार हुई. देखते ही देखते समूह की महिलाओं के साथ अन्य लोग भी जुड़ते चले गए, और यह मिशन सफल हो गया. प्रसन्नता है इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गवर्नर मंगू भाई पटेल ने कामिया जनपद अंतर्गत छिंदी गांव से की. और अब यह यूनिसेफ इंडिया की नेशनल डॉक्यूमेंट्री के साथ प्रदेश में लागू किया गया. मैंने सिर्फ अपने दायित्व निभाए." 

रविवार विचार :

* समाज से जुड़ा कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता. बल्कि सम्मानजनक होता है. 
* एक आयएएस ऑफिसर ठान ले तो ग्रामीण समाज की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है.
* सेल्फ मोड पर बड़ा प्रोजेक्ट खड़ा किया जा सकता है.
* स्वछता साथी जैसे संबोधन से शौचालय सफाई का काम करने वाले भी सम्मानित हो सकते है.
* सचिव, मध्यप्रदेश शासन शीलेन्द्र सिंह ने साबित कर दिया कि काम की ज़िद और नीयत साफ हो तो समाज सेवा आसान है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सहायता समूह छिंदवाड़ा